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हारे का सहारा बाबा श्याम हमारा

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  हरियाणा के हिसार ( वीर बरबरान ) मे एक पीपल का पेड़ है जिसको वीर बर्बरीक ने श्री कृष्ण भगवान के कहने पर अपने वाणों से छेदन किया था !  आज भी इन पत्तो में छेद है ! सबसे बड़ी बात ये है की जब इस पेड़ में नए पत्ते निकलते है तो उनमे भी छेद होता है ! सिर्फ इतना ही नहीं बल्कि, इसके बीज से उत्पन्न नए पेड़ के भी पत्तों में छेद होता है ! यह पीपल का पेड़ महाभारत काल की घटना का प्रत्यक्ष प्रमाण है और जो लोग रामायण और महाभारत जैसी घटनाओं को काल्पनिक करार देते है एवं यह कहते है कि इन घटनाओं को मानने वाले लोग काल्पनिक दुनिया में जीते हैं, उन लोगों के लिए यह किसी जोरदार तमाचे से कम नहीं होगा...जिन्होंने थोड़ी भी महाभारत पढ़ी होगी उन्हें वीर बर्बरीक वाला प्रसंग जरूर याद होगा ! उस प्रसंग में हुआ कुछ यूँ था कि महाभारत का युद्ध आरंभ होने वाला था और भगवान श्री कृष्ण युद्ध में पाण्डवों के साथ थे ! जिससे यह निश्चित जान पड़ रहा था कि कौरव सेना भले ही अधिक शक्तिशाली है, लेकिन जीत पाण्डवों की ही होगी..ऐसे समय में भीम के पौत्र और घटोत्कच के पुत्र बर्बरीक ने अपनी माता को वचन दिया कि युद्घ में जो पक्ष कमज...

दीपावली मुहूर्त्त-2023

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   दिवाली पर लक्ष्मी-गणेश पूजा का मुहूर्त-  12 नवंबर 2023 लक्ष्मी पूजा मुहूर्त:  शाम 05 बजकर 40 मिनट से शाम 07 बजकर 36 मिनट तक।  अवधि: 01 घंटा 54 मिनट  प्रदोष काल- 05-29 से 08-07 तक वृषभ काल- 05-40 से 07-36 तक दिवाली महानिशीथ काल पूजा मुहूर्त लक्ष्मी पूजा मुहूर्त्त- 11-39 से 12-31 तक अवधि- 52 मिनट महानिशीथ काल- 11-39 से 12-31 तक सिंह काल- 12-32 से 02-30 तक दिवाली शुभ चौघड़िया पूजा मुहूर्त अपराह्न मुहूर्त्त (शुभ)- 01-26 से 02-47 तक सायंकाल मुहूर्त्त (शुभ, अमृत, चल)- 05-29 से 22-26 तक रात्रि मुहूर्त्त (लाभ)- 01:44 से 03:23 तक उषाकाल मुहूर्त्त (शुभ)- 05:02 से 06:41 तक महापर्व की बेला सतयुग से शुरू हुई दीपावली द्वापर तक आते-आते 5 दिन का पर्व बन गया लक्ष्मी जी भगवान राम और कृष्ण की पूजा का महापर्व है  धनतेरस सबसे पहले सतयुग में कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी के दिन समुद्र मंथन से भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे तब से धनतेरस पर्व शुरू हुआ। दुसरा दिन द्वापर युग में इसी कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी के दिन भगवान कृष्ण ने नरकासुर का वध किया था तब पर...

जानकारी काल हिन्दी मासिक नवम्बर-2023

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जानकारी काल      वर्ष-24,अंक-07,नवम्बर - 2023,पृष्ठ 51,मूल्य 2-50       बिरसा मुण्डा (15 नवम्बर 1875 - 9 जून 1900) स्वतंत्रता सेनानी और मुंडा जनजाति के लोक नायक थे। बिरसा मुंडा ने जल, जंगल, जमीन और जनजाति की अस्मिता की रक्षा की। बहुत कम उम्र में ही अंग्रेजों के विरुद्ध हुंकार भरी और अंग्रेजों से लड़ाई लड़ी। उन्होंने आदिवासी क्षेत्र की अकाल पीड़ित जनता की सहायता करने की ठान रखी थी। उन्होंने आदिवासी लोगों को संगठित किया और जागरूक किया। बिरसा मुण्डा ने लोगों से ईसाई धर्म छोड़ कर एक ही भगवान को मानने को कहा,उन्होंने खुद को मसीहा बताते हुए ऐलान किया कि वे अपने लोगों को राज्य वापस दिलाने के लिए आए हैं । उन्होंने कहा कि अब विक्टोरिया रानी का राज खत्म हो गया है और मुण्डा राज शुरू हो गया है । मुण्डा उन्हें धरती बाबा कहने लगे थे।   संरक्षक  श्रीमान कुलवीर शर्मा कमहामंत्री समर्थ शिक्षा समिति डॉ वी  एस नेगी प्रोफेसर भगत सिंह कॉलेज सांध्य  प्रधान संपादक व  प्रकाशक  सतीश शर्मा     कार्यालय  ए 214 बुध नगर इंद्रपु...