बुद्ध ग्रह के उपाय श्री गणेश चालीसा,आरती,बुद्ध ग्रह की जानकारी व उपाय

बुध ग्रह
बुध ग्रह
बुद्ध की उत्पत्ति अत्रि गोत्र में मानी जाती है बुद्ध चेतन इच्छा सदाचार मानव जीवन में तरक्की और चेतना शक्ति का मुख्य रूप से प्रतिनिधित्व करता है ऐश्वर्या प्रेम उदारता आकांक्षा आत्मविश्वास अधिकारी है संतुलित करता है यह पुरातन बेटा आविष्कार करता राजा मंत्री आदि का भी प्रतिनिधित्व करता है हृदय रक्त का संचालन आंख कान हड्डी आदि पर भी बुद्ध अपना अधिक से अधिक प्रभाव डालता है
बुधवार का दिन गणेश जी का होता है| वो सभी देवताओं में सबसे प्रिय हैं, इसलिए उनकी पूजा सभी देवताओं से पहले की जाती है| उनकी पूजा-अर्चना करने से घर में सुख शांति और समृद्धि आती है. जानकार मानते हैं कि अगर बुधवार के दिन कुछ उपाय किये जाए तो बुध ग्रह का अच्छा प्रभाव पड़ता है.बुध ग्रह से दमा और अन्य रोग |
सांस की बीमारियां बुध के दूषित होने से होती हैं। बहुत खराब बुध से व्यक्ति के फेफड़े खराब होने का भय रहता है। व्यक्ति हकलाता है तो भी बुध के कारण और गूंगा बहरापन भी बुध के कारण ही होता है। कुंडली में अगर बुध ग्रह कमजोर है तो करें ये उपाय - घर के पूर्व दिशा में लाल झंडा लगायें।ऐसे व्यक्ति को हरे रंग के कपड़ों और वस्तुओं से परहेज करना चाहिए। 100 ग्राम चावल में चने की दाल मिलाकर बहते जल नदी या नहर में प्रवाहित करें।
बुधवार को मंत्र का जाप करने से दिमाग तेज होता है और व्यापार में मिलती है तरक्की मिलती है | बुध को मानसिक तनावों से राहत देने वाला, मन की एकाग्रता बढ़ाने वाला और याददाश्त तेज करने वाला ग्रह माना गया है। यही नहीं काराबोर में कामयाबी भी बुध के शुभ योग से मिलती है।
बुध मंत्र - बीज मंत्र 'ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः' तथा सामान्य मंत्र 'बुं बुधाय नमः' है।
बुध ग्रह का रंग - बुध का रंग वैसे तो हरा होता है पर कुछ लोग बुध का रंग श्याम मानते हैं।
बुध ग्रह का रत्न - पन्ना
बुद्ध का अंक 5
धर्म-कर्म में दृढ़ रहे बुद्धिमान मधुर भाषी सुंदर विद्वान धार्मिक जीवन माता-पिता में बहुत प्रेम रखें दर्शन में रुचि रखें चित्रकार
8 और 22 वर्ष में अगर बच जाए तो 64 वर्ष की आयु आलसी नशेड़ी अगर बुध कमजोर हो तो
यदि बुध अशुभ होकर अनिष्ट प्रभाव देता हो तो दुर्गा मां की उपासना करें प्रसंचित हो
ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, विवेक, वाणी और संचार का कारक माना गया है। इसे ग्रहों का
राजकुमार कहा जाता है। जिस व्यक्ति की कुंडली में बुध मजबूत होता है, वह उत्कृष्ट वक्ता, गणितज्ञ,
व्यापारी और सफल संचारक (कम्युनिकेटर) होता है। बुध सोचने-समझने, निर्णय लेने और विश्लेषणात्मक
