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पूर्णिमा का महत्व व उपाय

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  पूर्णिमा  पूर्णिमा को जन्मे बच्चे चंद्रमा के पूर्ण प्रभाव के कारण शांत, बुद्धिमान, आकर्षक और भावनात्मक रूप से मजबूत होते हैं। इन पर माँ लक्ष्मी की विशेष कृपा रहती है, जिससे ये भाग्यशाली, धनवान और जीवन में मान-सम्मान प्राप्त करते हैं। रचनात्मकता, नेतृत्व क्षमता और खाने-पीने के शौकीन ये बच्चे अपने शांत स्वभाव के बावजूद ठोस फैसले लेने में सक्षम होते हैं। ये बच्चे शांत, सौम्य और आकर्षक व्यक्तित्व वाले होते हैं। इन पर चंद्रमा का गहरा प्रभाव होता है। इनमें रचनात्मकता भरपूर होती है, इसलिए ये कला, संगीत, लेखन या चिकित्सा के क्षेत्र में बहुत अच्छा करते हैं। ये मानसिक रूप से मजबूत होते हैं और अपनी बुद्धि का उपयोग करके कठिन कार्यों को आसानी से कर लेते हैं। इन्हें माँ लक्ष्मी का आशीर्वाद माना जाता है, जिससे इन्हें जीवन में धन-धान्य और सुख की कमी नहीं होती। ये अपनी माँ से बहुत गहराई से जुड़े होते हैं। शांत होने के बावजूद, कभी-कभी वे अंतर्मुखी या अपनी ही दुनिया में खोए रहने वाले हो सकते हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन्हें बहुत ही शुभ और भाग्यशाली माना जाता है।पूर्णिमा के दिन मां लक...

चतुर्दशी तिथि का महत्व व करने योग्य उपाय

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https://youtu.be/_sK9XPmV7OQ चतुर्दशी तिथि का महत्व व करने योग्य उपाय   चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिव (शंकर) हैं। इस तिथि को शिवभक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना जाता है, जिसमें व्रत और उपवास करने का विशेष विधान है। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (मासिक शिवरात्रि) को भगवान शिव की पूजा के लिए उत्तम माना जाता है।चतुर्दशी को भगवान शिव की पूजा से समस्त इच्छाएं पूरी होती हैं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहते हैं, जिसमें भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) इस दिन यमराज की पूजा का विधान है।  चतुर्दशी रिक्ता संज्ञक (उग्र) तिथि है, इसलिए इसमें शुभ कार्यों से बचकर कठोर या तंत्र साधना वाले कार्य किए जाते हैं।  इस तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं ।  कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी अशुभ/कठोर और शुक्ल पक्ष की शुभ मानी जाती है । इसे 'उग्र' या 'क्रूर' तिथि माना जाता है, जिसमें कठोर कार्य करना उचित माना जाता है ।  इस दिन बाल काटना या शेविंग करने से बचना चाहिए । चतुर्दशी तिथि पर जन्मे लोग अत्यंत ऊर्जावान, दृढ़ इच्छाशक्ति वाल...

पिप्पलाद

 पिप्पलाद  श्मशान में जब महर्षि दधीचि के माँसपिंड का दाह संस्कार हो रहा था तो उनकी पत्नी अपने पति का वियोग सहन नहीं कर पायीं और पास में ही स्थित विशाल पीपल वृक्ष के कोटर में 3 वर्ष के बालक को रख स्वयं चिता में बैठकर सती हो गयीं.. इस प्रकार महर्षि दधीचि और उनकी पत्नी का बलिदान हो गया किन्तु पीपल के कोटर में रखा बालक भूख प्यास से तड़प तड़प कर चिल्लाने लगा। जब कोई वस्तु नहीं मिली तो कोटर में गिरे पीपल के गोदों (फल) को खाकर बड़ा होने लगा। कालान्तर में पीपल के पत्तों और फलों को खाकर बालक का जीवन येन केन प्रकारेण सुरक्षित रहा। एक दिन देवर्षि नारद वहाँ से गुजरे। नारद ने पीपल के कोटर में बालक को देखकर उसका परिचय पूछा – नारद – बालक तुम कौन हो? बालक – यही तो मैं भी जानना चाहता हूँ। नारद – तुम्हारे जनक कौन हैं? बालक – यही तो मैं जानना चाहता हूँ। तब नारद जी ने ध्यान धर देखा। नारद ने आश्चर्यचकित हो बताया कि हे बालक! तुम महान दानी महर्षि दधीचि के पुत्र हो। तुम्हारे पिता की अस्थियों का वज्र बनाकर ही देवताओं ने असुरों पर विजय पायी थी। बालक – मेरे पिता की अकाल मृत्यु का कारण क्या था ? नारद – तुम...

