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किसे कौन सा रूद्राक्ष धारण करना चाहिए। रूद्राक्ष कैसे धारण करें।

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  रुद्राक्ष  किस धारणा से कौन सा रूद्राक्ष धारण करना चाहिए। रूद्राक्ष कैसे धारण करें। एकमुखी रूद्राक्ष ('एक वक्त्र: शिव: साक्षाद्र ब्रहमहत्या त्योपहति`) एक मुखी रूद्राक्ष को साक्षात् भगवान शिव माना गया है। इस में स्वयं शिव ही विराजते हैं। द्विमुखी रूद्राक्ष (गृह सुख शान्तिदाता) यह मुक्ति एवं सांसारिक ऐश्वर्य का दाता है तथा अर्द्धनारीश्वर स्वरूप है यह स्त्रियों के लिए विशेषकर लाभदायक है। त्रिमुखी रूद्राक्ष (बुखार से छुटकारा) इसके धारक से अग्निदेव प्रसन्न होते है। जिस व्यक्ति को बार-बार बुखार आता है उसके लिए विशेष गुणकारी है। चर्तुमुखी रूद्राक्ष (ज्ञान-वाकपटुता) यह साक्षात् ब्रहमा जी का स्वरूप् है। जिस बालक की बुद्धि कमजोर हो, बोलने में अटकता हो उसके लिए अति उत्तम है। पंचमुखी रूद्राक्ष (दिल की बीमारी के लिए) इसको धारण करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं यह प्रचण्ड कालाग्नि रूद्र है। इसके धारक को किसी प्रकार का दुख नहीं सताता, इसके कम से कम तीन दाने धारण करने चाहिए। छ: मुखी रूद्राक्ष (विद्या प्राप्ति के लिए) यह रूदाक्ष स्वामी कार्तिकेय के समान है। यह विद्या प्राप्ति में तथा ब...

राम चरित्र मानस में कष्ट दूर करने के उपाय

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राम चरित मानस  तुलसी दास जी ने जब राम चरित मानस की रचना की,तब उनसे किसी ने पूंछा कि बाबा! आप ने इसका नाम रामायण क्यों नहीं रखा? क्योकि इसका नाम रामायण ही है.बस आगे पीछे नाम लगा देते है, वाल्मीकि रामायण,आध्यात्मिक रामायण.आपने राम चरित मानस ही क्यों नाम रखा? बाबा ने कहा - क्योकि रामायण और राम चरित मानस में एक बहुत बड़ा अंतर है.रामायण का अर्थ है राम का मंदिर, राम का घर,जब हम मंदिर जाते है तो एक समय पर जाना होता है, मंदिर जाने के लिए नहाना पडता है,जब मंदिर जाते है तो खाली हाथ नहीं जाते कुछ फूल,फल साथ लेकर जाना होता है.मंदिर जाने कि शर्त होती है,मंदिर साफ सुथरा होकर जाया जाता है. और मानस अर्थात सरोवर, सरोवर में ऐसी कोई शर्त नहीं होती,समय की पाबंधी नहीं होती,जाती का भेद नहीं होता कि केवल हिंदू ही सरोवर में स्नान कर सकता है,कोई भी हो ,कैसा भी हो? और व्यक्ति जब मैला होता है, गन्दा होता है तभी सरोवर में स्नान करने जाता है.माँ की गोद में कभी भी कैसे भी बैठा जा सकता है. रामचरितमानस की चौपाइयों में ऐसी क्षमता है कि इन चौपाइयों के जप से ही मनुष्य बड़े-से-बड़े संकट में भी मुक्त हो जाता है। इन मंत्...

आम बजट – 2026 से संभावना

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    आम बजट – 2026  से संभावना  सतीश शर्मा    अमेरिकी टैरिफ ने भारत के पारंपरिक निर्यात क्षेत्रों को झटका दिया है, लेकिन इससे अवसर भी प्रदान हुआ है कि भारत अपने निर्यात ढांचे को अधिक विविध, आधुनिक और प्रतिस्पर्धी बनाए इसके लिए वित मंत्रालय काम कर रहा होगा । भारत को दीर्घकालिक रणनीति के तहत नवाचार, विविधता और व्यापारिक संतुलन पर भी ध्यान देना होगा, ताकि ऐसी नीतिगत झटकों का असर भविष्य में कम किया जा सके इसके लिए बजट मे कुछ दीर्घकालीन उपाय करने होंगे। वित्त मंत्री संसद में देश की अनुमानित आय (कर और अन्य स्रोतों से) और अगले वित्तीय वर्ष के लिए प्रस्तावित खर्चों (शिक्षा, रक्षा, स्वास्थ्य पर) का ब्योरा पेश करते हैं।  आम बजट में सरकार की आर्थिक नीति की दिशा दिखाई देती है । इसमें मंत्रालयों को उनके खर्चों के लिए पैसे का आवंटन होता है। बड़े तौर पर इसमें आने वाले साल के लिए कर प्रस्तावों का ब्योरा पेश किया जाता है।  भारत का केंद्रीय बजट 2026-27, जो 1 फरवरी 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किया जा सकता है, अवसंरचना, रक्षा, ए आई  और स्वच्छ ...