क्षमता को नियंत्रित करता है। मजबूत बुध वाले लोग गणित, अकाउंट और रिसर्च में अच्छे होते हैं। बुध
वाकपटुता (बोलने की कला), लेखन, मार्केटिंग और संचार माध्यमों (जैसे डिजिटल मीडिया, टूरिज्म)
का प्रतिनिधित्व करता है। बुध को अर्थशास्त्र और व्यापार का स्वामी माना गया है। जिन जातकों का
बुध शुभ होता है, वे कुशल व्यवसाई होते हैं। इस लिए बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, व्यापार और संचार का
कारक माना जाता है बुध त्वचा (त्वचा संबंधी रोग), तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) और गले व नाक-कान
को नियंत्रित करता है।
कुंडली में बुध के कमजोर या खराब होने पर व्यक्ति को मानसिक तनाव, व्यापार में नुकसान और त्वचा
संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। बुध खराब होने के कारण हकलाना, तुतलाना या अपनी
बात को स्पष्ट रूप से दूसरों के सामने न रख पाना,तर्क और निर्णय क्षमता में कमी यानि सही समय पर
सही निर्णय न ले पाना, और बार-बार व्यापार में धन की हानि होना,याददाश्त कमजोर होना, पढ़ी हुई
बातें भूल जाना और एकाग्रता की कमी होना (खासकर छात्रों के लिए)। त्वचा और नसों के रोग जेसे
त्वचा का रूखा होना, एलर्जी, या स्नातंत्र से जुड़ी परेशानियां होना, घर की महिलाओं
(विशेषकर बहन, बुआ या बेटी) के साथ संबंधों में खटास आना।
बुध दोष के उपाय - मंत्र जाप: प्रतिदिन ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः, 'ॐ बुं बुधाय नमः' मंत्र का 108 बार
जाप करें। बुधवार के दिन हरी मूंग की दाल, हरे वस्त्र, या पालक का दान जरूरतमंदों को करें।बुधवार
का व्रत करे, भगवान गणेश की पूजा करें और उन्हें दुर्वा, मोदक, और पीले फूल चढ़ाएं। ऋणहर्ता
गणेश स्तोत्र का पाठ करने से धन से जुड़ी परेशानियां दूर होती हैं,गाय को हरी घास खिलाने से शुभ
फल प्राप्त होते हैं घर या कार्यस्थल पर एस्ट्रोसेज जैसे प्लेटफॉर्म से प्रमाणित बुध यंत्र स्थापित करें।
नियमित रूप से तुलसी के पौधे में जल चढ़ाएं और उसकी देखभाल करें। करियर में तरक्की के लिए
बुध वार वाले दिन दुर्गा सप्तशती का पाठ करने से सभी प्रकार की बाधाएं दूर होती हैं,बुधवार के दिन
हरे रंग का रुमाल रखे । शमी के पत्तों को भगवान गणेश को अर्पित करने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं,
तुलसी का पत्ता धोकर खाने से बुध ग्रह मजबूत होता है,बुधवार के दिन पैसे का लेन-देन करने से आर्थिक
समस्याएं हो सकती हैं। कुंडली में बुध की स्थिति यह तय करती है कि व्यक्ति अपनी बात कैसे रखता है
और उसका निर्णय लेने का तरीका कैसा है। किसी ज्योतिषी से सलाह लेकर 'पन्ना' रत्न धारण करना
