शुक्र ग्रह की जानकारी व उपाय,श्री लक्ष्मी चालीसा व आरती


शुक्र ग्रह




आकाश मंडल में  बुध ग्रह के बाद शुक्र ग्रह का स्थान है | शुक्र ग्रह,सूर्य व  चंद्र  के बाद सबसे प्रकाशवान ग्रह  हैं बृहस्पति के साथ-साथ शुक्र को भी मंत्रिपरिषद में मंत्री पद मिला है | शुक्र ग्रह को सौंदर्य, प्रेम, आकर्षण, भौतिक सुख-सुविधाओं और वैवाहिक जीवन का कारक माना गया है। विभिन्न राशियों में स्थित होने पर शुक्र जातक के स्वभाव, रिश्तों और जीवनशैली को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करते हैं। कुंडली के अलग-अलग भावों (भागों) में स्थित होने पर यह जातक को शानदार वाहन, ऐशो-आराम, कलात्मक रुचि और सुखी दांपत्य जीवन प्रदान करता है, हालांकि कमजोर होने पर विपरीत परिणाम भी देता है। 

प्रत्येक राशि पर शुक्र का विस्तृत प्रभाव नीचे दिया गया है-

मेष राशि -  इस राशि में शुक्र होने पर जातक साहसी, कलाप्रेमी और घूमने-फिरने के शौकीन होते हैं। प्रेम संबंधों में वे थोड़े आक्रामक हो सकते हैं और अपनी पसंद के जीवनसाथी को पाने के लिए प्रयासरत रहते हैं।

वृषभ राशि -  यह शुक्र की अपनी राशि है। यहाँ शुक्र जातक को बेहद आकर्षक, धनवान, उदार और वफादार बनाता है। ऐसे लोग भौतिक सुखों का भरपूर आनंद लेते हैं।

मिथुन राशि -  इस राशि में शुक्र वाले लोग बुद्धिमान, हाजिरजवाब और कला/विज्ञान में निपुण होते हैं। ये सामाजिक रूप से लोकप्रिय होते हैं, लेकिन प्रेम और रिश्तों में थोड़ा अस्थिर स्वभाव रख सकते हैं।

कर्क राशि -  इस भाव में शुक्र जातक को संवेदनशील, भावुक और परिवार से गहराई से जुड़ा हुआ बनाता है। ये दूसरों की भावनाओं का सम्मान करते हैं और अपने घर को बेहद प्यार करते हैं।

सिंह राशि -  यह शुक्र की एक अच्छी स्थिति मानी जाती है। ऐसे जातक खुले विचारों वाले, उदार और बड़े दिल वाले होते हैं। वे अपने प्रेम का इजहार भव्य तरीके से करते हैं।

कन्या राशि -  इस राशि में शुक्र नीच का माना जाता है। यहाँ शुक्र होने से जातक रिश्तों में बहुत ज्यादा तर्क-वितर्क करने लगते हैं, जिससे प्रेम जीवन में कुछ तनाव या असंतोष की स्थिति बन सकती है।

तुला राशि -  यह भी शुक्र की अपनी मूल त्रिकोण राशि है। इस राशि वाले कूटनीतिक, संतुलित, न्यायप्रिय और रोमांटिक होते हैं। ये सौंदर्य और कला की बहुत कद्र करते हैं।

वृश्चिक राशि -  यहाँ शुक्र होने से जातक के प्रेम संबंध बहुत गहरे, रहस्यमयी और तीव्र होते हैं। वे अपने पार्टनर के प्रति अत्यधिक समर्पित लेकिन थोड़े अधिकार-भाव वाले हो सकते हैं।

धनु राशि -  इस राशि में शुक्र वाले लोग आशावादी, दार्शनिक विचारों वाले और स्वतंत्र स्वभाव के होते हैं। वे अपने रिश्तों में भी एक दोस्त और रोमांच की तलाश करते हैं।

मकर राशि -  शुक्र के इस प्रभाव से जातक व्यावहारिक, अनुशासित और प्रतिबद्ध होते हैं। वे रिश्तों को बहुत गंभीरता से लेते हैं और जीवन में भौतिक सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं।

कुंभ राशि -  यहाँ शुक्र होने से जातक का दृष्टिकोण रिश्तों के प्रति बहुत आधुनिक और उदार होता है। ये अपने पार्टनर के विचारों का सम्मान करते हैं और सामाजिक कार्यों में रुचि लेते हैं।

मीन राशि -  मीन राशि में शुक्र उच्च का होता है। यहाँ स्थित शुक्र जातक को अत्यंत दयालु, रोमांटिक, स्वप्निल और आध्यात्मिक प्रवृत्ति का बनाता है। प्रेम में ये নিঃস্বার্থ होते हैं।

