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जनवरी, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

अध्यात्मिक साधना

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  बहूनां जन्मनामन्ते ज्ञानवान्मां प्रपद्यते। वासुदेवः सर्वमिति स महात्मा सुदुर्लभः अनेक जन्मों की आध्यात्मिक साधना के पश्चात जिसे ज्ञान प्राप्त हो जाता है, वह मुझे सबका उद्गम जानकर मेरी शरण ग्रहण करता है। ऐसी महान आत्मा वास्तव में अत्यन्त दुर्लभ होती है। हम पहले परमात्मा को दूर देखते हैं फिर समीप देखते हैं फिर अपने में देखते हैं और फिर केवल परमात्मा को ही देखते हैं कर्म योगी परमात्मा को समीप देखता है ज्ञान योगी परमात्मा को अपने में देखता है और भक्त योगी सब जगह परमात्मा को ही देखता है | सब कुछ परमात्मा ही है ऐसा अनुभव करना ही असली शरणागति है अर्थात् केवल शरणय ही रह जाएं शरणागत कोई रहे ही नहीं ! हमारी दृष्टि में संसार की सत्ता है। जैसे खेत में पहले भी गेहूं बोया गया था और अंत में ही गेहूं निकलेगा पर बीच में हरी हरी घास दिखने पर भी वह गेहूं की खेती कहलाती है उसे गाय खा जाए तो किसान कहता है गाय हमारा गेहूं खा गई जबकि गाय ने गेहूं का एक दाना भी नहीं खाया होता। इसी प्रकार सृष्टि के पहले भी परमात्मा थे और अंत में भी परमात्मा ही रहेंगे पर बीच में परमात्मा ने दीखने पर भी सब कुछ परमात्मा ही...

बुद्धियोग

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  दूरेण ह्यवरं कर्म बुधियोगाधनन्जय (2.49) भगवान अर्जुन को कह रहे हैं - कामना के साथ किया गया कार्य निश्चित ही अत्यन्त हीन है उसकी अपेक्षा जो कार्य बुद्धि योग द्वारा मन को नियन्त्रित करके किया जाता है। भगवान सभी को कह रहे हैं बुद्धौ शरणम् अन्विच्छ - बुद्धि की शरण लो। इसी श्लोक को संयुक्त राष्ट्र संघ के एक महासचिव द्वारा सार्वजनिक भाषण में कहा गया। इसके आगे वे कहते हैं कि यदि लोगों ने इस शिक्षा को अपने जीवन व्यवहार में लाया तो यह संसार रहने के लिए एक बेहतर जगह बन जाएगा। वास्तव में बुद्धि योग यानि तर्क, निर्णय और विवेक की क्षमता का विकास है। शरीर में उपस्थित इस उच्च मस्तिष्क प्रणाली का उद्देश्य शरीर के स्वत् संचालित कार्यों को छोड़कर पूरे मानव शरीर का नियन्त्रण और संचालन करना है। हमें तो केवल इस मस्तिष्कीय ऊर्जा का शुद्धिकरण कर, इसे परिष्कृत करना है। अपरिष्कृत मस्तिष्कीय ऊर्जा हमें अशिष्ट चरित्र ही दे सकती हैं जिस प्रकार तेल शोधक कारखानों में हम अपरिष्कृत तेल का शोधन कर उसमें से पैट्रोल, डीजल आदि सुन्दर, उपयोगी वस्तुओं को प्राप्त करते हैं, उसी प्रकार प्रकृति ने एक अद्भुत शोधन कारखाना म...

