विभिन समस्या पर ज्योतिष के उपाय
विभिन समस्या पर ज्योतिष के उपाय

विभिन समस्या पर ज्योतिष के उपाय
सतीश शर्मा
कमजोर और अशुभ (पीड़ित) ग्रह का दान किया जाता है। जो ग्रह आपकी कुंडली में कमजोर होकर खराब फल दे रहा है, उसकी वस्तुओं का दान करने से उसके नकारात्मक प्रभाव दूर होते हैं और जीवन में सकारात्मकता आती है।इसे समझने के लिए यहाँ कुछ मुख्य बातें दी गई हैं:कमजोर और अशुभ ग्रह (दान करें): यदि कोई ग्रह आपकी कुंडली में नीच का है या शत्रु राशि में बैठकर आपको नुकसान (बीमारी, रुकावटें, तनाव) पहुँचा रहा है, तो उस ग्रह की चीजों का दान करना चाहिए। ऐसा करने से उस ग्रह की बुरी ऊर्जा शांत हो जाती है। उदाहरण के लिए, यदि शनि कमजोर या पीड़ित है, तो शनिवार को काले तिल या लोहे का दान किया जाता है।
मजबूत ग्रह (दान न करें) – जो ग्रह आपकी कुंडली में पहले से ही मजबूत, उच्च अवस्था में हैं और आपको शुभ फल दे रहे हैं, उनका कभी भी दान नहीं करना चाहिए। मजबूत ग्रहों की ऊर्जा को बढ़ाने के लिए दान के बजाय उनके मंत्रों का जाप करना चाहिए या रत्न धारण करने चाहिए।
कर्ज से मुक्ति के लिए राशि के अनुसार विशेष उपाय और मंत्र बताए गए हैं (कुंडली के छठे भाव का संबंध कर्ज से होता है)
मेष, वृश्चिक (मंगल प्रभावित): मंगलवार को हनुमान जी को तुलसी का पत्ता और सिंदूर चढ़ाएं। ‘ऋण मोचन मंगल स्तोत्र’ का पाठ बहुत लाभकारी होता है।
वृषभ, तुला (शुक्र प्रभावित): शुक्रवार को मां लक्ष्मी को गुलाबी फूल अर्पित करें और मिश्री का दान करें। श्री यंत्र की पूजा करें।
मिथुन, कन्या (बुध प्रभावित): बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाएं। शिवलिंग पर थोड़े से तिल मिलाकर जल चढ़ाएं।
कर्क (चंद्रमा प्रभावित): सोमवार के दिन शिवलिंग पर गंगाजल अर्पित करें। पूर्णिमा के दिन चंद्रमा को अर्घ्य दें।
सिंह (सूर्य प्रभावित): रोजाना सुबह सूर्यदेव को जल में लाल चंदन या गुड़ मिलाकर अर्पित करें। आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ करें।
धनु, मीन (गुरु प्रभावित): गुरुवार को पीले वस्त्र पहनें और विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें। गाय को गुड़-रोटी खिलाएं।
मकर, कुंभ (शनि प्रभावित): शनिवार को पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। ‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का जाप करें।
ध्यान दे – कर्ज का लेन-देन कभी भी मंगलवार को नहीं करना चाहिए। प्रत्येक बुधवार को गाय को हरा चारा खिलाना कर्ज उतारने का सबसे अचूक उपाय माना जाता है।
कन्या विवाह संबंधित शंका समाधान
विवाह कहां होगा – माता-पिता अपनी कन्या का विवाह करने के लिए वर की कुंडली का गुण मिलान करते हैं। कन्या के भविष्य के प्रति चिंतित माता-पिता का यह कदम उचित है। किंतु, इसके पूर्व उन्हें यह देखना चाहिए कि लड़की का विवाह किस उम्र में, किस दिशा में तथा कैसे घर में होगा? उसका पति किस वर्ण का, किस सामाजिक स्तर का तथा कितने भाई-बहनों वाला होगा? लड़की की जन्म लग्न कुंडली से उसके होने वाले पति एवं ससुराल के विषय में सब कुछ स्पष्टतः पता चल सकता है। ज्योतिष विज्ञान में फलित शास्त्र के अनुसार लड़की की जन्म लग्न कुंडली में लग्न से सप्तम भाव उसके जीवन, पति, दाम्पत्य जीवन तथा वैवाहिक संबंधों का भाव है। इस भाव से उसके होने वाले पति का कद, रंग, रूप, चरित्र, स्वभाव, आर्थिक स्थिति, व्यवसाय या कार्यक्षेत्र, परिवार से संबंध कि आदि की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। यहां सप्तम भाव के आधार पर कन्या के विवाह से संबंधित विभिन्न तथ्यों का विश्लेषण प्रस्तुत है।
ससुराल की दूरी – सप्तम भाव में अगर वृष, सिंह, वृश्चिक या कुंभ राशि स्थित हो, तो लड़की की शादी उसके जन्म स्थान से 90 किलोमीटर के अंदर ही होगी। यदि सप्तम भाव में चंद्र, शुक्र तथा गुरु हों, तो लड़की की शादी जन्म स्थान के समीप होगी। यदि सप्तम भाव में चर राशि मेष, कर्क, तुला या मकर हो, तो विवाह उसके जन्म स्थान से 200 किलोमीटर के अंदर होगा। अगर सप्तम भाव में द्विस्वभाव राशि मिथुन, कन्या, धनु या मीन राशि स्थित हो, तो विवाह जन्म स्थान से 80 से 100 किलोमीटर की दूरी पर होगा। यदि सप्तमेश सप्तम भाव से द्वादश भाव के मध्य हो, तो विवाह विदेश में होगा या लड़का शादी करके लड़की को अपने साथ लेकर विदेश चला जाएगा।
