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छठ पूजा

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  छठ पूजा  माता सीता ने राम को ब्रह्म-हत्या के पाप से बचाने के लिए किया था छठ व्रत वैसे तो छठ की शुरुआत को लेकर कई कथाएं प्रचलित हैं। लेकिन इसमें से दो प्रमुख हैं। कहा जाता है कि रावण को मारने के बाद भगवान राम पर ब्रह्महत्या का पाप लगा था। अपने पति को इस पाप से मुक्त करने के लिए माता सीता ने मुद्गल ऋषि के कहने पर सूर्य भगवान को अर्घ्य दिया था। उन्होंने छह दिनों तक सूर्य भगवान और छठी माता की पूजा कर भगवान राम को ब्रह्महत्या के पाप से उबारा। पांडव जुए में हार गए थे राजपाट, छठ करके द्रौपदी ने लौटाया छठ पूजा की एक कथा महाभारत से भी जुड़ती है। लोक मान्यता के अनुसार, जब पांडव जुए में अपना पूरा राजपाट कौरवों से हार गए तो द्रौपदी ने छठ का व्रत किया। जिसके बाद पांडवों को उनका राजपाट वापस मिल गया। कर्ण भी सूर्य भक्त थे। वो रोज कमर तक पानी में खड़े होकर सूर्य भगवान को अर्घ्य देते थे। आज भी छठ में भी महिलाएं इसी तरह अर्घ्य देती हैं।

पन्ना रत्न,मोती रत्न

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  पन्ना रत्न  रत्न शास्त्र के अनुसार, पन्ना रत्न बुध ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है | इसे धारण करने से व्यक्ति के जीवन में कई सफलता के मुकाम हासिल करने का योग बनता है | पन्ना सुंदर हरे रंग का चमकदार पारदर्शक बहुमूल्य रत्न है | यह बुध ग्रह का रत्न है | पन्ना की कठोरता 4.5 से 8 तक होती है वैसे तो उत्तम कोटि का बेदाग और हरित आभा वाला पन्ना दुर्लभ है फिर भी आजकल के उपलब्ध पन्नों में उत्तम कोटि का पन्ना वही होता है जो लोचदार वजन में भारी हो स्पर्स में कोमल कमल के पत्ते या इमली के पत्ते जैसा उज्जवल हरे रंग का हो | अमेरिकी रूस का पन्ना उत्तम माने जाते हैं ज्योतिष शास्त्र में बुध की कमजोरी को दूर करने के लिए पन्ना धारण करने की सलाह दी जाती है लेकिन धारण करने के लिए शुद्ध एवं दोष रहित पन्ना ही उपयोगी होता है अगर दोषपूर्ण पन्ना धारण कर भी लिया जाए तो उससे अच्छे परिणाम के बाजए दुष्परिणाम अधिक मिलते हैं | गलत रत्न धारण करने से अधिकतर नपुंसकता एवं मानसिक रोग बढ़ जाते हैं इससे बेहतर तो यही होगा कि पन्ना रत्न पहने ही नहीं | रत्न पहने से पहले उसे शुद्ध करवा कर व उस ग्रह से संबंधित पूजा व द...

विश्‍वकर्मा और उनके शास्‍त्र

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विश्‍वकर्मा और उनके शास्‍त्र  विश्वकर्मा : 100 शिल्प ग्रंथ प्रदाता कलाएं कितनी हो सकती हैं? सब लोकोपयोगी हों। लोक उपयोगी सृजन से बड़ा कोई सृजन नहीं। सृजन श्रम, संघर्ष, समय को बचाने वाला और परिश्रम को सार्थक कर आजीविका देने वाला हो। श्राद्ध कब करे , क्यों करे ,कैसे करे जानने के लिय क्लिक करे - https://youtu.be/HfddQr4VnI8 जन्म कुण्डली बनवाए व दिखाने के लिए संपर्क करे शर्मा जी-9312002527 भारत विश्वकर्मीय ज्ञान के 100 से ज्यादा ग्रंथों से समृद्ध रहा है। ये गोपनीय अधिकांश ग्रंथ गत डेढ़ दशक में ही सानुवाद प्रकाश में आए हैं... क्या आप जानते हैं  विश्‍वकर्मा और उनके शास्‍त्र (संदर्भ : विश्‍वकर्मा ग्रंथों का बढ़ता प्रयोग) यह मेरे लिए प्रसन्नता का विषय है कि कल तक जो शिल्प और स्थापत्य के ग्रंथ केवल शिल्पियों के व्यवहार तक सीमित और केन्द्रित थे, उन पर आज अनेक संस्थानों से लेकर कई विश्व विद्यालयों तक ज्ञान सत्र आयोजित होने लगे हैं, सेमिनार, राष्ट्रीय, अंतर राष्ट्रीय गोष्ठियां होने लगी हैं। अनेक विद्वानों की भागीदारी होने लगी है। शिल्प के ये विषय पाठ्यक्रम के विषय होकर रोजगार और व्यवहार क...

