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पूर्णिमा का महत्व व उपाय

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  पूर्णिमा  पूर्णिमा को जन्मे बच्चे चंद्रमा के पूर्ण प्रभाव के कारण शांत, बुद्धिमान, आकर्षक और भावनात्मक रूप से मजबूत होते हैं। इन पर माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा रहती है, जिससे ये भाग्यशाली, धनवान और जीवन में मान-सम्मान प्राप्त करते हैं। रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता और खाने-पीने के शौकीन ये बच्चे अपने शांत स्वभाव के बावजूद ठोस फैसले लेने में सक्षम होते हैं। ये बच्चे शांत, सौम्य और आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं। इन पर चंद्रमा का गहरा प्रभाव होता है। इनमें रचनात्मकता भरपूर होती है, इसलिए ये कला, संगीत, लेखन या चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत अच्छा करते हैं। ये मानसिक रूप से मजबूत होते हैं और अपनी बुद्धि का उपयोग करके कठिन कार्यों को आसानी से कर लेते हैं। इन्हें माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद माना जाता है, जिससे इन्हें जीवन में धन-धान्य और सुख की कमी नहीं होती। ये अपनी माँ से बहुत गहराई से जुड़े होते हैं। शांत होने के बावजूद, कभी-कभी वे अंतर्मुखी या अपनी ही दुनिया में खोए रहने वाले हो सकते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन्हें बहुत ही शुभ और भाग्यशाली माना जाता है।पूर्णिमा के दिन मां लक...

श्री सत्यनारायण भगवान की कथा ,आरती

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                             श्री सत्यनारायण भगवान व्रत कथा   पहला अध्याय –   एक समय की बात है नैषिरण्य तीर्थ में शौनिकादि, अठ्ठासी हजार ऋषियों ने श्री सूतजी से पूछा हे प्रभु! इस कलियुग में वेद विद्या रहित मनुष्यों को प्रभु भक्ति किस प्रकार मिल सकती है? तथा उनका उद्धार कैसे होगा? हे मुनि श्रेष्ठ ! कोई ऎसा तप बताइए जिससे थोड़े समय में ही पुण्य मिलें और मनवांछित फल भी मिल जाए. इस प्रकार की कथा सुनने की हम इच्छा रखते हैं. सर्व शास्त्रों के ज्ञाता सूत जी बोले – हे वैष्णवों में पूज्य ! आप सभी ने प्राणियों के हित की बात पूछी है इसलिए मैं एक ऎसे श्रेष्ठ व्रत को आप लोगों को बताऊँगा जिसे नारद जी ने लक्ष्मीनारायण जी से पूछा था और लक्ष्मीपति ने मनिश्रेष्ठ नारद जी से कहा था. आप सब इसे ध्यान से सुनिए – एक समय की बात है, योगीराज नारद जी दूसरों के हित की इच्छा लिए अनेकों लोको में घूमते हुए मृत्युलोक में आ पहुंचे. यहाँ उन्होंने अनेक योनियों में जन्मे प्राय: सभी मनुष्यों को अपने कर्मों द्वारा अनेकों दुखों से पीड़ित देखा...

चतुर्दशी तिथि का महत्व व करने योग्य उपाय

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https://youtu.be/_sK9XPmV7OQ चतुर्दशी तिथि का महत्व व करने योग्य उपाय   चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिव (शंकर) हैं। इस तिथि को शिवभक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना जाता है, जिसमें व्रत और उपवास करने का विशेष विधान है। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (मासिक शिवरात्रि) को भगवान शिव की पूजा के लिए उत्तम माना जाता है।चतुर्दशी को भगवान शिव की पूजा से समस्त इच्छाएं पूरी होती हैं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहते हैं, जिसमें भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) इस दिन यमराज की पूजा का विधान है।  चतुर्दशी रिक्ता संज्ञक (उग्र) तिथि है, इसलिए इसमें शुभ कार्यों से बचकर कठोर या तंत्र साधना वाले कार्य किए जाते हैं।  इस तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं ।  कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी अशुभ/कठोर और शुक्ल पक्ष की शुभ मानी जाती है । इसे 'उग्र' या 'क्रूर' तिथि माना जाता है, जिसमें कठोर कार्य करना उचित माना जाता है ।  इस दिन बाल काटना या शेविंग करने से बचना चाहिए । चतुर्दशी तिथि पर जन्मे लोग अत्यंत ऊर्जावान, दृढ़ इच्छाशक्ति वाल...

