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महंगी पडी आपसी फूट

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*दो चोंच का एक पक्षी था भरूड उसकी दोनों चोंच में मन मुटाव हो गया दोनों अलग अलग स्वादानुसार खाना चहाते थे एक ने,,,पूरा पढे*  महंगी पड़ी आपसी फूट प्राचीन समय में एक विचित्र पक्षी रहता था। उसका धड़ एक ही था, परंतु सिर दो थे। नाम था उसका भारुंड। एक शरीर होने के बावजूद उसके सिरों में एकता नहीं थी और न ही था तालमेल। वे एक-दूसरे से बैर रखते थे। हर जीव सोचने-समझने का काम दिमाग से करता है और दिमाग होता है सिर में। दो सिर होने के कारण भारुंड के दिमाग भी दो थे, जिनमें से एक पूरब जाने की सोचता, तो दूसरा पश्चिम। फल यह होता था कि टांगें एक कदम पूरब की ओर चलतीं, तो अगला कदम पश्चिम की ओर। और भारुंड स्वयं को वहीं खड़ा पाता था। भारुंड का जीवन बस दो सिरों के बीच रस्साकसी बनकर रह गया था। एक दिन भारुंड भोजन की तलाश में नदी तट पर घूम रहा था कि एक सिर को नीचे गिरा एक फल नजर आया। उसने चोंच मारकर उसे चखकर देखा तो जीभ चटकाने लगा- 'वाह! ऐसा स्वादिष्ट फल तो मैंने आज तक कभी नहीं खाया। भगवान ने दुनिया में क्या-क्या चीजें बनाई हैं।'अच्छा! जरा मैं भी चखकर देखूं।' कहकर दूसरे ने अपनी चोंच उस फल की ओर बढ़ाई ...

आयुर्वेद में इलायची

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इलायची इलायची औषधीय रूप से अति महत्त्वपूर्ण है | यह दो प्रकार की होती है – छोटी व बड़ी | छोटी इलायची : यह सुंगधित, जठराग्निवर्धक, शीतल, मूत्रल, वातहर, उत्तेजक व पाचक होती है | इसका प्रयोग खाँसी, अजीर्ण, अतिसार, बवासीर, पेटदर्द, श्वास ( दमा ) तथा दाहयुक्त तकलीफों में किया जाता है | औषधीय प्रयोग अधिक केले खाने से हुई बदहजमी एक इलायची खाने से दूर हो जाती है | धूप में जाते समय तथा यात्रा में जी मचलाने पर एक इलायची मुँह में डाल दें | 1 कप पानी में 1 ग्राम इलायची चूर्ण डालके 5 मिनट तक उबालें | इसे छानकर एक चम्मच शक्कर मिलायें | 2 – 2 चम्मच यह पानी 2 – 2 घंटे के अंतर लेने से जी – मचलाना, उबकाई आना, उल्टी आदि में लाभ होता है | छिलके सहित छोटी इलायची तथा मिश्री समान मात्रा में मिलाकर चूर्ण बनालें | चुटकीभर चूर्ण को 1 -1 घंटे के अंतर से चूसने से सूखी खाँसी में लाभ होता है | कफ पिघलकर निकल जाता है | रात को भिगोये 2 बादाम सुबह छिलके उतारकर घिसलें | इसमें 1 ग्राम इलायची चूर्ण, आधा ग्राम जावित्री चूर्ण, 1 चम्मच मक्खन तथा आधा चम्मच मिश्री मिलाकर खाली पेट खाने से वीर्य पुष्ट व गाढ़ा होता है...