सूर्य ग्रहण से सीख

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   सूर्य ग्रहण से सीख  सूर्य ग्रहण का पर्व मानव जीवन को तीन प्रमुख सीखें प्रदान करता है।   *पहली -* इस सृष्टि में सब कुछ परिवर्तनशील है। इस भू मण्डल पर शाश्वत जैसा कुछ भी नहीं। समस्त चराचर जगत को प्रकाशित करने वाले सूर्य देव की किरणों को भी कुछ समय के लिए ही सही मगर पृथ्वी तक पहुँचने में असमर्थता हो जाती है अथवा पृथ्वी से सूर्य किरणों का ह्रास हो जाता है।   *दूसरी -* जीवन में सदैव अवरोध आते रहेंगे। यात्रा जितनी लंबी होगी अथवा लक्ष्य जितना श्रेष्ठ होगा अवरोध भी उतने ही उत्पन्न होंगे। बस उन क्षणों में धैर्य का परिचय देते हुए ये विचार करें कि जब सुख ही शाश्वत नहीं रहा तो दुख की क्या औकात है..? समय बुरा हो सकता है मगर जीवन कदापि नहीं। ये वक्त भी गुजर जायेगा, बस इतना ध्यान रहे।   *तीसरी -*  एक महत्वपूर्ण बात और वो ये कि जिस प्रकार सूर्य ग्रहण लगने पर भी मूल रूप से भगवान सूर्य नारायण में कोई परिवर्तन नहीं आता। दूर से देखने पर लगेगा कि सूर्य पर अंधेरा छा गया है जबकि यथार्थ में सूर्य की स्थिति सम बनी रहती है। ऐसे ही जीवन के सुख - दुख, मान - अपमा...

दीपावली पूजन मुहर्त

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  दीपावली पूजन मुहर्त   पौराणिक कथाओं के अनुसार कार्तिक मास की अमावस्या को भगवान राम चौदह वर्ष का वनवास पूर्ण करने के बाद अपनी जन्मभूमि अयोध्या वापस लौटे थे। जिसके उपलक्ष्य में हर साल कार्तिक मास की अमावस्या तिथि को दीपावली का पावन पर्व मनाया जाता है।”  श्री महालक्ष्मी पूजन एवं दीपावली का महापर्व कार्तिक अमावस में प्रदोष काल एवं अर्धरात्रि व्यापिनी हो तो विशेष रूप से शुभ होता है। इस वर्ष कार्तिक अमावस 24 अक्टूबर सोमवार 2022 को सांयकाल 17:28 के बाद प्रदोष निशीध तथा महानिशीध व्यापिनी होगी। अतः "दिवाली पर्व" 24 अक्टूबर सोमवार 2022 के दिन दीपावली मनाया जाना चाहिए |इस  साल दिवाली एवं चित्रा नक्षत्र, विष्कुंभ योग, कन्या राशिस्थ् तथा अर्धरात्रि व्यापिनी अमावस्या युक्त होने से विषेश शुभ रहेगी।दिवाली के दिन पूजा स्थल पर एक चौकी रखें और लाल कपड़ा बिछाकर उस पर लक्ष्मी जी और गणेश जी की मूर्ति रखें या दीवार पर लक्ष्मी जी का चित्र लगाएं। चौकी के पास जल से भरा एक कलश रखें। माता लक्ष्मी और गणेश जी की मूर्ति पर तिलक लगाएं और दीपक जलाकर जल, मौली, चावल, फल, गुड़, हल्दी, अबीर-गुलाल आदि ...

