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माता के नो रूप

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  १-शैलपुत्री वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्। वृषारूद्धां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम् ।। माँ दुर्गा अपने पहले स्वरूपमें 'शैलपुत्री' के नामसे जानी जाती हैं। पर्वतराज हिमालयके वहाँ पुत्रीके रूपमें उत्पन्न होनेके कारण इनका यह 'शैलपुत्री' नाम पड़ा था। वृषभ स्थिता इन माताजीके दाहिने हाथमें त्रिशूल और बायें हाथमें कमल पुष्य सुशोभित है। यही नव दुर्गाओंमें प्रथम दुर्गा है। अपने पूर्वजन्ममें ये प्रजापति दक्षकी कन्याके रूपमें उत्पन्न हुई थीं। तब इनका नाम 'सती' था। इनका विवाह भगवान् शङ्करजीये हुआ था। एक बार प्रजापति दक्षने एक बहुत बड़ा यज्ञ किया। इसमें उन्होंने सारे देवताओंकी अपना-अपना यज्ञ-भाग प्राप्त करनेके लिये निमन्त्रित किया। किन्तु शङ्करजीको उन्होंने इस यज्ञमें निमन्वित नहीं किया। सतीने जब सुना कि हमारे पिता एक अत्यन्त विशाल यज्ञका अनुष्ठान कर रहे हैं, तब वहाँ जानेके लिये उनका मन विकल हो उठा। अपनी यह इच्छा उन्होंने शङ्करजीको बतायी। सारी बातोंपर विचार करनेके बाद उन्होंने कहा "प्रजापति दक्ष किसी कारणवश हमसे रुष्ट हैं। अपने यज्ञमें उन्होंने सारे देवताओंको...

त्रयोदशी के दिन जन्मे बच्चे कैसे होते हैं

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  त्रयोदशी के दिन जन्मे बच्चे कैसे होते हैं त्रयोदशी तिथि (शुक्ल या कृष्ण पक्ष) में जन्मे बच्चे आम तौर पर ज्ञानवान, पवित्र दिल वाले, मिलनसार और महासिद्ध (प्रतिभाशाली) होते हैं। ये बच्चे बहुत मेहनती होते हैं और अपने जीवन में ऊंचा लक्ष्य (Success) निर्धारित करते हैं, जिसे पाने के लिए दृढ़ निश्चयी रहते हैं। कामदेव के प्रभाव के कारण ये आकर्षक व्यक्तित्व और कलात्मक प्रतिभा वाले भी हो सकते हैं।  त्रयोदशी तिथि में जन्मे बच्चों की प्रमुख विशेषताएं - ये बच्चे विद्या प्रेमी होते हैं, उन्हें शास्त्रों का ज्ञान हो सकता है और वे नई-नई चीजें सीखने में रुचि रखते हैं। ये मिलनसार, हंसमुख और दूसरों को प्रभावित करने वाले होते हैं। इनका स्वभाव परोपकारी होता है। ये अपने जीवन में सफलता प्राप्त करने के लिए कड़ी मेहनत करते हैं और अक्सर भाग्यशाली होते हैं। ये कला, लेखन, या किसी भी रचनात्मक कार्य (Creativity) में माहिर हो सकते हैं। इन बच्चों में धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण हो सकता है।  शुक्ल पक्ष त्रयोदशी: इस पक्ष में जन्मे लोग विकसित मन और दृढ़ इच्छाशक्ति वाले होते हैं, और इनका भाग्योदय 28 सा...

अनंग त्रयोदशी व्रत का महत्व

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  अनंग त्रयोदशी व्रत का महत्व यह व्रत दांपत्य जीवन से अनबन को दूर कर पति-पत्नी के बीच प्रेम और मधुरता बढ़ाता है। इस दिन 'अनंग' (बिना शरीर वाले) कामदेव की पूजा से जीवन में प्रेम, आकर्षण और सौंदर्य की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस व्रत के प्रभाव से सुयोग्य संतान और वंश वृद्धि का वरदान मिलता है। पौराणिक मान्यता अनुसार, यह व्रत परिवार में समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और सौभाग्य लाता है। जो लोग अपने प्रेम संबंधों को विवाह में बदलना चाहते हैं, उनके लिए यह व्रत बहुत ही शुभ और फलदाई माना जाता है।  व्रत और पूजा विधि - सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करके पवित्र होकर हाथ में चावल लेकर व्रत का संकल्प लें। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें, शिवलिंग का पंचामृत (दूध, दही, शहद, शक्कर, गंगाजल) से अभिषेक करें और बेलपत्र अर्पित करें। इस दिन कामदेव और उनकी पत्नी रति की पूजा करना अनिवार्य है, क्योंकि यह दिन उनके पुनः जीवित होने की खुशी में मनाया जाता है। पूजा के लिए प्रदोष काल (शाम का समय) सबसे उत्तम माना जाता है। इस दिन जरूरतमंदों को दान देने और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से शिवजी की कृपा...