उपहार

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  उपहार        मैं सुचित्रा, आज मेरा जन्मदिन है।सचिन ने सुबह ही कहा :- "आज कुछ बनाना नहीं। दोपहर के खाने के लिए हम बाहर चलेंगे। तुम्हारे जन्मदिन पर आज तुम्हें एक अनोखी दावत मिलेगी।" 15 साल हो गए हमारी शादी को। मैं सचिन को बहुत अच्छे से जानती हूँ। दोनों बच्चे शाम 4 बजे स्कूल से लौटेंगे यानी लंच पर मैं और सचिन ही जाएँगे और बच्चों के आने से पहले लौट भी आएँगे। एक नए बने मॉल की पार्किंग में हमारी गाड़ी पहुँची। 5 वीं मंजिल पर खाने पीने के ढेरों स्टॉल्स थे अतः एक बंद द्वार पर हम पहुँचे। द्वार पर एक बोर्ड लगा था, जिसपर लिखा था : “Dialogue in the dark” मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ। "अंधेरे में संवाद" ? ये कैसा नाम है, रेस्टॉरेंट का ? बड़ा विचित्र लग रहा था सब कुछ। अगले मोड़ के बाद इतना अंधेरा हो गया कि, मैंने सचिन का हाथ पकड़ लिया और फिर शायद हम एक हॉल में पहुँचे। एक सूटबूट धारी आदमी ने किसी को आवाज लगाई :- "संपत।" “ये आज के हमारे विशेष अतिथि हैं। आज दीदी का जन्मदिन है। ऑर्डर मैंने ले लिया है, तुम इन्हें इनकी टेबल पर लेकर जाओ। अब उस दूसरे आदमी संपत ने हमारे हाथ थामे और हमें टे...

रिश्तों की स्टेपनी

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  रिश्तों की स्टेपनी  कुछ साल पहले जब मैंने पहली बार बीएमडब्लू कार खरीदी थी, तब मुझे पता चला था कि इसमें स्टेपनी नहीं होती। स्टेपनी नहीं होती? मतलब? मतलब इसकी डिक्की में वो अतिरिक्त पहिया नहीं होता, जो आम तौर पर सभी गाड़ियों में होता है। और इसके पीछे तर्क ये था कि इस गाड़ी में रन फ्लैट टायर लगे होते हैं। रन फ्लैट टायर का मतलब ऐसे टायर, जो पंचर हो जाने के बाद भी कुछ दूर चल सकते हैं।  भारत में जब बीएमडब्लू गाड़ियां लांच हुई थीं, तब कंपनी के लोगों ने यहां की सड़कों का ठीक से अध्ययन नहीं किया था। यूरोप और अमेरिका में ये गाड़ियां सफलता पूर्वक चल रही थीं, तो उसकी वज़ह ये थी कि वहां सड़कें काफी अच्छी होती हैं, और दूसरी बात ये कि जगह-जगह कंपनी के सर्विस सेंटर भी होते हैं। मैंने जब बीएमडब्लू कार खरीदी, तो मुझे बताया गया कि इसमें एक्स्ट्रा टायर की न ज़रूरत है, न जगह।  अब स्टेपनी नहीं होने का अर्थ ये तो नहीं था कि गाड़ी पंचर ही नहीं होगी। एक दिन गाड़ी पंचर हो गई। मैं गाड़ी चलाता रहा। कायदे से ये टायर पंचर होने के बाद पचास किलोमीटर तक चल सकते हैं, पर पचास किलोमीटर की दूरी पर बीए...

पोपट का टाईम पास

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 पोपट का टाईम पास   पोपट काका सरकारी ऑफिस से रिटायर हो चुके थे। रिटायर हो कर भी अच्छे खासे दो साल हो गए थे, पोपटकाका को न फ़िल्म-टीवी देखने में रुचि न अखबार-किताबे पढ़ने में रुचि, इसलिए रिटायरमेंट के बाद पोपटलाल टाइम पास कैसे करता है, ये एक बड़ा पेचीदा सवाल उनके दोस्त के सामने खडा हुआ पड़ा था। अबे पोपट, तुझे न कोई शौक, न पढ़ने की आदत न फ़िल्म टीवी में रुचि, ना ही ध्यान अध्यात्म में लगाव, रिटायरमेंट के बाद आखिर टाइम पास करता कैसे है रे तू?" पोपटलाल को अपने दोस्त के चीठेपन और खोदखोद कर गहराई में जाकर बेमतलब पूछताछ करने की आदत अच्छे से पता थी। इसके दिमाग का कीड़ा, शंका का समाधान होने तक शांत नही होगा और तब तक ये अपने को चैन से जीने नहीं देगा, यह भी उनको पता था। बताता हूँ... कल की ही बात है, पोपटलाल ने शंका निवारण करना आरंभ किया, "मैं और श्रीमतीजी गए थे बाजार में, अशरफीलाल ज्वेलर्स के शोरूम पर। अंदर जा कर केवल पांच ही मिनट में बाहर आ गए। बाहर आकर देखते हैं तो क्या? दुकान के सामने पार्क की हुई कार के पास ट्रैफिक पुलिस का सिपाही खड़ा हुआ था, हाथ में चालान बनाने के लिए रसीद बुक लिए। हम ...

