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भारत को एक कैशलेस अर्थव्यवस्था बनाना ही U P I का उद्देश्य

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  आम जनता के लिए UPI पेमेंट अभी भी पूरी तरह से मुफ्त है सतीश शर्मा विपक्ष का आरोप है कि सरकार यूपीआई सेवाओं को अब महंगा कर रही है। विपक्ष का दावा है कि इससे दुकानदारों पर बोझ बढ़ेगा, जिसका असर अंततः आम जनता की जेब पर पड़ेगा। आओ समझे खेल क्या है । यूपीआई (UPI) व्यवस्था को साल 2016 में लॉन्च किया गया था, लेकिन जनवरी 2020 में सरकार ने 'ज़ीरो एमडीआर' नीति लागू की थी, जिसके तहत यूपीआई को आम जनता और व्यापारियों के लिए पूरी तरह मुफ्त कर दिया गया था। सरकार द्वारा इस पूरी व्यवस्था को बढ़ावा देने के पीछे मुख्य उद्देश्य भारत को एक कैशलेस अर्थव्यवस्था बनाना और डिजिटल भुगतान को हर नागरिक तक पहुँचाना था।  भारत में नकदी के रख-रखाव, नोटों की छपाई और उनके परिवहन पर सरकार और बैंकों का भारी खर्च होता था। यूपीआई को लाकर सरकार कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देना चाहती थी। डिजिटल भुगतान से हर लेन-देन का रिकॉर्ड बनता है, जिससे अर्थव्यवस्था में पारदर्शिता आती है और काले धन पर रोक लगती है। देश ...

*शिक्षा में अपव्यय व अवरोधन*

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  *शिक्षा में अपव्यय व अवरोधन* *सतीश शर्मा* शिक्षा में अपव्यय (बिना प्राथमिक शिक्षा पूरी किए बीच में स्कूल छोड़ना) और अवरोधन (एक ही कक्षा में फेल होकर दोबारा रुकना) मुख्य रूप से गरीबी, अशिक्षा और दोषपूर्ण शिक्षण व्यवस्था के कारण होते हैं। ये दोनों समस्याएँ प्राथमिक शिक्षा स्तर पर सबसे अधिक देखी जाती हैं। अनिवार्य प्राथमिक शिक्षा के प्रचार में जहाँ अन्य बाधाएँ सामने आई उनमें अपव्यय तथा अवरोधन की समस्याएँ भी प्रमुख रही है। शिक्षा में जब अपव्यय पर बात होती है तो पाया जाता है कि प्राथमिक शिक्षा में अपव्यय और अवरोधन अधिक है। हमारी प्राथमिक शिक्षा के लिए यह एक गम्भीर समस्या है। हम जब तक इस समस्या से निजात नहीं पाते तब तक शिक्षा के सार्वजनीकरण का हमारा सपना पूरा नहीं हो सकता। अपव्यय का आशय बालक का अपनी प्राथमिक शिक्षा पूरी किए बिना ही विद्यालय छोड़ देना, जिससे बालक पर खर्च किया गया धन, समय और श्रम बेकार चला जाता है। हार्टोग कमेटी के अनुसार-"प्राइमरी शिक्षा पूरी करने से पहले बच्चे का किसी स्तर पर स्कूल छोड़ देना अपव्यय है।" अवरोधन का आशय कक्षा में असफल रहने से लिया जाता है। अर्थात एक...

मान चित्र परिचय

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  मानचित्र परिचय  सतीश शर्मा  पृथ्वी के सतह के किसी भाग के स्थानों, नगरों, देशों, पर्वत, नदी आदि की स्थिति को पैमाने की सहायता से कागज पर लघु रूप में बनाना मानचित्रण कहलाता हैं। मानचित्र दो शब्दों मान और चित्र से मिल कर बना है जिसका अर्थ किसी माप या मूल्य को चित्र द्वारा प्रदर्शित करना है। भारत की पारम्परिक सीमा "त्रिविष्टप" (तिब्बत) भारत के उत्तर में रही है। कैलाश मानसरोवर, गान्धार, कश्यप-सागर (कैस्पियन सागर), बर्मा (ब्रह्मदेश), श्रीलंका, ईरान (आर्यान), अफगानिस्तान (उप गणस्थान) आदि भारत के अंग रहे हैं। वृहत्तर भारत की सीमाएं- दक्षिण में हिन्दु महासागर और पूर्व में ब्रह्मदेश, श्याम, काम्बोज, द्वारावती (सुमात्रा), स्वर्ण दीप (बोर्नियो), सिंह द्वीप आदि । हिन्दु एशिया (इण्डोनेशिया) पश्चिम में यूनान तक महाभारत का विस्तार । समस्त पृथ्वी पर चक्रवर्तियों का शासन (धर्मानुशासन)। महाभारत के युद्ध (जनमेजय) के बाद चक्रवर्ती प्रथा समाप्त। भारत की सीमायें क्रमश: संकुचित । बुद्ध के पश्चात् सैनिक तैयारियाँ और जागरुकता भी बन्द । चन्द्रगुप्त मौर्य को फिर से दहेज में गान्धार मिला परन्तु अरब...