अत्यंत लाभकारी होता है।बुध ग्रह की पीड़ा की शांति हेतु चावल ,सरसों बुधवार को दान करें । अगर
हो सके तो बुधवार को स्वर्ण दान करें । गणेश चतुर्थी का व्रत करे | तांबे के सिक्के बहते पानी में बहाएं।
एक बात ध्यान रखे की अगर बुध उच्च का हो तो बुध की चीजों का दान नहीं करना चाहिए।
बुध नीच का हो तो ही बुध की चीजों का दान ना ले। अगर घर में परेशानी आ रही हो तो किसी हिजड़े को
हरी चूड़ी और हरे रंग का कपड़ा दान में कर देंगे तो भी लाभ रहेगा । शालिग्राम भगवान की पूजा करें ,
तुलसी को जल चढ़ाएं और तुलसी पत्र को भी का सेवन करें तो भी बुद्ध से होने वाली परेशानी दूर होती है
अगर बुध की वजह से और व्यापार में परेशनी आ रही हो तो भगवान कृष्ण की पूजा करें, गोपाल
सहस्त्रनाम भी पढ़ सकते हैं | अगर बुध की वजह से बच्चों की तरफ से परेशानी आ रही हो मधु किसी
को दान या 11 एकादशी के व्रत करें| कन्याओं को अगर बुध की वजह से कोई परेशानी आ रही हो
दुर्गा का पाठ करें | शारीरिक परेशानी और व्यापारी परेशानी हो तो गरीब कन्याओं को भोजन दान करें |
घर में परेशानी हो तो गरीब कन्याओं को नए वस्त्र दान करें | गणेश जी महाराज आपकी सभी
परेशानियों को दूर करेंगे और बुध ग्रह भी प्रसन्न रहेंगे |
विभिन्न राशियों पर बुध का प्रभाव नीचे दिया गया है-
मेष, सिंह और धनु (अग्नि तत्व) - इन राशियों में बुध होने से जातक विचारों में स्पष्ट, शीघ्र निर्णय लेने
वाले, लेकिन थोड़े अधीर हो सकते हैं।
वृषभ, कन्या और मकर (पृथ्वी तत्व) - बुध इन राशियों में व्यावहारिक और तार्किक बुद्धि देता है।
कन्या राशि में बुध उच्च का (सर्वश्रेष्ठ) होता है। यहाँ जातक उत्कृष्ट विश्लेषक, व्यापारी और गणना
में माहिर होते हैं।
मिथुन, तुला और कुंभ (वायु तत्व) - इन राशियों में बुध जातक को उत्कृष्ट संचारक सामाजिक,
और रणनीतिकार बनाता है। मिथुन राशि बुध की स्वराशि है।
कर्क, वृश्चिक और मीन (जल तत्व) - इन राशियों में बुध की स्थिति जातक को भावुक बुद्धि और
कल्पनाशीलता देती है। मीन राशि में बुध नीच का माना जाता है। यहाँ तार्किक सोच थोड़ी भ्रमित
हो सकती है, लेकिन रचनात्मकता बहुत उच्च स्तर की होती है।
स्वामी - बुध देव। दिशा - उत्तर,वार-बुधवार,अंक: 5 और 6 ,रत्न - पन्ना,मंत्र ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं सः बुधाय नमः
श्री गणेश चालीसा
॥ दोहा ॥
जय गणपति सदगुण सदन,कविवर बदन कृपाल ।
विघ्न हरण मंगल करण,जय जय गिरिजालाल ॥
॥ चौपाई ॥
जय जय जय गणपति गणराजू ।मंगल भरण करण शुभः काजू ॥
जै गजबदन सदन सुखदाता ।विश्व विनायका बुद्धि विधाता ॥
वक्र तुण्ड शुची शुण्ड सुहावना ।तिलक त्रिपुण्ड भाल मन भावन ॥
राजत मणि मुक्तन उर माला ।स्वर्ण मुकुट शिर नयन विशाला ॥