अगर हम नही देश के काम आए धरा क्या कहेगी गगन क्या कहेगा।।

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  अगर हम नही देश के काम आए धरा क्या कहेगी गगन क्या कहेगा ॥ चलो श्रम करे आज खुद को सँवारें युगों से चढी जो खुमारी उतारें अगर वक्त पर हम नहीं जाग पाएं सुभा क्या कहेगी पवन क्या कहेगा ॥ अधुर गन्ध का अर्थ है खूब महके पडे संकटों की भले मार सहके अगर हम नहीं पुष्प सा मुस्कुराएं लता क्या कहेगी चमन क्या कहेगा ॥ बहुत हो चुका स्वर्ग भू पर उतारें करें कुछ नया स्वस्थ सोचें विचारें अगर हम नहीं ज्योति बन झिलमिलाएं निशा क्या कहेगी भुवन क्या कहेगा ॥

संघ गीत

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  शत नमन माधव चरण में शत नमन माधव चरण में शत नमन माधव चरण में ॥धृ॥ आपकी पीयूष वाणी ,  शब्द को भी धन्य करती आपकी आत्मीयता थी ,  युगल नयनों से बरसती और वह निश्छल हंसी जो ,  गूँज उठती थी गगन में ॥१॥ ज्ञान में तो आप ऋषिवर ,  दीखते थे आद्यशंकर और भोला भाव शिशु सा ,  खेलता मुख पर निरन्तर दीन दुखियों के लिये थी ,  द्रवित करुणाधार मन में ॥२॥ दु:ख सुख निन्दा प्रशंसा ,  आप को सब एक ही थे दिव्य गीता ज्ञान से युत ,  आप तो स्थितप्रज्ञ ही थे भरत भू के पुत्र उत्तम ,  आप थे युगपुरुष जन में ॥३॥ सिन्धु सा गम्भीर मानस ,  थाह कब पाई किसी ने आ गया सम्पर्क में जो ,  धन्यता पाई उसी ने आप योगेश्वर नये थे ,  छल भरे कुरुक्षेत्र रण में ॥४॥ मेरु गिरि सा मन अडिग था ,  आपने पाया महात्मन त्याग कैसा आप का वह ,  तेज साहस शील पावन मात्र दर्शन भस्म कर दे ,  घोर षडरिपु एक क्षण में ॥५॥

नवग्रह के बारे में जाने

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नवग्रह के बारे में जाने  सूर्य,चन्द्र ,मंगल ,बुध ,गुरु ,शुक्र व शनि ग्रह हमारे जीवन में क्या  प्रभाव डालते है | अगर कुंडली में कमजोर हो तो क्या उपाय करे    सूर्य ग्रह     जिनका सूर्य प्रबल होता है वे बहुत तेजस्वी सदगुणी विद्वान उदार स्वभाव दयालु, और मनोबल में आत्मबल से पूर्ण होते है। वे अपने कार्य स्वत: ही करता है किसी के भरोसे रह कर काम करना उन्हे नहीं आता है। वे सरकारी नौकरी और सरकारी कामकाज के प्रति समर्पित होता है। वह अपने को अल्प समय में ही कुशल प्रसाशक बनालेता है। सूर्य को एक प्रभावशाली ग्रह माना जाता है।  अगर कुंडली में सूर्य कमजोर हो तो  निम्न मंत्र का जाप करें।  ॐ ह्रीं ह्रीं सूर्याय सहस्रकिरणराय मनोवांछित फलम् देहि देहि स्वाहा. ॐ सूर्याय नम: ॐ घृणि सूर्याय नम: । सूर्य का बीज मंत्र - ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः ॥ सूर्य का रत्न माणिक्य है ।     चंद्र ग्रह नवग्रहों में सूर्य के बाद चन्द्रमा ज्योतिष में सर्वाधिक महत्वपूर्ण ग्रह है | चंद्र ग्रह कर्क राशी का स्वामी है |  कमजोर चंद्र के कारण होने वाले कष्ट - व्यक्ति क...

