आपदा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य
आपदा में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के कार्य
सतीश शर्मा
आपदा के समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का महत्व अत्यंत है क्योंकि वे तत्काल राहत, बचाव कार्य, भोजन और आश्रय जैसी बुनियादी ज़रूरतों को पूरा करते हैं, प्रभावित लोगों को भावनात्मक और सामाजिक समर्थन देते हैं, और सरकार व अन्य संस्थाओं के साथ मिलकर समन्वित और प्रभावी सेवा कार्य सुनिश्चित करते हैं, जिससे समुदायों को जल्दी सामान्य स्थिति में लौटने में मदद मिलती है, जैसा कि कई प्राकृतिक आपदाओं (भूकंप, बाढ़, सुनामी) में देखा गया है।
आपदा के समय संघ के मुख्य कार्य और महत्व
तत्काल सहायता और बचाव,स्वयंसेवक सबसे पहले घटनास्थल पर पहुँचकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाते हैं और जीवन बचाने का कार्य करते हैं।
खोज और बचाव कार्यों में सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
बुनियादी ज़रूरतों की पूर्ति,भोजन, पानी और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था करते हैं, खासकर उन क्षेत्रों में जहाँ सरकारी सहायता पहुँचने में समय लगता है।
राशन किट और राहत सामग्री वितरित करते हैं।
दीर्घकालिक पुनर्वास,आपदा के बाद भी सेवा कार्य जारी रखते हैं, जैसे समुदायों को फिर से बसाना और पुनर्निर्माण में मदद करना।
शैक्षणिक और सामुदायिक केंद्रों के माध्यम से लोगों को मुख्यधारा से जोड़ने का काम करते हैं।
भावनात्मक और मानसिक समर्थन,पीड़ितों को तत्काल भावनात्मक सहारा और मनोबल बढ़ाने का काम करते हैं, जो मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
सामाजिक एकजुटता,निःस्वार्थ सेवा के आदर्श के साथ, संघ सामाजिक एकजुटता और सामुदायिक भावना को मजबूत करता हैं, जिससे लोग मुश्किल समय में अकेले महसूस नहीं करते।
संक्षेप में, आपदा के समय संघ की भूमिका जीवन-रक्षक, पुनर्स्थापनात्मक और सामाजिक-मनोवैज्ञानिक समर्थन प्रदान करने वाली होती है, जो आपदा प्रबंधन का एक अभिन्न अंग है।
संघ कार्य का एक बड़ा हिस्सा आपदाओं में सेवा कार्यों के लिए समर्पित है। शाखा का वातावरण, स्वयंसेवकों को देश के लिए जीना सिखाता है व उनके मन में समाज के प्रति संवेदना जगाता है। संघ पर लोगों का विश्वास इस कार्य की आधारशिला है, चाहे चेन्नई की सुनामी हो या फिर लातूर में आया विनाशकारी भूकंप, कोरोना काल हो, या फिर कोई अन्य आपदा, समाज के हर वर्ग ने राहत कार्यों में तन-मन-धन से संघ का साथ दिया है। आपदा बीतते ही जब सब संगठन अपना बोरिया बिस्तर समेट लेते हैं व सरकारी तंत्र भी सुध लेना छोड़ देता है, तब भी संघ के स्वयंसेवक पीड़ित आबादी को मुख्यधारा में लाने तक उस स्थान में सेवा कार्य करते रहते हैं। कोरोना काल में संघ के उग्र हिंदुत्व को निशाना बनाने वाली मीडिया ने भी स्वयंसेवकों की इस भूमिका को सराहा। उन सेवा दूतों की सच्ची कहानियाँ लेकर सामने आए, जिन्होंने प्रकृति के प्रकोप के बीच कराहती हुई मानवता पर अपनेपन और समाजिक आस्था का मरहम लगाया। इन्होने सूख रही बगिया में कुछ प्रेम के पौधे लगाये, इन पौधों के बड़े होने से जब इनमें फूल लहलहाते हैं उनसे महकती हैं कई पीढियां और महकता है अपना हिन्दुस्तान।
कोरोना का संकट गंभीर था, लेकिन समाज, सरकारें तथा प्रशासन व हमारे कोरोना योद्धा संकट के समय तत्परता के साथ कार्य कर रहे थे। सकारात्मकता और सामूहिक शक्ति के बल पर ही हम इस गम्भीर संकट से जीत पाऐ। समाज में विभिन्न संगठन व संस्थाओं के साथ मिलकर समन्वय स्थापित करते हुए कई आवश्यक उपक्रम प्रारंभ किये हैं, जिनमें सेवाभाव से हज़ारों लोग सक्रिय हुए हैं।
