प्रदोष व्रत
प्रदोष व्रत का विशेष महत्व है। प्रदोष व्रत हर माह की शुक्ल और कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को पड़ता है यानी हर महीने दो प्रदोष व्रत पड़ते हैं और इनमें सोम प्रदोष का बहुत महत्व है। जिस तरह एकादशी तिथि भगवान विष्णु को समर्पित होती है, उसी तरह प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव कैलाश पर्वत पर अपने रजत भवन में नृत्य करते हैं और सभी देवी-देवता उनकी स्तुति करते हैं। भगवान शिव को समर्पित इस व्रत को करने से मोक्ष और भोग की प्राप्ति होती है। सोम प्रदोष व्रत का महत्व सोम प्रदोष व्रत का संबंध चंद्रमा से भी माना जाता है। इस दिन व्रत रखने से चंद्रमा के नकारात्मक प्रभाव से बचा जा सकता है और कुंडली में चंद्रमा की स्थिति भी मजबूत होती है। इसलिए इस दिन विधि-विधान से शिवजी की पूजा की जाती है। प्रदोष काल वह समय कहलाता है, जब सूर्यास्त हो चुका हो और रात्रि प्रारंभ हो रही है यानी दिन और रात के मिलन को प्रदोष काल कहा जाता है। इस समय भगवान शिव की पूजा करने से अमोघ फल की प्राप्ति होती है। साथ ही इस व्रत से स्वास्थ्य बेहतर होता है और दीर...