शादी की आयु – यदि जातक या जातका की जन्म लग्न कुंडली में सप्तम भाव में सप्तमेश बुध हो और वह पाप ग्रह से प्रभावित न हो, तो शादी 13 से 18 वर्ष की आयु सीमा में होता है। सप्तम भाव में सप्तमेश मंगल पापी ग्रह से प्रभावित हो, तो शादी 18 वर्ष के अंदर होगी। शुक्र ग्रह युवा अवस्था का द्योतक है। सप्तमेश शुक्र पापी ग्रह से प्रभावित हो, तो 25 वर्ष की आयु में विवाह होगा। चंद्रमा सप्तमेश होकर पापी ग्रह से प्रभावित हो, तो विवाह 22 वर्ष की आयु में होगा। बृहस्पति सप्तम भाव में सप्तमेश होकर पापी ग्रहों से प्रभावित न हो, तो शादी 27-28 वें वर्ष में होगी। सप्तम भाव को सभी ग्रह पूर्ण दृष्टि से देखते हैं तथा सप्तम भाव में शुभ ग्रह से युक्त हो कर चर राशि हो, तो जातिका का विवाह दी गई आयु में संपन्न हो जाता है। यदि किसी लड़की या लड़के की जन्मकुंडली में बुध स्वराशि मिथुन या कन्या का होकर सप्तम भाव में बैठा हो, तो विवाह बाल्यावस्था में होगा।
विवाह वर्ष ज्ञात करने की ज्योतिषीय विधि- आयु के जिस वर्ष में गोचरस्थ गुरु लग्न, तृतीय, पंचम, नवम या एकादश भाव में आता है, उस वर्ष शादी होना निश्चित समझना चाहिए। परंतु शनि की दृष्टि सप्तम भाव या लग्न पर नहीं होनी चाहिए। अनुभव में देखा गया है कि लग्न या सप्तम में बृहस्पति की स्थिति होने पर उस वर्ष शादी हुई है। विवाह कब होगा यह जानने की दो विधियां यहां प्रस्तुत हैं। जन्म लग्न कुंडली में सप्तम भाव में स्थित राशि अंक में 10 जोड़ दें। योगफल विवाह का वर्ष होगा। सप्तम भाव पर जितने पापी ग्रहों की दृष्टि हो, उनमें प्रत्येक की दृष्टि के लिए 4-4 वर्ष जोड़ योगफल विवाह का वर्ष होगा।
जहां तक विवाह की दिशा का प्रश्न है, ज्योतिष के अनुसार गणित करके इसकी जानकारी प्राप्त की जा सकती है। जन्मांग में सप्तम भाव में स्थित राशि के आधार पर शादी की दिशा ज्ञात की जाती है। उक्त भाव में मेष, सिंह या धनु राशि एवं सूर्य और शुक्र ग्रह होने पर पूर्व दिशा, वृष, कन्या या मकर राशि और चंद्र, शनि ग्रह होने पर दक्षिण दिशा, मिथुन, तुला या कुंभ राशि और मंगल, राहु, केतु ग्रह होने पर पश्चिम दिशा, कर्क, वृश्चिक, मीन या राशि और बुध और गुरु ग्रह होने पर उत्तर दिशा की तरफ शादी होगी। अगर जन्म लग्न कुंडली में सप्तम भाव में कोई ग्रह न हो और उस भाव पर अन्य ग्रह की दृष्टि न हो, तो बलवान ग्रह की स्थिति राशि में शादी की दिशा समझनी चाहिए। एक अन्य नियम के अनुसार शुक्र जन्म लग्न कुंडली में जहां कहीं भी हो, वहां से सप्तम भाव तक गिनें। उस सप्तम भाव की राशि स्वामी की दिशा में शादी होनी चाहिए। जैसे अगर किसी कुंडली में शुक्र नवम भाव में स्थित है, तो उस नवम भाव से सप्तम भाव तक गिनें तो वहां से सप्तम भाव वृश्चिक राशि हुई। इस राशि का स्वामी मंगल हुआ। मंगल ग्रह की दिशा दक्षिण है। अतः शादी दक्षिण दिशा में करनी चाहिए।
पति कैसा मिलेगा – ज्योतिष विज्ञान में सप्तमेश अगर शुभ ग्रह (चंद्रमा, बुध, गुरु या शुक्र) हो या सप्तम भाव में स्थित हो या सप्तम भाव को देख रहा हो, तो लड़की का पति सम आयु या दो-चार वर्ष के अंतर का, गौरांग और सुंदर होना चाहिए। अगर सप्तम भाव पर या सप्तम भाव में पापी ग्रह सूर्य, मंगल, शनि, राहु या केतु का प्रभाव हो, तो बड़ी आयु वाला अर्थात लड़की की उम्र से 5 वर्ष बड़ी आयु का होगा। सूर्य का प्रभाव हो, तो गौरांग, आकर्षक चेहरे वाला, मंगल का प्रभाव हो, तो लाल चेहरे वाला होगा। शनि अगर अपनी राशि का उच्च न हो, तो वर काला या कुरूप तथा लड़की की उम्र से काफी बड़ी आयु वाला होगा। अगर शनि उच्च राशि का हो, तो, पतले शरीर वाला गोरा तथा उम्र में लड़की से 12 वर्ष बड़ा होगा। सप्तमेश अगर सूर्य हो, तो पति गोल मुख तथा तेज ललाट वाला, आकर्षक, गोरा सुंदर, यशस्वी एवं राजकर्मचारी होगा। चंद्रमा अगर सप्तमेश हो, तो पति शांत चित्त वाला गौर वर्ण का, मध्यम कद तथा, सुडौल शरीर वाला होगा। मंगल सप्तमेश हो, तो पति का शरीर बलवान होगा। वह क्रोधी स्वभाव वाला, नियम का पालन करने वाला, सत्यवादी, छोटे कद वाला, शूरवीर, विद्वान तथा भ्रातृ-प्रेमी होगा तथा सेना, पुलिस या सरकारी सेवा में कार्यरत होगा।
