जानकारी काल हिन्दी मासिक नवम्बर - 2025

 जानकारी काल 



   वर्ष-26   अंक - 07        नवम्बर - 2025 ,  पृष्ठ 37   www.sumansangamaashray.com    





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अनुक्रमणिका

अपनों से अपनी बात - 3 

मानव के लिए खतरा प्लास्टिक प्रदूषण - 4 लेख

श्री गुरु नानक देव जी के श्री सूत्री सिद्धांत - 7 लेख

साधारण बनने की साधना - 10 लेख

 समझदारी  - 12 कथा 

जटिलतायें - 13 कहानी 

समस्या का समाधान - 15 प्रेरक प्रसंग

तुम मेरे पास हो, रात हैरान है - 16 कविता 

स्वच्छंद परिंदा - 17 कहानी

सादगी डॉक्टर अनंत अय्यर  - 20 व्यक्तित्व

जोहो कारपोरेशन के अध्यक्ष श्रीधर वेम्बू - 23 आहार 

अंतिम विदाई - 24 कविता

नवंबर मास का पंचांग,व्रत त्यौहार,पंचक- 25

देव प्रबोधिनी एकादशी  - 29 कथा

उत्पन्ना एकादशी - 30 कथा  

नवंबर 2025 के महत्वपूर्ण दिवस - 31





अपनों से अपनी बात 

राजधानी दिल्ली देश की राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियों का केंद्र है, वहां बच्चों की सुरक्षा को लेकर हाल ही में जारी रिपोर्ट ने गंभीर चिंता पैदा कर दी है। एलायंस फार पीपुल और चाइल्ड राइट्स एंड यू द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली से लापता होने वाले 10 बच्चों में से छह का कभी पता ही नहीं चल पाता। रिपोर्ट के मुताबिक पिछले पांच वर्षों में दिल्ली से 26,761 बच्चे लापता हुए, जिनमें से केवल 9,727 बच्चों का ही पता लगाया जा सका। यानी करीब 63 प्रतिशत बच्चे आज भी लापता हैं। तुलना करें तो राष्ट्रीय स्तर पर यह आंकड़ा 30 प्रतिशत है। 12 से 18 वर्ष की आयु वर्ग में लापता होने वाले बच्चों की संख्या सबसे अधिक है और इनमें लड़कियों की संख्या लड़कों की तुलना में काफी ज्यादा पाई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ये आंकड़े वास्तविक स्थिति का केवल एक हिस्सा हैं क्योंकि लगभग 70 प्रतिशत मामलों में शिकायत दर्ज ही नहीं होती। दिल्ली और इसके आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय मानव तस्कर गिरोह इस समस्या को और भयावह बना रहे हैं। ये गिरोह गरीब परिवारों के बच्चों को बहला-फुसलाकर या जबरन उठाकर अपने जाल में फंसा लेते हैं। इन बच्चों को सड़कों, बस अड्डों और रेलवे स्टेशनों पर भीख मंगवाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। वहीं लड़कियों को वेश्यावृत्ति के धंधे में धकेल दिया जाता है। कई किशोरियों को खाड़ी देशों में बेच दिया जाता है जहां वे शोषण का शिकार होती हैं।

महिला क्रिकेट विश्व कप के फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को 52 रन से हराकर भारत दुनिया में छा गया है। यह करिश्मा भारत की बेटियों द्वारा किया गया, जिस पर 140 करोड़ भारतीयों को नाज है। फाइनल में भारत ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 298 रन बनाए थे, जबकि दक्षिण अफ्रीका 246 रन पर ही आउट हो गई। इस ऐतिहासिक मैच में दीप्ति शर्मा ने 58 रन के साथ ही पांच शानदार विकेट लेकर बहुमूल्य योगदान दिया। जिसके लिए दीप्ति शर्मा बधाई की पात्र हैं। सेमीफाइनल में भारत की महिला क्रिकेट टीम ने सात बार की विजेता आस्ट्रेलिया को हराकर इतिहास रचा था। यह भारत की बेटियों की ऐतिहासिक जीत थी। इस ऐतिहासिक जीत में मुंबई की जेमिमा राड्रिग्ज द्वारा बनाए गए नाबाद 127 रन और हरमनप्रीत कौर की 89 रन की पारी का महत्वपूर्ण योगदान था। भारत इससे पहले भी दो बार 2005 और 2017 में फाइनल में पहुंच चुका था लेकिन दोनों बार फाइनल में हार का सामना करना पड़ा था। सेमीफाइनल के बाद सभी भारतीयों को एक बड़ी उम्मीद जगी थी कि इस बार जिस तरह ऐतिहासिक एवं साहसिक पारी भारत के खिलाड़ियों द्वारा सेमीफाइनल खेली गई है, इसी उत्साह को बरकरार रखते हुए फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर भारत महिला क्रिकेट बिश्व कप विजेता बना। यह ऐतिहासिक गौरव भारत की बेटियों ने दक्षिण अफ्रीका को हराकर भारतीयों को दिया है। 

