संदेश

नवंबर, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

तितिक्षा, सूख, आत्मनिरीक्षण, अध्यात्मिकता, गुरुत्वाकर्षण, शबरी के राम, तुलसी

चित्र
    तान् तितिक्षस्व भारत गीता के दूसरे अध्याय के चौदहवें श्लोक में भगवान अर्जुन को कहते हैं - हे अर्जुन, ऐन्द्रिक विषयों से सम्पर्क आने पर यह तुम्हें कभी शीत, कभी गर्मी, कभी सुख, कभी दुख का अनुभव देगा, यही प्रकृति है लेकिन वे आते हैं और चले जाते हैं - हमेशा बने नहीं रहते, अतः इन्हें सहन करना चाहिए - तान् तितिक्षस्व भारत। यह एक अद्भुत कथन है - जिसकी चिकित्सा नहीं - उसे सहन करना चाहिए -What can not be cured must be endured, चीजों को सहन करना- तितिक्षा- एक महान क्षमता है- यह व्यक्ति परक है यानि हर मनुष्य में अलग-अलग, किसी के पास अधिक तो कहीं कम। हमें इस क्षमता को अपने अंदर विकसित करना चाहिये। प्रत्येक को जीवन के परिवर्तन और अवसरों को सहन करने के लिए कुछ मानसिक बल विकसित करना चाहिए। एक व्यक्ति भगवान से प्रार्थना कर रहा था-‘हे प्रभु, मेरे अन्दर वह शक्ति, सामर्थ्य दो जिससे मैं जो बदलना चाहता हूँ वह बदल सकूँ, साथ ही वह शक्ति व सामर्थ्य भी दो जिससे मैं जो बदलना चाहता हूँ और बदल नहीं पा रहा तो उसको सहन कर सकूँ।’ सद्गुण, नैतिकता व इस प्रकार के आत्ममनस्थिति के बिना हम नहीं सफल हो पाऐंगे।...

जानकारी काल नवम्बर - 2022 हिंदी मासिक

चित्र
  हिंदी मासिक   जानकारी काल     वर्ष-23,        jaankaarikaal.com    अंक-04,  नवम्बर-2022,   पृष्ठ 54,    मूल्य 2-50       जह आपि रचिओ परपंचु अकारु ॥ तिहु गुण महि कीनो बिसथारु ॥  पापु पुंनु तह भई कहावत ॥ कोऊ नरक कोऊ सुरग बंछावत ॥  आल जाल माइआ जंजाल ॥ हउमै मोह भरम भै भार ॥  दूख सूख मान अपमान ॥ अनिक प्रकार कीओ बख्यान ॥  आपन खेलु आपि करि देखै ॥ खेलु संकोचै तउ नानक एकै ||  जब प्रभु ने स्वयं जगत की खेल रच दी, और माया के तीन गुणों का पसारा पसार दिया,तब ये बात चल पड़ी कि ये पाप है ये पुण्य है, तब कोई जीव नर्कों का भागी और कोई स्वर्गों का चाहवान बना।घरों के धंधे,माया के बंधन,अहंकार,मोह,भुलेखे,डर,दुख,सुख,आदर,निरादरी- ऐसी कई किस्मों की बातें चल पड़ीं। हे नानक! प्रभु स्वयं तमाशा रच के स्वयं देख रहा है। जब इस खेल को समेटता है तो एक स्वयं ही स्वयं हो जाता है। संरक्षक  श्रीमान कुलवीर शर्मा कमहामंत्री समर्थ शिक्षा समिति डॉ वी  एस नेगी प्रोफेसर भगत सिंह कॉलेज सांध्य ...