संदेश

सितंबर, 2022 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

शारदीय नवरात्र दुर्गासप्तशती में हर समस्या के लिए एक विशेष मंत्र

चित्र
  शारदीय नवरात्र विडियो देखने के लिए किल्क करे -   https://youtu.be/mlbXMeQGctI ॐ खड्गं चक्रगदेषुचापपरिघात्र्छूलं भुशुण्डीं शिर:शङ्खं संदधतीं करैस्त्रिनयनां सर्वांगभूषावृताम् । नीलाश्म धुतिमास्यपाददशकां सेवे महाकालिका ं यामस्तौव्स्वपिते ह्वरौ कमलजो हन्तुं मधुंकैटभम्। । शारदीय नवरात्र  अश्विनी मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक होते हैं |  कलश स्थापना मुहर्त -  26 सितम्बर को प्रातः काल सूर्योदय के बाद 4 घंटे तक अथवा अभिजीत मुहूर्त 11:47 से 12:36 तक में ही नवरात्र प्रारंभ घट स्थापन दी पूजन आदि करनी चाहिए | सूर्योदय - 06-10 सबेरे | कलश स्थापना - कलश स्थापना करने के लिए गंगाजल, रोली, मोली, पान,कलश, सुपारी, नारियल, धूपबत्ती, घी का दीपक, फल, फूल की माला, बिल्वपत्र, चावल, केले के पत्ते, आम के पत्ते, बंदनवार के लिय,चंदन,हल्दी की गांठ, लाल वस्त्र, जो, बतासे, सुगंधित तेल, सिंदूर, कपूर, पंच सुगंध, नैवेद्य के लिए फल, पंचामृत के लिए दूध दही मधु, दुर्गा जी की मूर्ति, कुमारी पूजन के लिए वस्त्र, आभूषण, इत्यादि लेकर हम सवेरे स्नान करके और माता के चरणों में ध्यान लगा कर ...

बोध कथा

चित्र
  क़िस्मत किसी शहर में, सूरज और श्रीहर्ष नाम के दो भाई रहा करते थे. वे अक्सर अपनी बातें एक दूसरे से साझा करते. दिल्ली के एक कॉलेज में दोनों ने दाखिला लिया था। श्रीहर्ष का रुझान फिल्मों और मीडिया कि तरफ था और वह उसी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहता था. एक दिन उसने दिल्ली के समाचार पत्र में के एक विज्ञापन देखा. एक नयी फिल्म के मुख्य पात्र के लिए नए लड़कों को ऑडिशन के लिए बुलाया गया था. क्योंकि उस फिल्म के निर्माता को अपनी फिल्म के लिए किसी नए चेहरे की तलाश थी। विज्ञापन को देखकर श्रीहर्ष की बाँछे खिल गयी और उसने ऑडिशन के लिए जाने की योजना बनाई। श्रीहर्ष ने सूरज को कहा – भाई मुझे इस ऑडिशन के लिए जाना है। तुम भी मेरे साथ चलो। सूरज आराम करना चाहता था। उसने जाने से मना कर दिया। श्री हर्ष ने कहा – यदि तुम मेरे साथ चलोगे तो, मैं तुम्हें पिज्जा खिलाऊँगा. सूरज पिज्जा का बहुत शौकीन था. इस ऑफर को वह ठुकरा न सका. श्रीहर्ष के साथ वह ऑडिशन की जगह पर पहुंचा। कम से कम तीन-चार हज़ार प्रतियोगियों की भारी भीड़ जमा थी। श्रीहर्ष अपनी बारी का इंतज़ार कर रहा था। सूरज वही क...

बचपन के संस्कार

चित्र
  बचपन के संस्कार  ऑफिसियल टूर पर पटियाला आया हुआ था। साथ में दो स्थानीय सहयोगी भी थे। दोपहर में पंजाब के प्रसिद्ध रेस्टोरेंट सृंखला की एक शाखा में बैठकर भोजन का ऑर्डर दिया और अपनी कम्पनी के नियम शर्तों आदि के विषय में चर्चा करने लगे।तभी मेरी दृष्टि रेस्टोरेंट परिसर में बाहर  एक लगभग 80 वर्ष के एक बूढ़े पर पड़ी जो रेस्टोरेंट आने-जाने वाले ग्राहकों से भोजन करने का संकेत करते हुए पैसे माँग रहा था। अचरज यह था कि 500 रुपये से अधिक का भोजन करने व 40-50 रुपये टिप देने वाले ग्राहक उस बूढ़े को लगातार अनदेखा किये जा रहे थे। वार्तालाप में मेरा मन न लगता देख एक साथी ने पूछा - क्या हुआ सर! कहाँ डिस्ट्रैक्ट हो रहे हैं आप? मैंने कहा- "8-9 वर्ष की आयु में एक बार मैं अपने डैडी व माँ'जी के साथ कानपुर के एक रेस्टोरेंट में भोजन करने गया था। बाहर निकलते समय बाहर एक बूढ़ा भिखारी मिला जो अपने दाहिने हाथ को अपने होंठों से लगाकर भूखे होने का संकेत कर रहा था। मैं बच्चा था। नासमझ। मैंने उसे भाग जाने को कहा। तभी डैडी ने उसे वहीं रुकने को कह कर रेस्टोरेंट के अंदर गए और एक आदमी के लिए भोजन पैक कराकर ले आ...

