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फ़रवरी, 2025 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

महाशिवरात्रि

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महाशिवरात्रि  हर महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को  शिवरात्रि  आती है |  फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि का पर्व पड़ता है | पुरे वर्ष भर में 12 शिवरात्रि आती  है | फाल्गुन मास में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को महाशिवरात्रि पड़ती है  | महाशिवरात्रि पर प्रात: स्नान करने के बाद व्रत का संकल्प लें।इसके बाद पूजा आरंभ करें।शिवरात्रि का व्रत पूरी श्रद्धा व भाव से करना चाहिए तभी इसका पूर्ण फल प्राप्त होता है।इसके साथ ही महाशिवरात्रि के व्रत का पारण भी विधि पूर्वक करना चाहिए। सूर्योदय और चतुर्दशी तिथि के अस्त होने के मध्य समय में ही व्रत पारण करना चाहिए। महाशिवरात्रि पर भगवान शिव की पूजा चार बार की जाती है। इस दिन भगवान की पूजा रात्रि के समय एक बार या फिर संभव हो तो चार बार करनी चाहिए. वेदों में रात्रि के चार प्रहर बताए गए हैं।इस दिन हर प्रहर में भगवान शिव पूजा की जाती है। महाशिवरात्रि के दिन ही भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ था | सारा दिन भगवान आशुतोष का ध्यान करें।अगर कोई मंत्र जपते है तो उसका जाप करें नहीं है तो ॐ नम शिवाय ...

छत्रपति संभाजी महाराज की मृत्यु का बदला

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  छत्रपति संभाजी महाराज की मृत्यु का बदला सतीश शर्मा औरंगज़ेब ने छत्रपति संभाजी महाराज के सामने कई माँगें रखीं और कहा कि अगर उन्होंने बात मान ली तो उनकी जान बख्श दी जाएगी। संभाजी महाराज से उनका सारे किलों को मुगलों को देने को कहा गया। उनसे कहा गया कि वे उन सभी मुगलों के नाम बताएँ, जो मराठा से मिले हुए हैं। साथ ही वे मराठा के छिपे हुए खजाने का पता बताएँ, ऐसी भी शर्त रखी गई। उन्हें इस्लाम कबूल करने को भी मजबूर किया गया। छत्रपति शिवाजी महाराज की तरह ही हौंसले अपनाते हुए संभाजी महाराज ने ये सब मानने से इनकार कर दिया। छत्रपति शिवाजी तो औरंगज़ेब की क़ैद से भाग कर मराठा साम्राज्य की स्थापना कर ‘छत्रपति’ के रूप में पदस्थापित होने में कामयाब रहे थे, लेकिन दुर्भाग्य से संभाजी महाराज को एक भयानक मौत मिली। 11 मार्च 1689 को औरंगजेब ने छत्रपती संभाजी महाराज की बड़ी क्रूरता के साथ हत्या कर दी। छत्रपति संभाजी की हत्या के बाद औरंगजेब के सेनापति जुल्फिकार खान ने रायगढ़ पर कब्जा कर छत्रपति संभाजी की पत्नी येसु बाई और उनके पुत्र को भी कैद कर लिया जिसके बाद छत्रपति संभाजी महाराज के छोटे भाई  राजाराम ...