पति कितने भाई-बहनों वाला होगा – लड़की की जन्म लग्न कुंडली में सप्तम भाव से तृतीय भाव अर्थात नवम भाव उसके पति के भाई-बहन का स्थान होता है। उक्त भाव में स्थित ग्रह तथा उस पर दृष्टि डालने वाले ग्रह की संख्या से 2 बहन, मंगल से 1 भाई व 2 बहन, बुध से 2 भाई 2 बहन वाला कहना चाहिए। लड़की की जन्मकुंडली में पंचम भाव उसके पति के बड़े भाई-बहन का स्थान है। पंचम भाव में स्थित ग्रह तथा दृष्टि डालने वाले ग्रहों की कुल संख्या उसके पति के बड़े भाई-बहन की संख्या होगी। पुरुष ग्रह से भाई तथा स्त्री ग्रह से बहन समझना चाहिए।
पति का मकान कहां एवं कैसा होगा – लड़की की जन्म लग्न कुंडली में उसके लग्न भाव से तृतीय भाव पति का भाग्य स्थान होता है। इसके स्वामी के स्वक्षेत्री या मित्रक्षेत्री होने से पंचम और राशि वृद्धि से या तृतीयेश से पंचम जो राशि हो, उसी राशि का श्वसुर का गांव या नगर होगा। प्रत्येक राशि में 9 अक्षर होते हैं। राशि स्वामी यदि शत्रुक्षेत्री हो, तो प्रथम, द्वितीय अक्षर, सम राशि का हो, तो तृतीय, चतुर्थ अक्षर मित्रक्षेत्री हो, तो पंचम, षष्ठम अक्षर, अपनी ही राशि का हो तो सप्तम, अष्टम अक्षर, उच्च क्षेत्री हो, तो नवम अक्षर प्रसिद्ध नाम होगा। तृतीयेश के शत्रुक्षेत्री होने से जिस राशि में हो उससे चतुर्थ राशि ससुराल या भवन की होगी। यदि तृतीय से शत्रु राशि में हो और तृतीय भाव में शत्रु राशि में पड़ रहा हो ,तो दसवी राशि ससुर के गांव की होगी। लड़की की कुंडली में दसवां भाव उसके पति का भाव होता है। दशम भाव अगर शुभ ग्रहों से युक्त या दृष्ट हो, या दशमेश से युक्त या दृष्ट हो, तो पति का अपना मकान होता है। राहु, केतु, शनि, से भवन बहुत पुराना होगा। मंगल ग्रह में मकान टूटा होगा। सूर्य, चंद्रमा, बुध, गुरु एवं शुक्र से भवन सुंदर, सीमेंट का दो मंजिला होगा। अगर दशम स्थान में शनि बलवान हो, तो मकान बहुत विशाल होगा।
पति की नौकरी – लड़की की जन्म लग्न कुंडली में चतुर्थ भाव पति का राज्य भाव होता है। अगर चतुर्थ भाव बलयुक्त हो और चतुर्थेश की स्थिति या दृष्टि से युक्त सूर्य, मंगल, गुरु, शुक्र की स्थिति या चंद्रमा की स्थिति उत्तम हो, तो नौकरी का योग बनता है।
पति की आयु – लड़की के जन्म लग्न में द्वितीय भाव उसके पति की आयु भाव है। अगर द्वितीयेश शुभ स्थिति में हो या अपने स्थान से द्वितीय स्थान को देख रहा हो, तो पति दीर्घायु होता है। अगर द्वितीय भाव में शनि स्थित हो या गुरु सप्तम भाव, द्वितीय भाव को देख रहा हो, तो भी पति की आयु 75 वर्ष की होती है।
विवाह हेतु उपाय
विवाह में देरी या बाधाओं को दूर करने के लिए, गुरुवार को विष्णु-लक्ष्मी जी की पूजा और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ का 11 माला जाप करें। सोमवार को भगवान शिव का अभिषेक करें, शुक्ल पक्ष के गुरुवार को पीले कपड़े पहनें, और विवाह की शीघ्र कामना हेतु शिवलिंग पर कलावा (तीन गांठों के साथ) अर्पित करें। इन उपायों से शीघ्र विवाह के योग बन सकते हैं।
बृहस्पति (गुरु) के उपाय (पुरुषों और महिलाओं के लिए)-हर गुरुवार को सुबह स्नान के बाद भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें।
भगवान विष्णु को पीले फूल चढ़ाएं और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ मंत्र का तुलसी की माला से 11 माला जाप करें।
गुरुवार को व्रत रखें और भोजन में पीले रंग की वस्तुओं (जैसे पीले चावल या बेसन के लड्डू) का सेवन करें।