शनि ग्रह की जानकारी व उपाय , शनि की साढ़ेसाती एवं ढैय्या

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  शनि ग्रह   शनिग्रह :- नौ  ग्रहों  में  शनि  बृहस्पति के बाद सबसे बड़ा  ग्रह  है।  शनिग्रह  एक राशि में ढाई वर्ष भ्रमण करता है।  शनि  सभी द्वादश (बारह) राशि घूमने के लिए तीस साल का समय लेता है। तीन राशियों की कालावधि को साढे सात वर्ष लगते हैं इसीलिए इस काल को साढेसाती कहते हैं। शनिदेव हैं पश्चिम  दिशा  के स्वामी, इस  दिशा  में दोष होने पर लाइफ में बनी रहती हैं परेशानियां,ध्यान रखें ये बाते वास्तु में दस दिशाओं को महत्व बताया गया है।  इन सभी दिशाओं का एक-एक प्रतिनिधि  ग्रह  होता है, जिसका प्रभाव उस  दिशा  से होता है। उसी के अनुसार पश्चिम  दिशा  पर शनिदेव का आधिपत्य माना गया है। दरअसल ज्योतिष के अनुसार  शनि  को श्यामवर्ण माना गया है।  काला रंग  आलस्य का प्रतीक  होता  है।  शनि  को भी धीमे चलने वाला अशुभ  शनि  को शुभ बनाने के लिए लोहे व  काली  चीजों के दान का ज्योतिष के अनुसार विशेष महत्व है।जिसके दान से उस  ग्रह...

महारानी अहिल्याबाई होलकर

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      महारानी अहिल्याबाई होलकर भारत का अपना एक समृद्धशाली इतिहास रहा है | संस्कृति और परंपराओं का देश भारत हमेशा से ही दुनिया भर में आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां की विविधताओं की वजह से दुनिया भर से लोग यहां खींचे चले आते हैं। यहां कई शासकों ने शासन किया, तो वहीं यहां कई लड़ाइयां भी लड़ी गईं। इसके अलावा भारत के इतिहास के पन्नों में कई ऐसी रानियों के नाम भी शामिल हैं, जिन्होंने अपने पराक्रम और दृढ़ निश्चय से विरोधियों को कड़ी टक्कर दे हराया है । रानी अहिल्याबाई उन्ही वीरांगनाओ में से एक थीं, उनका नाम लोग सम्मान सहित याद करते है ।अहिल्याबाई होलकर भारत माता की वह बेटी थी जिसने 275 साल पहले ही कुरीतियों की बेड़ियों को तोड़ व उन्हे समाप्त करने का प्रयास किया । राज्य मे संकट के समय जब जरूरत पड़ी तो अपनी प्रजा के लिए घोड़े पर सवार होकर खड़ग हाथ मे लिए जंग भी लड़ी। धर्म का संदेश फैलाया,मंदिरों का निर्माण किया , संस्कृति संरक्षण, बालिका शिक्षा, महिला अधिकारों और औद्योगीकरण को बढ़ावा दिया। होलकर साम्राज्य की महारानी होलकर भारतीय इतिहास की कुशल महिला शासकों में से एक रही हैं। इनका जन्म 31...

