चतुर्दशी तिथि का महत्व व करने योग्य उपाय
चतुर्दशी तिथि का महत्व व करने योग्य उपाय
चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिव (शंकर) हैं। इस तिथि को शिवभक्तों के लिए अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी माना जाता है, जिसमें व्रत और उपवास करने का विशेष विधान है। कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (मासिक शिवरात्रि) को भगवान शिव की पूजा के लिए उत्तम माना जाता है।चतुर्दशी को भगवान शिव की पूजा से समस्त इच्छाएं पूरी होती हैं। भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चतुर्दशी कहते हैं, जिसमें भगवान विष्णु के अनंत रूप की पूजा की जाती है। नरक चतुर्दशी (छोटी दिवाली) इस दिन यमराज की पूजा का विधान है। चतुर्दशी रिक्ता संज्ञक (उग्र) तिथि है, इसलिए इसमें शुभ कार्यों से बचकर कठोर या तंत्र साधना वाले कार्य किए जाते हैं। इस तिथि के स्वामी भगवान शिव हैं । कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी अशुभ/कठोर और शुक्ल पक्ष की शुभ मानी जाती है । इसे 'उग्र' या 'क्रूर' तिथि माना जाता है, जिसमें कठोर कार्य करना उचित माना जाता है । इस दिन बाल काटना या शेविंग करने से बचना चाहिए । चतुर्दशी तिथि पर जन्मे लोग अत्यंत ऊर्जावान, दृढ़ इच्छाशक्ति वाले और कभी-कभी तानाशाही स्वभाव के होते हैं । ऐसे जातक जीवन में कई चुनौतियों का सामना करते हैं, लेकिन अपनी कड़ी मेहनत और स्पष्टवादिता से अंततः सफल होते हैं । ये लोग आत्म-त्यागी, चतुर और अपनी बात पर अडिग रहने वाले होते हैं । वे बाहर से सख्त लेकिन अंदर से कोमल हो सकते हैं । ये दबंग होते हैं और अपनी सीमाओं को तोड़कर बड़े काम करने में सक्षम होते हैं । वे दूसरों की राय की परवाह नहीं करते । इनमें क्रोध अधिक हो सकता है और वे किसी के द्वारा किए गए अपमान को जल्दी नहीं भूलते । इनका जीवन परीक्षण और कठिन संघर्षों से भरा हो सकता है, लेकिन वे दृढ़निश्चयी होते हैं । कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी (अमावस्या से पहले) को जन्म को अक्सर कम शुभ या चुनौतीपूर्ण माना जाता है । इस तिथि में जन्मे जातकों को भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए और भगवान शिव पर स्थानीय फूल अर्पित करने चाहिए। ये जातक अपनी मर्जी के मालिक होते हैं और किसी के अधीन काम करना पसंद नहीं करते। दही और तिल का तेल का इस्तेमाल ना करें तो अच्छा रहेगा। इस दिन सात्विक भोजन करना चाहिए। इस दिन के शुभ रंग है पीला (ज्ञान), लाल (शक्ति), हरा (शांति/भाग्य), नारंगी (ऊर्जा)।

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