किसी भी उम्र के विवाह योग्य पुरुष, शीघ्र और अच्छे विवाह के लिए रोज सुबह या शाम को माता दुर्गा के सामने दीपक जलाकर एक निश्चित समय पर बैठकर ‘पत्नीं मनोरमाम देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्। तारिणीं दुर्ग संसार सागरस्य कुलोद्भवाम्॥’ मंत्र का एक या तीन माला जप करें और शीघ्र विवाह की प्रार्थना करें, यह उपाय पुरुषों के लिए विशेष है ।
शिव-पार्वती की पूजा – सोमवार के दिन मंदिर में भगवान शिव और पार्वती की पूजा करें। शिवलिंग पर दूध, दही, शहद और चंदन अर्पित करें।’ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का 108 या 324 बार जाप करें।
विवाह की बाधा दूर करने के लिए, शिवलिंग पर कलावा (धागा) चढ़ाते समय अपनी मनोकामना कहें,
रोज शाम को माता दुर्गा की पूजा करें और लाल फूल चढ़ाएं।
कुंडली में यदि गुरु कमजोर है, तो पीले पुखराज धारण करने से पहले ज्योतिषी से सलाह अवश्य लें।
विवाह में रुकावट आ रही हो तो घर में पीपल के पेड़ की पूजा करने से भी लाभ होता है।
इन उपायों को पूरी निष्ठा और सात्विक मन से करना चाहिए, और लगातार कुछ महीनों तक करने से बेहतर परिणाम मिलते हैं।
मकान प्राप्ति के लिए उपाय
मकान प्राप्ति के लिए मंगलवार के दिन हनुमान जी के मंदिर में जाकर उन्हें सिंदूर अर्पित करें और 21 बार हनुमान चालीसा का पाठ करें। उनसे शीघ्र मकान प्राप्ति की प्रार्थना करें ।
मकान प्राप्ति के लिए भगवान गणेश को प्रतिदिन 21 दिनों तक लाल रंग का फूल चढ़ाएं और अपना घर होने की कामना करें।
मनचाही जगह या भूमि प्राप्ति के लिए उस स्थान की थोड़ी सी मिट्टी लाकर एक कांच की शीशी में गंगाजल और कपूर के साथ पूजा स्थान में रखें।
भूमि और मकान की अभिलाषा रखने वालों के लिए 1000 पार्थिव शिवलिंग का पूजन करना फलदायी माना जाता।
घर खरीदने में बाधा आ रही है तो लाल कपड़े में कुमकुम, लौंग, बिंदी और मुट्ठी भर मिट्टी बांधकर नदी में प्रवाहित करना शुभ माना जाता है ।
मंगलवार के दिन गणेश जी को गेहूं और गुड़ का भोग लगाएं या भगवान कृष्ण को माखन-मिश्री अर्पित करें ।
वास्तु दोष दूर करने के लिए घर के उत्तर-पूर्व में कछुआ रखने जैसे उपाय किए जाते हैं ।
भगवान वराह पृथ्वी (वसुंधरा) के अधिपति हैं। भूमि प्राप्ति के लिए उनके मंत्र “ॐ नमः श्रीवराहाय धरण्युद्धारणाय स्वाहा” का नियमित जाप करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है।
ज्योतिष में भूमि का कारक ग्रह मंगल है। अपनी इच्छापूर्ति के लिए तांबे के यंत्र पर त्रिकोण बनाकर लाल वस्त्र पर रखकर पूजन करें।
प्रतिदिन या मंगलवार के दिन गाय को गुड़ और मसूर की दाल खिलाने से भूमि संबंधी अड़चनें दूर होती हैं ।
शुक्ल पक्ष के मंगलवार को इच्छित भूमि से थोड़ी सी मिट्टी लाकर लाल कपड़े में बांधकर घर के पूजा स्थल में रखें और धूप-दीप दिखाएं।
वाहन प्राप्ति और उसके सुख के लिए ज्योतिष में शुक्र (वैभव के कारक) और शनि (वाहन के कारक) की अनुकूलता को महत्वपूर्ण माना जाता है । अपनी कुंडली के चौथे भाव को मजबूत करें और विशेष उपायों का पालन करें। यात्रा से पहले ‘ॐ गं गणपतये नमः’ का जाप करें । वाहन खरीदने के बाद हनुमान जी के मंदिर में पूजा करवाकर, सिंदूर से बोनट पर स्वस्तिक बनाएं । नशा करने से बचें, डैशबोर्ड पर देवी-देवता का चित्र लगाएं और वाहन को हमेशा साफ रखें ।
शुभ दिन और नक्षत्र – सोमवार, बुधवार, गुरुवार, शुक्रवार या रविवार को वाहन खरीदें । श्रवण, धनिष्ठा, और पुष्य, रोहिणी, मृगशिरा,रेवती,और पुनर्वसु नक्षत्र जैसे नक्षत्रों को विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
शुभ नक्षत्र – वाहन खरीदने के लिए बेहद शुभ माने जाते हैं। शुभ रंग – सफेद या क्रीम रंग का वाहन सभी के लिए अनुकूल रहता है।
संतान सुख के लिए उपाय
ज्योतिष में संतान प्राप्ति के लिए मुख्य रूप से गुरु (बृहस्पति) ग्रह और कुंडली के पंचम भाव (संतान का घर) को जिम्मेदार माना जाता है। आपकी राशि (चंद्र राशि) के अनुसार कुछ आसान और प्रभावी उपाय नीचे दिए गए हैं।
मेष, सिंह और धनु (अग्नि राशियाँ) – रोज सुबह सूर्यदेव को जल चढ़ाएं और “ॐ आदित्याय नमः” मंत्र का १०८ बार जाप करें। लाल गाय को गुड़ और रोटी खिलाना भी बहुत शुभ होता है।