छोटी बात पर काम की बात

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बड़े बुजुर्ग कहते हैं कि, जब भी किसी मंदिर में दर्शन के लिए जाएं तो दर्शन करने के बाद #बाहर आकर मंदिर की पेडी या ऑटले पर थोड़ी देर बैठते हैं । क्या आप जानते हैं इस परंपरा का क्या कारण है? आजकल तो लोग मंदिर की पैड़ी पर बैठकर अपने घर की व्यापार की राजनीति की चर्चा करते हैं। परंतु यह प्राचीन परंपरा एक विशेष #उद्देश्य के लिए बनाई गई । वास्तव में मंदिर की पैड़ी पर बैठ कर के हमें एक श्लोक बोलना चाहिए। यह श्लोक आजकल के लोग भूल गए हैं । आप इस लोक को सुनें और आने वाली पीढ़ी को भी इसे बताएं । यह श्लोक इस प्रकार है - अनायासेन मरणम् ,बिना देन्येन जीवनम्। देहान्त तव सानिध्यम्, देहि मे परमेश्वरम् ।। इस श्लोक का अर्थ है...  अनायासेन मरणम्...... अर्थात बिना तकलीफ के हमारी मृत्यु हो और हम कभी भी बीमार होकर बिस्तर पर पड़े पड़े ,कष्ट उठाकर मृत्यु को प्राप्त ना हो चलते फिरते ही हमारे प्राण निकल जाएं । बिना देन्येन जीवनम्......... अर्थात परवशता का जीवन ना हो मतलब हमें कभी किसी के सहारे ना पड़े रहना पड़े। जैसे कि लकवा हो जाने पर व्यक्ति दूसरे पर आश्रित हो जाता है वैसे परवश या बेबस ना हो । ठाकुर जी की कृ...

समस्या है तो समाधान भी है

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समस्या है तो समाधान भी है कानूनी,पैतृक संपत्ति, वैवाहिक जीवन में तनाव, संतान,पढाई, विदेश यात्रा, नोकरी व व्यापार संबंधित समस्या पर उचित सलाह व समाधान हेतु संपर्क करें शर्मा जी 9312002527 If there is a problem there is a solution too. Contact Sharma counsultant 9312002527 for proper advice and solution on legal, ancestral property, stress in married life, children, studies, foreign travel, job and business related problems. वर वधू के लिए निम्नलिखित फार्म भरे । सुमनस॔गम  Fill the following form for the bride and groom। Sumansangam.com  https://docs.google.com/forms/ d/1v4vSBtlzpdB3- 6idTkD1qoUZ6YkZIqEv8HAAeOJyPRI /edit जन्म कुंडली दिखाने के लिए व बनवाने हेतु संपर्क करें।    शर्मा जी, जन्म कुंडली विशेषज्ञ व सलाहकार  9312002527,9560518227 jankarikal@gmail.com  www.jaankaarikaal.com 

दान

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  दान        एक बुज़ुर्ग शिक्षिका भीषण गर्मियों के दिन में बस में सवार हुई। वह पैरों के दर्द से बेहाल थी लेकिन बस में सीट न देख कर जैसे – तैसे     अभी बस ने कुछ दूरी ही तय की थी कि एक उम्रदराज औरत ने बड़े सम्मानपूर्वक आवाज़ दी, "आ जाइए मैडम, आप यहाँ बैठ जाएं” कहते हुए उसे अपनी सीट पर बैठा दिया। खुद वो गरीब सी औरत बस में खड़ी हो गयी। मैडम ने दुआ दी, "बहुत-बहुत धन्यवाद, सच में मेरी बहुत बुरी हालत थी।" ऐसा सुनकर  उस गरीब महिला के चेहरे पर एक सुकून भरी मुस्कान फैल गयी।  कुछ देर बाद शिक्षिका के पास वाली सीट खाली हो गयी लेकिन महिला ने एक और महिला को, जो एक छोटे बच्चे के साथ यात्रा कर रही थी और मुश्किल से बच्चे को ले जाने में सक्षम थी, को सीट पर बिठा दिया।   अगले पड़ाव पर बच्चे के साथ महिला भी उतर गयी।सीट खाली हो गयी लेकिन नेकदिल महिला ने बैठने का लालच नहीं किया बल्कि बस में चढ़े एक कमजोर बूढ़े आदमी को बैठा दिया जो अभी - अभी बस में चढ़ा था।  कुछ देर बाद सीट फिर से खाली हो गयी। बस में अब गिनी – चुनी सवारियां ही रह गयी थीं। अब उस अध्यापिका न...

