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दही भल्ला

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          दही भल्ला दो कप धुली मुंग की दाल , आधा कप उड्द धुली दाल, एक  चम्मच जीरा , अदरक दो टुकडे , काजू किशमिश , कुटी काली मिर्च , नमक , धी/तेल, काला नमक  तीन कप दही , एक चम्मच चीनी , लाल मिर्च , हरी मिर्च  चाट मसाला , हरा धनिया , अनार के दाने, मीठी चटनी, हरी चटनी मूंग की दाल उड़द की दाल को बारीक पीस लें, पिसते समय अदरक, हरी मिर्च डाले | पिसने के बाद जीरा, काली मिर्च कुटी  हुई, ड्राई फ्रूट काटकर मिला दे व थोड़ा सा नमक भी डालें,अच्छी तरह फेंट लें,कढ़ाई में घी डालकर गर्म करें, जब घी गरम हो जाये तो भल्ला  बनाकर कढ़ाई में तलने के लिए डालें | हल्की आंच पर भल्ले को तले ,भल्ले को  निकालकर साथ रखें पानी में डालें ध्यान रहे उसमें थोड़ा सा नमक भी मिला दे | पानी में जब भल्ले भीग  जाए तो एक प्लेट में भल्ले  का पानी निचौर कर  कर रखें अब उनके उपर दही डाले , मीठी चटनी ,हरी चटनी ,चाट मसाला,भुना जीरा डाले | थोड़ी सा  हरा धनिया बुर्क दे | अनार के दाने,ड्राई फ्र...

सास बहु

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        एक चुटकी ज़हर रोजाना आरती नाम की एक युवती का विवाह हुआ और वह अपने पति और सास के साथ अपने ससुराल में रहने लगी। कुछ ही दिनों बाद आरती को आभास होने लगा कि उसकी सास के साथ पटरी नहीं बैठ रही है। सास पुराने ख़यालों की थी और बहू नए विचारों वाली। आरती और उसकी सास का आये दिन झगड़ा होने लगा। दिन बीते, महीने बीते. साल भी बीत गया. न तो सास टीका-टिप्पणी करना छोड़ती और न आरती जवाब देना। हालात बद से बदतर होने लगे।  आरती को अब अपनी सास से पूरी तरह नफरत हो चुकी थी. आरती के लिए उस समय स्थिति और बुरी हो जाती जब उसे भारतीय परम्पराओं के अनुसार दूसरों के सामने अपनी सास को सम्मान देना पड़ता। अब वह किसी भी तरह सास से छुटकारा पाने की सोचने लगी. एक दिन जब आरती का अपनी सास से झगड़ा हुआ और पति भी अपनी माँ का पक्ष लेने लगा तो वह नाराज़ होकर मायके चली आई। आरती के पिता आयुर्वेद के डॉक्टर थे. उसने रो-रो कर अपनी व्यथा पिता को सुनाई और बोली – “आप मुझे कोई जहरीली दवा दे दीजिये जो मैं जाकर उस बुढ़िया को पिला दूँ नहीं तो मैं अब ससुराल नहीं जाऊँगी…” बेटी का दुःख समझते हुए पिता ने आरती के सिर प...

हमदर्दी

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                          हमदर्दी  मैं एक घर के करीब से गुज़र रहा था की अचानक से मुझे उस घर के अंदर से एक बच्चे की रोने की आवाज़ आई। उस बच्चे की आवाज़ में इतना दर्द था कि अंदर जा कर वह बच्चा क्यों रो रहा है, यह मालूम करने से मैं खुद को रोक ना सका। अंदर जा कर मैने देखा कि एक माँ अपने दस साल के बेटे को आहिस्ता से मारती और बच्चे के साथ खुद भी रोने लगती। मैने आगे हो कर पूछा बहनजी आप इस छोटे से बच्चे को क्यों मार रही हो? जब कि आप खुद भी रोती हो। उस ने जवाब दिया भाई साहब इस के पिताजी भगवान को प्यारे हो गए हैं और हम लोग बहुत ही गरीब हैं, उन के जाने के बाद मैं लोगों के घरों में काम करके घर और इस की पढ़ाई का खर्च बामुश्किल उठाती हूँ और यह कमबख्त स्कूल रोज़ाना देर से जाता है और रोज़ाना घर देर से आता है। जाते हुए रास्ते मे कहीं खेल कूद में लग जाता है और पढ़ाई की तरफ ज़रा भी ध्यान नहीं देता है जिस की वजह से रोज़ाना अपनी स्कूल की वर्दी गन्दी कर लेता है। मैने बच्चे और उसकी माँ को जैसे तैसे थोड़ा समझाया और चल दिया। इस घटना को कुछ दिन ही बीते ...