मानव के लिए खतरा - प्लास्टिक प्रदूषण

सतीश शर्मा 

प्रदूषण के कारण से मानव का जीवन खतरे में पढ़ रहा है और हम कहें कि पृथ्वी का अस्तित्व ही खतरे में पड़ रहा है तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी । प्लास्टिक प्रदूषण जो शायद इस वक्त सबसे बड़ी समस्या बन खड़ा हुआ है। प्लास्टिक प्रदूषण पृथ्वी के पर्यावरण में प्लास्टिक वस्तुओं के जमाव को कहते हैं, जो झीलें, नदियाँ और समुद्र प्रदूषित करते हैं और वन्यजीवों व मनुष्यों के स्वास्थ्य को नुकसान पहुँचाते हैं।  यह एक वैश्विक समस्या है जहाँ हर साल बड़ी मात्रा में प्लास्टिक कचरा पर्यावरण में पहुँचता है और लंबे समय तक बना रहता है, जिससे माइक्रोप्लास्टिक बनते हैं। 

प्लास्टिक प्रदूषण के स्रोत और कारण - गैर-जैवनिम्नीकरणीय सामग्री ये  प्लास्टिक,  प्लास्टिक सैकड़ों वर्षों तक पर्यावरण में बने रहते हैं और मिट्टी, नदियों और समुद्र में जमा हो जाते हैं। प्लास्टिक कचरे का सही ढंग से निपटान या पुनर्चक्रण न करने से वे पर्यावरण में फैलते हैं। प्लास्टिक कचरे के कुप्रबंधन के कारण बड़ी मात्रा में कचरा अनुपचारित रह जाता है, जिससे प्रदूषण बढ़ता है। पानी और शैम्पू की बोतलें, पॉलीथीन, और अन्य प्लास्टिक उत्पाद प्लास्टिक कचरा वन्यजीवों के जीवन, आवास और पारिस्थितिक तंत्र को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करता है।  प्लास्टिक में पाए जाने वाले हानिकारक रसायन अंतःस्रावी तंत्र को बाधित कर सकते हैं, जिससे हार्मोन असंतुलन, प्रजनन संबंधी समस्याएं और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। समय के साथ, प्लास्टिक के टुकड़े टूटकर माइक्रोप्लास्टिक बन जाते हैं, जो पर्यावरण और मानव स्वास्थ्य के लिए एक गंभीर खतरा हैं। 

प्लास्टिक से मानव जीवन को कई तरह से नुकसान पहुँचता है, जो इसके पूरे जीवनचक्र में होता है, 


यानी इसके उत्पादन से लेकर इसके निपटान तक। ये नुकसान मुख्य रूप से माइक्रोप्लास्टिक्स और प्लास्टिक में मौजूद हानिकारक रसायनों के कारण होते हैं, जो भोजन, पानी और हवा के माध्यम से हमारे शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। प्लास्टिक के बहुत छोटे कण, जिन्हें माइक्रोप्लास्टिक्स और नैनोप्लास्टिक्स कहते हैं, शरीर में प्रवेश करके कोशिकाओं को नुकसान पहुँचा सकते हैं,ओर शारीरिक क्षति करते हैं । ये कण शरीर के ऊतकों में जमा हो सकते हैं और सूजन पैदा कर सकते हैं। माइक्रोप्लास्टिक्स के कारण रोगों का जोखिम बढ़ता है जैसे  कैंसर, हृदय रोग और सूजन संबंधी आंत्र रोग जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। हानिकारक रसायनों के प्रभाव से हमारे हार्मोनल असंतुलन होते है ।  प्लास्टिक में बिस्फेनॉल ए (BPA) और फ़ेथलेट्स जैसे रसायन होते हैं, जो एंडोक्राइन सिस्टम को बाधित करते हैं। इससे हार्मोनल असंतुलन, प्रजनन संबंधी समस्याएँ और कैंसर जैसी बीमारियाँ हो सकती हैं। इस कारण कुछ प्रजनन संबंधी समस्याएँ हो सकती है ।  कुछ अध्ययनों से पता चलता है कि फ़ेथलेट्स के संपर्क में आने से पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है। शोध करने पर यह भी पता चला की प्लास्टिक में मौजूद कुछ रसायन तंत्रिका तंत्र को भी नुकसान पहुँचा सकते हैं, जिससे न्यूरोलॉजिकल विकार हो सकते हैं। 