शुकदेव जी और वैराग्य

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  शुकदेव जी और वैराग्य  शुकदेव जी 12 वर्षों तक माता के गर्भ में रहे थे। जब भगवान श्रीकृष्ण के आश्वासन पर वे बाहर आए, तो जन्म लेते ही उनके भीतर पूर्ण वैराग्य था। उन्होंने सामान्य बालकों की तरह न तो रुदन किया और न ही वे संसार की किसी वस्तु की ओर आकर्षित हुए। जैसे ही शुकदेव जी का जन्म हुआ, वे तुरंत खड़े होकर उत्तर दिशा (पहाड़ों/गिरी) की ओर चल पड़े। उनके मन में न तो परिवार के प्रति मोह था और न ही शरीर के प्रति ममता। पुत्र को जाते देख महर्षि वेदव्यास जी अत्यंत व्याकुल हो उठे। वे उनके पीछे-पीछे भागे और करुण स्वर में पुकारने लगे, "हे पुत्र! हे पुत्र! रुक जाओ।" शुकदेव जी ने तो पीछे मुड़कर नहीं देखा, लेकिन उनके भीतर व्याप्त ब्रह्म-ज्ञान के कारण वृक्षों और पहाड़ों (गिरी) ने व्यास जी को उत्तर दिया। हवाओं की सरसराहट और पत्तों की खड़खड़ाहट में वही गूंज सुनाई दी कि आत्मा का न कोई पिता है, न कोई पुत्र; वह तो सर्वव्यापी है। शुकदेव जी के वैराग्य की पराकाष्ठा को दर्शाने वाली एक प्रसिद्ध घटना उनके मार्ग में आने वाले एक जलाशय की है। मार्ग में एक जलाशय में कुछ अप्सराएं स्नान कर रही थीं। जब पूर्णत...

बुद्ध ग्रह के उपाय श्री गणेश चालीसा,आरती,बुद्ध ग्रह की जानकारी व उपाय

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बुध ग्रह को शांत करने  के उपाय   पीड़ा की शांति हेतु चावल ,सरसों बुधवार को दान  करें | अगर हो सके तो बुधवार को स्वर्ण  दान करें |  गणेश चतुर्थी का व्रत करे | तांबे के सिक्के बहते पानी में बहाएं एक बात ध्यान रखे  की अगर बुध  उच्च का हो तो बुध की चीजों का दान नहीं करना चाहिए बुध नीच का हो तो ही बुध की चीजों का दान ना ले   अगर घर में परेशानी आ रही हो तो किसी हिजड़े को हरी चूड़ी और हरे रंग का कपड़ा दान में कर देंगे तो भी लाभ रहेगा  शालिग्राम भगवान की पूजा करें ,तुलसी को जल चढ़ाएं और तुलसी पत्र को भी का सेवन करें तो भी बुद्ध से होने वाली परेशानी दूर होती है | अगर बुध की वजह से और व्यापार में परेशनी  आ रही हो तो भगवान कृष्ण की पूजा करें, गोपाल सहस्त्रनाम भी पढ़ सकते हैं | अगर बुध की वजह से बच्चों की तरफ से परेशानी आ रही हो...

मंगल ग्रह की जानकारी,उपाय,हनुमान चालीसा,संकटमोचन हनुमानाष्टक,हनुमानजी की आरती

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  मंगल ग्रह   मंगल हिंसक,शुर ,तरुण ,पित्त प्रक्रति लाल गोर वरनी अग्नि जैसा उग्र उदार तामसी स्वभाव वाला और गर्वीला होता है | सौर परिवार में मंगल का चोथा स्थान है | मंगल ग्रह को ऊर्जा, भूमि और साहस का कारक ग्रह माना गया है। ज्योतिष शास्त्र में मंगल ग्रह को क्रूर ग्रह माना गया है। मेष और वृश्चिक राशि के स्वामी मंगल ग्रह होते हैं। मंगल मकर राशि में उच्च के जबकि कर्क राशि में नीच के माने गए हैं। मंगल का रत्न - मूंगा, लाल रंग का धागा अभिमंत्रित कर पहन सकते है। मंगल का वहन मेथा , मेष व वृश्चिक राशी का स्वामी होता है |  कमजोर मंगल के रोग - पित ,वायु ,कर्ण रोग,विशु चिका , खुजली |  कुंडली में मंगल 4 ,8 भाव को पूर्ण दृष्टि से देखता है |  मंगल की धातु - सुवर्ण ,ताम्र |  मंगल का दान - मसूर ,गूढ़ ,घी ,लाल वस्त्र ,लाल कनेर ,कस्तूरी , लाल चन्दन | मंगल का बीज मंत्र- ॐ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः। मंगल का अंक - 9  मंगल अशुभ हो तो कभी कभी जेल के दर्शन भी हो जाते हैं | कुंडली का मंगल जीवन के सुख, संपत्ति, विवाद और मुकदमेबाजी जैसे पहलुओं को विशेष रूप से प्रभावित करता है...