जानकी मा का भोजन

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  भगवान् राम जब रावण को मारकर अयोध्या आयें और रामजी का राजतिलक हो गया, माता जानकीजी की ब्राह्मणों में बड़ी श्रद्धा है, अपने हाथ से ब्राह्मणों के लिये भोजन बनाती है, माता सिताजी से एक दिन रामजी से उदास होकर बोले- प्रभु क्या बताऊँ? बड़े प्रेम से भोजन प्रसादी बनाती हूँ लेकिन जो भी ब्राह्मण देवता आते हैं वे थोड़ा सा पाकर ही उठ जाते हैं, कोई ढंग से भोजन पाता ही नहीं, कभी कोई ऐसा ब्राह्मण तो बुलाओ न प्रभु, जिन्हें मैं जिम्हाकर सन्तुष्ट हो सकू। रामजी बोले- ऐसा मत कहो देवी, कभी कोई ऐसा ब्राह्मण आ गया तो आप भोजन बनाते-बनाते थक जाओगी, अभी आपने असली ब्राह्मण देखे कहां है? ठीक है किसी दिव्य ब्राह्मण को बुलाता हूंँ, मेरे प्रभु रघुवर आज समाधि लगाकर अगस्त्य मुनि के ध्यान में पहुंच गये, अगस्त्य मुनि वहीं है जो तीन अंजली में पूरे समुद्र को पी गये, अगस्त्य मुनि ने कहा- क्या आज्ञा है प्रभु?  रामजी ने कहा- सिताजी बड़ी तंग करती है बाबा, आज अपना असली रूप बता देना, अगस्त्य मुनि आ गयें, सिताजी ने स्वागत किया, चरणों में प्रणाम किया, चरण धोये, रामजी बोले- महाराज आप भोजन आज यहीं पर करें, अगस्त्यजी बोले-...

कर्म का फल

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  कर्म का फल   अस्पताल में एक एक्सीडेंट का केस आया। अस्पताल के मालिक डॉक्टर ने तत्काल खुद जाकर आईसीयू में केस की जांच की। दो-तीन घंटे के ओपरेशन के बाद डॉक्टर बाहर आया और अपने स्टाफ को कहा कि इस व्यक्ति को किसी प्रकार की कमी या तकलीफ ना हो...और उससे इलाज व दवा के पैसे न लेने के लिए भी कहा ।तकरीबन 15 दिन तक मरीज अस्पताल में रहा।जब बिल्कुल ठीक हो गया और उसको डिस्चार्ज करने का दिन आया तो उस मरीज का तकरीबन ढाई लाख रुपये का बिल अस्पताल के मालिक और डॉक्टर की टेबल पर आया। डॉक्टर ने अपने अकाउंट मैनेजर को बुला करके कहा ... इस व्यक्ति से एक पैसा भी नहीं लेना है। ऐसा करो तुम उस मरीज को लेकर मेरे चेंबर में आओ।मरीज व्हीलचेयर पर चेंबर में लाया गया।डॉक्टर ने मरीज से पूछा... प्रवीण भाई ! मुझे पहचानते हो!मरीज ने कहा लगता तो है कि मैंने आपको कहीं देखा है।डॉक्टर ने कहा ... याद करो, अंदाजन दो साल पहले सूर्यास्त के समय शहर से दूर उस जंगल में तुमने एक गाड़ी ठीक की थी। उस रोज मैं परिवार सहित पिकनिक मनाकर लौट रहा था कि अचानक कार में से धुआं निकलने लगा और गाड़ी बंद हो गई। कार एक तरफ खड़ी कर हम लोगों ने च...