माघ मास

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माघ मास  माघ मास में जन्मे सुंदर चेहरा ,मनोहर ,नरम  स्वभाव ,अपनी इक्छा अनुसार कार्य करने वाली /वाला दुसरो को अपनी बात पूरी तरह प्रकट ना होने दे | पंचांग के अनुसार माघ  (चंद्रमास) वर्ष का ग्यारहवां महीना होता है। पौष के बाद माघ माह प्रारंभ होता है। इसका नाम माघ इसलिए रखा गया क्योंकि यह मघा नक्षत्र युक्त पूर्णिमा से प्रारंभ होता है। चंद्रमास के महीने के नाम नक्षत्रों पर ही आधारित है, जैसे पौष का पुष्य नक्षत्र से संबंध है। पुराणों में माघ मास के महात्म्य का वर्णन मिलता है। पद्म पुराण में माघ मास में कल्पवास के दौरान स्नान, दान और तप के माहात्म्य के विस्तार से वर्णन मिलता है। इसके अलावा माघ में ब्रह्मवैवर्तपुराण की कथा सुनने के महत्व का वर्णन भी मिलता है। माघ कृष्ण द्वादशी को यम ने तिलों का निर्माण किया और दशरथ ने उन्हें पृथ्वी पर लाकर खेतों में बोया था। अतएव मनुष्यों को उस दिन उपवास रखकर तिलों का दान कर तिलों को ही खाना चाहिए। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है।  माघ मास में प्रयाग संगम तट पर कल्पवास करने का विधान है। साथ ही माघ मास की अमावास्या को प्रयागराज में स्नान ...

सांख्य योग

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  योगस्थः कुरु कर्माणकर्माणि - समत्वं योग उच्यते भगवद् गीता के दूसरे अध्याय, सांख्य योग के 48वें श्लोक में भगवान अर्जुन को कार्य करते समय मन का दृष्टिकोण कैसा हो, के बारे में बोलते हुए कहते हैं - योग में स्थित होकर अर्जुन, आसक्ति छोड़कर, सफलता व विफलता के प्रति तटस्थ होकर कर्म करो-मन की यह सम स्थिति ही योग है। योग क्या है - समत्वं योग है - स्थिरता - मन का पूर्ण संतुलन। भगवान ने बुद्धि योग का वर्णन करते हुए कहा ही योगस्थः कुरु कर्माणि - योग में स्थित होकर कर्म करो। आसक्ति रहित, सफलता में प्रसन्नता व विफलता में उदासीनता के भाव से मुक्त रहते हुए, मन का ऐसा संतुलन रख कर कर्म करना चाहिए। महाभारत में ही संजय नामक एक युवा राजकुमार की कथा है जो युद्ध में पराजित होकर उदास व अकर्मण्य हो गया। उसकी माँ विदुला उसे समझाती है - उदास मत हो, सफलता-असफलता समुद्र की लहरों के समान आती जाती रहती हैं आगे वे कहती है - मुहूर्त ज्वलितो श्रेयो न तु धूमायितं चिरं - एक क्षण के लिए प्रज्जवलित होकर प्रकाश देना तुम्हारे लिए अच्छा है, युगों तक धुआँ देते जाओ, इसमें क्या आन्द है। अतः श्री कृष्ण कह रहे हैं - योगस्थः ...

मासिक पंचांग-जनवरी -2023

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        मासिक पंचांग-जनवरी-2023  दिनांक  भारतीय व्रत उत्सव जनवरी - 2023  2  पुत्रदा एकादशी व्रत  4  प्रदोष व्रत   6  सत्य व्रत,पौष पूर्णिमा,माघ स्नान प्रारम्भ,शाकम्भरी जयंती   10  श्री गणेश चतुर्थी व्रत,संकट हरनी चतुर्थी व्रत,चन्द्र उदय 20 - 42   13  लोहड़ी  14   मकर संक्रांति पुन्य,   15  कालाष्टमी  18   षटतिला एकादशी व्रत     19  सोम  प्रदोष व्रत, 20  मास शिवरात्रि     21  मोनी शनिचरी अमावस्या , 24  गौरी तृतीय   25    तिल वर्द कुंद चतुर्थी  व्रत   26  बसंत पंचमी  28  अचला सप्तमी , भीमा अष्टमी   29  दुर्गा अष्टमी  पंचक विचार जनवरी - 2023    पंचक विचार -(धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण से रेवती नक्षत्र तक) पंचको में दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना मकान दुकान आदि की छत डालना चारपाई पलंग आदि बुनना,दाह संस्...