अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया)
अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया)
अक्षय तृतीया 2026 रविवार, 19 अप्रैल 2026 को मनाई जाएगी। शुभ मुहूर्त तृतीया तिथि 19 अप्रैल की सुबह 10:49 बजे से शुरू होकर 20 अप्रैल की सुबह 07:27 बजे तक रहेगी। 19 अप्रैल 2026 को सुबह 10:49 बजे से दोपहर 12:20 बजे तक का समय पूजा के लिए अत्यंत शुभ है।
इस वर्ष अक्षय तृतीया पर रोहिणी नक्षत्र के साथ सर्वार्थ सिद्धि, अमृत सिद्धि और गजकेसरी जैसे कई दुर्लभ शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन किया गया दान, जप, तप और शुभ कार्यों का फल कभी नष्ट नहीं होता। अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया) जिसका अर्थ है 'कभी क्षय न होने वाली'। यह अबूझ मुहूर्त है, जिस दिन विवाह, नए व्यवसाय, या संपत्ति खरीदने जैसे मांगलिक कार्य के लिए पंचांग देखने की आवश्यकता नहीं होती। इस दिन दान, पूजा और स्वर्ण खरीदारी से अक्षय फल और समृद्धि प्राप्त होती है।
इसी दिन भगवान विष्णु के छठे अवतार परशुराम का प्राकट्य हुआ था। साथ ही, नर-नारायण और हयग्रीव अवतार भी इसी दिन हुए थे। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, अक्षय तृतीया के दिन ही त्रेता युग का आरंभ हुआ था, इसलिए इसे युगादि तिथि भी कहते हैं। दरिद्र सुदामा ने जब भगवान कृष्ण को भेंट में केवल चावल (तंदुल) दिए थे, तब कृष्ण ने उन्हें इसी दिन अनंत ऐश्वर्य का आशीर्वाद दिया था। द्यूत क्रीड़ा में सब कुछ हारने के बाद, वनवास के दौरान पांडवों को इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण से अक्षय पात्र मिला था, जिससे वे कभी भी भोजन प्राप्त कर सकते थे। मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेद व्यास ने गणेश जी के साथ महाभारत ग्रंथ लिखना शुरू किया था। मान्यता है कि मां गंगा का धरती पर अवतरण भी इसी पावन तिथि पर हुआ था। इस शुभ दिन से ही प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम के कपाट भक्तों के लिए खोले जाते हैं।
इस दिन सोना या चांदी खरीदना समृद्धि लाता है। अपनी क्षमता के अनुसार अन्न, वस्त्र या जल का दान अवश्य करें। कोई भी नया व्यवसाय या शुभ कार्य की शुरुआत बिना मुहूर्त देखे की जा सकती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, और गर्मी के मौसम में जल से भरे घड़े, हाथ के पंखे, सत्तू, और अन्न का दान करना बहुत पुण्यदायी माना जाता है।
शाम के समय माता लक्ष्मी और विष्णु जी की पूजा करें। पूजा में केसर और हल्दी का प्रयोग करें। 11 कौड़ियों को हल्दी से पीला करके लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी में रखें। इस दिन चांदी के सिक्के पर हल्दी-कुमकुम लगाकर, इसे माता लक्ष्मी के चरणों में रखने के बाद अपनी तिजोरी में रखें। नया नमक खरीदना भी घर में दरिद्रता दूर करने वाला माना जाता है। घर के कोनों में डली वाला नमक रखने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
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