कोरोना की प्रथम लहर की भांति दूसरी लहर में भी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक सेवा भारती सहित अन्य संगठन व संस्थाओं के माध्यम से प्रभावित परिवारों व जरूरतमंदों को सहायता उपलब्ध करवाने के कार्य में जुटे हुए थे। इस संकट काल में स्वयंसेवकों ने स्वतःस्फूर्त होकर क्षेत्र की आवश्यकता के अनुसार प्राथमिकता पर कई प्रकार के सेवा कार्य शुरू किए थे।
कोरोना के संभावित लोगों हेतु आइसोलेशन केंद्र व संक्रमित रोगियों हेतु कोरोना केयर सेंटर, सरकारी कोविड केयर सेंटर व अस्पतालों में सहायता उपलब्ध करवाना, सहायता हेतु हेल्पलाइन नंबर, ऑनलाइन चिकित्सकीय सलाह, रक्तदान, प्लाज्मादान, अंतिम संस्कार का कार्य, आयुर्वेदिक काढ़ा व दवा वितरण, समुपदेशन (काउंसलिंग), ऑक्सीजन आपूर्ति व एम्बुलेंस सेवा, भोजन, राशन व मास्क तथा टीकाकरण अभियान व जागरूकता, शव वाहन जैसे आवश्यक कार्य स्वयंसेवकों ने प्रारंभ किए थे।
स्वयंसेवकों द्वारा सहायता के लिए देशभर में लगभग 3800 स्थानों पर हेल्पलाइन सेंटर्स चलाए जा रहे थे। इसी प्रकार वैक्सीनेशन शिविर, सहयोग व जागरूकता अभियान में 7500 से अधिक स्थानों पर 22 हजार से अधिक कार्यकर्ता लगे हुए थे ,जिसमें कई लोगों को वैक्सीनेशन करवाया गया। देशभर में 287 स्थानों पर आइसोलेशन केंद्र संचालित किए गए, जिनमें लगभग 9800 से अधिक बिस्तर की व्यवस्था थी। इसके साथ ही 118 शहरों में कोविड केयर सेंटर भी चलाए जा रहे थे, जिनमें 7476 बिस्तर की व्यवस्था थी, इनमें से 2285 बिस्तर ऑक्सीजन युक्त थे। इन केंद्रों के संचालन में 5100 से अधिक कार्यकर्ता कार्य कर रहे थे। इनके अलावा सरकारी कोविड केयर केंद्रों में भी स्वयंसेवक व्यवस्थाओं में सहयोग कर रहे थे। देश में 762 शहरों में संचालित 819 सरकारी कोविड केयर केंद्रों में 6000 से अधिक कार्यकर्ता सहयोग कर रहे थे। स्वयंसेवकों ने 1256 स्थानों पर रक्तदान शिविरों का आयोजन कर 44 हजार यूनिट रक्तदान करवाया। देशभर में 1400 स्थानों पर संचालित चिकित्सकीय हेल्पलाइन के माध्यम से डेढ़ लाख से अधिक लोग लाभान्वित हुए , इन केंद्रों में 4445 चिकित्सक सेवाएं प्रदान कर रहे थे।
1 - हेल्पलाइन सेंटर्स :
स्थान - 3770
2 - सरकार के सहयोग में संचालित वेक्सिनेशन केन्द्र :
टीकाकरण केंद्र स्थान - 2904
सरकारी केंद्र में सहयोग एवं जनजागरण - 4773 स्थानों पर
सहभागी कार्यकर्ता संख्या - 22274
3 - आइसोलेशन केंद्र :
शहर - 287
बिस्तर संख्या - 9838
कार्यकर्ता - 3194
4 - कोविड केयर केंद्र :
शहर - 118
बिस्तर संख्या - 7476
सेवित जन - 18379
ऑक्सीजन युक्त बिस्तर - 2285
कार्यकर्ता - 1989
5 - सरकारी कोविड केयर केंद्र में सहयोग :
शहर- 762cकितनें केंद्रों में - 819
कार्यकर्ता - 6030
6 - ऑनलाइन डॉक्टर सलाह :
स्थान - 1399
सक्रिय डॉक्टर्स - 4445
सेवित जन - 1,51,257
7 - संक्रमित परिवारों / व्यक्तियों को भोजन -
स्थानों - 3315
अब तक वितरित पैकेट - 5,37,436
8 - रक्तदान :
कितने स्थान पर - 1256
रक्त यूनिट - 43,972
9 - प्लाज्मा दान :
कितने स्थान पर - 426
सेवित जन - 4193
10 - आयुर्वेदिक काढ़ा वितरण :
स्थान - 5921
सेवित जन - 40,51,088
11 - समुपदेशन केंद्र (काउन्सलिंग) :
स्थान - 1242
सेवित जन - 75,751
12 - अंत्यसंस्कार में
सेवा :
कितने स्थान पर - 816
13 - शव वाहन सेवा :303
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