आत्मा गमन

चित्र
आत्मा गमन आत्मा जब शरीर छोड़ती है तो मनुष्य को पहले ही पता चल जाता है । ऐसे में वह स्वयं भी हथियार डाल देता है अन्यथा उसने आत्मा को शरीर में बनाये रखने का भरसक प्रयत्न किया होता है और इस चक्कर में कष्ट झेला होता है । अब उसके सामने उसके सारे जीवन की यात्रा चल-चित्र की तरह चल रही होती है । उधर आत्मा शरीर से निकलने की तैयारी कर रही होती है इसलिये शरीर के पाँच प्राण एक 'धनंजय प्राण' को छोड़कर शरीर से बाहर निकलना आरम्भ कर देते हैं । ये प्राण, आत्मा से पहले बाहर निकलकर आत्मा के लिये सूक्ष्म-शरीर का निर्माण करते हैं जो कि शरीर छोड़ने के बाद आत्मा का वाहन होता है । धनंजय प्राण पर सवार होकर आत्मा शरीर से निकलकर इसी सूक्ष्म-शरीर में प्रवेश कर जाती है । बहरहाल अभी आत्मा शरीर में ही होती है और दूसरे प्राण धीरे-धीरे शरीर से बाहर निकल रहे होते हैं कि व्यक्ति को पता चल जाता है । उसे बेचैनी होने लगती है, घबराहट होने लगती है । सारा शरीर फटने लगता है, खून की गति धीमी होने लगती है । सांँस उखड़ने लगती है । बाहर के द्वार बंद होने लगते हैं । अर्थात् अब चेतना लुप्त होने लगती है और मूर्च्छा आने लगती है । ...

ईश्वर का न्याय

चित्र
  ईश्वर का न्याय एक रोज रास्ते में एक महात्मा अपने शिष्य के साथ भ्रमण पर निकले. गुरुजी को ज्यादा इधर-उधर की बातें करना पसंद नहीं था, कम बोलना और शांतिपूर्वक अपना कर्म करना ही गुरू को प्रिय था। परन्तु शिष्य बहुत चपल था, उसे हमेशा इधर-उधर की बातें ही सूझती, उसे दूसरों की बातों में बड़ा ही आनंद आता था।चलते हुए जब वो तालाब से होकर गुजर रहे थे, तो उन्होंने देखा कि एक झींवर नदी में जाल डाले हुए है. शिष्य यह सब देख खड़ा हो गया और झींवर को ‘अहिंसा परमोधर्म’ का उपदेश देने लगा।लेकिन झींवर कहाँ समझने वाला था, पहले उसने टालमटोल करनी चाही और बात जब बहुत बढ़ गयी तो शिष्य और झींवर के बीच झगड़ा शुरू हो गया. यह झगड़ा देख गुरूजी जो उनसे बहुत आगे बढ़ गए थे, लौटे और शिष्य को अपने साथ चलने को कहा एवं शिष्य को पकड़कर ले चले।गुरूजी ने अपने शिष्य से कहा- “बेटा हम जैसे साधुओं का काम सिर्फ समझाना है, लेकिन ईश्वर ने हमें दंड देने के लिए धरती पर नहीं भेजा है!” शिष्य ने पुछा- “महाराज को न तो बहुत से दण्डों के बारे में पता है और न ही हमारे राज्य के राजा बहुतों को दण्ड देते हैं. तो आखिर इसको दण्ड कौन देगा?”शिष्य की इस ...