वृषभ, कन्या और मकर (पृथ्वी राशियाँ) – भगवान गणेश की आराधना करें और उन्हें रोज़ दूर्वा (घास) अर्पित करें। प्रतिदिन “ॐ गं गणपतये नमः” का १०८ बार जाप करें।
मिथुन, तुला और कुंभ (वायु राशियाँ) – भगवान शिव का पंचामृत से अभिषेक करें। संतान गोपाल मंत्र या “ॐ नमः शिवाय” का नियमित जाप करें।
कर्क, वृश्चिक और मीन (जल राशियाँ) – माता पार्वती और भगवान शिव की पूजा करें। बृहस्पतिवार के दिन पीले वस्त्र धारण करें और केले के पेड़ की परिक्रमा करें।
संतान गोपाल मंत्र – प्रतिदिन सुबह शुद्ध मन से “ॐ देवकी सुत गोविंद वासुदेव जगतपते देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहम शरणं गताः” मंत्र का ११ बार या १०८ बार जाप करें।
गुरु ग्रह को मजबूत करें – गुरुवार के दिन केले के पेड़ पर जल चढ़ाएं और शाम के समय शुद्ध घी का दीपक जलाएं। ब्राह्मणों को पीले फल या चने की दाल का दान करें।
गौ माता की सेवा – रोजाना अपने भोजन में से पहली रोटी गाय के लिए निकालें।
पीपल का पेड़ – किसी सार्वजनिक स्थान पर पीपल का पौधा लगाएं और उसकी सेवा करें।
यह सलाह दी जाती है कि अगर कोई बहुत गंभीर समस्या या कुंडली में विशेष दोष (जैसे नाड़ी दोष, पितृ दोष) है, तो किसी योग्य ज्योतिषी से अपनी कुंडली का विश्लेषण अवश्य कराएं।
संतान प्राप्ति की कामना के लिए प्रतिदिन कृष्ण भगवान के बाल रूप की पूजा करें और ‘ॐ देवकीसुत गोविंद वासुदेव जगत्पते। देहि मे तनयं कृष्ण त्वामहं शरणं गतः॥’ मंत्र का 108 बार जाप करें। संतान प्राप्ति की कामना के लिए नियमित रूप से हरिवंश पुराण का पाठ करवाना/करना बहुत फलदायी माना जाता है। भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। सोमवार को शिवलिंग पर शहद और दूध मिश्रित जल चढ़ाना शुभ माना जाता है । कुछ लोग 21 मंगलवार तक हनुमान जी का व्रत रखते हैं और संतान सुख के लिए प्रार्थना करते हैं । रविवार को छोड़कर अन्य दिनों में पीपल के पेड़ के नीचे घी का दीपक जलाकर उसकी परिक्रमा करना भी उपाय है।
संतान सुख का मुख्य कारक बृहस्पति होता है। यदि कुंडली में गुरु कमजोर या पीड़ित हो, तो संतान प्राप्ति में बाधा आती है। कुंडली के पंचम भाव (संतान भाव) में यदि राहु, केतु, शनि या मंगल जैसे अशुभ ग्रह बैठें हों या उनकी दृष्टि हो, तो गर्भधारण में समस्याएं आती हैं।
व्यापार वृद्धि के टोटके
व्यापार में वृद्धि – व्यापार में वृद्धि लाने के लिए गोमती चक्र का प्रयोग जरूर करे। यह बिज़नेस बढ़ाने का एक असरदार टोटका है। 3 , 5 या 7 गोमती चक्र लेके एक चांदी के तार में पीरों लें और फिर अपनी जेब में हमेशा रखे। ऐसा करने से आपको बिज़नेस में सफलता जरूर प्राप्त होगी।
गुरुवार के दिन शुक्ल पक्ष में हल्दी और केसर के मिश्रण से 12 गोमती चक्र पर तिलक लगाएं। इनको फिर एक साफ़ कपडे में बांधकर अपनी दुकान की चौखट पर रखदें। यह बिज़नेस बढ़ाने के टोटके में से सबसे जल्दी असर दिखाने वाला टोटका है।
झाड़ू को लक्ष्मी माता का प्रतिक मानते है। इसीलिए इसका प्रयोग ढंग से करना जरूरी है। के अनुसार झाड़ू को ऐसी जगह पर रखना चाहिए ताकि किसी भी बाहर वाले की नज़र उसपे ना पढ़ें।
शुक्रवार के दिन लक्ष्मी नारायण मंदिर में गुड़ चना और चना बांटना चाहिए ऐसा करने से घर में रहने वाले सदस्यों के बीच में प्रेम बढ़ता है और जिस घर में लोग प्रेम से रहते हैं वहां लक्ष्मी माता अवश्य आती है तो आप आसानी से सफलता प्राप्त पा सकते हैं को आप आसानी से अपना कर सफलता पा सकते है।