एक विश्व एक मानवता

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  एक विश्व एक मानवता  न्यू यॉर्क का *मैडिसन स्क्वायर गार्डन* है। वहां 29 अगस्त 2026 को RSS शताब्दी वर्ष के तहत एक विश्व - एक मानवता उत्सव' *"Universal Oneness Celebration / One World - One Humanity"* कार्यक्रम हुआ था, जिसे American Hindus for Engagement & Dialogue (AHEAD) ने आयोजित किया था।राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में उनका भाषण हुआ जिसमें भारतीय समुदाय के अलावा  30 देशों के, 16 विभिन्न धर्मो के प्रतिनिधि भी सम्मिलित हुए थे। 180 से अधिक आध्यात्मिक / धार्मिक गुरु, आचार्य थे। विश्व के अनेकों चैनलों के पत्रकार व हजारों सोशल मीडिया अकाउंट्स से यह कार्यक्रम लाइव प्रसारित हो रहा था। अपने उद्बोधन मे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत ने भारत के सदियों पुराने 'वसुधैव कुटुंबकम' के सोच का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म और पूजा-पद्धतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन पूरी इंसानियत एक ही है। उनके संबोधन से पहले उनकी तस्वीरें टाइम्स स्क्वायर के मुख्य बिलबोर्ड पर दिखाई गईं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ...

सूर्य ग्रह का हमारे जीवन पर प्रभाव

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  https://youtu.be/q2Q4DBAJfL4?si=BajAnhxFBS0jw2dc सूर्य ग्रह   सूर्य के गोचर का फल सूर्य के गोचर के दौरान कैसा फल प्राप्त होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि सूर्य आपकी कुंडली या राशि से किस भाव में संचरण कर रहा है। क्योंकि सभी 12 भावों में सूर्य के गोचर का फल भिन्न-भिन्न होता है। जन्मकुंडली में चंद्रमा जिस भाव में स्थित होता है उसे लग्न भाव मानकर गोचर के ग्रहों का फलकथन कहा जाता है। अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे  शर्मा जी-931202527    रविवार को दीपदान करने से यश ,मान-सम्मान और वैभव मिलता है। कुंडली  में  सूर्य  बलवान होता है तो उसे यश और शोहरत की कोई कमी नहीं होती,वह अपने पिता और पिता तुल्य व्यक्तियों से लाभ प्राप्त प्राप्त करता है,साथ ही साथ वह सामाजिक मान-सम्मान का भी हकदार बनता है। रविवार का दिन  सूर्य  भगवान को समर्पित  होता  है | रविवार का  उपवास रखने से घर में शांति और सुख- समृद्धि आती हैं| सूर्य का रत्न माणिक्य,सूर्य सिंह राशी के स्वामी है | सूर्य के खराब होने के लक्षण -  बार बार बिना गलती के भी अ...

शनि ग्रह की जानकारी व उपाय , शनि की साढ़ेसाती एवं ढैय्या

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  शनि ग्रह   शनिग्रह :- नौ  ग्रहों  में  शनि  बृहस्पति के बाद सबसे बड़ा  ग्रह  है।  शनिग्रह  एक राशि में ढाई वर्ष भ्रमण करता है।  शनि  सभी द्वादश (बारह) राशि घूमने के लिए तीस साल का समय लेता है। तीन राशियों की कालावधि को साढे सात वर्ष लगते हैं इसीलिए इस काल को साढेसाती कहते हैं। शनिदेव हैं पश्चिम  दिशा  के स्वामी, इस  दिशा  में दोष होने पर लाइफ में बनी रहती हैं परेशानियां,ध्यान रखें ये बाते वास्तु में दस दिशाओं को महत्व बताया गया है।  इन सभी दिशाओं का एक-एक प्रतिनिधि  ग्रह  होता है, जिसका प्रभाव उस  दिशा  से होता है। उसी के अनुसार पश्चिम  दिशा  पर शनिदेव का आधिपत्य माना गया है। दरअसल ज्योतिष के अनुसार  शनि  को श्यामवर्ण माना गया है।  काला रंग  आलस्य का प्रतीक  होता  है।  शनि  को भी धीमे चलने वाला अशुभ  शनि  को शुभ बनाने के लिए लोहे व  काली  चीजों के दान का ज्योतिष के अनुसार विशेष महत्व है।जिसके दान से उस  ग्रह...