कुंडली के विभिन्न भागों (12 भावों) में शुक्र ग्रह का प्रभाव निम्नलिखित रूप से पड़ता है -

प्रथम भाव (लग्न) - इस भाव में शुक्र जातक को अत्यंत आकर्षक, सुंदर, कलाप्रेमी और हंसमुख बनाता है। ऐसे लोग रचनात्मक कार्यों (जैसे गायन, अभिनय) में रुचि रखते हैं और विपरीत लिंग के बीच काफी लोकप्रिय होते हैं

द्वितीय भाव (धन) - यहाँ स्थित शुक्र धन, संपत्ति और पारिवारिक सुख में वृद्धि करता है। जातक को स्वादिष्ट भोजन और कीमती वस्त्रों का शौक होता है। 

तृतीय भाव (पराक्रम) - यह जातक को पराक्रमी बनाता है। जातक की रुचि लेखन, संगीत या यात्राओं में होती है। भाई-बहनों के साथ संबंध मधुर रहते हैं। 

चतुर्थ भाव (सुख-सुविधा) - यहाँ शुक्र सबसे शुभ माना जाता है। जातक को आलीशान घर, उत्तम वाहन, माता का सुख और जीवन की सभी भौतिक सुविधाएं प्राप्त होती हैं । 

पंचम भाव (बुद्धि और संतान) - यह भाव प्रेम संबंधों, रचनात्मकता और संतान सुख के लिए अच्छा होता है। जातक की बुद्धि तीव्र और कलात्मक होती है। 

षष्ठम भाव (शत्रु और रोग) - यह शुक्र के लिए कमजोर स्थिति मानी जाती है। यहाँ शुक्र होने पर जातक को अत्यधिक खर्च, गुप्त शत्रुओं और जीवन में कुछ संघर्षों का सामना करना पड़ता है।

सप्तम भाव (विवाह और साझेदारी) - यहाँ शुक्र का होना अत्यंत शुभ माना जाता है। जातक को एक सुंदर, समझदार जीवनसाथी मिलता है और वैवाहिक जीवन सुखमय रहता है। 

अष्टम भाव (आयु और रहस्य) - इस भाव में शुक्र जातक को अचानक धन लाभ तो दे सकता है, लेकिन स्वास्थ्य और वैवाहिक जीवन में उतार-चढ़ाव व मानसिक अशांति भी ला सकता है।

नवम भाव (भाग्य) - यहाँ स्थित शुक्र जातक को भाग्यशाली, धार्मिक और दानी बनाता है। जातक को लंबी यात्राओं और विदेशी संबंधों से लाभ मिलता है। 

दशम भाव (कार्यक्षेत्र) - शुक्र के प्रभाव से जातक कला, मीडिया, फैशन, सौंदर्य प्रसाधन या लग्जरी गाड़ियों के व्यापार में बड़ी सफलता प्राप्त करता है । 

एकादश भाव (लाभ) - यह शुक्र के लिए एक बहुत ही उत्तम स्थिति है। जातक को समाज में मान-सम्मान, कई आय के साधन और मित्रों से भरपूर सहयोग मिलता है। 

द्वादश भाव (व्यय और शय्या सुख) - इस भाव में शुक्र विलासिता, ऐशो-आराम और बेडरूम के सुखों में वृद्धि करता है, लेकिन जातक का धन दिखावे और भौतिक सुखों पर बहुत अधिक खर्च होता है। 

शुक्र की राशियां वृषभ और तुला हैं।  शुक्र को स्त्री ग्रह माना जाता है | ज्योतिष में शुक्र को भौतिक सुखों का कारक माना गया है | शुक्र ग्रह का रंग चमकीला सफ़ेद और गुलाबी होता है | शुक्र ग्रह को प्रेम, सौंदर्य, और सुख-सौभाग्य का ग्रह माना जाता है | अंक ज्योतिष में मूलांक 6 को शुक्र का अंक माना गया है।यह वृष, मिथुन, कन्या, तुला, मकर और कुंभ लग्न वालों को बड़ा अच्छा फल प्रदान करते हैं। इन्हें इन लग्नों में राजयोग कारक ग्रह कहा जाता है। देवराज इंद्र को इनका अधिदेवता माना जाता है। यह ग्रह दक्षिण-पूर्व दिशा का स्वामी, स्त्री जाति |

