वट सावित्री व्रत कथा
वट सावित्री व्रत कथा https://youtu.be/zJrEIiDTYvA ज्येष्ठ अमावस्या के दिन आने वाले सावित्री व्रत की कथा में निम्न प्रकार से है- भद्र देश के एक राजा थे नाम अश्वपति था। भद्र देश के राजा अश्वपति के कोई संतान नही थी। वे संतान की प्राप्ति के लिए मंत्रोचारण के साथ प्रतिदिन एक लाख आहुत सम्बद्ध मंत्र से हवन करते थे । काफी सालों तक यह क्रम जारी रहा। इसके बाद सावित्रीदेवी ने प्रकट होकर कहा कि: राजन आपके यहा एक सुन्दर व सुशील कन्या का जन्म होगा। सावित्रीदेवी की कृपा से जन्म लेने के कारण से कन्या का नाम सावित्री रखा गया। कन्या बड़ी बेहद रूपवान हुई। योग्य वर न मिलने की वजह से सावित्री के पिता दुखी थे। उन्होंने कन्या को स्वयंवर खोज के लिए भेजा। सावित्री तपोवन में भटकने लगी। वहाँ साल्व देश के राजा द्युमत्सेन रहते थे, क्योंकि उनका राज्य किसी ने छीन लिया था। उनके पुत्र सत्यवान को देखकर सावित्री ने पति के रूप में उनका वरण किया ऋषिराज नारद को जब यह बात पता चली तो वह राजा अश्वपति के पास पहुंचे और कहा कि हे राजन! यह क्या कर रहे हो तुम? सत्यवान गुणवान हैं, धर्...