वास्तु विचार

 

वास्तु विचार 

वास्तु शास्त्र घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और समृद्धि के लिए दिशाओं और तत्वों का विज्ञान है।घर के निर्माण के समय या किसी भी तरह का रिनोवेशन करने से पहले वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है, ताकि आप अपनी जीवन शैली के अनुसार सबसे अच्छे नतीजे पा सकें। वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का निर्माण सकारात्मक ऊर्जा, सुख, समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य को आकर्षित करने के लिए किया जाता है। घर का मुख्य द्वार पूर्व या उत्तर दिशा में हो, रसोई आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) में हो और शयनकक्ष दक्षिण-पश्चिम में हो, तो यह अत्यंत शुभ माना जाता है। घर की ऊर्जा को संतुलित और सकारात्मक रखने के लिए इन प्रमुख बातों का ध्यान रखें-

मुख्य द्वार - घर का मुख्य द्वार पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए।इसे हमेशा साफ-सुथरा और अच्छी रोशनी से युक्त रखे ।

रसोई घर - अग्नि से संबंधित कार्यों के लिए दक्षिण-पूर्व दिशा (आग्नेय कोण) सबसे उत्तम मानी जाती है । खाना बनाते समय आपका मुख पूर्व दिशा की ओर होना चाहिए।

पूजा घर - पूजा कक्ष हमेशा घर के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा में होना चाहिए, क्योंकि यह दिशा आध्यात्मिक ऊर्जा और शांति का केंद्र है।

शयनकक्ष - घर का मुख्य बेडरूम दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य कोण) दिशा में होना चाहिए।सोते समय सिर हमेशा दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर रखें।

उत्तर - धन और समृद्धि की दिशा। यह कुबेर का स्थान है। यहाँ खुला स्थान या मुख्य द्वार होना बहुत शुभ माना जाता है。

पूर्व - सूर्य का स्थान। यह नई शुरुआत, सफलता और ऊर्जा की दिशा है। यहाँ खिड़कियां या बरामदा होना चाहिए।

दक्षिण - यम और पितरों की दिशा। यह धैर्य और अनुशासन का प्रतीक है। इस दिशा में भारी निर्माण और घर का मुख्य (मास्टर) बेडरूम होना अच्छा माना जाता है।

पश्चिम - लाभ और सफलता की दिशा।यह स्थान बच्चों के कमरे या डाइनिंग हॉल के लिए उपयुक्त है।

उत्तर-पूर्व ईशान कोण - जल का स्थान और आध्यात्मिक केंद्र। पूजा घर और बोरिंग या पानी का टैंक यहाँ होना चाहिए।

दक्षिण-पूर्व आग्नेय कोण - अग्नि का स्थान। रसोईघर के लिए यह सर्वोत्तम दिशा है।

दक्षिण-पश्चिम नैऋत्य कोण - स्थिरता और शक्ति का स्थान। घर के मुखिया का कमरा (मास्टर बेडरूम) या भारी अलमारी यहाँ रखनी चाहिए।

उत्तर-पश्चिम वायव्य कोण - वायु का स्थान। यह मेहमानों के कमरे या स्टोरेज (भंडारण) के लिए आदर्श है।

केंद्र ब्रह्म स्थान - घर का बिल्कुल बीच का हिस्सा। इसे हमेशा साफ और खुला (बिना किसी भारी निर्माण के) रखना चाहिए।

ध्यान दें -  घर में मकड़ी के जाले या गंदगी न होने दें, इससे दरिद्रता आती है। पानी की टंकी उत्तर-पूर्व में न रखें दर्पण बेडरूम में बिस्तर के सामने नहीं होना चाहिए। फर्नीचर और भारी सामान दक्षिण या पश्चिम दिशा में रखें। घर का मुख्य प्रवेश द्वार उत्तर, पूर्व या उत्तर-पूर्व दिशा में होना चाहिए। यह सकारात्मक ऊर्जा का मार्ग है। घर के मालिक का बेडरूम दक्षिण-पश्चिम दिशा में होना चाहिए। यह स्थिरता और अच्छे स्वास्थ्य के लिए है। आग्नेय कोण (दक्षिण-पूर्व) रसोई के लिए सबसे अच्छा स्थान है। उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) दिशा पूजा घर के लिए सर्वोत्तम है। शौचालय और बाथरूम उत्तर-पश्चिम या दक्षिण-पश्चिम दिशा में होने चाहिए, उत्तर-पूर्व में कभी नहीं। उपरोक्त विधान यद्यपि शास्त्रीय है परन्तु आज की समस्याओं के कारण यह सर्वत्र सुलभ नहीं है। अत्तः ऐसी स्थिति में मुख्य द्वार पर श्री गणपति की प्रतिमा और दक्षिण-पश्चिम दिशाओं के दोष की निवृत्ति के लिये पवनपुत्र श्रीहनुमान जी की प्रतिमा अथवा चित्र दीवार पर लगा दें।

अधिक जानकारी हेतु संपर्क करे शर्मा जी 9312002527 , 9560518227

sumansangamaashray2025@gmail.com


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