जिन लोगों के वैवाहिक जीवन और आपसी रिश्तों में परेशानियां आ रही हों, उन्हें चमकीले सफ़ेद या गुलाबी रंग की चीज़ों का इस्तेमाल करना चाहिए | शुक्र के शत्रु राशि सिंह में होने से वैवाहिक जीवन, नशीले पदार्थों का सेवन करने वालों और उनके परिवार पर कठिनाइयों के बादल छाए रहेंगे। श्याम, गौर वर्ण का लक्ष्मी की मूर्ति को दूध, शहद, घी (मक्खन तेल), दही, चीनी - जिसे पंचामृत कहा जाता है - से स्नान कराने से शुक्र ग्रह प्रसन्न होगा क्योंकि, वह यानी देवी लक्ष्मी शुक्र की स्वामिनी हैं। नियमित रूप से सफेद फूल और चंदन के लेप (तिलक) के साथ देवी लक्ष्मी की पूजा करने से शुक्र प्रसन्न होगा।

शुक्र ग्रह के  उपाय किए  - शुक्रवार के दिन सफ़ेद रंग के कपड़े पहनें और सफ़ेद चीज़ों का दान करें | शुक्रवार का व्रत रखें और खट्टा भोजन न खाएं |  शुक्रवार के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करें | शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख में जल भरकर भगवान विष्णु का अभिषेक करें |  शुक्र ग्रह को मज़बूत करने के लिए 'ॐ द्रां द्रीं दौं सः शुक्राय नमः' मंत्र का जाप करें | शुक्र यंत्र को घर में स्थापित करें और नियमित रूप से इसकी पूजा करें. शुक्र ग्रह को प्रसन्न करने के लिए चमकीले रंग के कपड़े पहनें |  शुक्र ग्रह को प्रसन्न करने के लिए सुगंधित वस्तुओं का इस्तेमाल करें | शुक्र ग्रह को प्रसन्न करने के लिए गाय, कौवे, या कुत्ते को कुछ भोजन दें | शुक्र ग्रह को प्रसन्न करने के लिए गरीबों को सफ़ेद वस्त्र दान करें | शुक्र ग्रह को प्रसन्न करने के लिए महिलाओं का सम्मान करें | शुक्रवार के दिन खीर, ज्वार, इत्र, रंग-बिरंगे कपड़े, चांदी और चावल का दान करें | शुक्रवार के दिन अपने शरीर पर चंदन का लेप लगाना चाहिए | शुक्र कमज़ोर है तो छह या 13 मुखी रुद्राक्ष धारण करना चाहिए | ज्योतिष के मुताबिक, कुंडली में शुक्र ग्रह कमज़ोर होने पर कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं | ये समस्याएं आर्थिक, शारीरिक, मानसिक और वैवाहिक जीवन से जुड़ी हो सकती हैं | आर्थिक समस्याएं धन की तंगी, दरिद्रता, हर काम में असफलता, तरक्की में बाधाएं | शारीरिक समस्याएं चेहरे पर चमक की कमी त्वचा रोग हार्मोनल असंतुलन आंखों की समस्या मधुमेह कमर में दर्द गुर्दे की समस्या सांस लेने की समस्या मानसिक समस्याएं आत्मविश्वास में कमी, निर्णय लेने में कठिनाई, खुद पर से भरोसा खत्म होना | वैवाहिक जीवन में परेशानियां, संतान सुख नहीं मिलना,कामुकता धीरे-धीरे कम होना शराब, जुआ, धूम्रपान जैसी चीज़ों का आदी होना व्यभिचार नपुंसकता गर्भाशय के रोग स्तन रोग | 

शुक्र का रंग सफेद, प्रवृत्ति वात, ब्राह्मण जाति, जल तत्व, स्त्रीलिंग, गुण  शुभ, वसंत ऋतु, तुला और वृषभ राशि का स्वामी, रत्न मोती , धातु चांदी ,

जन्म कुंडली में साथ में घर का स्वामी,शुक्र अंक 6 

3,12, 21 व 29 तारीख को जन्मे लोगों के साथ किसी प्रकार का कारोबार संबंध नहीं रखना चाहिए 

5 6 8 14 15 17 23 24 व  26 तारीख में जन्मे हुए लोगों के साथ कारोबार करते हैं या मित्रता करते हैं तो लाभ होने की संभावना होती है |