छत्रपति शिवाजी हिन्दवी स्वराज के निर्माता

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  *छत्रपति शिवाजी हिन्दवी स्वराज के निर्माता*  विदेशी ताकतों पर निर्भरता कम करने के लिए छत्रपति शिवाजी महाराज का ‘स्वराज्य’ और ‘राष्ट्र प्रथम’ का मूल मंत्र आज के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का आधार है। छत्रपति शिवाजी महाराज महान शासक और दूर दृष्टा थे, उन्होंने मुगलों और बीजापुर सल्तनत के विरुद्ध संघर्ष कर हिन्दवी स्वराज की नींव रखी। अपनी अदम्य वीरता, छापामार युद्ध (गोरिल्ला) नीति और उत्कृष्ट प्रशासनिक व्यवस्था के लिए वे इतिहास में अमर हैं ओर रहेंगे। शिवाजी महाराज ने कम उम्र में ही बीजापुर सल्तनत के खिलाफ अपने अभियान शुरू कर दिए थे। उन्होंने तोरना, कोंडाना (सिंहगढ़), और राजगढ़ जैसे कई किलों पर विजय प्राप्त की। छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म 19 फरवरी 1630 को पुणे के शिवनेरी किले में। उनकी माता जीजाबाई और पिता शाहजी भोंसले थे।छत्रपति शिवाजी महाराज के व्यक्तित्व और चरित्र निर्माण में उनकी माता राजमाता जीजाबाई का प्रभाव सबसे गहरा और अद्वितीय था। उन्होंने शिवाजी को बचपन से ही एक वीर, साहसी और स्वाभिमानी शासक के रूप में ढाला। बचपन में माता जीजाबाई शिवाजी को रामायण, महाभारत और अन्य वीरों ...

हिन्दू साम्राज्य के वीर नायक छत्रपति शिवाजी

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  हिन्दू साम्राज्य के वीर नायक छत्रपति शिवाजी  सतीश शर्मा   छत्रपति शिवाजी महाराज का  ऐसा राज्याभिषेक हुआ जिससे उस समय की सारी परिस्थितियाँ बदल गई। जिन परिस्थितियों का समर्थ रामदास जी ने वर्णन करते हुए कहा था- “कोई पीर की पूजा करता है, कोई कब्र को पूजता है, तो कोई भिन्न-भिन्न प्रकार से मोहर्रम मनाता है। इस प्रकार हमारे समाज के लोगों ने अपने धर्म का स्वाभिमान छोड़ दिया हैं अपने देवताओं को भुला दिया है और वह पराये लोगों का अनुकरण करने में स्वयं को धन्य मान रहा है। उन्होंने बड़े दुखी स्वर से कहा था-“हे भगवान् भीषणता की अब परिसीमा हो गयी है। सारे तीर्थ भ्रष्ट हो गये हैं। भजन, पूजन करना असम्भव हो गया है। न हमारा कोई राजा है न हमारी कोई प्रजा। अधर्म का साम्राज्य सर्वत्र फैल गया है। अतः हे प्रभो अब आओ और हमारे धर्म की रक्षा करो।” ऐसी परिस्थितियों में हिन्दू समाज के लिए प्रतिकूलता की पराकाष्ठा थी। बड़े-बड़े विद्धान शूरवीरों के दिमाग में यह विचार भी नहीं आता था कि इस परिस्थिति को बदला जा सकता है। अनेक वर्षों से ऐसी ही परिस्थिति में रहने के कारण उसे बदलने की किसी की इच्छा...