फरवरी मास के महत्व पूर्ण दिवस व घटनाए

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  सामान्य ज्ञान हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है कि हम क्या पढ़ते है। जो पढ़ा जा रहा है उसे समझने के लिए मस्तिष्क को लगातार मौजूदा संग्रहीत ज्ञान से आकर्षित होने और उससे जुड़ने की आवश्यकता होती है, समान्य ज्ञान उसकी पूर्ति करता है। फरवरी मास के महत्व पूर्ण दिवस   व घटनाए   सतीश शर्मा  1 फरवरी: LGBT इतिहास माह शुरू होता है विभिन्न देशों में एलजीबीटी समुदाय के इतिहास, योगदान और उपलब्धियों का एक महीने तक चलने वाला उत्सव मनाया जाता है। 1 फरवरी – भारतीय तटरक्षक दिवस 2 फरवरी – विश्व आर्द्रभूमि दिवस 2 फरवरी: ग्राउंडहॉग दिवस 2025 अमेरिका और कनाडा में मनाई जाने वाली एक अनोखी परंपरा जिसमें ग्राउंडहॉग मौसम की भविष्यवाणी करता है। अगर उसे अपनी परछाई दिख जाती है, तो सर्दी लंबे समय तक रहेगी; अगर नहीं, तो वसंत जल्दी आने की उम्मीद है। 2,1948,गांधी हत्या के झूठे आरोप में श्रीगुरु जी गिरफ्तार 2,1905,दादा साहब आप्टे जन्म 3,1829,कित्तूर की रानी चेन्नमा पुण्यतिथि 3 फरवरी: वसंत पंचमी,बुद्धि, ज्ञान और कला की देवी देवी सरस्वती को समर्पित एक हिंदू त्योहार, जो वसंत ऋतु के आगमन का प्र...

दिग्विजय एक स्व-शिक्षित चॉकलेटियर

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  दिग्विजय एक स्व-शिक्षित चॉकलेटियर दिग्विजय एक स्व-शिक्षित चॉकलेटियर सतीश शर्मा  ये एक प्रेरणा दायक प्रसंग है उदयपुर के रहने वाले 19 वर्षीय दिग्विजय सिंह ने अपने शौक को कारोबार में बदल दिया |  उदयपुर के रहने वाले दिग्विजय सिंह की कहानी प्रेरणादायक है। पर्याप्त खाली समय के साथ, उन्होंने अपनी ऊर्जा को किसी दिलचस्प और मजेदार चीज़ में लगाने की कोशिश की। विभिन्न गतिविधियों के साथ प्रयोग करने के बाद, उन्होंने घर पर चॉकलेट बनाने का फैसला किया। दिग्विजय जब सिर्फ़ 16 साल के थे, तब उठाया गया यह छोटा सा कदम आखिरकार उन्हें अपना खुद का ब्रांड शुरू करने के लिए प्रेरित किया। अब, 19 साल की उम्र में, दिग्विजय एक स्व-शिक्षित चॉकलेटियर हैं, जो साराम नामक एक कंपनी चलाते हैं, जो बीन से लेकर बार तक बढ़िया चॉकलेट बनाती है। इस ब्रांड के तहत, दिग्विजय ने देश भर में सैकड़ों संतुष्ट ग्राहकों को दो टन से ज़्यादा चॉकलेट बेची हैं। उन्होंने दिल्ली, बेंगलुरु, उदयपुर और जयपुर जैसे प्रमुख शहरों में एक वफ़ादार ग्राहक आधार बनाया है। , दिग्विजय ने  YouTube की मदद से  चॉकलेट बनाने की कला सीखी और पर...

स्वयंसेवकत्व

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  स्वयंसेवकत्व सन 1938 की घटना है। नागपुर के संघ शिक्षा वर्ग में श्रद्धानिधि समर्पित करने का कार्यक्रम था। प्रत्येक स्वयंसेवक ने उस श्रद्धानिधि में अपनी अपनी राशि समर्पित की। किसने कितनी राशि समर्पित की यह अन्य दूसरे को जानने का कोई कारण नहीं था। एक स्वयंसेवक ने अपने हाथ की घड़ी की सोने की चेन निकालकर अपनी श्रद्धा का प्रतीक इस नाते उसे श्रद्धानिधि में समर्पित किया। स्वाभाविक ही सभी स्वयंसेवकों ने उसकी प्रशंसा की। उस संघ शिक्षा वर्ग के सर्वाधिकारी के नाते जब पूज्य श्री गुरुजी का भाषण हुआ तब उन्होंने उस स्वयंसेवक द्वारा श्रद्धानिधि में जो सोने की चेन समर्पित की उसका उल्लेख करते हुए कहा - ‘सोने की चेन #श्रद्धानिधि में समर्पित करनेवाले स्वयंसेवक के मन में डाक्टर साहब के प्रति प्रेम, #श्रद्धा और आदर है, यह तो मानना ही पड़ेगा। किन्तु उसका #स्वयंसेवकत्व अभी अपूर्ण है।  श्रद्धानिधि में अन्य सारे स्वयंसेवकों ने अपनी अपनी राशि समर्पित की, उसमें किसी का पृथक समर्पण दिखाई नहीं देता। किन्तु इस स्वयंसेवक ने अन्य सारे स्वयंसेवकों के अनुसार अपना #समर्पण न करते हुए, विशेष रूप से, सबको दिखाई पड़े ...

