सोमवती अमावस्या का विभिन राशि पर प्रभाव व उपाय

 


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सोमवती अमावस्या का विभिन राशि पर प्रभाव व उपाय

सोमवार के दिन पड़ने वाली अमावस्या को सोमवती अमावस्या कहते हैं ।सोमवती अमावस्या वाले दिन नदियों में स्नान, दान, मौन व्रत, और पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है । सोमवती अमावस्या का  व्रत महिलाओं द्वारा पति की लंबी आयु और पारिवारिक सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है । इसके साथ ही, पितरों की शांति के लिए सोमवती अमावस्या का दिन अत्यंत उत्तम माना जाता है । सोमवती अमावस्या का  किसी भी धार्मिक कार्य, जप, या दान का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक फल (अक्षय फल) प्राप्त होता है ।  विवाहित स्त्रियां अपने पति की दीर्घायु, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य के लिए यह व्रत रखती हैं । सोमवती अमावस्या को पितृ तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों को शांति मिलती है और पितृ दोष से मुक्ति प्राप्त होती है । इस दिन पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा करने की परंपरा है, जो सुख-समृद्धि और आरोग्य प्रदान करती है ।  यदि सोमवती अमावस्या वाले  दिन मौन रहकर स्नान और जप किया जाए, तो सहस्र (हजारों) गायों के दान के बराबर पुण्य मिलता है । 

सोमवती अमावस्या का सभी १२ राशियों पर भिन्न-भिन्न प्रभाव पड़ता है। मुख्य रूप से, मिथुन, धनु, कन्या, और मीन राशियों पर इसका प्रभाव थोड़ा अधिक गहरा रहता है। यह दिन मुख्य रूप से शिव पूजा और पितरों की शांति के लिए अत्यंत शुभ होता है। 

मेष, सिंह, और धनु (अग्नि तत्व)

इन राशियों के लिए यह अमावस्या ऊर्जा के नवीनीकरण का समय है। आपको अपने करियर या व्यवसाय में कुछ नए और महत्वपूर्ण निर्णय लेने पड़ सकते हैं। भगवान शिव का जल से अभिषेक करें। 

वृषभ, कन्या, और मकर (पृथ्वी तत्व)

इन राशियों के लिए यह तिथि आर्थिक और पारिवारिक स्थिरता लाती है। अटका हुआ धन प्राप्त होने के योग बनते हैं। पुराने निवेशों से लाभ मिल सकता है। पीपल के वृक्ष के नीचे घी का दीपक जलाएं। 

मिथुन, तुला, और कुंभ (वायु तत्व)

ये राशियां परिवर्तन के दौर से गुजर सकती हैं। मिथुन राशि वालों के लिए यह एक नई शुरुआत का संकेत है। कुंभ राशि वालों के घर में सुख-सुविधाओं और शांति में वृद्धि होगी। जरूरतमंदों को अनाज या वस्त्रों का दान करें।

कर्क, वृश्चिक, और मीन (जल तत्व)

भावनात्मक और आध्यात्मिक दृष्टि से इन राशियों के लिए यह दिन बेहद महत्वपूर्ण है। मन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होगा। मीन राशि वालों का आत्मविश्वास बढ़ेगा। पितरों के निमित्त जल तर्पण करें और शिव मंत्र का जाप करें।

ध्यान रहे  अमावस्या के दिन मानसिक उथल-पुथल की संभावना भी रहती है। इसलिए संयम बनाए रखना आवश्यक है। 


सोमवती अमावस्या व्रत कथा (सोना धोबिन की कथा)

एक बार एक गरीब ब्राह्मण परिवार में एक गुणवान और सुंदर कन्या का जन्म हुआ। समय बीतने के साथ उसके विवाह की चिंता सताने लगी। एक ब्राह्मण ने बताया कि कन्या के भाग्य में वैधव्य (विधवा योग) का दोष है, इसलिए उसका विवाह नहीं हो सकता।

समाधान पूछने पर  ब्राह्मण ने बताया कि सिंहल द्वीप में एक सोना नाम की धोबिन रहती है, यदि यह कन्या उसकी सेवा करे तो उसका यह दोष दूर हो सकता है।

लड़की अपने भाई के साथ सिंहल द्वीप पहुँच गई और चुपचाप रोज़ सुबह उठकर सोना धोबिन के सारे काम (घर की सफाई, पानी भरना आदि) करने लगी। एक दिन धोबिन को पता चला कि यह लड़की ब्राह्मण की पुत्री है और उसकी निःस्वार्थ सेवा से प्रसन्न होकर उसने कारण पूछा।

लड़की ने सारी बात बता दी। तब सोना धोबिन ने अपनी पति-भक्ति और व्रत के प्रभाव से लड़की को अपना सिंदूर देकर आशीर्वाद दिया। जैसे ही सोना धोबिन ने उस कन्या की मांग में अपना सिंदूर लगाया, उसी समय कन्या का विवाह तय हो गया, लेकिन उसके पति की मृत्यु हो गई। अपने पतिव्रता धर्म और सोमवती अमावस्या के व्रत के प्रभाव से सोना धोबिन तुरंत उस स्थान पर पहुँची और पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा शुरू की। धोबिन ने अपनी परिक्रमा का पुण्य उस कन्या के मृत पति को अर्पित कर दिया। इस चमत्कार से उस कन्या का पति जीवित हो उठा। तब से ही सुहागिन महिलाओं ने अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए सोमवती अमावस्या का व्रत रखकर पीपल के वृक्ष की परिक्रमा करना आरंभ कर दिया।

 इस दिन सुबह किसी पवित्र नदी, सरोवर या घर में ही गंगाजल मिले जल से स्नान करें।  पीपल के पेड़ के मूल (जड़) में जल, दूध, और मिष्ठान्न अर्पित करें। पेड़ को सूत (कलावा) लपेटते हुए 108 बार परिक्रमा करें। परिक्रमा के दौरान हाथ में फल या मीठा रखने का विधान है।

सोमवती अमावस्या के दिन पीपल के पेड़ की परिक्रमा, शिवलिंग का जलाभिषेक, और पितरों के तर्पण जैसे उपाय विशेष फलदायी माने जाते हैं। इनसे सौभाग्य, धन-संपदा, और पारिवारिक शांति की प्राप्ति होती है। पीपल के वृक्ष में त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) का वास माना जाता है। पेड़ की जड़ में दूध, गंगाजल, और काले तिल अर्पित करें। अपनी मनोकामना कहते हुए वृक्ष की 108 परिक्रमा करें और कच्चा सूत (कलावा) लपेटें। सोमवार और अमावस्या का दुर्लभ संयोग होने से महादेव की कृपा जल्दी प्राप्त होती है। शिवलिंग पर दूध, दही, शहद, और गंगाजल से अभिषेक करें व  बेलपत्र, भांग, और धतूरा चढ़ाएं। पितृ दोष निवारण के लिए दक्षिण दिशा में पितरों के निमित्त सरसों के तेल का दीपक जलाएं। दोपहर के समय नदी में स्नान करें या पानी में थोड़ा गंगाजल मिलाकर घर पर ही नहाएं। गरीब व जरूरतमंद लोगों को छाता, जूते-चप्पल, या मौसमी फलों का दान करें। धन-धान्य में वृद्धि के लिए आटे की गोलियां बनाकर मछलियों को खिलाएं या चींटियों को शक्कर मिला हुआ आटा डालें।


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