 शुक्र के विकार 

मेष राशि में शुक्र हो तो नेत्र विकार होती हैं  

वृषभ राशि में शुक्र होने पर गले में सूजन खांसी 

मिथुन राशि में शुक्र हो तो चेहरे पर फुंसियां कील मुंहासे 

कर्क राशि में शुक्र हो तो पेट फूलना बीमा चलाना 

सिंह राशि में शुक्र हो तो ह्रदय विकार 

कन्या राशि में शुक्र होने पर अतिसार का रोग 

तुला राशि में शुक्र होने पर पेशाब संबंधी रोग 

वृषभ राशि में शुक्र होने पर हर्निया जैसे लोग 

धनु राशि में शुक्र होने पर कमर नितंब मलाशय से संबंधित रोग 

मकर राशि में शुक्र होने पर घुटनों में सूजन व त्वचा रोग 

कुंभ राशि में शुक्र होने पर रक्त दोष , नसों से संबंधित रोग 

मीन राशि में शुक्र होने पर पैरों की एड़ियां फटना व वल्व संबंधी रोग

*शुक्रवार के दिन सुख समृद्धि व धन लाभ के लिए ये उपाय किए जा सकते हैं-*

मां लक्ष्मी की पूजा करें,शुक्रवार का व्रत करें,कपूर जलाएं,कमल गट्टे की माला से जाप करें,पानी में केसर मिलाकर नहाएं,गाय को मीठी रोटी खिलाएं

सफ़ेद वस्त्र पहनें,मां लक्ष्मी को खीर का भोग लगाएं,गरीब या ज़रूरतमंद को अन्न-वस्त्र का दान करें,मां लक्ष्मी के मंदिर में शंख चढ़ाएं,शुक्रवार के दिन सूर्यास्त के बाद स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें,माता लक्ष्मी के सामने एक घी का दीपक जलाएं,एक डिब्बे में नमक भरकर उसे लाल कपड़े पर रखें,माता लक्ष्मी के बीज मंत्र का 1001 बार जप करें,जप के बाद नमक के डिब्बे में एक लौंग डाल दें,इस फिर डिब्बे को धन रखने की जगह पर रखें,उपाय को 10 शुक्रवार तक करें,शुक्रवार के दिन एक कटोरी में थोड़ी-सी हल्दी लेनी चाहिए और उसे पानी की सहायता से घोलना चाहिए।