बेटी

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बेटी विवाह के बाद पहली बार मायके आयी बेटी का स्वागत सप्ताह भर चला। सप्ताह भर बेटी को जो पसन्द है, वही सब किया गया।वापिस ससुराल जाते समय पिता ने बेटी को एक अति सुगंधित अगरबत्ती का पुडा दिया और कहा की-बेटी, तुम जब ससुराल में पूजा करने जाओगी,तब यह अगरबत्ती जरूर जलाना | माँ ने कहा - बिटिया प्रथम बार मायके से ससुराल जा रही है,तो भला कोई अगरबत्ती जैसी चीज देता है? पिता ने झट से जेब मे हाथ डाला और जेब मे जितने भी रुपये थे,वो सब बेटी को दे दिए | ससुराल में पहुंचते ही सासु माँ ने बहु के माता-पिता ने बेटी को बिदाई में क्या दिया,यह देखा तो वह अगरबत्ती का पुडा भी दिखा। सासु माँ ने मुंह बना कर बहु को बोला कि-कल पूजा में यह अगरबत्ती लगा लेना | सुबह जब बेटी पूजा करने बैठी, अगरबत्ती का पुडा खोला तो उसमे से एक चिट्ठी निकली,लिखा था-"बेटा यह अगरबत्ती स्वतः जलती है,मगर संपूर्ण घर को सुगंधित  कर देती है।इतना ही नही, आजू-बाजू के पूरे वातावरण को भी अपनी महक से सुगंधित एवम प्रफुल्लित कर देती है...!! हो सकता है की तुम कभी पति से कुछ समय के लिए रुठ जाओगी या कभी अपने सास-ससुरजी से नाराज हो जाओगी,कभी देवर या...

भाई

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 सरस्वती के भाई  अयोध्या के बहुत निकट ही पौराणिक नदी कुटिला है – जिसे आज टेढ़ी कहते हैं, उसके तट के निकट ही एक भक्त परिवार रहता था। उनके घर एक सरस्वती नाम की बालिका थी। वे लोग नित्य श्री कनक बिहारिणी बिहारी जी का दर्शन करने अयोध्या आते थे। सरस्वती जी का कोई सगा भाई नही था, केवल एक मौसेरा भाई ही था। वह जब भी श्री रधुनाथ जी का दर्शन करने आती, उसमे मन मे यही भाव आता की सरकार मेरे अपने भाई ही है।उसकी आयु उस समय मात्र दो वर्ष की थी। रक्षाबंधन से कुछ समय पूर्व उसने सरकार से कहा की मै आपको राखी बांधने आऊंगी। उसने सुंदर राखी बनाई और रक्षाबंधन पूर्णिमा पर मंदिर लेकर गयी। पुजारी जी से कहा कि हमने भैया के लिए राखी लायी है। पुजारी जी ने छोटी सी सरस्वती को गोद मे उठा लिया और उससे कहा कि मै तुम्हे राखी सहित सरकार को स्पर्श कर देता हूं और राखी मै बांध दूंगा। पुजारी जी ने राखी बांध दी और उसको प्रसाद दिया। अब हर वर्ष राखी बांधने का उसका नियम बन गया। समय के साथ वह बड़ी हो गयी और उसका विवाह निश्चित हो गया। वह पत्रिका लेकर मंदिर में आयी और कहा की मेरा विवाह निश्चित हो गया है, मै आपको न्योता देने आ...

विदाई

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  विदाई जी हाँ ! यह संगीता-कुंज नाम का आशियाना मेरा ही है ।अपनी सेवानिवृत्ति होने से चार वर्ष पूर्व मैंने इसे बनवाया था।यह चमत्कार कैसे संपन्न हो सका ,मुझे नहीं मालूम।इसे मैं ईश्वर कृपा ही कहूँगा अन्यथा निखालिस आय वाले सरकारी मुलाजिम के लिए इस महंगाई में मकान बनवाना इतना सहज नहीं होता ।   कुछ सरकारी लोन लिया, कुछ फंड से रुपया निकाला और श्री गणेश का नाम लेके करा डाली नींव की खुदाई ।तीन महीने बाद लिंटर पड़ गया।एक ढाँचे के रूप में मकान आकार ले चुका था।किंतु इसके बाद मकान की फ़िनिशिंग में कितने पापड़ बेलने पड़े, यह मैं मुक्त भोगी ही जानता हूँ ।भागते-दौड़ते जूते के सोल घिस गए।धूप-बरसात में खड़े-खड़े सिर के रहे-सहे बाल झड़ गए और चंदिया नज़र आने लगी ।  जैसे भी हुआ पर यह सच था कि अपना स्वयं का आशियाना होने का सपना साकार हो गया था ।पंडित से गृह प्रवेश का मुहूर्त निकलवाया गया।पत्नी की इच्छा थी कि गृह प्रवेश नाते-रिश्तेदारों एवं दोस्तों को आमंत्रित करके धूमधाम से संपन्न हो।किंतु मकान से राज मिस्रियों को विदा करते-करते जेब की हालत कितनी पतली हो गई थी, इसे सपनों की दुनिया में डोलती पत...