सुधार

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  गुरु संदेश -मन का दर्पण एक गुरुकुल के आचार्य अपने शिष्य की सेवा से बहुत प्रभावित हुए । विद्या पूरी होने के बाद जब शिष्य विदा होने लगा तो गुरू ने उसे आशीर्वाद के रूप में एक दर्पण दिया ।वह साधारण दर्पण नहीं था । उस दिव्य दर्पण में किसी भी व्यक्ति के मन के भाव को दर्शाने की क्षमता थी ।शिष्य, गुरू के इस आशीर्वाद से बड़ा प्रसन्न था । उसने सोचा कि चलने से पहले क्यों न दर्पण की क्षमता की जांच कर ली जाए ।परीक्षा लेने की जल्दबाजी में उसने दर्पण का मुंह सबसे पहले गुरुजी के सामने कर दिया ।शिष्य को तो सदमा लग गया । दर्पण यह दर्शा रहा था कि गुरुजी के हृदय में मोह, अहंकार, क्रोध आदि दुर्गुण स्पष्ट नजर आ रहे है | मेरे आदर्श, मेरे गुरूजी इतने अवगुणों से भरे है ! यह सोचकर वह बहुत दुखी हुआ. दुखी मन से वह दर्पण लेकर गुरुकुल से रवाना हो गया तो हो गया लेकिन रास्ते भर मन में एक ही बात चलती रही. जिन गुरुजी को समस्त दुर्गुणों से रहित एक आदर्श पुरूष समझता था लेकिन दर्पण ने तो कुछ और ही बता दिया ।उसके हाथ में दूसरों को परखने का यंत्र आ गया था । इसलिए उसे जो मिलता उसकी परीक्षा ले लेता ।उसने अपने कई इष्ट मि...

संबंध#, एक भावनात्मक कहानी

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डॉक्टर साहब ने स्पष्ट कह दिया,"जल्दी से जल्दी प्लाज्मा डोनर का इंतजाम कर लो नही तो कुछ भी हो सकता हैं।" रोहन को अब तो कुछ भी नही सूझ रहा था, मां फफक फफक कर रो रही थी और सामने बेड पर थे बाबूजी जो बेहद ही सीरियस थे सब जगह तो देख लिया था, सबसे गुहार कर ली थी लेकिन बी पॉजिटिव प्लाज्मा का कोई इंतजाम ही नही हो रहा था। वैसे तो बी पॉजिटिव प्लाज्मा  उनके घर में ही था; रोहन के चाचा जो अभी 2 महीने पहले ही कॉविड को हराकर लौटे थे। लेकिन वो चाचा जी से कहे तो कैसे?  अभी 15 दिन पहले ही तो बगल वाले प्लॉट में काम शुरू करवाया था तो बाबूजी ने मात्र 6 इंच जमीन के विवाद में भाई को ही जेल भिजवा दिया था ऐसे में चाचा जी शायद ही प्लाज्मा डोनेट करें!     खैर एक बार फिर माता जी को बाबूजी के पास छोड़कर शहर मे चला प्लाज्मा तलाशने, दोपहर बीत गई, रात होने को आई कोई डोनर नही मिला थक हार कर लौट आया और माता जी से चिपक कर फूट फूट कर रोने लगा, माताजी कोई डोनर नही मिल रहा है। तब तक देखा कि चाचा जी बाबूजी के बेड के पास बैठे हैं। कुछ बोल नहीं पाया, चाचा जी खुद ही रोहन के पास आए सिर पर हाथ फेर कर बोले तू क्...

बेटी

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  बेटी  एक गर्भवती स्त्री ने अपने पति से कहा, "आप क्या आशा करते हैं  लडका होगा या लडकी"पति-"अगर हमारा लड़का होता है, तो मैं उसे गणित पढाऊगा, हम खेलने जाएंगे, मैं उसे मछली पकडना सिखाऊगा।" पत्नी - "अगर लड़की हुई तो...?" पति- "अगर हमारी लड़की होगी तो, मुझे उसे कुछ सिखाने की जरूरत ही नही होगी" "क्योंकि, उन सभी में से एक होगी जो सब कुछ मुझे दोबारा सिखाएगी, कैसे पहनना, कैसे खाना, क्या कहना या नही कहना।" "एक तरह से वो, मेरी दूसरी मां होगी। वो मुझे अपना हीरो समझेगी, चाहे मैं उसके लिए कुछ खास करू या ना करू।"जब भी मै उसे किसी चीज़ के लिए मना करूंगा तो मुझे समझेगी। वो हमेशा अपने पति की मुझ से तुलना करेगी।" "यह मायने नही रखता कि वह कितने भी साल की हो पर वो हमेशा चाहेगी की मै उसे अपनी baby doll की तरह प्यार करूं।"वो मेरे लिए संसार से लडेगी, जब कोई मुझे दुःख देगा वो उसे कभी माफ नहीं करेगी। पत्नी - "कहने का मतलब है कि, आपकी बेटी जो सब करेगी वो आपका बेटा नहीं कर पाएगा। पति- "नहीं, नहीं क्या पता मेरा बेटा भी ऐसा ही करे...