सत्य का तेज

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सत्य का तेज काशी में एक धनवान सेठ रहते थे। वह जगदीश्वर भगवान् विष्णु के परम भक्त थे और हमेशा सच बोला करते थे।एक बार जब भगवान् सेठ जी की प्रशंसा कर रहे थे तभी माँ लक्ष्मी ने कहा, स्वामी आप इस सेठ की इतनी प्रशंसा किया करते हैं , क्यों न आज उसकी परीक्षा ली जाए और जाना जाए कि क्या वह सचमुच इसके लायक है या नहीं ?भगवान् बोले , ” ठीक है ! अभी सेठ गहरी निद्रा में है आप उसके स्वप्न में जाएं और उसकी परीक्षा ले लें। ” अगले ही क्षण सेठ जी को एक स्वप्न आया। स्वप्न मेँ धन की देवी लक्ष्मी उनके सामनेँ आई और बोली ,” हे मनुष्य ! मैँ धन की दात्री लक्ष्मी हूँ।” सेठ जी को अपनी आँखों पर यकीन नहीं हुआ और वो बोले , ” हे माता आपने साक्षात अपने दर्शन देकर मेरा जीवन धन्य कर दिया है , बताइये मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूँ ?” ”कुछ नहीं ! मैं तो बस इतना बताने आयी हूँ कि मेरा स्वाभाव चंचल है, और वर्षों से तुम्हारे भवन में निवास करते-करते मैं ऊब चुकी हूँ और यहाँ से जा रही हूँ।” सेठ जी बोले , ”मेरा आपसे निवेदन है कि आप यहीं रहे, किन्तु अगर आपको यहाँ अच्छा नहीं लग रहा है तो मैं भला आपको कैसे रोक सकता हूँ, आप अपनी इच्छा...

माँ

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    ज्ञान  एक बूढ़ी माता मंदिर के सामने भीख माँगती थी। एक संत ने पूछा - आपका बेटा लायक है, फिर यहाँ क्यों ??बूढ़ी माता बोली - बाबा, मेरे पति का देहांत हो गया है। मेरा पुत्र परदेस नौकरी के लिए चला गया। जाते समय मेरे खर्चे के लिए कुछ रुपए देकर गया था, वे खर्च हो गये इसीलिए भीख माँग रही हूँ।संत ने पूछा - क्या तेरा बेटा तुझे कुछ नहीं भेजता ??बूढ़ी माता बोली - मेरा बेटा हर महीने एक रंग-बिरंगा कागज भेजता है जिसे मैं दीवार पर चिपका देती हूँ।संत ने उसके घर जाकर देखा कि दीवार पर 60  बैंक ड्राफ्ट चिपकाकर रखे थे। प्रत्येक ड्राफ्ट ₹50,000 राशि का था। पढ़ी-लिखी न होने के कारण वह नहीं जानती थी कि उसके पास कितनी संपति है। संत ने उसे ड्राफ्ट का मूल्य समझाया।हमारी स्थिति भी उस बूढ़ी माता की भाँति ही है।हमारे पास धर्मग्रंथ तो हैं पर माथे से लगाकर अपने घर में सुसज्जित कर के रखते हैं | जबकि हम उनका वास्तविक लाभ तभी उठा पाएगें जब हम उनका अध्ययन चिंतन मनन करके उन्हें अपने जीवन में उतारेगें।हम हमारे धर्मग्रंथों की वैज्ञानिकता को समझे, हमारे त्यौहारो की वैज्ञानिकता को ...

