किसे कौन सा रूद्राक्ष धारण करना चाहिए। रूद्राक्ष कैसे धारण करें।
रुद्राक्ष किस धारणा से कौन सा रूद्राक्ष धारण करना चाहिए। रूद्राक्ष कैसे धारण करें। एकमुखी रूद्राक्ष ('एक वक्त्र: शिव: साक्षाद्र ब्रहमहत्या त्योपहति`) एक मुखी रूद्राक्ष को साक्षात् भगवान शिव माना गया है। इस में स्वयं शिव ही विराजते हैं। द्विमुखी रूद्राक्ष (गृह सुख शान्तिदाता) यह मुक्ति एवं सांसारिक ऐश्वर्य का दाता है तथा अर्द्धनारीश्वर स्वरूप है यह स्त्रियों के लिए विशेषकर लाभदायक है। त्रिमुखी रूद्राक्ष (बुखार से छुटकारा) इसके धारक से अग्निदेव प्रसन्न होते है। जिस व्यक्ति को बार-बार बुखार आता है उसके लिए विशेष गुणकारी है। चर्तुमुखी रूद्राक्ष (ज्ञान-वाकपटुता) यह साक्षात् ब्रहमा जी का स्वरूप् है। जिस बालक की बुद्धि कमजोर हो, बोलने में अटकता हो उसके लिए अति उत्तम है। पंचमुखी रूद्राक्ष (दिल की बीमारी के लिए) इसको धारण करने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं यह प्रचण्ड कालाग्नि रूद्र है। इसके धारक को किसी प्रकार का दुख नहीं सताता, इसके कम से कम तीन दाने धारण करने चाहिए। छ: मुखी रूद्राक्ष (विद्या प्राप्ति के लिए) यह रूदाक्ष स्वामी कार्तिकेय के समान है। यह विद्या प्राप्ति में तथा ब...