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विजया एकादशी

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  विजया एकादशी विजया एकादशी व्रत फाल्गुन मास कृष्ण पक्ष एकादशी को किया जाता है | इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से मन प्रसन्न होता है व सभी मनोकामना पूर्ण होती है | पूजन में धूप दीप नैवेद्य नारियल आदि चढ़ाया जाता है | सप्त अन्न युक्त घट स्थापित किया जाता है जिसके ऊपर विष्णु की मूर्ति रखी जाती है | विजया एकादशी को 24 घंटे कीर्तन करके दिन रात बिताना चाहिए | द्वादशी के दिन अन्न से भरा घड़ा ब्राह्मण को दान दिया जाता है | इस व्रत के प्रभाव से दुख दरिद्रता दूर हो जाती है | समस्त कार्य में विजय प्राप्त होती है | इसकी कथा भगवान राम की लंका विजय से संबंधित है | विजया एकादशी व्रत के बारे में कहा जाता है कि विजया एकादशी व्रत करने मात्र से स्वर्णणदान,भूमि दान,अन्न दान और गौ दान से भी अधिक पुण्य फलों की प्राप्ति होती है और अंततः विजया एकादशी व्रत करके मोक्ष की प्राप्ति होती है। यदि कोई आपसे शत्रुता रखता है तो आपको विजया एकादशी का व्रत अवश्य करना चाहिए। विजया एकादशी की कथा - जब भगवान राम माता सीता की मुक्ति के लिए वानर दल के साथ सिंधु तट पर पहुंचे तो रास्ता रुक गया | पास में ही दाल्भ्य मुन...

श्री सत्यनारायण भगवान की कथा ,आरती

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                             श्री सत्यनारायण भगवान व्रत कथा   पहला अध्याय –   एक समय की बात है नैषिरण्य तीर्थ में शौनिकादि, अठ्ठासी हजार ऋषियों ने श्री सूतजी से पूछा हे प्रभु! इस कलियुग में वेद विद्या रहित मनुष्यों को प्रभु भक्ति किस प्रकार मिल सकती है? तथा उनका उद्धार कैसे होगा? हे मुनि श्रेष्ठ ! कोई ऎसा तप बताइए जिससे थोड़े समय में ही पुण्य मिलें और मनवांछित फल भी मिल जाए. इस प्रकार की कथा सुनने की हम इच्छा रखते हैं. सर्व शास्त्रों के ज्ञाता सूत जी बोले – हे वैष्णवों में पूज्य ! आप सभी ने प्राणियों के हित की बात पूछी है इसलिए मैं एक ऎसे श्रेष्ठ व्रत को आप लोगों को बताऊँगा जिसे नारद जी ने लक्ष्मीनारायण जी से पूछा था और लक्ष्मीपति ने मनिश्रेष्ठ नारद जी से कहा था. आप सब इसे ध्यान से सुनिए – एक समय की बात है, योगीराज नारद जी दूसरों के हित की इच्छा लिए अनेकों लोको में घूमते हुए मृत्युलोक में आ पहुंचे. यहाँ उन्होंने अनेक योनियों में जन्मे प्राय: सभी मनुष्यों को अपने कर्मों द्वारा अनेकों दुखों से पीड़ित देखा...

जानकारी काल फरवरी -2023

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  जानकारी काल     वर्ष-23,  अंक-09, फरवरी -2023, पृष्ठ 4 मूल्य 2-50       शिव और शक्ति का महामिलन महाशिवरात्रि को हुआ था | भगवान शिव और शक्ति एक दूसरे से विवाह बंधन में बंधे थे | वैरागी शिव वैराग्य छोड़कर गृहस्थ आश्रम में प्रवेश किए थे | महाशिवरात्रि के दिन ही द्वादश ज्योतिर्लिंग प्रकट हुए थे | 12 ज्योतिर्लिंग हैं - सोमनाथ ज्योतिर्लिंग, मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग, महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग, ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग, केदारनाथ ज्योतिर्लिंग, भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग, विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग, त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग, वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग, नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, रामेश्वर ज्योतिर्लिंग और घृष्‍णेश्‍वर ज्योतिर्लिंग हैं. इन 12 ज्योतिर्लिंगों के प्रकट होने के उत्सव के रुप में भी महाशिवरात्रि मनाई जाती है | संरक्षक  श्रीमान कुलवीर शर्मा कमहामंत्री समर्थ शिक्षा समिति डॉ वी  एस नेगी प्रोफेसर भगत सिंह कॉलेज सांध्य  प्रधान संपादक व  प्रकाशक  सतीश शर्मा     कार्यालय  ए 214 बुध नगर इंद्रपुरी  नई दिल...