एक माँ की घर वापसी

चित्र
घर वापसी एक मार्मिक कहानी बच्चों को स्कूल बस में बैठाकर वापस आ शालू खिन्न मन से टैरेस पर जाकर बैठ गई | शालू की इधर-उधर दौड़ती सरसरी नज़रें थोड़ी दूर एक पेड़ की ओट में खड़ी बुढ़िया पर ठहर गईं | 'ओह! फिर वही बुढ़िया, क्यों इस तरह से उसके घर की ओर ताकती है ?’शालू की उदासी बेचैनी में तब्दील हो गई, मन में शंकाएं पनपने लगीं. इससे पहले भी शालू उस बुढ़िया को तीन-चार बार नोटिस कर चुकी थी | दो महीने हो गए थे शालू को पूना से गुड़गांव शिफ्ट हुए, मगर अभी तक एडजस्ट नहीं हो पाई थी | सब कुछ कितना सुव्यवस्थित चल रहा था पूना में. उसकी अच्छी जॉब थी. घर संभालने के लिए अच्छी मेड थी, जिसके भरोसे वह घर और रसोई छोड़कर सुकून से ऑफ़िस चली जाती थी | घर के पास ही बच्चों के लिए एक अच्छा-सा डे केयर भी था. स्कूल के बाद दोनों बच्चे शाम को उसके ऑफ़िस से लौटने तक वहीं रहते. लाइफ़ बिल्कुल सेट थी, मगर सुधीर के एक तबादले की वजह से सब गड़बड़ हो गया |दो दिन बाद सुधीर टूर से वापस आए, तो शालू ने उस बुढ़िया के बारे में बताया. सुधीर को भी कुछ चिंता हुई, “ठीक है, अगली बार कुछ ऐसा हो, तो वॉचमैन को बोलना वो उसका ध्यान रखेगा, वरना फिर देखत...

महान व्यक्तित्व रामानुजन

चित्र
महान व्यक्तित्व रामानुजन अदभुत गणित में कोई भी संख्या 1 से 10 तक के सभी अंकों से नहीं कट सकती, लेकिन इस विचित्र संख्या को देखिये ! दरअसल, सदियों तक यह माना जाता रहा था कि ऐसी कोई भी संख्या नहीं है जिसे 1 से 10 तक के सभी अंको से विभाजित किया जा सके। लेकिन रामानुजन ने इन अंकों के साथ माथापच्ची करके इस मिथ को भी तोड़ दिया था। उन्होंने एक ऐसी संख्या खोजी थी जिसे 1 से 10 तक के सभी अंकों से विभाजित किया जा सकता है। यानी भाग दिया जा सकता है। यह संख्या है (2520)। संख्या 2520 अन्य संख्याओं की तरह वास्तव में एक सामान्य संख्या नही है, यह वो संख्या है जिसने विश्व के गणितज्ञों को अभी भी आश्चर्य में किया हुआ है !! यह विचित्र संख्या 1 से 10 तक प्रत्येक अंक से भाज्य है। ऐसी संख्या जिसे इकाई तक के किसी भी अंक से भाग देने के उपरांत शेष शून्य रहे, बहुत ही असम्भव/ दुर्लभ है, ऐसा प्रतीत होता है !! अब निम्न सत्य को देखें: 2520 ÷ 1 = 2520 2520 ÷ 2 = 1260 2520 ÷ 3 = 840 2520 ÷ 4 = 630 2520 ÷ 5 = 504 2520 ÷ 6 = 420 2520 ÷ 7 = 360 2520 ÷ 8 = 315 2520 ÷ 9 = 280 2520 ÷ 10 = 252 महान गणितज्ञ अभी भी आश्चर्यचकि...

लस्सी का कुल्हड़

चित्र
लस्सी का कुल्हड़ लस्सी का कुल्हड़ एक दूकान पर लस्सी का ऑर्डर देकर हम सब दोस्त- आराम से बैठकर एक दूसरे की खिंचाई और हंसी-मजाक में लगे ही थे कि, लगभग 70-75 साल की बुजुर्ग स्त्री पैसे मांगते हुए हमारे सामने हाथ फैलाकर खड़ी हो गई। उनकी कमर झुकी हुई थी, चेहरे की झुर्रियों में भूख तैर रही थी। नेत्र भीतर को धंसे हुए किन्तु सजल थे। उनको देखकर मन में न जाने क्या आया कि मैंने जेब में सिक्के निकालने के लिए डाला हुआ हाथ वापस खींचते हुए उनसे पूछ लिया: दादी लस्सी पियोगी? मेरी इस बात पर दादी कम अचंभित हुईं और मेरे मित्र अधिक क्योंकि अगर मैं उनको पैसे देता तो बस 5 या 10 रुपए ही देता लेकिन लस्सी तो 40 रुपए की एक है। इसलिए लस्सी पिलाने से मेरे गरीब हो जाने की और उस बूढ़ी दादी के द्वारा मुझे ठग कर अमीर हो जाने की संभावना बहुत अधिक बढ़ गई थी। दादी ने सकुचाते हुए हामी भरी और अपने पास जो मांग कर जमा किए हुए 6-7 रुपए थे, वो अपने कांपते हाथों से मेरी ओर बढ़ाए। मुझे कुछ समझ नहीं आया तो मैने उनसे पूछा, ये किस लिए? इनको मिलाकर मेरी लस्सी के पैसे चुका देना बाबूजी। भावुक तो मैं उनको देखकर ही हो गया था। रह...