संस्कार - पिता पुत्र

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 संस्कार  पापा, ये क्या है दादाजी ने सारे आँफिस के सामने आपको डांटा और आप चुपचाप सुनते रहे मुझे बिल्कुल अच्छा नही लगा आप भी कम्पनी में सारे कामकाज देखते है क्या  हुआ जो गलती से आर्डर इधर उधर हो गया आँफिस में सभी आपका सम्मान करते है ऐसे सबके सामने वो आपको डांटकर बेइज्जत कैसे कर सकते हैं सुमित ने अपने पिता मोहनबाबू से अपना गुस्सा जाहिर करते हुए कहा ।सुमित! देखो बेटा यहां आओ बैठो आराम से सबसे पहले तो ये गुस्सा त्याग दो क्योंकि ये गुस्सा हमें केवल नकारात्मकता की ओर ही बढाता है सही और गलत की दिशा से भटकाता है अब ध्यान से सुनो सारी दुनिया के भले ही मैं बडा आदमी हो सकता हूँ पर अपने मम्मी पापा के लिये मैं सिर्फ उनका बेटा हूं और उन्हे सारी उम्र मुझे कुछ भी कहने का हक है तुम अभी छोटे हो तुम्हें अभी समझ नहीं आयेगा परिपक्व होने पर खुद समझ जाओगे ।माता पिता की ये डांट ये समझाने का तरीका बेटा ये उनका एक मार्गदर्शन करने का वो तरीका है जो हमें सही और गलत का अंतर बताता है उन्होंने सबके सामने मुझे डांटा कयोंकि गलती मेरी थी मुझे ध्यान देना चाहिए था एक जिम्मेदार व्यक्ति एक जिम्मेदार कर्मचारी ...

भंडारा एक कहानी, सूने होते मोहल्ले

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भंडारा    तीन दोस्त भंडारे मे भोजन कर रहे थे कि- उनमें से पहला बोला काश हम भी ऐसे भंडारा कर पाते दूसरा बोला हां यार सैलरी आने से पहले जाने के रास्ते बनाकर आती हैं  तीसरा बोला खर्चे इतने सारे होते है तो कहा से करें भंडारा पास बैठे एक महात्मा भी भंडारे का आनंद ले रहे थे वो उन दोस्तों की बाते सुन रहे थे; महात्मा उन तीनों से बोले बेटा भंडारा करने के लिए धन नहीं केवल अच्छे मन की जरूरत होती है वह तीनो आश्चर्यचकित होकर महात्मा की ओर देखने लगे महात्मा ने सभी की उत्सुकता को देखकर हंसते हुए कहा बच्चों बिस्कुट का पैकेट लो और उन्हें चीटियों के स्थान पर बारीक चूर्ण बनाकर उनके खाने के लिए रख दो देखना अनेकों चीटियां उन्हें खुश होकर खाएगी हो गया भंडारा चावल-दाल के दाने लाओ उसे छतपर बिखेर दो चिडिया कबूतर आकर खाऐंगे हो गया भंडारा बच्चों ईश्वर ने सभी के लिए अन्न का प्रबंध किया है ये जो तुम और मैं यहां बैठकर पूड़ी सब्जी का आनंद ले रहे है ना इस अन्न पर ईश्वर ने हमारा नाम लिखा हुआ है बच्चों तुम भी जीव जन्तुओं के लिए उनके नाम के भोजन का प्रबंध करने के लिए जो भी करोगे वो भी उस ऊपरवाले की इच्छाओं ...