पहचान, एक कहानी

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  पहचान   एक राजा की आदत थी, कि वह भेस बदलकर लोगों की खैर-ख़बर लिया करता था।एक दिन अपने वज़ीर के साथ गुज़रते हुए शहर के किनारे पर पहुंचा तो देखा एक आदमी गिरा पड़ा हैl राजा ने उसको हिलाकर देखा तो वह मर चुका था ! लोग उसके पास से गुज़र रहे थे, राजा ने लोगों को आवाज़ दी लेकिन लोग राजा को पहचान ना सके और पूछा क्या बात है ? राजा ने कहा इस को किसी ने क्यों नहीं उठाया ? लोगों ने कहा यह बहुत बुरा और गुनाहगार इंसान है। राजा ने कहा क्या ये "इंसान" नहीं है ? और उस आदमी की लाश उठाकर उसके घर पहुंचा दी, उसकी बीवी पति की लाश देखकर रोने लगी, और कहने लगी "मैं गवाही देती हूँ मेरा पति बहुत नेक इंसान है।" इस बात पर राजा को बड़ा ताज्जुब हुआ कहने लगा "यह कैसे हो सकता है ? लोग तो इसकी बुराई कर रहे थे और तो और इसकी लाश को हाथ लगाने को भी तैयार ना थे ?" उसकी बीवी ने कहा "मुझे भी लोगों से यही उम्मीद थी, दर असल हकीकत यह है कि मेरा पति हर रोज शहर के शराबखाने में जाता शराब खरीदता और घर लाकर नालियों में डाल देता और कहता कि चलो कुछ तो गुनाहों का बोझ इंसानों से हल्का हुआ।  उसी रात इसी तरह...

सबक एक कहानी

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 एक बार अमेरिका में कैलीफोर्निया की सड़कों के किनारे पेशाब करते हुए देख एक बुजुर्ग आदमी को पुलिसवाले पकड़ कर उनके घर लाए और उन्हें उनकी पत्नी के हवाले करते हुए निर्देश दिया कि वो उस शक़्स का बेहतरीन ढंग से ख़याल रखें औऱ उन्हें घर से बाहर न निकलने दें । दरअसल वो बुजुर्ग बिना बताए कहीं भी औऱ किसी भी वक़्त घर से बाहर निकल जाते थे और ख़ुद को भी नहीं पहचान पाते थे ।  बुजुर्ग की पत्नी ने पुलिस वालों को शुक्रिया कहा और अपने पति को प्यार से संभालते हुए कमरे के भीतर ले गईं।  पत्नी उन्हें बार बार समझाती रहीं कि तुम्हें अपना ख्याल रखना चाहिए। ऐसे बिना बताए बाहर नहीं निकल जाना चाहिए। तुम अब बुजुर्ग हो गए हो, साथ ही तुम्हें अपने गौरवशाली इतिहास को याद करने की भी कोशिश करनी चाहिए। तुम्हें ऐसी हरकत नहीं करनी चाहिए जिससे शर्मिंदगी महसूस हो । जिस बुजुर्ग को पुलिस बीच सड़क से पकड़ कर उन्हें उनके घर ले गई थी, वो किसी ज़माने में अमेरिका के जाने-माने फिल्मी हस्ती थे। लोग उनकी एक झलक पाने के लिए तरसते थे। उनकी लोकप्रियता का आलम ये था कि उसी के दम पर वो राजनीति में पहुंचे और दुनिया के सबसे शक्तिशाल...

