शत नमन माधव चरण में शत नमन माधव चरण में शत नमन माधव चरण में ॥धृ॥ आपकी पीयूष वाणी , शब्द को भी धन्य करती आपकी आत्मीयता थी , युगल नयनों से बरसती और वह निश्छल हंसी जो , गूँज उठती थी गगन में ॥१॥ ज्ञान में तो आप ऋषिवर , दीखते थे आद्यशंकर और भोला भाव शिशु सा , खेलता मुख पर निरन्तर दीन दुखियों के लिये थी , द्रवित करुणाधार मन में ॥२॥ दु:ख सुख निन्दा प्रशंसा , आप को सब एक ही थे दिव्य गीता ज्ञान से युत , आप तो स्थितप्रज्ञ ही थे भरत भू के पुत्र उत्तम , आप थे युगपुरुष जन में ॥३॥ सिन्धु सा गम्भीर मानस , थाह कब पाई किसी ने आ गया सम्पर्क में जो , धन्यता पाई उसी ने आप योगेश्वर नये थे , छल भरे कुरुक्षेत्र रण में ॥४॥ मेरु गिरि सा मन अडिग था , आपने पाया महात्मन त्याग कैसा आप का वह , तेज साहस शील पावन मात्र दर्शन भस्म कर दे , घोर षडरिपु एक क्षण में ॥