वायु और जल प्रदूषण -  प्लास्टिक के उत्पादन और जलने से हवा में विषैले रसायन निकलते हैं, जिन्हें साँस लेने से फेफड़ों को नुकसान होता है। इससे श्वसन संबंधी रोग और फेफड़ों की क्षमता में कमी हो सकती है। प्लास्टिक कचरा पानी में विषैले रसायन छोड़ता है, जो पानी के स्रोतों को दूषित करता है। यह दूषित पानी पीने से स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। प्लास्टिक से संबंधित काम करने वाले कर्मचारियों में फेफड़ों की समस्याएँ और फेफड़ों की क्षमता में कमी देखी गई है। प्लास्टिक के उत्पादन और निपटान से निकलने वाले विषैले पदार्थों के संपर्क में आने से कैंसर का खतरा बढ़ सकता है, खासकर ल्यूकेमिया, लिंफोमा और स्तन कैंसर का। कुछ अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि प्लास्टिक में मौजूद रसायन गर्भ में पल रहे शिशुओं के विकास पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकते हैं। 

प्लास्टिक प्रदूषण कम करने के क्या करे -

पुन: प्रयोज्य उत्पादों का उपयोग: बोतलबंद पानी खरीदने से बचें और घर से दोबारा इस्तेमाल होने वाली बोतलें, कपड़े के थैले आदि ले जाएं। प्लास्टिक कचरे का सही तरीके से पुनर्चक्रण करें और उसका अनुचित निपटान न करें। अपने आसपास के समुद्री तटों और जलमार्गों की सफाई में हिस्सा लें।  प्लास्टिक प्रदूषण के खतरों के बारे में दूसरों को जागरूक करें और टिकाऊ प्रथाओं को बढ़ावा दें।  प्लास्टिक के पूरे जीवनचक्र को संबोधित करने और प्लास्टिक को पर्यावरण में जाने से रोकने के लिए वैश्विक समझौतों का समर्थन करें। प्लास्टिक की पानी की बोतलों, प्लास्टिक थैलियों, स्ट्रॉ, कप और कटलरी जैसे डिस्पोजेबल प्लास्टिक का उपयोग बंद करें। प्लास्टिक की थैलियों के बजाय कपड़े या कागज की थैली इस्तेमाल करें, प्रयोज्य स्टेनलेस स्टील या कांच की बोतलें खरीदें। ऐसे उत्पाद खरीदें 




जिनमें प्लास्टिक की जगह कांच, कागज या बांस से बनी पैकेजिंग हो। टूथपेस्ट और स्क्रब जैसे उत्पादों में सूक्ष्म प्लास्टिक कणों (माइक्रोप्लास्टिक्स) का उपयोग करने से बचें, क्योंकि ये पानी में रिसकर जलीय जीवों को नुकसान पहुंचाते हैं। बाहर से खाना मँगवाते समय घर के दोबारा इस्तेमाल होने वाले कंटेनर ले जाएं, ताकि प्लास्टिक के कंटेनरों का उपयोग कम हो सके। 

सामुदायिक और व्यवस्थित स्तर पर उपाय -

जागरूकता बढ़ाएं -  प्लास्टिक प्रदूषण के प्रभावों के बारे में दूसरों को शिक्षित करें और उन्हें प्लास्टिक कचरा कम करने के लिए प्रोत्साहित करें। 

साफ-सफाई अभियानों का आयोजन करे व उनमें भाग लें - प्लास्टिक कचरा साफ करने वाले स्थानीय अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लें। 

कचरा प्रबंधन में सुधार करें -  प्लास्टिक कचरे को निर्धारित डिब्बों में ही डालें और सुनिश्चित करें कि वह सही जगह पर जाए। 