वास्तु विचार

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  वास्तु विचार   वास्तु शास्त्र घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और समृद्धि के लिए दिशाओं और तत्वों का विज्ञान है।घर के निर्माण के समय या किसी भी तरह का रिनोवेशन करने से पहले वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है, ताकि आप अपनी जीवन शैली के अनुसार सबसे अच्छे नतीजे पा सकें।  वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का निर्माण सकारात्मक ऊर्जा, सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य को आकर्षित करने के लिए किया जाता है। घर का मुख्य द्वार पूर्व या उत्तर दिशा में हो, रसोई आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में हो और शयनकक्ष दक्षिण-पश्चिम में हो, तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है। घर की ऊर्जा को संतुलित और सकारात्मक रखने के लिए इन प्रमुख बातों का ध्यान रखें- मुख्य द्वार - घर का मुख्य द्वार पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए।इसे हमेशा साफ-सुथरा और अच्छी रोशनी से युक्त रखे । रसोई घर - अग्नि से संबंधित कार्यों के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) सबसे उत्तम मानी जाती है । खाना बनाते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए। पूजा घर - पूजा कक्ष हमेशा घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में होना...

वैश्विक स्तर पर शांति, स्वास्थ्य व सद्भाव को बढ़ावा देता है योग।

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  वैश्विक स्तर पर शांति, स्वास्थ्य व सद्भाव को बढ़ावा देता है योग। सतीश शर्मा  अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का मुख्य उद्देश्य योग के अभ्यास से होने वाले शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक लाभों के बारे में दुनिया भर में जागरूकता बढ़ाना है । अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस का लक्ष्य लोगों को तनावमुक्त जीवनशैली जीने, बीमारियों से बचाव करने और सभी के बीच वैश्विक स्तर पर शांति, स्वास्थ्य व सद्भाव को बढ़ावा देना है।  योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाकर आधुनिक जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों (जैसे- मधुमेह, ब्लड प्रेशर और मोटापा) को दूर करना और लोगों को सक्रिय रखना है। ध्यान और प्राणायाम के माध्यम से मानसिक शांति हासिल करना, ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ाना और अवसाद या एंग्जायटी को कम करना है। भारत की प्राचीन योग परंपरा से पूरी दुनिया को परिचित कराना और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना के साथ वैश्विक स्तर पर लोगों को एकजुट करना है । प्रकृति और मनुष्य के बीच संतुलन बनाने में मदद करना, जिससे व्यक्तिगत और सामाजिक स्तर पर भाईचारा और शांति बनी रहे । इस दिवस के पीछे यह विचार भी है कि योग किसी धर्म या संप्रदाय...

शुक्र ग्रह की जानकारी व उपाय,श्री लक्ष्मी चालीसा व आरती

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शुक्र ग्रह आकाश मंडल में  बुध ग्रह के बाद शुक्र ग्रह का स्थान है | शुक्र ग्रह,सूर्य व  चंद्र  के बाद सबसे प्रकाशवान ग्रह  हैं बृहस्पति के साथ-साथ शुक्र को भी मंत्रिपरिषद में मंत्री पद मिला है | शुक्र ग्रह को सौंदर्य, प्रेम, आकर्षण, भौतिक सुख-सुविधाओं और वैवाहिक जीवन का कारक माना गया है। विभिन्न राशियों में स्थित होने पर शुक्र जातक के स्वभाव, रिश्तों और जीवनशैली को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करते हैं। कुंडली के अलग-अलग भावों (भागों) में स्थित होने पर यह जातक को शानदार वाहन, ऐशो-आराम, कलात्मक रुचि और सुखी दांपत्य जीवन प्रदान करता है, हालांकि कमजोर होने पर विपरीत परिणाम भी देता है।  प्रत्येक राशि पर शुक्र का विस्तृत प्रभाव नीचे दिया गया है- मेष राशि -  इस राशि में शुक्र होने पर जातक साहसी, कलाप्रेमी और घूमने-फिरने के शौकीन होते हैं। प्रेम संबंधों में वे थोड़े आक्रामक हो सकते हैं और अपनी पसंद के जीवनसाथी को पाने के लिए प्रयासरत रहते हैं। वृषभ राशि -  यह शुक्र की अपनी राशि है। यहाँ शुक्र जातक को बेहद आकर्षक, धनवान, उदार और वफादार बनाता है। ऐसे लोग भौतिक सुखो...