भगवान का घर

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भगवान का घर कल दोपहर में मैं बैंक में गया था। वहाँ एक बुजुर्ग भी उनके काम से आये थे। वहाँ वह कुछ काम की बात ढूंढ रहे थे। मुझे लगा शायद उन्हें पेन चाहिये। इसलिये उनसे पुछा तो, वह बोले "बिमारी के कारण मेरे हाथ कांप रहे हैं और मुझे पैसे निकालने की स्लीप भरनी हैं। उसके लिये मैं देख रहा हूँ कि किसी की मदद मिल जाये तो अच्छा रहता।" मैं बोला "आपको कोई हर्ज न हो तो मैं आपकी स्लीप भर दूँ क्या?"उनकी परेशानी दूर होती देखकर उन्होंने मुझे स्लीप भरने की अनुमति दे दी। मैंने उनसे पुछकर स्लीप भर दी। रकम निकाल कर उन्होंने मुझसे पैसे गिनने को कहा। मैंने पैसे गिनकर उन्हें वापस कर दिये। मेरा और उनका काम लगभग साथ ही समाप्त हुआ तो, हम दोनों एक साथ ही बैंक से बाहर आ गये तो, वह बोले साॅरी तुम्हें थोडा कष्ट तो होगा। परन्तु मुझे रिक्षा करवा दोगे क्या? भरी दोपहरिया में रिक्षा मिलना कष्टकारी होता हैं।  मैं बोला "मुझे भी उसी तरफ जाना हैं। मैं तुम्हें कार से घर छोड दूँ तो चलेगा क्या? वह तैयार हो गये। हम उनके घर पहूँचे। घर क्या बंगला कह सकते हो। 60' × 100' के प्लाट पर बना हुआ। घर...

अभ्यास , एक कहानी

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पीतल का लोटा स्वामी विवेकानंद रोज की तरह अपने पीतल के लोटे को मांज रहे थे। काफी देर तक लोटा मांजने के बाद जब वह उठे तो उनके एक शिष्य ने सवाल किया कि रोज-रोज इतनी देर तक इस लोटे को मांजने की क्या जरूरत है? सप्ताह में एक बार मांज लें या ज्यादा से ज्यादा तीन बार। बाकी दिनों में तो इसे पानी से सिर्फ खंगाल कर काम चलाया जा सकता है। इससे इसकी चमक बहुत फीकी तो नहीं होगी। विवेकानंद ने कहा - बात तो सही ही कहते हो। रोज-रोज पांच-दस मिनट इसमें बर्बाद ही होते हैं। उसके बाद उन्होंने उसे नही मांजा। कुछ ही दिनों में उस लोटे की चमक फीकी पड़ने लगी। सप्ताह भर बाद विवेकानंद ने उस शिष्य को बुलाया और कहा कि मैंने इसे रोज मांजना छोड़ दिया, अब आज फुरसत में हो तो इस लोटे को साफ कर दो। शिष्य ने हामी भरी और कुएं पर ले जाकर मूंज से लोटे को मांजना शुरू कर दिया। बहुत देर मांजने के बाद भी वह पहले वाली चमक नहीं ला सका। फिर और मांजा, तब जाकर लोटा कुछ चमका। विवेकानंद मुस्कुराए और बोले - इस लोटे से सीखो। जब तक इसे रोज मांजा जाता रहा, यह रोज चमकता रहा। तुमको इसकी रो...

जानकारी काल पत्रिका जनवरी - 2022

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  हिंदी मासिक   जानकारी काल   वर्ष-22,             अंक-09,             जनवरी - 2022,          पृष्ठ 42,        मूल्य-2-50 12 जनवरी 1863 - स्वामी विवेकानंद - विख्यात और प्रभावशाली आध्यात्मिक गुरु संरक्षक  श्रीमान कुलवीर शर्मा महामंत्री समर्थ शिक्षा समिति डॉ वी  एस नेगी प्रोफेसर भगत सिंह कॉलेज सांध्य  प्रधान संपादक व्  प्रकाशक  सतीश शर्मा     कार्यालय  ए 214 बुध नगर इंद्रपुरी  नई दिल्ली 110012  मोबाइल   9312002527  संपादक मंडल  सौरभ  शर्मा,कपिल शर्मा, गौरव शर्मा,डॉ अजय प्रताप सिंह, करुणा ऋषि, डॉ मधु वैध,  भूप  सिंह यादव, ऋतु सिंह, राजेश शुक्ल   प्रकाशक व मुद्रक सतीश शर्मा के लिय ग्लैक्सी प्रिंटर -106 F ,कृणा नगर नई दिल्ली 110029, A- 214 बुध नगर इं पूरी नई दिल्ली  110012 से प्रकाशित | सभी लेखों पर संपादक की सहमति आवश्यक नहीं है पत्रिका में किसी भी लेख में आपत्ति हो...