व्यापार वृद्धि पाने लिए गाये,कुत्ते और कौओं को रोटी भी खिलानी चाहिए। रोटी में घी और कुछ मीठा लगाने के बाद खिलानी चाहिए। यह सब बिज़नेस बढ़ाने के तरीके हैं।एक चमकीले लाल कपडे में एक नारियल बांध ले। इस नारियल को अपनी दुकान या अपने व्यापर करने की जगह के मंदिर या तिजोरी में रखें। हर सुबह इस नारियल को अगरबत्ती दिखाएं। बिज़नेस बढ़ाने के उपाय में से यह एक सरल उपाए है जिसे अपनाकर आप अपना बिज़नेस बढ़ा सकते है।अपना धन बढ़ाने के लिए थोड़ा सा कपूर और रोली जलाएं। इनकी राख को एक पुड़िया में बांधकर अपनी दुकान या व्यापार के धन रखने की जगह पर रखें। ऐसा करने से आपको सफलता प्राप्त होगी। थोड़ा सा गंगाजल लेकर उसमे फूंक मारे और गायत्री मंत्र का 21 बार जाप करे। उसके बाद इसी गंगाजल को अपनी दुकान या व्यापार करने के स्थान की दीवारों पर छिड़के। यह कार्य 7 सोमवार तक करे। आपको व्यापार में सफलता जरूर मिलेगी। सोमवार के दिन सफ़ेद चंदन खरीद कर अपने घर के मंदिर में रखें। एक सप्ताह तक उसे धुप बत्ती दिखाएं। 1 सप्ताह बाद उससे अपनी दुकान की तिजोरी में रखदें। ऐसा करने से आपको धन में बरकत मिलेगी और बिज़नेस में भी सफलता मिलेगी। दुकान या व्यापर की जगह में घुसते वक़्त अपने दाहिने हाथ से जमीन छुए और अपने सर या दिल पर लगाएं। ऐसा करने से आपके मन में काम की तरफ सम्मान की भावना बढ़ती और सकारात्मक ऊर्जा भी पैदा होती है। यह सकारात्मक ऊर्जा यह नकारात्मक ऊर्जा आप के कारोबार में बढ़ोतरी उत्पन्न करती है। कार्यस्थल या दुकान पर अंदर जाने से पहले अपना दाहिना हाथ ज़मीन पर लगाएं और उसके बाद मस्तक या हृदय पर लगाएं। ऐसा करने से आपको असीम लाभ प्राप्त होगा। व्यापार या कारोबार वृद्धि के लिए ये बहुत ही आसान उपाय है।
व्यापार व कारोबार में वृद्धि के लिए लक्ष्मी नारायण के मंदिर में हर शुक्रवार गुड़ चना बाँटें। मंदिर में लक्ष्मी मां की प्रतिमा के समक्ष खुशबूदार अगरबत्ती जलाएं और प्रार्थना करें। ये आसान उपाय आपको हर तरह से समृद्धि दिलाएगा।
व्यापार में स्थायी लाभ पाने के लिए कुत्ता, गाय और कौवों को रोटी ज़रूर खिलाएं।
आप नींबू और हरी मिर्च के प्रयोग से भी अपने व्यापार व कारोबार को बढ़ा सकते हैं। इसके लिए 7 हरी मिर्च और 7 नींबू लेकर माला बनाएं और उसे दुकान में वहां पर टांगें, जहाँ ग्राहक की निगाह पड़े। ये बहुत ही आसान सा उपाय है, इसके आपको काफी अच्छे परिणाम मिलेंगे।
आप कच्चे सूत के प्रयोग से भी अपने व्यापार में तरक्की पा सकते हैं। एक कच्चे सूत को केसर के घोल में भिगोकर रंग दें और फिर इसे अपने कार्य स्थल पर बांध दें। ऐसा करने से व्यापार में सफलता मिलती है।
कार्यक्षेत्र पर जाते वक्त अपने इष्ट देव का ध्यान करें और कोई सुगंधित इत्र लगाएं, ऐसा करने से व्यापार में सफलता मिलेगी।
कपूर और रोली को जलाकर उसकी राख को एक कागज में रख लें और उसे अपनी दुकान या घर के उस स्थान पर रखें, जहां आप अपना धन रखते हैं।
लड़ाई, झगड़े व क्लेश वाले घरों में लक्ष्मी का निवास नहीं होता है, ऐसे में घर में शांति व प्रेम बनाएं रखें।
शाम के समय सोएं नहीं साथ ही झाड़ू भी न लगाएं क्योंकि ऐसा करने से लक्ष्मी रुष्ट हो जाती हैं। पूजा स्थल पर दीपक ज़रूर जलाएं।
एक नारियल को चमकीले लाल नए कपड़े में लपेटकर घर और व्यापार स्थल के पूजा स्थान अथवा तिजोरी में रखें। इसमें रोजाना धूप या अगरबत्ती दिखाने से भी व्यापार में लाभ मिलता है।
कार्यक्षेत्र पर सफलता के लिए किसी सफल व्यक्ति को अपना आदर्श बना लें और उस व्यक्ति की तस्वीर अपने कक्ष में लगाएं। रोजाना समय निकालकर उस व्यक्ति के जीवन के बारे में अध्ययन करें और खुद को उसके बराबर लाने की योजना बनाएं।
व्यापारिक स्थल के पूजा घर में स्फटिक श्री यंत्र और एकाक्षी नारियल स्थापित करके प्रतिदिन गुलाब की सुगंधित अगरबत्ती से पूजा करने से व्यापार में निश्चित सफलता प्राप्त होती है।
व्यापार में मंदी आ जाने पर किसी साफ शीशी में सरसों का तेल भरें और उसे किसी बहती नदी या तालाब के जल में प्रवाहित कर दें। व्यापार फिर से उठने लग जाएगा।
शुक्ल पक्ष में किसी भी दिन अपनी फैक्ट्री या दुकान के दरवाजे के बाहर दोनों तरफ थोडा सा गेहूं का आटा रख दें। ध्यान रहे इस कार्य को करते वक्त किसी की नज़र आप पर न पड़े।
कारोबार में नुकसान या झगड़े की स्थिति होने पर अपने वज़न के बराबर कच्चा कोयला लेकर पानी में प्रवाहित कर दें, ऐसा करने से अवश्य लाभ होगा।