जीवन को समाज के अनुकूल बनाए

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  जीवन को  समाज के अनुकूल बनाए जीवन को  समाज के अनुकूल बनाए सतीश शर्मा  राष्ट्रीय स्वयंसेवक  संघ ने सम्पूर्ण भारतीय समाज में आधारभूत परिवर्तन के लिए जिन पांच आयामों को चुना है वे हैं ‘स्व’, सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण और नागरिक कर्तव्य।पंच परिवर्तन का यह संकल्प भारत को वैभव सम्पन्न सशक्त राष्ट्र के रूप में विकसित करेगा। इस दृष्टि से शताब्दी वर्ष में संघ ने पंच अमृत धाराओं से समाज को सिंचित करने का संकल्प लिया है। 2024-25 में यह परिवर्तन खुद में व अपने परिवार में करना हैं उसके बाद समाज मे लेकर जाना हैं | पंच परिवर्तन के बिन्दु  स्व आधारित जीवनशैली –  अपने पूर्वजों, परंपरा, ज्ञान-संपदा पर गर्व करना। बुनियादी जानकारी के लिए घर पर आवश्यक सामग्री उपलब्ध होना। हमारी जीवनशैली आधुनिक हो लेकिन पश्चिमी नहीं। फर्क समझना चाहिए। घर में स्वदेशी, स्थानीय उत्पादों पर जोर दें। हमारे त्यौहार, माध्यमों के प्रभाव के आगे झुके बिना सभ्य एवं सरल तरीके से मनाएं। सदियों से चली अपनी परंपराओं का पालन करना। जन्मदिन, विवाह वर्षगाँठ आदि को भारतीय पद्धती से मनाना। देव द...

जानकारी काल फरवरी -2025

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  जानकारी काल      वर्ष-25   अंक - 10    फरवरी - 2025 ,  पृष्ठ 40                    www.sumansangam.com      प्रधान संपादक व  प्रकाशक  सतीश शर्मा   कार्यालय  ए 214 बुध नगर इंद्रपुरी  नई दिल्ली 110012  मोबाइल    9312002527  संपादक मंडल  सौरभ  शर्मा, कपिल शर्मा, गौरव शर्मा, डॉ अजय प्रताप सिंह,  करुणा ऋषि,  डॉ मधु वैध, राजेश शुक्ल   प्रकाशक व मुद्रक  सतीश शर्मा के लिय ग्लैक्सी प्रिंटर- 106 F, कृणा नगर नई दिल्ली 110029 , A- 214 बुध नगर इन्दर पूरी नई दिल्ली  110012 से प्रकाशित | सभी लेखों पर संपादक की सहमति आवश्यक नहीं है पत्रिका में किसी भी लेख में आपत्ति होने पर उसके विरुद्ध कार्रवाई केवल दिल्ली कोर्ट में ही होगी  R N I N0-68540/98 मूल्य 02-50  sumansangam.com jaankaarikaal.blogspot.com अनुक्रमणिका अपनों से अपनी बात - 3  हिंदवी स्वराज्य के स्वप्न द्रष्टा महानायक छत्रपत...