रक्षाबंधन
रक्षाबंधन का पर्व रक्षा के संकल्प का पर्व है रक्षा बंधन का वास्तविक अर्थ- -वर्षों से चले आ रहे रक्षाबंधन त्योहार को हम मनाते तो आ रहे हैं किंतु हम में से कितने लोग हैं जो उसके वास्तविक स्वरूप और महत्व को जानते हैं।आज इस त्योहार को अधुनिकता के रंग में रंग कर कही हम अपने ही विरसे को भूल तो नही रहे,यह जानने के लिये आइए आज इस कथा को ध्यान से पढ़ें। येन बद्धो बलि राजा,दान वेंद्रो महाबलः,तेन त्वाम अनुबंधनावमि, रक्षे माचल मा चल।। इस सूक्ति का अर्थ है जिस से दानवीर महाबलशाली राजा बलि बंधे,उस रक्षा सूत्र से मैं आपको बांध रहा या रही हूं।यह अडिग होकर तुम्हारी रक्षा करे।इस मंत्र के अंतिम भाग में मानवीय संवेदना और आत्मीयता के उच्च शिखर की प्रस्तुति है कि बांधने और बंधने वाले दोनों की रक्षा एवं कल्याण हो फिर चाहे वो कोई बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांध रही है | पुरोहित अपने जजमान को कलावा,दोनों में ही रक्षा एवं कल्याण निहित है। दैत्यराज वैरोचन बलि भगवान विष्णु के भक्त थे । पराक्रमी इतने कि तीनों लोकों पर एक तरह से आधिपत्य स्थापित कर लिया था । गुरु शुक्राचार्य की प्रेरणा से शताश्वमेध यज्ञों की...