पर्यावरण-अनुकूल नीतियों का समर्थन करें - ऐसी नीतियों के लिए मतदान करें जो प्लास्टिक के उपयोग को सीमित करती हैं और स्थिरता को बढ़ावा देती हैं। 

सर्कुलर अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दें - ऐसी अर्थव्यवस्था का समर्थन करें जहाँ कचरे को दोबारा उपयोग किया जा सके और वह किसी अन्य उद्योग के लिए कच्चे माल के रूप में काम आए। 


देश हमें देता है सब कुछ, हम भी तो कुछ देना सीखें ।


सूरज हमें रौशनी देता, हवा नया जीवन देती है । 

भूख मिटने को हम सबकी, धरती पर होती खेती है । 

औरों का भी हित हो जिसमें, हम ऐसा कुछ करना सीखें ।। 


गरमी की तपती दुपहर में, पेड़ सदा देते हैं छाया । 

सुमन सुगंध सदा देते हैं, हम सबको फूलों की माला ।

 त्यागी तरुओं के जीवन से, हम परहित कुछ करना सीखें । । 


जो अनपढ़ हैं उन्हें पढ़ाएँ, जो चुप हैं उनको वाणी दें ।

 पिछड़ गए जो उन्हें बढ़ाएँ, समरसता का भाव जगा दें । 

हम मेहनत के दीप जलाकर, नया उजाला करना सीखें ।। 



श्री गुरु नानक देव जी के त्रि-सूत्री सिद्धांत – प्रकाश उत्सव विशेष

– डॉ० नरेंद्र सिंह विर्क

भारतीय पंरपरा के अनुसार, जब दुनिया में अन्याय, उत्पीड़न, सामाजिक, आर्थिक और धार्मिक स्थिति अधोगति में जाने लगे तो उस समय दुनिया में कोई अवतार या गुरु आगमन होता है जो दुनिया को पतन से उठाकर, सच्चे गुणों को अपना कर ईश्वर के साथ विलय होने का रास्ता दिखता है। ऐसे अवतारी पुरूष, गुरु जन-मानस को प्रेम करुणा का अमृत देते हैं और सही रास्ता दिखाते हैं।

गुरु नानक देव जी का जीवन मानवता के लिए सच्चाई की प्राप्ति के लिए रास्ता दिखाने का काम करता रहा और भविष्य में भी करता रहेगा। उन्होंने अपना अधिकांश जीवन देश-देशांतरों की यात्रा में (जिन्हे ‘उदासियो’ का नाम दिया गया है) गुजारा। लोगों को धर्म का वास्तविक स्वरुप समझा कर परमात्मा में लीन होने का रास्ता दिखया।

गुरु साहिब ने लोगों के सामाजिक, आर्थिक, राजनीतिक और धार्मिक जीवन में आई गिरावट को खत्म करके जीवन का असली उद्देश्य समझाते हुए उन्हें उच्च आदर्शों का मॉडल ‘किरत करने, नाम जपने और बाँट छकने’ का तीन सूत्री सिद्धांत दिया। जिसमें आदर्श जीवन का संपूर्ण दर्शन है। इन सिद्धांतों को अपनाने वाला व्यक्ति समाज में रहते हुए, कार-विचार करते हुए, परिवार की पालना करते हुए स्वस्थ समाज के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है और जीवन के वास्तविक उद्देश्य को पाकर ईश्वर के साथ विलय होता है।

गुरुबाणी के अनुसार :



‘‘उदम् करेदिआ जीउ तूँ कमावदिया सुख भुंचु।।धिआइदिआ तूं प्रभु मिलु नानक उतरी चिंत।।’’

शरीर के निर्वाह के लिए स्वस्थ आहार की प्राप्ति और तंदुरुस्ती के लिए श्रम करना बहुत जरुरी है। श्रम परिवार की जरुरतों के लिए भी। इसके अलावा, समाज में जरुरतमंदों की मदद के लिए भी श्रम करना आवश्यक है। एक श्रम करने वाला व्यक्ति समाज पर बोझ नहीं बनता बल्कि अन्य लोगों की आय के लिए भी संसाधन बनाता है। उसका सामाजिक और आर्थिक जीवन उत्पन्न हो जाता है। कीर्तिमनुष्य स्वाभिमान की जिंदगी जीता है और किसी पर निर्भर नहीं होता । कीर्तिमान मनुष्य आलसी नहीं होता है। कीर्ति मनुष्य स्वस्थ रहता है।

गुरबाणी का पवित्र गुरुवाक् है:

“घालि खाड़ किछु हथहु देइ।। नानक राहु पछाणहि सेई।।”

श्रम से संबंधित गुरु साहिब के जीवन की एक साखी प्रचलित है कि एमनाबाद के एक साहूकार मलिक भागों ने अपने घर में ब्रह्म भोज रखा था जिसमें सभी साधु-संतों को बुलाया गया। उन्होंने गुरु साहिब को निमंत्रण भेजा लेकिन गुरु जी ने इस भोज में आने से इनकार कर दिया। गुरु जी को बार-बार अनुरोध करने पर आप जी उन्हें उपदेश देने के लिए गुरु जी उनके घर गए लेकिन भोजन नहीं लिया। मलिक भागों के पूछने पर गुरुजी ने कहा कि तुम्हारी कमाई सच्चे श्रम की ना होकर और गरीबों के उत्पीड़न से इकठ्ठा की गई है, इसलिए इसमें गरीबों का खून है, इसलिए हम यह खाना नहीं खा सकते।

मलिक भागों ने इसका प्रमाण माँगा। गुरुजी ने मलिक भागों से तैयार भोजन मँगवाया और भाई लालों के घर में बनाई गई कोधरे की रोटी मँगवाई। गुरु जी ने अपने दाहिने हाथ में भाई लालों की रोटी और अपने बाएँ हाथ में मलिक भागों की रोटी ली। जब गुरुजी ने दोनों रोटियों को हाथ में दबाया तो मलिक भागों की रोटी से खून निकला और भाई लालों की रोटी से दूध की धारा बह निकली। मलिक भागों ने गुरु जी से माफी माँगी और आगे से अपने हाथों से काम करने का संकल्प लिया।

नाम जपना:  दुनिया में सबसे उत्तम है नाम जपना। गुरुबाणी का हुकुम है-

“अवरि काज तैरे कितै न काम। मिलु साधसंगति भजु केवल नाम।।” अंग साहिब-12

ईश्वर के नाम से मनुष्य में दैवीय गुण पैदा हो जाते हैं, जिससे मानव देवता बन जाता है, समदृष्टि आ जाती है इससे साझीवालता (भाईचारा) की भावना पैदा होती है, उसकी स्थिति गुरबाणी अनुसार ऐसी बन जाती हैः

“सभे साझीवाल सदइनित किसै न दिसहि बाहरा जीऊ।” अंग साहिब – 97

इंसान हर किसी की भलाई चाहता है। वह प्राणियों की भलाई और परोपकार के लिए हमेशा तैयार रहता है और किसी को नुकसान नहीं पहुँचाना चाहता। किताबी ज्ञान हमें Knowledge दे सकता है लेकिन नाम Wisdom पैदा करता है। उसको अच्छे और बुरे की समझ हो जाती है। वह संसार को 

संवारने में जीवन लगा देता है। संम्पूर्ण प्रकृति की संभाल करता है। गुरबाणी का आदेश है:

‘सरब रोग अउखदु नाम।।’ अंग साहिब-274

नाम सभी रोगों की दवाई है। इस पर बहुत शोध किया गया है जिससे यह साबित हो गया है कि नाम 


जपने वाला व्यक्ति सभी प्रकार की बीमारियों से छुटकारा पा सकता है और शारीरिक व मानसिक तौर पर तंदरूस्त हो जाता है। जिस प्रकार शरीर के लिए आहार आवश्यक है, उसी प्रकार आत्मा का आहार प्रभु का नाम है। जब कोई व्यक्ति नाम जपता है, तो उसके भीतर आध्यात्मिक बल बढ़ता है फिर वह शारीरिक बल से सही दिशा में काम ले सकता है। तनजानिया विश्वविद्यालय द्वारा शोध किया गया कि रात के 12 बजे से सुबह 7 बजे तक परमात्मा की बंदगी करने से ब्रह्माण्डीय ऊर्जा (Cosmic energy) मिलती है। इस समय में 4 बजे से 5 बजे तक का समय Prime Time होता है। प्रभु के नाम का जाप करने से इंसान में भगवान के सद्गुण आ जाते हैं। इस तरह से इंसान गुणवान बनता है। नाम मनुष्य के मन को जागृत करता है। गुरुबाणी का आदेश है:

इहु मन सक्ति इहु मनु सीऊ। इहु मनु पंच ततु को जीऊ।। अंग साहिब 340

बाँट कर छकना: कीर्ति मनुष्य में बाँट कर छकना (खाने) की प्रकृति उत्पन्न होती है। वह समाज के बुरे लोगों को पुनः सँवारने के लिए समय व्यतीत करता है। सिक्ख पंथ में सिक्ख की कमाई का दसवाँ हिस्सा, गुरु के नाम पर अलग करता है, जिसे ‘दशबन्ध’ कहा जाता है। इस कमाई का उपयोग जरुरतमंद, गरीब, बेसहारा, अनाथ लोगों के कल्याण के लिए किया जाता है, जैसे गरीब बच्चों को पढ़ाना आदि। ‘जॉन रॉक फिलर’ नामक एक दानी कहता है कि उसके द्वारा किए गए दान से उसका धन बढ़ जाता है। वह तथ्य अर्थशास्त्र के सिद्धांत के विपरीत है, लेकिन जब वह अन्य लोगों पर सिद्धान्त का शोध करता है, तो तथ्य सामने आते हैं कि यह सिद्धांत  Universal low है। इस प्रकार दान का सिद्धांत है कि आप जितना बाँटोगे उससे अधिक प्राप्त करोगे। गुरु नानक देव जी ने पहले ही हमें यह सिद्धान्त दे दिया है। गुरबाणी के अनुसारः

‘खावहि खरचहि रल मिल भाई।। तोटि न आवै बधदो जाई।।’

दुनिया में जहाँ भी कोई प्राकृतिक आपदा या युद्ध होता है या दुनिया के किसी भी क्षेत्र में भुखमरी और महामारी फैलने के कारण कोई आफत आ जाती है तो ‘खालसा एंड सोसाइटी’ वहां लंगर का आयोजन करती है और उस जगह के लोगों के पुनर्वास के लिए प्रंबध करती है, फिर भी धन आदि की किसी तरह की कोई कमी नहीं आती है।

उपरोक्त किरत करने, नाम जपने और बाँट कर छकने का सिद्धांत समाज को नई दृष्टि, आपसी भाईचारा, प्रेम और सुरक्षा, पृथ्वी- जल-वायु के साथ निकटता, जीव-जन्तुओं के साथ प्यार और कादर की प्रकृति की संभाल करता है। प्रकृति की गोद का आनंद लेते हुए, कादर में विलय हो जाता है, जो मानव दुनिया में आने का मुख्य उद्देश्य है।

श्री गुरु नानक देव जी के त्रि-सूत्री सिद्धांत ‘किरत करने, नाम जपने और बाँट कर छकने’ को आज की शिक्षा में सम्मिलित कर नई पीढ़ी को अवगत करवाने की आज महती आवश्यकता है




साधारण बनने की साधना

एक नगर  में शाखा चलती थी। सुबह की ठंडी हवा में केसरिया ध्वज लहराता, बच्चों की हँसी-ठिठोली और घोष की ध्वनि से वातावरण गूंजता। 

वहीं शाखा का एक स्वयंसेवक था। — अभय।

वह हर कार्य समय से करता, न कोई दिखावा, न कोई ऊँची बात। लोग उसे देख कहते, “यह तो बहुत अनुशासित संघ का साधारण स्वयंसेवक है।”

पर भीतर से अभय जानता था— उसकी साधारणता अब भी बाहरी है, भीतर कहीं कुछ “हर दम खास दिखने” की चाह रहती ही है कि मैं सबसे विशेष अथवा अलग हूँ।

एक दिन शाखा के बाद श्रीश जी— जो लंबे समय से संघकार्य में थे।  अभय के साथ टहलते हुए बोले,

“बेटा, तुम्हारा अनुशासन अच्छा है। पर बताओ, तुम स्वयं को कैसा स्वयंसेवक मानते हो?”

अभय ने सहजता से कहा, “सरल और साधारण।”

श्रीश जी मुस्कुराए —

“अच्छा! पर याद रखो— साधारण स्वयंसेवक होना, दिखना और बनना— तीन अलग बातें हैं।

‘होना’ तो स्वभाव है— जैसे नदी बिना बोले बहती है।

‘दिखना’ समाज की अपेक्षा है— लोग चाहते हैं कि हम विनम्र लगें।

पर ‘बनना’ — यह भीतर की सतत साधना है, एक लम्बी प्रक्रिया है, जहाँ अहंकार गलता है और सेवा ही शेष रह जाती है।”

अभय उस बात को भूल नहीं पाया।

अब वह हर कार्य में “श्रेय” नहीं, “कर्तव्य” देखने लगा।



वह शाखा के बाहर भी शाखा का स्वयंसेवक बनने लगा...

