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मई, 2023 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

वट सावित्री व्रत कथा

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  वट सावित्री व्रत कथा   https://youtu.be/zJrEIiDTYvA  ज्येष्ठ अमावस्या के दिन आने वाले सावित्री व्रत की कथा में निम्न प्रकार से है- भद्र देश के एक राजा थे नाम अश्वपति था। भद्र देश के राजा अश्वपति के कोई संतान नही थी।  वे संतान की प्राप्ति के लिए मंत्रोचारण के साथ प्रतिदिन एक लाख आहुत सम्बद्ध मंत्र से हवन करते थे । काफी सालों तक यह क्रम जारी रहा।  इसके बाद सावित्रीदेवी ने प्रकट होकर कहा कि: राजन आपके यहा एक सुन्दर व सुशील कन्या का जन्म होगा। सावित्रीदेवी की कृपा से जन्म लेने के कारण से कन्या का नाम सावित्री रखा गया। कन्या बड़ी बेहद रूपवान हुई। योग्य वर न मिलने की वजह से सावित्री के पिता दुखी थे। उन्होंने कन्या को स्वयंवर खोज के लिए भेजा।  सावित्री तपोवन में भटकने लगी। वहाँ साल्व देश के राजा द्युमत्सेन रहते थे, क्योंकि उनका राज्य किसी ने छीन लिया था। उनके पुत्र सत्यवान को देखकर सावित्री ने पति के रूप में उनका वरण किया  ऋषिराज नारद को जब यह बात पता चली तो वह राजा अश्वपति के पास पहुंचे और कहा कि हे राजन! यह क्या कर रहे हो तुम? सत्यवान गुणवान हैं, धर्...

सन्तान सुख

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सन्तान सुख मिले सम्मान मिले सब चाहते हैं, आइए देखें कैसे-  अगर पंचम भाव में जब गुरु स्थिति हो तो ऐसे व्यक्ति की  संतान  से 100 अधिक पिता करते हैं और  ऐसी  संतति  को अपने कुल का दीपक कहा जाता है।  गोचर योजनाओं में जब भी गुरु लग्न पंचम, नवम व एकादश भाव में हो तो भी  संतति सुख  का योग बनता है  ज्योतिष शास्त्र  में  सन्तान   प्राप्ति के कुछ उपाय भी मौजूद हैं। अमावस्या वाले दिन पीपल के पेड़ के नीचे घृत का दीपक प्रज्जवलित करें ऐसा करने से पूर्ण सुख प्राप्त होता है।अपने से बडो को सम्मानित करें सेवा करें, आपको निश्चत सुख व वैभव मिलेगा। अमावस्या वाले दिन किसी कुवारे पंडित जी के बच्चे को मीठा दूध पीने को दे।  किसी गुरु कुल मे किसी बच्चे की पढ़ने में सहायता करे। अधिक जानकारी हेतु संपर्क करें -  समस्या है तो समाधान भी कानूनी,पैतृक संपत्ति,विवाह में तनाव,संरक्षण,पढाई,विदेश यात्रा, नोकरी व व्यापार संबंधी समस्या पर उचित सलाह व समाधान कारण संपर्क करें शर्मा जी 9312002527 यदि समस्या है तो समाधान भी है । कानूनी, माता-...

अचला एकादशी/अपरा एकादशी व्रत कथा

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  अचला एकादशी कथा कहानी सुनने के लिए क्लिक करे https://youtube.com/@satishsharma7164   अचला एकादशी जेष्ठ मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को मानते  हैं | इसे अपरा एकादशी भी कहते हैं | इस व्रत के करने से ब्रह्महत्या,परनिंदा, भूत योनि, जैसे निम्न कर्मों से छुटकारा मिल जाता है तथा कीर्ति पुणय  एवं धन धन्य में अभिवृद्धि होती है |   अचला एकादशी की कथा   बहुत समय पहले की बात है एक महीध्वज नाम का राजा था वह बड़ा ही धर्मात्मा था इसके विपरीत उसी का छोटा भाई ब्रजध्वज बड़ी ही दुष्ट प्रवृत्ति का अधर्मी तथा अन्यायी  था | वह अपने बड़े भाई को अपना दुश्मन समझता था | एक दिन अवसर पाकर उसने  अपने बड़े भाई राजा महिध्वज की हत्या करके और उसके मृत शरीर को जंगल में पीपल के वृक्ष के नीचे गाड़ दिया | राजा की आत्मा पीपल पर वास करने लगी और आने जाने वालों को सताने लगी | अकस्मात एक दिन धौम्य में ऋषि वहां से जा रहे थे | उन्होंने अपने तपोबल से प्रेत के उत्पाद कारण और उसके जीवन का वृतांत सुना और समझा | ऋषि महोदय ने प्रसन्न होकर प्रेत को पीपल के पेड़ से उतारकर परलोक विद्या का उपदेश दि...

मोहिनी एकादशी व्रत,विधि व कथा

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  मोहिनी एकादशी व्रत  मोहिनी एकादशी व्रत,विधि व कथा   https://youtube.com/@satishsharma7164 मोहिनी एकादशी व्रत करने वाले व्यक्ति को दशमी की रात से ही नियमों का पालन करना चाहिए। एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त यानि सुबह उठकर तिल का लेप लगाना चाहिए या फिर तिल मिले जल से स्नान करना चाहिए। स्नान के बाद लाल वस्त्रों से सजे कलश की स्थापना कर पूजा की जाती है इसके बाद भगवान विष्णु तथा श्रीराम का  धूप, दीप फल, फूलों आदि से पूजन किया जाता है। पूजन के बाद प्रसाद वितरण कर ब्राह्मण को भोजन तथा दक्षिणा देने का विधान है। रात के समय भगवान का भजन तथा कथा का पाठ करना चाहिए। पद्म पुराण के अनुसार वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को मोहिनी एकादशी के नाम से जाना जाता है। यह व्रत मोह बंधन तथा पापों से मुक्ति दिलाता है। सीता माता की खोज के दौरान भगवान राम ने तथा महाभारत काल में युधिष्ठिर ने मोहिनी एकादशी व्रत कर अपने सभी दुखों से छुटकारा पाया था |   मोहिनी एकादशी व्रत का महत्त्व  मोहिनी एकादशी व्रत के प्रभाव से सभी प्रकार के पाप तथा दुख मिट जाते हैं। यह व्रत मोह बंधन से मुक्ति दिलात...