विश्वास की शक्ति

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  विश्वास की शक्ति  मुझे लगा मैंने उसकी मदद करके गलती की है पर शायद मैं गलत था,,,,, मेरी बेटी की शादी थी और मैं कुछ दिनों की छुट्टी ले कर शादी के तमाम इंतजाम को देख रहा था ! उस दिन सफर से लौट कर मैं घर आया तो पत्नी ने आ कर एक लिफाफा मुझे पकड़ा दिया। लिफाफा अनजाना था लेकिन प्रेषक का नाम देख कर मुझे एक आश्चर्यमिश्रित जिज्ञासा हुई अमर विश्वास’ एक ऐसा नाम जिसे मिले मुझे वर्षों बीत गए थे । मैं ने लिफाफा खोला तो उस में 1 लाख डालर का चेक और एक चिट्ठी थी. इतनी बड़ी राशि वह भी मेरे नाम पर । मैं ने जल्दी से चिट्ठी खोली और एक सांस में ही सारा पत्र पढ़ डाला । पत्र किसी परी कथा की तरह मुझे अचंभित कर गया. लिखा था - आदरणीय सर, मैं एक छोटी सी भेंट आप को दे रहा हूँ  मुझे नहीं लगता कि आप के एहसानों का कर्ज मैं कभी उतार पाऊंगा । ये उपहार मेरी अनदेखी बहन के लिए है. घर पर सभी को मेरा प्रणाम ,आप का नाम- अमर  मेरी आंखों में वर्षों पुराने दिन सहसा किसी चलचित्र की तरह तैर गए । एक दिन मैं चंडीगढ़ में टहलते हुए एक किताबों की दुकान पर अपनी मनपसंद पत्रिकाएं उलटपलट रहा था कि मेरी नजर बाहर पुस्तको...

महाराज विक्रमादित्य

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महाराजा वीर विक्रमादित्य महाराजा विक्रमादित्य जिन्होंने भारत को सोने की चिड़िया बनाया था और स्वर्णिम काल लाया था।उज्जैन के राजा थे गन्धर्वसैन। जिनके तीन संताने थी, सबसे बड़ी लड़की थी मैनावती, उससे छोटा लड़का भृतहरि और सबसे छोटा वीर विक्रमादित्य... बहन मैनावती की शादी धारानगरी के राजा पदमसैन के साथ कर दी, जिनके एक लड़का हुआ गोपीचन्द, आगे चलकर गोपीचन्द ने श्री ज्वालेन्दर नाथ जी से योग दीक्षा ले ली और तपस्या करने जंगलों में चले गए, फिर मैनावती ने भी श्री गुरू गोरक्ष नाथ जी से योग दीक्षा ले ली।आज ये देश और यहाँ की संस्कृति केवल विक्रमादित्य के कारण अस्तित्व में है।सम्राट अशोक ने बोद्ध धर्म अपना लिया था और बोद्ध बनकर 25 साल राज किया था।भारत में तब सनातन धर्म लगभग समाप्ति पर आ गया था, देश में बौद्ध और अन्य हो गए थे।रामायण और महाभारत जैसे ग्रन्थ खो गए थे, महाराजा विक्रम ने ही पुनः उनकी खोज करवा कर स्थापित किया।विष्णु और शिव जी के मंदिर बनवाये और सनातन धर्म को बचाया। विक्रमादित्य के 9 रत्नों में से एक कालिदास ने "अभिज्ञान शाकुन्तलम्" लिखा। जिसमे भारत का इतिहास है। अन्यथा भारत का इत...