कभी रास्ते में गिरे पेड़ की टहनियाँ हटाता,

कभी किसी बूढ़ी अम्मा को राशन की थैली घर तक पहुँचा आता,

और जब लोग धन्यवाद कहते, तो बस चेहरे पर एक मुस्कान ले कर आगे बढ़ जाता।

धीरे-धीरे लोगों ने महसूस किया कि— अभय अब केवल “अच्छा अनुशासित स्वयंसेवक मात्र” नहीं, बल्कि संघ के भाव को जीने वाला गम्भीर व्यक्ति बन गया है।

कुछ महीनों बाद शाखा में वार्षिकों उत्सव हुआ।

सभी स्वयंसेवकों से पूछा गया— “इस वर्ष सबसे प्रेरक उत्तम कार्य किसने किया?”

बहुतों ने अभय का नाम लिया। पर जब उसको कहा गया, तो वह बोला—

“जी, मैंने तो कुछ नहीं किया। जहाँ आवश्यकता पड़ी, या आवश्यक लगा वहाँ अपना हाथ बढ़ा दिया।”

सारी शाखा मौन हो गई।

श्रीश जी ने धीरे से कहा - “अब यह साधारण ‘दिखने’ वाला स्वयंसेवक, सचमुच साधारण बन गया है।”

अभय ने अन्त:करण में भीतर झुककर ध्वज को प्रणाम किया। सभी को अन्त: प्रणाम किया...

उस क्षण उसे लगा— जैसे भीतर कोई बोझ था अब उसका बोझ उतर गया हो।

वह जान गया कि संघ में सबसे ऊँचा पद कोई दायित्व नहीं, चमक दमक नहीं, यहां तक की जिम्मेदारी भी नहीं,बल्कि वह मनोदशा है— जहाँ  “अहम” का अस्तित्व मिट जाता है,और केवल “वयम” शेष रह जाता है। साधारण स्वयंसेवक होना एक स्वभाव है,साधारण दिखना एक छवि है,पर साधारण बनना— स्व की खोज है अनुसंधान की साधना है।जो यह साधना कर ले, वही संघ का सच्चा स्वयंसेवक है।



प.पू. डॉ० हेडगेवार जी ने कहा हमारा धर्म तथ्था संस्कृति कितने भी श्रेष्ठ क्यों न हों, जब तक उनकी रक्षा के लिए हमारे पास आवश्यक शाक्ति नहीं है तब तक वे जग में आदर के योग्य नहीं होंगे हम शक्तिहीन हैं इसी कारण हमारा धर्म और जाति इस दीन हीन दशा को पहुँचती नजर आती है।

हम पर जितने भी आकमण अथवा अन्याय हुए हैं, और आज भी हो रहे हैं, उनका उत्तर एक ही ही हो सकता है- हम प्रचण्ड शक्तिशाली बने। यह हम संगठन के द्वारा ही उत्पन्न कर सकते हैं, अन्य किसी मार्ग से इस शक्ति का निर्माण नहीं हो सकता।





समझदारी 

एक बार समुद्र के बीच में एक बड़े जहाज पर बड़ी दुर्घटना हो गयी. कप्तान ने शिप खाली करने का आदेश दिया. जहाज पर एक युवा दम्पति थे. जब लाइफबोट पर चढ़ने का उनका नम्बर आया तो देखा गया नाव पर केवल एक व्यक्ति के लिए ही जगह है. इस मौके पर आदमी ने औरत को धक्का दिया और नाव पर कूद गया.

डूबते हुए जहाज पर खड़ी औरत ने जाते हुए अपने पति से चिल्लाकर एक वाक्य कहा.

अब प्रोफेसर ने रुककर स्टूडेंट्स से पूछा – तुम लोगों को क्या लगता है, उस स्त्री ने अपने पति से क्या कहा होगा ?

ज्यादातर विद्यार्थी फ़ौरन चिल्लाये – स्त्री ने कहा – मैं तुमसे नफरत करती हूँ ! I hate you !

प्रोफेसर ने देखा एक स्टूडेंट एकदम शांत बैठा हुआ था, प्रोफेसर ने उससे पूछा कि तुम बताओ तुम्हे क्या लगता है ?