व्यापार को बढ़ाने के लिए शनिवार को पीपल के पेड़ से एक पत्ता तोड़ लाएं, उसे धूप-बत्ती दिखाकर अपनी दुकान की गद्दी जिस पर आप बैठते हैं, उसके नीचे रख दें। सात शनिवार तक लगातार ऐसा ही करें। जब गद्दी के नीचे सात पत्ते इकट्ठे हो जाएं तो उन्हें एक साथ किसी तालाब या कुएं में बहा दें, आपका व्यवसाय चल निकलेगा।
किसी ऐसी दुकान जो काफी चलती हो, वहां से लोहे की कोई कील या नट आदि शनिवार के दिन ख़रीदकर ले आएं। काली उड़द के 10-15 दानों के साथ उसे एक शीशी में रख लें। धूप-दीप से पूजा कर ग्राहकों की नज़रों से बचाकर दुकान में रख लें। व्यवसाय खूब चलेगा।
शनिवार को सात हरी मिर्च और सात नींबू की माला बनाकर दुकान में ऐसे टांगें कि उस पर ग्राहक की नज़र पड़े।
व्यापार स्थल पर किसी भी प्रकार की समस्या हो, तो वहां श्वेतार्क गणपति तथा एकाक्षी श्री फल की स्थापना करें और फिर नियमित रूप से धूप, दीप आदि से पूजा करें तथा सप्ताह में एक बार मिठाई का भोग लगाकर प्रसाद यथासंभव अधिक से अधिक लोगों को बाँटें। चाहें तो भोग नित्य प्रति भी लगा सकते हैं।
नौकरी या काम-धंधे में बरकत नहीं आती हो तो गाय की धूलि लेकर उसको ललाट पर लगाकर काम-धंधे पर जाएँ l धीरे-धीरे बरकत होने लगेगी और विघ्न हटने लगेंगे l
ग्रह दोष की शांति के लिए
कुंडली में ग्रहों की अशुभ स्थिति हो तो दुर्भाग्य का सामना करना पड़ सकता है। किसी एक ग्रह की वजह से भी हमारे कार्यों में बाधाएं आ सकती हैं। यहां जानिए ज्योतिष शास्त्र के कुछ ऐसे उपाय,जिनसे ग्रहों के दोष दूर होते हैं और बाधाएं दूर हो सकती हैं।
सूर्य से संबंधित दोष को दूर करने के लिए शिवलिंग पर पीले फूल अर्पित करना चाहिए । चंद्र से संबंधित दोष दूर करने के लिए शिवलिंग पर दूध चढ़ाएं। मंगल दोष दूर करने के लिए शिवलिंग पर कुम -कुम और लाल पुष्प अर्पित करना चाहिए । बुद्ध संबंधित दोषों से मुक्ति के लिए शिवलिंग पर बिल्ब पत्र अर्पित करें । गुरु के दोषों को दूर करने के लिए शिवलिंग पर चने की दाल और बेसन के लड्डू अर्पित करें। शुक्र के दोष दूर करने के लिए शिवलिंग पर हर रोज जल अर्पित करें । शनि, राहु और केतु से संबंधित दोषों से मुक्ति के लिए शिवलिंग पर काले तिल अर्पित करना चाहिए ।
स्वस्थ संबंधी उपाय
ज्योतिष और चिकित्सा शास्त्र के अनुसार, हर राशि का संबंध शरीर के किसी न किसी खास अंग और तत्व (अग्नि, पृथ्वी, वायु, जल) से होता है। इसी आधार पर जातक को कुछ विशेष बीमारियां होने की संभावना अधिक होती है।
राशि के अनुसार रोग और उनसे बचने के आसान उपाय ।
मेष – रोग,रक्तचाप, सिरदर्द, अनिद्रा, और चोट-चपेट की समस्या।उपाय: रोजाना सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करें। तांबे के बर्तन में पानी पिएं और गुस्से पर नियंत्रण रखें।
वृषभ – रोग,गले में खराश, थायराइड, टॉन्सिल, और त्वचा संबंधी रोग।
उपाय – खूब सारा पानी पिएं। भगवान शिव की उपासना करें और ठंडी चीजों से परहेज करें।
मिथुन – रोग, फेफड़े और श्वास नली से जुड़ी समस्या, एलर्जी और मानसिक तनाव।
उपाय – नियमित रूप से अनुलोम-विलोम (प्राणायाम) करें। तुलसी का सेवन करें और ध्यान लगाएं।
कर्क – रोग, पाचन तंत्र कमजोर होना, पेट दर्द, कफ, और भावनात्मक तनाव।
उपाय – रात को हल्का भोजन करें। चांदी के गिलास में पानी पिएं। पूर्णिमा का व्रत रखना फायदेमंद होता है।
सिंह रोग – हृदय रोग, रीढ़ की हड्डी में दर्द, और आंखों की समस्या।
उपाय – अपने दिल और सेहत को दुरुस्त रखने के लिए रोजाना व्यायाम करें। लाल वस्त्रों का दान करें और नियमित सूर्य नमस्कार करें।
कन्या – रोग, गैस, कब्ज, आंतों के रोग, और एनीमिया (खून की कमी)।
उपाय – फाइबर युक्त (पौष्टिक) भोजन खाएं। गाय को हरी घास खिलाएं और विष्णु जी की पूजा करें।
तुला – रोग, किडनी या मूत्राशय की समस्या, मधुमेह, और कमर दर्द।
उपाय – पानी भरपूर मात्रा में पिएं। शनि देव के मंत्रों का जाप करें और चीनी का सेवन कम करें।
वृश्चिक – रोग, हार्मोनल असंतुलन, गुप्त रोग, और पाइल्स।
उपाय: स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। हनुमान जी की पूजा करें और मंगलवार को मीठा बांटे।
धनु – रोग, लिवर की समस्या, डायबिटीज, और जांघों में दर्द।
