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मिशन करवाचौथ

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 मिशन करवाचौथ करवाचौथ  मोनिका करवाचौथ से हफ़्ता भर पहले बड़े ज़ोर शोर से त्यौहार की तैयारी में लगी थी । आई लैशेज़ और नेल्स एक्सटेंशन तो उसने पहले ही करवा लिया था । महँगी कामदार साड़ी और ब्रांडेड गाउन कल ही खरीदा साथ ही डायमंड के ईयर रिंग्स भी । सबसे फेमस मेहंदी वाला भी बुक हो चुका था ।अब तो बस रोज़ पार्लर जा जा कर खुद को चमकाने निखारने के मिशन जोरों पर था। कुल मिलाकर मोटी रकम खर्च हो चुकी थी, और हाँ ...अभी करवाचौथ व्रत का गिफ़्ट क्या होगा , ये मोनिका ने डिसाइड नहीं किया। वैसे इस बार उसका मन विदेश में छुट्टियां मनाने का है ...तो जब वो चाँद की पूजा करके अपने पति योगेश के हाथों पानी पी कर व्रत खोलेगी तो उससे हफ़्ते भर का विदेश में टूर गिफ़्ट में मांग लेगी । जगह जो योगेश को पसन्द हो । आखिर उसी की लम्बी आयु के लिए तो मोनिका ने ये व्रत किया है , तो इतना हक़ तो योगेश का भी बनता है कि उसी की पसन्द की जगह पर घूमने जाया जाए। बस थोड़ा ही वक़्त बचा था कि जब चन्द्र देव उदित हो कर सब सुहागिनों की मुराद पूरी करेंगे। मोनिका ने आईने में खुद को देखा और मेकअप का फाइनल टच दे कर योगेश के कमरे की ओर मुड़ चली।...

महर्षि वाल्मीकि

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  🌷 विश्व की प्रथम भाषा संस्कृत है और उसके आदि कवि महर्षि वाल्मीकि जी की जयंती पर हार्दिक शुभकामनाएं🌷 महर्षि वाल्मीकि - विश्व की प्रथम भाषा संस्कृत है और उसके आदि कवि वाल्मीकि है। उनका आश्रम तमसा नदी के तट से १०० मीटर दूरी पर वर्तमान नेपाल में है। तमसा नदी के दूसरे तट पर भारत के बिहार प्रांत के पश्चिम चंपारण जिले में वाल्मीकि नगर है। वहां से नेपाल नदी को पैदल लांघकर जा सकते हैं। मैं जब तमसा नदी के पात्र में खड़ा होकर ऋषि वाल्मीकि का स्मरण करने लगा तो मेरे मन:चक्षु के सामने वह करुण दृश्य साकार हो उठा, जिसे देखकर वाल्मीकि जी के मुख से अनायास शोक प्रकट करने वाली अनुष्टुप छंद की रचना प्रस्फुटित हुई थी, जिसे आगे श्लोक यह नाम प्राप्त हुआ। ऐसे ऐतिहासिक स्थान पर पहुंच कर शरीर पर रोंगटे खड़े हो गये।           आगे ब्रह्मा जी के निर्देश पर वाल्मीकि जी ने २४ हजार श्लोकों का रामायण रचा। उसकी शैली को वैदर्भीय शैली कहते हैं। यह संस्कृत साहित्य की सरलतम शैली है। इसलिए थोड़ा संस्कृत आने पर रामायण को पढ़ा और समझा जा सकता है। इसका और एक कारण यानि रामायण की कथा हमें पहले से ...

चन्द्रग्रहण 2023

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  भारत में दृश्य एकमात्र चन्द्रग्रहण का विस्तृत विवरण,खण्डग्रास चन्द्रग्रहण (28 अक्तूबर, 2023 ई., शनिवार)- यह ग्रहण आश्विन पूर्णिमा को 28 एवं 29 अक्तूबर, 2023 ई. की मध्यगत रात्रि को सम्पूर्ण भारत में खण्डग्रास के रूप में दिखाई देगा। इस ग्रहण का स्पर्श-मोक्षादि काल (भा.स्टे.टा.) इस प्रकार होगा- ग्रहण स्पर्श (प्रारम्भ)-25-05 (01-05) ग्रहण मध्य 25-44,मध्यगत रात्रि ग्रहणमोक्ष (समाप्त) 26-24 (02-24) पर्वकाल = 1. 19मि.,  भारत में जब 28/29 अक्तूबर, 2023 ई. की मध्य रात्रि 1 बजकर 05 मिनट पर यह चन्द्रग्रहण शुरु होगा, उस समय तक सम्पूर्ण भारतवर्ष में चन्द्र-उदय हो चुका होगा। भारत के सभी नगरों/ग्रामों में 28 अक्तू. को सायं 4 बजे से सायं 6 बजे तक चन्द्रोदय हो जाएगा तथा यह खण्डग्रास चन्द्रग्रहण 28 अक्तू. की रात्रि 25-05 मं. से प्रारम्भ होकर रात्रि 26 पं.- 24 मि. (अर्थात् 2 बजकर 24 मिंट) पर समाप्त (मोक्ष) होगा। भारत के सभी नगरों में इसका प्रारम्भ, मध्य तथा मोक्ष रूप देखा जा सकेगा। इस ग्रहण में चन्द्रबिम्ब दक्षिण की ओर से ग्रस्त दिखेगा।  भारत के अतिरिक्त दिखाई देने वाले क्षेत्र य...

मर्यादा की सीमा पार करना विनाश है।

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  रावण की कथा से एक बात स्पष्ट हो जाती है कि कोई अधर्मी व्यक्ति कितना भी सुन्दर स्वरूप बना ले, स्वयं को कितना भी धार्मिक बता दे, उसपर विश्वास नहीं किया जाना चाहिये। यदि विश्वास करेंगे तो आपका हरण होगा...      अब प्रश्न यह है कि आप पहचानेंगे कैसे? साधु वेश में आया व्यक्ति सचमुच संत है, या कोई रावण, यह कैसे तय होगा? तो इसका बड़ा ही सहज उत्तर है। जो व्यक्ति आपको आपकी लक्ष्मण रेखा पार करने को कहे, यकीन कीजिये वह संत नहीं है। धूर्त है, अधर्मी है। किसी भी तरह आपको आपकी मर्यादा की सीमा से बाहर निकलने की प्रेरणा देने वाला कभी भी आपका शुभचिंतक नहीं हो सकता।       सबके चारों ओर मर्यादा की एक लक्ष्मण रेखा होती है। वह रेखा समाज द्वारा खींची गई हो सकती है, हमारे अपनों द्वारा, हमारे परिवार द्वारा खींची गई हो सकती है, या स्वयं हमारे द्वारा ही खींची गई हो सकती है। आप पुरुष हों या स्त्री, सुरक्षित जीवन जीने के लिए उस रेखा का ध्यान रखना आवश्यक होता है। आप उसके बाहर निकलते ही असुरक्षित हो जाते हैं।      आप श्रीराम की महायात्रा को देखिये, वे जिस भेष में घर ...