वास्तु विचार
वास्तु विचार वास्तु शास्त्र घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख और समृद्धि के लिए दिशाओं और तत्वों का विज्ञान है।घर के निर्माण के समय या किसी भी तरह का रिनोवेशन करने से पहले वास्तु विशेषज्ञ से सलाह लेना हमेशा बेहतर होता है, ताकि आप अपनी जीवनशैली के अनुसार सबसे अच्छे नतीजे पा सकें। उत्तर - मुख्य द्वार, सीढ़ियां जलाशय, देवगृह, भंडार, तहखाना, तिजोरी (नीची भूमि) । पूर्व - मुख्य द्वार, स्नानगृह, तहखाना, वाटिका (नीची भूमि), मकान का केंद्र ब्रहा स्थान (रिक्त भूमि),दक्षिण - शयनगृह (ऊँची भूमि),पश्चिम - रसोई, सीढ़ियां, कुआं, वाटिका (ऊँची भूमि),ईशान - देवगृह, जल स्थान, तहखाना (बेसमेंट) सर्ववस्तु भंडार, वाटिका (नीची भूमि),आग्नेय - रसोई, भंडार गृह (ऊँची भूमि),नैर्ऋत्य - शौचालय, वस्त्रालय, गृह सामग्री, अध्ययन कक्ष (ऊँची भूमि),वायव्य - शयनगृह, अन्नभंडार पशुगृह, शौचालय (ऊँची भूमि) ध्यान दें - घर में मकड़ी के जाले या गंदगी न होने दें, इससे दरिद्रता आती है। पानी की टंकी उत्तर-पूर्व में न रखें दर्पण बेडरूम में बिस्तर के सामने नहीं होना चाहिए। फर्नीचर और भारी सामान दक्षिण या पश्चिम ...