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राम नवमी पर करने लिए मंत्र

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 रामनवमी की मंगल शुभकामनाये  राम नवमी के दिन निम्नलिखित मंत्र जपे व सभी मुसीबतों से मुक्त हो जाएं।  श्री राम जय राम जय जय राम। । भगवान राम जन्म स्तुति, इसके पाठ से होती है सभी सुख की प्राप्ति। भए प्रगट कृपाला दिनदयाला, कौशल्या हितकारी। हरषित महतारी, मुनि मन हारी,अद्भुत रूप बिचारी॥ लोचन अभिरामा, तनु घनस्यामा, निज आयुध भुजचारी। भूषन बनमाला, नयन बिसाला, सोभासिंधु खरारी ॥ कह दुइ कर जोरी, अस्तुति तोरी, केहि बिधि करू अनंता। माया गुन ग्यानातीत आमना,वेद पुराण भंता ॥ करुना सुख सागर, सब गुन आगर, जेहि गाहिं श्रुति संता । सो मम हित लागी, जन अनुरागी, भए प्रगट श्रीकंता ॥ ब्रह्मांड निकाया, निर्मित माया, रोम रोम प्रति बेद कहै । मम उर सो बसी, यह उपहासी, सुनत धीर मति थिर न रहै ॥ उपजा  सब ग्याना  प्रभु मुसकाना, चरित बहुत बिधि कीन्ह चहै । कहि कथा सुहाई मातु बुझाई, जेहि प्रकार सुत प्रेम लहै ॥ माता पुनी बोली, सो मति डोली, तजहु तात यह रूपा   । कीजै शिशुलीला, अति प्रियसिला, यह सुख परम अनूपा ॥ सुनि बचन सुजाना, रोदन ठाना, होइ बालक सुरभूपा। यह चरित जे गावहिं, हरिपद पावहिं,ते न परहिं ...

होली

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https://youtu.be/aUx1iSRm_W4  *होली* की शुरुआत मुल्तान भारत से हुई थी, लेकिन 1947 से एक क्रूर विभाजन के बाद, यह अब पाकिस्तान में है, जहां 1992 में जिहादी भीड़ द्वारा नष्ट किए जाने के बाद भी प्राचीन प्रह्लादपुरी मंदिर के अंतिम खंडहर मौजूद हैं। आज रात अपने परिवार के साथ *होलिका दहन* करते समय इसे न भूलें। जो सभ्यता अपने इतिहास को भूल जाती है उसे कभी माफ नहीं किया जाता। जो लोग इतिहास भूल जाते हैं, वे इसे दोहराने की निंदा करते हैं। कितने हिंदुओं ने मुल्तान में *प्रह्लादपुरी मंदिर* के बारे में कभी सुना।  मुल्तान भारत के सबसे महान सूर्य मंदिर में से एक, *आदित्य सूर्य मंदिर* का स्थल भी था, जिसे पहले मुहम्मद बिन कासिम द्वारा नष्ट किया गया था और बाद में 1026 ईस्वी में गजनी के महमूद द्वारा पूरी तरह से नष्ट कर दिया गया था। मुल्तान का नाम संस्कृत शब्द मुला स्थान से आया है, इसका अर्थ 'मूल निवास' था और इसमें एक विशाल आदित्य सूर्य मंदिर था।  कहा जाता है कि मुल्तान की स्थापना हिरण्य कश्यप के पिता कश्यप ने की थी, जिसके बाद इसका नाम कश्यपपुर पड़ा।जब बौद्ध तीर्थयात्री ह्वेन त्सांग ने पूरे भा...

जानकारी काल मार्च - 2023

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  जानकारी काल     वर्ष-23,  अंक-11, मार्च -2023, पृष्ठ 62 मूल्य 2-50       जब वह राधा और अन्‍य गोपियों को तरह-तरह के रंगों से रंग रहे थे, तो नटखट श्री कृष्‍ण की यह प्यारी शरारत सभी ब्रजवासियों को बहुत पंसद आई। माना जाता है, कि इसी दिन से होली पर रंग खेलने का प्रचलन शुरू हो गया और इसीलिए होली पर रंग-गुलाल खेलने की यह परंपरा आज भी निभाई जा रही है। संरक्षक  श्रीमान कुलवीर शर्मा कमहामंत्री समर्थ शिक्षा समिति डॉ वी  एस नेगी प्रोफेसर भगत सिंह कॉलेज सांध्य  प्रधान संपादक व  प्रकाशक  सतीश शर्मा     कार्यालय  ए 214 बुध नगर इंद्रपुरी  नई दिल्ली 110012  मोबाइल    9312002527  संपादक मंडल  सौरभ  शर्मा,कपिल शर्मा, गौरव शर्मा,डॉ अजय प्रताप सिंह, करुणा ऋषि, डॉ मधु वैध,राजेश शुक्ल   प्रकाशक व मुद्रक सतीश शर्मा के लिय ग्लैक्सी प्रिंटर- 106 F, कृणा नगर नई दिल्ली 110029 , A- 214 बुध नगर इन्दर पूरी नई दिल्ली  110012 से प्रकाशित | सभी लेखों पर संपादक की सहमत...