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रक्षाबंधन

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  रक्षाबंधन का पर्व रक्षा के संकल्प का पर्व है रक्षा बंधन का वास्तविक अर्थ- -वर्षों से चले आ रहे रक्षाबंधन त्योहार को हम मनाते तो आ रहे हैं किंतु हम में से कितने लोग हैं जो उसके वास्तविक स्वरूप और महत्व को जानते हैं।आज इस त्योहार को अधुनिकता के रंग में रंग कर कही हम अपने ही विरसे को भूल तो नही रहे,यह जानने के लिये आइए आज इस कथा को ध्यान से पढ़ें। येन बद्धो बलि राजा,दान वेंद्रो महाबलः,तेन त्वाम अनुबंधनावमि, रक्षे माचल मा चल।। इस सूक्ति का अर्थ है जिस से दानवीर महाबलशाली राजा बलि बंधे,उस रक्षा सूत्र से मैं आपको बांध रहा या रही हूं।यह अडिग होकर तुम्हारी रक्षा करे।इस मंत्र के अंतिम भाग में मानवीय संवेदना और आत्मीयता के उच्च शिखर की प्रस्तुति है कि बांधने और बंधने वाले दोनों की रक्षा एवं कल्याण हो फिर चाहे वो कोई बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांध रही है | पुरोहित अपने जजमान को कलावा,दोनों में ही रक्षा एवं कल्याण निहित है। दैत्यराज वैरोचन बलि भगवान विष्णु के भक्त थे । पराक्रमी इतने कि तीनों लोकों पर एक तरह से आधिपत्य स्थापित कर लिया था । गुरु शुक्राचार्य की प्रेरणा से शताश्वमेध यज्ञों की...

संगठन व नेतृत्व

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 संगठन व नेतृत्व   प्रक्रिया बनाम शक्ति, कौन सच्चे नेतृत्व को परिभाषित करता है | जब श्री राम सोने के मृग को खोजने के लिए जंगल में गए और काफी देर तक वापस नहीं लौटे, तो लक्ष्मण जी ने बाहर जाकर उसे खोजने का फैसला किया क्योंकि वह श्री राम के बारे में चिंतित थे। माँ सीता को अकेला छोड़ते समय, वह माँ सीता को सुरक्षित करने के लिए घर के चारों ओर एक रेखा खींचते हैं। लक्ष्मण रेखा,,,,,, एक बार जब श्री राम और लक्ष्मण जी दोनों जंगल में थे, रावण को पता था कि यह माँ सीता को लेने का सबसे अच्छा समय है और वह कुटी (घर) गया और साधु के रूप में अपना रूप बदल लिया, लेकिन लक्ष्मण रेखा को पार करने से इनकार कर दिया, जिससे वह जल जाता। अब सोचिए, रावण इतना शक्तिशाली था लेकिन लक्ष्मण रेखा नहीं लांघ सका। इसका मतलब है कि रावण को खत्म करने के लिए, लक्ष्मण जी उससे लड़ने और युद्ध खत्म करने के लिए काफी थे, लेकिन फिर भी, श्री राम ने केवट से लेकर निषाद राज, हनुमान जी, नल और नील, अंगद और फिर अपनी टीम बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया। और भी बहुत से लोग सामूहिक रूप से लड़े और जीते अब बताओ कौन जीतता है? शक्ति या प्रक्रि...

जानकारी काल अगस्त 2023

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  जानकारी काल     वर्ष-24  अंक-04 अगस्त -2023, पृष्ठ 56  मूल्य 2-50       राष्ट्रभक्ति ले हृदय में, है खड़ा अब देश सारा । संकटो पर मात कर यह, राष्ट्र विजयी हो हमारा ॥ प्रत्येक व्यक्ति जहां रहता है वहां की संस्कृति, परंपराओं, आदर्शों और विचारों से प्रभावित होता है। देश के प्रति उसका यही सम्मान उसके अंदर राष्ट्रवाद को उजागर करता है। राष्ट्रवाद की भावना धर्म, जाति और समाज से ऊपर होती है तथा सबको एक सूत्र में बांधती है | संरक्षक  श्रीमान कुलवीर शर्मा कमहामंत्री समर्थ शिक्षा समिति डॉ वी  एस नेगी प्रोफेसर भगत सिंह कॉलेज सांध्य  प्रधान संपादक व  प्रकाशक  सतीश शर्मा     कार्यालय  ए 214 बुध नगर इंद्रपुरी  नई दिल्ली 110012  मोबाइल    9312002527  संपादक मंडल  सौरभ  शर्मा,कपिल शर्मा, गौरव शर्मा,डॉ अजय प्रताप सिंह, करुणा ऋषि, डॉ मधु वैध,राजेश शुक्ल   प्रकाशक व मुद्रक सतीश शर्मा के लिय ग्लैक्सी प्रिंटर- 106 F, कृणा नगर नई दिल्ली 110029 , A- 214 बुध नगर ...