बनाये लाजबाब बसन्ती चावल

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  बसंती चावल  बसंत पंचमी वाले दिन बसन्ती चावल  खाने का रिवाज है | बनाये लाजबाब बसन्ती चावल |  चावल बनाने की सामग्री - 1/2   कप  बासमती चावल, 2   चम्मच घी , 1/2 इंच लंबा दालचीनी का टुकड़ा , 2 लॉन्ग, 2 इलाइची , 1/3 कप चीनी शक्कर, 10 केसर के धागे , 1/4 टेबलस्पून इलायची का पाउडर, 4 बदाम , 4 काजू ,8 किसमिस |  चावल बनाने की विधि - बासमती चावल को तीन चार बार पानी से धो लें और उन्हें 20 मिनट के लिए पानी में भिगो दें | एक पतीले में मध्यम आंच पर चावल को दो कप पानी के साथ चावल 90% तक उबले | चावल में से पानी  निकालें | | एक भारी तले वाली कढ़ाई में घी डाले ,लोंग ,इलाइची व दालचीनी को हल्का भुने | चावल डाले ,चीनी /शक्कर को धोड़े पानी में मिला कर डाले | दो चम्मच  दूध में केसर भिगो कर डाले |सारा मिला कर हलकी आंच पर पकाए |उपर काजू ,बादाम के छोटे करके व इलाइची पाउडर बुरक दे | तैयार है  बसन्ती चावल | मिथलेश शर्मा 

ऐतिहासिक नीलामी

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ऐतिहासिक नीलामी    सन् 1944 की 26 जनवरी का दिन। रंगून के म्युनिसिपल बिल्डिंग के प्रांगण में नेताजी के सम्मान में एक विशेष जनसभा का आयोजन किया गया था। बर्मा में इस प्रकार की सभा का यह प्रथम आयोजन था। नेताजी के नाम का ऐसा जादू था कि जनसाधारण के अलावा गणमान्य लोग भी सम्मिलित थे उस जनसमुद्र में। सभा के आरंभ में बर्मा के निवासियों की तरफ से नेताजी को एक माला पहनायी गई। तत्पश्चात नेताजी लगभग दो घंटे तक बोले। श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो कर सुन रहे थे--समय कैसे बीत गया किसी को पता नहीं चला। भाषण के अंत में नेताजी अपनें हाथ से माला को उठा कर आह्वान करते हुए बोले, "यह माला समस्त बर्मा वासियों की शुभकामनाओं का प्रतीक है और इसलिए यह अमूल्य है। समय व्यतीत होने के साथ-साथ यह सूख कर मूल्यहीन हो जायेगी। इसीलिए इस मुहूर्त में इसका यथार्थ मूल्य निर्धारित करने के लिए मैं इसे नीलाम करना चाहता हूँ। जो भी धन इससे प्राप्त होगा उससे रंगून में आज़ाद हिंद संग्रहालय खोला जाएगा।" जैसे ही नेताजी की बात ख़त्म हुयी एक सिख युवक हरगोविन्द सिंह चिल्ला कर बोल उठे, "नेताजी, वह माला मैं ख़रीदूंगा--एक लाख डॉ...

जानकारी काल फरवरी -2022

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  हिंदी मासिक   जानकारी काल   वर्ष-22,             अंक-09,             फरवरी - 2022,          पृष्ठ 42,        मूल्य-2-50 ओम ऐं ह्रीं क्लीं महासरस्वती देव्यै नमः।  जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता। सद्गुण वैभवशालिनी, त्रिभुवन विख्याता।। संरक्षक  श्रीमान कुलवीर शर्मा महामंत्री समर्थ शिक्षा समिति डॉ वी  एस नेगी प्रोफेसर भगत सिंह कॉलेज सांध्य  प्रधान संपादक व्  प्रकाशक  सतीश शर्मा     कार्यालय  ए 214 बुध नगर इंद्रपुरी  नई दिल्ली 110012  मोबाइल   9312002527  संपादक मंडल  सौरभ  शर्मा,कपिल शर्मा, गौरव शर्मा,डॉ अजय प्रताप सिंह, करुणा ऋषि, डॉ मधु वैध,  भूप  सिंह यादव, ऋतु सिंह, राजेश शुक्ल   प्रकाशक व मुद्रक सतीश शर्मा के लिय ग्लैक्सी प्रिंटर -106 F ,कृणा नगर नई दिल्ली 110029, A- 214 बुध नगर इं पूरी नई दिल्ली  110012 से प्रकाशित | सभी लेखों पर संपादक की सहमति ...