पुस्तक पाणि कुठार त्रिशूलं ।मोदक भोग सुगन्धित फूलं ॥
सुन्दर पीताम्बर तन साजित ।चरण पादुका मुनि मन राजित ॥
धनि शिव सुवन षडानन भ्राता ।गौरी लालन विश्व-विख्याता ॥
ऋद्धि-सिद्धि तव चंवर सुधारे ।मुषक वाहन सोहत द्वारे ॥
कहौ जन्म शुभ कथा तुम्हारी ।अति शुची पावन मंगलकारी ॥
एक समय गिरिराज कुमारी ।पुत्र हेतु तप कीन्हा भारी ॥
भयो यज्ञ जब पूर्ण अनूपा ।तब पहुंच्यो तुम धरी द्विज रूपा ॥
अतिथि जानी के गौरी सुखारी ।बहुविधि सेवा करी तुम्हारी ॥
अति प्रसन्न हवै तुम वर दीन्हा ।मातु पुत्र हित जो तप कीन्हा ॥
मिलहि पुत्र तुहि, बुद्धि विशाला ।बिना गर्भ धारण यहि काला ॥
गणनायक गुण ज्ञान निधाना ।पूजित प्रथम रूप भगवाना ॥
अस कही अन्तर्धान रूप हवै ।पालना पर बालक स्वरूप हवै ॥
बनि शिशु रुदन जबहिं तुम ठाना ।लखि मुख सुख नहिं गौरी समाना ॥
सकल मगन, सुखमंगल गावहिं ।नाभ ते सुरन, सुमन वर्षावहिं ॥
शम्भु, उमा, बहुदान लुटावहिं ।सुर मुनिजन, सुत देखन आवहिं ॥
लखि अति आनन्द मंगल साजा ।देखन भी आये शनि राजा ॥
निज अवगुण गुनि शनि मन माहीं ।बालक, देखन चाहत नाहीं ॥
गिरिजा कछु मन भेद बढायो ।उत्सव मोर, न शनि तुही भायो ॥
कहत लगे शनि, मन सकुचाई ।का करिहौ, शिशु मोहि दिखाई ॥
नहिं विश्वास, उमा उर भयऊ ।शनि सों बालक देखन कहयऊ ॥
पदतहिं शनि दृग कोण प्रकाशा ।बालक सिर उड़ि गयो अकाशा ॥
गिरिजा गिरी विकल हवै धरणी ।सो दुःख दशा गयो नहीं वरणी ॥
हाहाकार मच्यौ कैलाशा ।शनि कीन्हों लखि सुत को नाशा ॥
तुरत गरुड़ चढ़ि विष्णु सिधायो ।काटी चक्र सो गज सिर लाये ॥
बालक के धड़ ऊपर धारयो ।प्राण मन्त्र पढ़ि शंकर डारयो ॥
नाम गणेश शम्भु तब कीन्हे ।प्रथम पूज्य बुद्धि निधि, वर दीन्हे ॥
बुद्धि परीक्षा जब शिव कीन्हा ।पृथ्वी कर प्रदक्षिणा लीन्हा ॥
चले षडानन, भरमि भुलाई ।रचे बैठ तुम बुद्धि उपाई ॥
चरण मातु-पितु के धर लीन्हें ।तिनके सात प्रदक्षिण कीन्हें ॥
धनि गणेश कही शिव हिये हरषे ।नभ ते सुरन सुमन बहु बरसे ॥
तुम्हरी महिमा बुद्धि बड़ाई ।शेष सहसमुख सके न गाई ॥
मैं मतिहीन मलीन दुखारी ।करहूं कौन विधि विनय तुम्हारी ॥
भजत रामसुन्दर प्रभुदासा ।जग प्रयाग, ककरा, दुर्वासा ॥
अब प्रभु दया दीना पर कीजै ।अपनी शक्ति भक्ति कुछ दीजै ॥
॥ दोहा ॥
श्री गणेश यह चालीसा,पाठ करै कर ध्यान ।
नित नव मंगल गृह बसै,लहे जगत सन्मान ॥
सम्बन्ध अपने सहस्त्र दश,ऋषि पंचमी दिनेश ।
पूरण चालीसा भयो,मंगल मूर्ती गणेश ॥
जन्म कुंडली दिखाने के लिए व वनबाने हेतु संपर्क करें -
शर्मा जी, जन्म कुंडली विशेषज्ञ व सलाहकार,9312002527, 9560518227
jankarikal@gmail.com
श्राद्ध कब करे , क्यों करे ,कैसे करे जानने के लिय क्लिक करे -
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें