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लक्ष्मी पूजन मुहर्त व विधि

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  लक्ष्मी पूजन मुहर्त व विधि आप सबको दिवाली की मंगल शुभकामना एंव हार्दिक बधाई |  मां लक्ष्मी आपकी सभी मनोकामनाएं पूरी करें | लक्ष्मी पूजन मुहर्त दिनांक 31-10-2024  स्थिर लग्न - वृषभ - 6-25 से 8-20 तक,सिंह लग्न - 00-56 से 3-14 तक राहू काल 13-27 से 14-50 चौघड़िया मुहूर्त शुभ - 16-13 से 17-36,तक,अमृत - 17-36 से 19-13 तक,चल - 19-13 से 20-50 तक लाभ - 00-04 से 01-41 तक,शुभ - 03-18 से 04-55 तक,अमृत - 04-55 से 06-32 तक  दिनांक - 01-11-2024  स्थिर लग्न - वृश्चिक - 07-40 से 10-05 तक, कुंभ - 13-52 से 15-30 तक,वृषभ - 18-21 से 20-16 तक,सिंह - 00-52 से 03-10 तक राहूकाल 10-41 से 12-04 लाभ 07-55 से 09-18 तक अमृत - 09-18 से 10-41 तक,शुभ 12-04 से 13-26 तक लाभ 20-49 से 22-27 तक  लक्ष्मी पूजन विधि दीपावली पर अपने घर में भगवान गणपति, माँ लक्ष्मी, माँ सरस्वती एवं कुबेर इनका पूजन का करते  है । दीपावली पर पंच देवों के स्मरण पूजन से अंतर एवं बाह्य महालक्ष्मी की अभिवृद्धि तथा जीवन में सुख-शांति का संचार होता है । सब श्रद्धालु भावपूर्वक वैदिक विधि-विधान का लाभ ले सकें, इस हेतु ...

देव प्रबोधिनी एकादशी कथा

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  देव प्रबोधिनी एकादशी कथा एक राजा के राज्य में सभी लोग एकादशी का व्रत रखते थे। वहां की प्रजा नौकर-चाकरों से लेकर पशुओं तक को एकादशी के दिन अन्न नहीं दिया जाता था। एक दिन किसी दूसरे राज्य का एक व्यक्ति राजा के पास आकर बोला- महाराज! कृपा करके मुझे नौकरी पर रख लें। तब राजा ने उसके सामने एक शर्त रखी कि ठीक है, रख लेते हैं। लेकिन रोज तो तुम्हें खाने को सब कुछ मिलेगा, पर एकादशी को अन्न नहीं मिलेगा। उस व्यक्ति ने उस समय 'हां' कर ली, पर एकादशी के दिन जब उसे फलाहार का सामान दिया गया तो वह राजा के सामने जाकर गिड़गिड़ाने लगा- महाराज! इससे मेरा पेट नहीं भरेगा। मैं भूखा ही मर जाऊंगा। मुझे खाने के लिए अन्न दे दो। राजा ने उसे शर्त की बात याद दिलाई, फिर भी वह अपनी बात पर अड़ा रहा और अन्न छोड़ने को राजी नहीं हुआ, तब राजा ने उसे आटा-दाल-चावल आदि दिए। वह नित्य की तरह नदी पर पहुंचा और स्नान कर भोजन पकाने लगा। जब भोजन बन गया तो वह भगवान को बुलाने लगा- आओ भगवान! भोजन तैयार है। उसके बुलाने पर पीताम्बर धारण किए भगवान चतुर्भुज रूप में आ पहुंचे और प्रेम से उसके साथ भोजन करने लगे। भोजनादि करके भगवान अंतर्ध...

शरद पूर्णिमा

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  शरद पूर्णिमा... https://youtu.be/JlsGWN4zTjY वर्ष के बारह महीनों में ये पूर्णिमा ऐसी है, जो तन, मन और धन तीनों के लिए सर्वश्रेष्ठ होती है। इस पूर्णिमा को चंद्रमा की किरणों से अमृत की वर्षा होती है, तो धन की देवी महालक्ष्मी रात को ये देखने के लिए निकलती हैं कि कौन जाग रहा है और वह अपने कर्मनिष्ठ भक्तों को धन-धान्य से भरपूर करती हैं। शरद पूर्णिमा का एक नाम 'कोजागरी पूर्णिमा' भी है यानी लक्ष्मी जी पूछती हैं, कौन जाग रहा है? अश्विनी महीने की पूर्णिमा को चंद्रमा अश्विनी नक्षत्र में होता है इसलिए इस महीने का नाम अश्विनी पड़ा है।एक महीने में चंद्रमा जिन 27 नक्षत्रों में भ्रमण करता है, उनमें ये सबसे पहला है और आश्विन नक्षत्र की पूर्णिमा आरोग्य देती है। केवल शरद पूर्णिमा को ही चंद्रमा अपनी सोलह कलाओं से संपूर्ण होता है और पृथ्वी के सबसे ज्यादा निकट भी। चंद्रमा की किरणों से इस पूर्णिमा को अमृत बरसता है आयुर्वेदाचार्य वर्ष भर इस पूर्णिमा की प्रतीक्षा करते हैं। जीवनदायिनी रोगनाशक जड़ी-बूटियों को वह शरद पूर्णिमा की चांदनी में रखते हैं। अमृत से नहाई इन जड़ी-बूटियों से जब दवा बनायी जाती है ...