उपाय – हल्दी और शहद का सेवन करें। गुरुवार के दिन व्रत रखें और गाय को चने की दाल खिलाएं।
मकर – रोग जोड़ों का दर्द (अर्थराइटिस), गैस, और त्वचा के रोग।
उपाय – तेल-मसालेदार भोजन से बचें। शनि देव को तेल चढ़ाएं और पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाएं।
कुंभ – रोग,नसों से जुड़ी समस्या, जलोदर (पेट में पानी भरना), और मानसिक चिंता।
उपाय – अपनी दिनचर्या में योग को शामिल करें। कुत्ते और पक्षियों को दाना-पानी दें।
मीन – रोग, पैरों में दर्द, लिवर के रोग, और मोटापा।
उपाय – ज्यादा देर एक ही जगह न बैठें। केले के पेड़ की पूजा करें और जरूरतमंदों को पीले वस्त्र दान करें।
पेट सम्बन्धी तकलीफों में – नींबू के रस में सौंफ भिगो दें और जितना नींबू का रस, सौंफ पी ले l फिर सौंफ में थोड़ा काला नमक या संत कृपा चूर्ण मिलाकर तवे में सेंक कर रख दो l ये लेने से पेट का भारीपन, बदहाजमा दूर होगा और भूख खुलकर लगेगी l कब्ज़ की तकलीफ भी ठीक हो जायेगी l
पढाई में आशातीत लाभ हेतु
विद्या या ज्ञान प्राप्त करने के लिए एकाग्रता और देवी सरस्वती का आशीर्वाद सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।
सरस्वती मंत्र का जाप – हर सुबह स्नान करके “ॐ ऐं सरस्वत्यै नमः” मंत्र का १०८ बार जाप करें。 यह बुद्धि तेज करता है और याददाश्त बढ़ाता है।
सही दिशा में पढ़ाई: पढ़ाई करते समय अपना मुँह हमेशा पूर्व या उत्तर दिशा की ओर रखें। इससे दिमाग में नई ऊर्जा आती है और एकाग्रता बढ़ती है।
गायत्री मंत्र – प्रतिदिन सुबह और शाम गायत्री मंत्र का जाप करने से बुद्धि का विकास होता है。
अपनी किताबों के बीच में मोर पंख रखने से ज्ञान और विद्या की प्राप्ति होती है।
भगवद गीता के कुछ श्लोक रोज पढ़ने या किसी बुजुर्ग को पढ़ते सुनने से शिक्षा के मार्ग में आने वाली बाधाएँ दूर होती हैं ।
विद्यार्थी अध्ययन-कक्ष में अपने इष्टदेव या गुरुदेव का श्रीविग्रह अथवा स्वस्तिक या ॐकार का चित्र रखें तथा नियमित अध्ययन से पूर्व उसे 10-15 मिनट अपनी आँखों की सीध में रखकर पलकें गिराये बिना एकटक देखें अर्थात त्राटक करें | इससे पढ़ाई में आशातीत लाभ होता हैं |
एकादशी के दिन करने योग्य
एकादशी व्रत के पुण्य के समान और कोई पुण्य नहीं है । जो पुण्य सूर्यग्रहण में दान से होता है, उससे कई गुना अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है । जो पुण्य गौ-दान सुवर्ण-दान, अश्वमेघ यज्ञ से होता है, उससे अधिक पुण्य एकादशी के व्रत से होता है । एकादशी करनेवालों के पितर नीच योनि से मुक्त होते हैं और अपने परिवारवालों पर प्रसन्नता बरसाते हैं ।इसलिए यह व्रत करने वालों के घर में सुख-शांति बनी रहती है । धन-धान्य, पुत्रादि की वृद्धि होती है । कीर्ति बढ़ती है, श्रद्धा-भक्ति बढ़ती है, जिससे जीवन रसमय बनता है । परमात्मा की प्रसन्नता प्राप्त होती है ।पूर्वकाल में राजा नहुष, अंबरीष, राजा गाधी आदि जिन्होंने भी एकादशी का व्रत किया, उन्हें इस पृथ्वी का समस्त ऐश्वर्य प्राप्त हुआ ।भगवान शिवजी ने नारद से कहा है : एकादशी का व्रत करने से मनुष्य के सात जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं, इसमे कोई संदेह नहीं है । एकादशी के दिन किये हुए व्रत, गौ-दान आदि का अनंत गुना पुण्य होता है ।
एकादशी को दिया जलाके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें । .विष्णु सहस्त्र नाम नहीं हो तो १० माला गुरुमंत्र का जप कर लें l अगर घर में झगडे होते हों, तो झगड़े शांत हों जायें ऐसा संकल्प करके विष्णु सहस्त्र नाम पढ़ें तो घर के झगड़े भी शांत होंगे l
महीने में हर 15 दिन में एकादशी आती है एकादशी का व्रत पाप और रोगों को स्वाहा कर देता है लेकिन वृद्ध, बालक और बीमार व्यक्ति एकादशी न रख सके तभी भी उनको चावल का तो त्याग करना चाहिए एकादशी के दिन जो चावल खाता है… तो धार्मिक ग्रन्थ से एक- एक चावल एक- एक कीड़ा खाने का पाप लगता है…ऐसा डोंगरे जी महाराज के भागवत में डोंगरे जी महाराज ने कहा।
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