अधिक जानकारी हेतु संपर्क करे शर्मा जी 93120025

27


श्री लक्ष्मी चालीसा 

॥ सोरठा॥

यही मोर अरदास, हाथ जोड़ विनती करुं।

सब विधि करौ सुवास, जय जननि जगदंबिका॥

॥ चौपाई ॥

सिन्धु सुता मैं सुमिरौ तोही।ज्ञान बुद्घि विघा दो मोही॥

श्री लक्ष्मी चालीसा

तुम समान नहिं कोई उपकारी। सब विधि पुरवहु आस हमारी॥

जय जय जगत जननि जगदंबा सबकी तुम ही हो अवलंबा॥1॥  

तुम ही हो सब घट घट वासी। विनती यही हमारी खासी॥

जगजननी जय सिन्धु कुमारी। दीनन की तुम हो हितकारी॥2॥

विनवौं नित्य तुमहिं महारानी। कृपा करौ जग जननि भवानी॥

केहि विधि स्तुति करौं तिहारी। सुधि लीजै अपराध बिसारी॥3॥

कृपा दृष्टि चितववो मम ओरी। जगजननी विनती सुन मोरी॥

ज्ञान बुद्घि जय सुख की दाता। संकट हरो हमारी माता॥4॥

क्षीरसिन्धु जब विष्णु मथायो। चौदह रत्न सिन्धु में पायो॥

चौदह रत्न में तुम सुखरासी। सेवा कियो प्रभु बनि दासी॥5॥

जब जब जन्म जहां प्रभु लीन्हा। रुप बदल तहं सेवा कीन्हा॥

स्वयं विष्णु जब नर तनु धारा। लीन्हेउ अवधपुरी अवतारा॥6॥

तब तुम प्रगट जनकपुर माहीं। सेवा कियो हृदय पुलकाहीं॥

अपनाया तोहि अन्तर्यामी। विश्व विदित त्रिभुवन की स्वामी॥7॥

तुम सम प्रबल शक्ति नहीं आनी। कहं लौ महिमा कहौं बखानी॥

मन क्रम वचन करै सेवकाई। मन इच्छित वांछित फल पाई॥8॥

तजि छल कपट और चतुराई। पूजहिं विविध भांति मनलाई॥

और हाल मैं कहौं बुझाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥9॥

ताको कोई कष्ट नोई। मन इच्छित पावै फल सोई॥

त्राहि त्राहि जय दुःख निवारिणि। त्रिविध ताप भव बंधन हारिणी॥10॥

जो चालीसा पढ़ै पढ़ावै। ध्यान लगाकर सुनै सुनावै॥

ताकौ कोई न रोग सतावै। पुत्र आदि धन सम्पत्ति पावै॥11॥

पुत्रहीन अरु संपति हीना। अन्ध बधिर कोढ़ी अति दीना॥

विप्र बोलाय कै पाठ करावै। शंका दिल में कभी न लावै॥12॥

पाठ करावै दिन चालीसा। ता पर कृपा करैं गौरीसा॥

सुख सम्पत्ति बहुत सी पावै। कमी नहीं काहू की आवै॥13॥

बारह मास करै जो पूजा। तेहि सम धन्य और नहिं दूजा॥

प्रतिदिन पाठ करै मन माही। उन सम कोइ जग में कहुं नाहीं॥14॥

बहुविधि क्या मैं करौं बड़ाई। लेय परीक्षा ध्यान लगाई॥

करि विश्वास करै व्रत नेमा। होय सिद्घ उपजै उर प्रेमा॥15॥

जय जय जय लक्ष्मी भवानी। सब में व्यापित हो गुण खानी॥

तुम्हरो तेज प्रबल जग माहीं। तुम सम कोउ दयालु कहुं नाहिं॥16॥

मोहि अनाथ की सुधि अब लीजै। संकट काटि भक्ति मोहि दीजै॥

भूल चूक करि क्षमा हमारी। दर्शन दजै दशा निहारी॥17॥

बिन दर्शन व्याकुल अधिकारी। तुमहि अछत दुःख सहते भारी॥

नहिं मोहिं ज्ञान बुद्घि है तन में। सब जानत हो अपने मन में॥18॥

रुप चतुर्भुज करके धारण। कष्ट मोर अब करहु निवारण॥

केहि प्रकार मैं करौं बड़ाई। ज्ञान बुद्घि मोहि नहिं अधिकाई॥19॥

॥ दोहा॥

त्राहि त्राहि दुख हारिणी, हरो वेगि सब त्रास। 

जयति जयति जय लक्ष्मी, करो शत्रु को नाश॥

रामदास धरि ध्यान नित, विनय करत कर जोर। 

मातु लक्ष्मी दास पर, करहु दया की कोर॥


लक्ष्मी जी आरती 

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।
तुमको निस दिन सेवत हर-विष्णु-धाता॥ ॐ जय…

उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ ॐ जय…

तुम पाताल-निरंजनि, सुख-सम्पत्ति-दाता।
जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि-धन पाता॥ ॐ जय…

तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता।
कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता॥ ॐ जय…

जिस घर तुम रहती, तहं सब सद्गुण आता।
सब सम्भव हो जाता, मन नहिं घबराता॥ ॐ जय…

तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न हो पाता।
खान-पान का वैभव सब तुमसे आता॥ ॐ जय…

शुभ-गुण-मंदिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता।
रत्न चतुर्दश तुम बिन कोई नहिं पाता॥ ॐ जय…

महालक्ष्मीजी की आरती, जो कई नर गाता।
उर आनन्द समाता, पाप शमन हो जाता॥ ॐ जय…

या देवी सर्व भूतेषु मातृ रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै। नमस्तस्यै।नमस्तस्यै। नमो नमः।।
या देवी सर्व भूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै। नमस्तस्यै।नमस्तस्यै। नमो नमः।।
या देवी सर्व भूतेषु बुद्धि रूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै। नमस्तस्यै।नमस्तस्यै। नमो नमः।।
या देवी सर्व भूतेषु लक्ष्मी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै। नमस्तस्यै।नमस्तस्यै। नमो नमः।।


एक बच्चा, एक शिक्षक, एक किताब और एक पेन पूरी दुनिया बदल सकते हैं।
 अज्ञान को दूर भगाएं ज्ञान का उजाला करें। गरीब बेसहारा बच्चों कि शिक्षा हेतु सहायता करने के लिए निम्नलिखित खाते में दान करें।
सुमन संगम आश्रय 
अकाउंट नंबर 44629950112
IFSC code – SBIN0061208
State Bank of India Sector 77 Noida
अधिक जानकारी के लिया संपर्क करे संपादक – 9560518227
समस्या है तो समाधान भी है ,जन्म कुंडली दिखाने व बनवाने हेतु संपर्क करे शर्मा – 9312002527,9560518227
jankarikal@gmail.com 

www.sumansangamaashray.com

टिप्पणियाँ

  1. राम राम जी आज 19 जून है

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. जिस दिन ये लेख लिख था उस दिन की तारीख है ,कॉमेंट के लिए धन्यवाद सतीश शर्मा

      हटाएं

एक टिप्पणी भेजें

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

शनि ग्रह की जानकारी व उपाय , शनि की साढ़ेसाती एवं ढैय्या

संगठन में शक्ति है