एक जमाना था

चित्र
 एक जमाना था खुद ही स्कूल जाना पड़ता था क्योंकि साइकिल बस आदि से भेजने की रीत नहीं थी, स्कूल भेजने के बाद कुछ अच्छा बुरा होगा ऐसा हमारे मां-बाप कभी सोचते भी नहीं थे | उनको किसी बात का डर भी नहीं होता था | पास/नापास यही हमको मालूम था | प्रतिशत से हमारा कभी भी संबंध ही नहीं था | ट्यूशन लगाई है ऐसा बताने में भी शर्म आती थी क्योंकि हमको ढपोर शंख समझा जा सकता था | किताबों में पीपल के पत्ते, विद्या के पत्ते, मोर पंख रखकर हम होशियार हो सकते हैं ऐसी हमारी धारणाएं थी | कपड़े की थैली में बस्तों में और बाद में एल्यूमीनियम की पेटियों में किताब कॉपियां बेहतरीन तरीके से जमा कर रखने में हमें महारत हासिल थी | हर साल जब नई क्लास का बस्ता जमाते थे उसके पहले किताब कापी के ऊपर रद्दी पेपर की जिल्द चढ़ाते थे और यह काम एक वार्षिक उत्सव या त्योहार की तरह होता था | साल खत्म होने के बाद किताबें बेचना और अगले साल की पुरानी किताबें खरीदने में हमें किसी प्रकार की शर्म नहीं होती थी.. क्योंकि तब हर साल न किताब बदलती थी और न ही पाठ्यक्रम,हमारे माताजी पिताजी को हमारी पढ़ाई  बोझ है.. ऐसा कभी  लगा ही नहीं ...

श्राद्ध कर्म कब करे।

चित्र
ॐ श्रीं श्याम देवाय नमः।। ॐ नमो भगवते वासुदेवय ।। *श्राद्ध कर्म कब करे,कैसे करे व क्यो करे,,,सुनने के लिए क्लिक करे* https://youtu.be/q9n9QdmWv5A *Please like Share & Subscribe me* श्राद्ध कब करे , क्यों करे ,कैसे करे जानने के लिय क्लिक करे - https://youtu.be/HfddQr4VnI8 जन्म कुण्डली बनवाए व दिखाने के लिए संपर्क करे शर्मा जी-9312002527

जानकारी काल सितम्बर - 2022

चित्र
  हिंदी मासिक   जानकारी काल  वर्ष-23,       jaankaarikaal.com         अंक-03        सितम्बर  - 2022,    पृष्ठ 43    मूल्य 2-50       मैं एक मानव हूँ और जो कुछ भी मानवता को प्रभावित करता है उससे मुझे मतलब है। राख का हर एक कण मेरी गर्मी से गतिमान है मैं एक ऐसा पागल हूं जो जेल में भी आज़ाद है। निष्ठुर आलोचना और स्वतंत्र विचार ये क्रांतिकारी सोच के दो अहम लक्षण हैं। ज़रूरी नहीं था की क्रांति में अभिशप्त संघर्ष शामिल हो, यह बम और पिस्तौल का पंथ नहीं था। संरक्षक  श्रीमान कुलवीर शर्मा कमहामंत्री समर्थ शिक्षा समिति डॉ वी  एस नेगी प्रोफेसर भगत सिंह कॉलेज सांध्य  प्रधान संपादक व  प्रकाशक  सतीश शर्मा     कार्यालय  ए 214 बुध नगर इंद्रपुरी  नई दिल्ली 110012  मोबाइल    9312002527  संपादक मंडल  सौरभ  शर्मा,कपिल शर्मा, गौरव शर्मा,डॉ अजय प्रताप सिंह, करुणा ऋषि, डॉ मधु वैध, भूप  सिंह यादव...