वो लड़का बोला – मुझे लगता है, औरत ने कहा होगा – हमारे बच्चे का ख्याल रखना !

प्रोफेसर को आश्चर्य हुआ, उन्होंने लडके से पूछा – क्या तुमने यह कहानी पहले सुन रखी थी ?

लड़का बोला- जी नहीं, लेकिन यही बात बीमारी से मरती हुई मेरी माँ ने मेरे पिता से कही थी.

प्रोफेसर ने दुखपूर्वक कहा – तुम्हारा उत्तर सही है !

प्रोफेसर ने कहानी आगे बढ़ाई – जहाज डूब गया, स्त्री मर गयी, पति किनारे पहुंचा और उसने अपना बाकि जीवन अपनी एकमात्र पुत्री के समुचित लालन-पालन में लगा दिया. कई सालों बाद जब वो व्यक्ति मर गया तो एक दिन सफाई करते हुए उसकी लड़की को अपने पिता की एक डायरी मिली. 


डायरी से उसे पता चला कि जिस समय उसके माता-पिता उस जहाज पर सफर कर रहे थे तो उसकी माँ एक जानलेवा बीमारी से ग्रस्त थी और उनके जीवन के कुछ दिन ही शेष थे। 

ऐसे कठिन मौके पर उसके पिता ने एक कड़ा निर्णय लिया और लाइफबोट पर कूद गया. उसके पिता ने डायरी में लिखा था – तुम्हारे बिना मेरे जीवन को कोई मतलब नहीं, मैं तो तुम्हारे साथ ही समंदर में समा जाना चाहता था ।  लेकिन अपनी संतान का ख्याल आने पर मुझे तुमको अकेले छोड़कर जाना पड़ा । जब प्रोफेसर ने कहानी समाप्त की तो, पूरी क्लास में शांति थी । 

दिल्ली        

इस संसार में कईयों सही गलत बातें हैं लेकिन उसके अतिरिक्त भी कई जटिलतायें हैं, जिन्हें समझना आसान नहीं. इसीलिए ऊपरी सतह से देखकर बिना गहराई को जाने-समझे हर परिस्थिति का एकदम सही आकलन नहीं किया जा सकता।

रात के करीब साढ़े बारह बजे का वक़्त था। दिल्ली की खाली सड़कों पर सिर्फ़ स्ट्रीट लाइट की पीली रोशनी टिमटिमा रही थी। डॉ. आरव मेहरा अपनी कार से घर लौट रहे थे — एक लंबी ड्यूटी के बाद। अचानक, उन्होंने देखा कि सड़क के किनारे एक इंसान पड़ा है — लहूलुहान, कपड़े फटे हुए, चेहरा कीचड़ में सना हुआ।

उन्होंने कार रोकी, झुककर देखा — न कोई पहचान, न कोई फोन, न कोई बटुआ। बस एक टूटी हुई चेन और आधी जली हुई तस्वीर… जिसमें किसी बच्चे की मुस्कुराहट झलक रही थी।

डॉ. आरव ने झिझकते हुए कहा,

“इस हालत में छोड़ नहीं सकता…”

और वो अजनबी, जिसे कोई शायद मरने के लिए छोड़ गया था, अब उनके अस्पताल की इमरजेंसी में था।

तीन दिन तक वो आदमी बेहोश रहा। उसके शरीर में दर्जनों चोटें थीं, सिर पर गहरी चोट, और हाथ की हड्डी टूटी हुई। पुलिस ने रिपोर्ट लिखी — “अज्ञात व्यक्ति, सड़क हादसे का शिकार।”

आरव रोज़ उसे देखने जाते। कुछ तो था उस चेहरे में — जैसे किसी अनकही कहानी की परछाईं।

चौथे दिन जब उसने आँखें खोलीं, तो पहली बात जो उसने कही —

“मैं मर क्यों नहीं गया?”

आरव ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, “क्योंकि शायद तुम्हारी कहानी अभी बाकी है।”

वो आदमी खुद को विवेक कहता था। पर जब पुलिस ने उसके फिंगरप्रिंट ट्रेस किए, तो हैरानी हुई — उसका कोई रिकॉर्ड नहीं था। न आधार कार्ड, न पते का कोई सबूत। जैसे कोई उसे मिटा देना चाहता था।

अगले कुछ हफ़्तों में विवेक धीरे-धीरे ठीक हुआ। लेकिन वो अक्सर अस्पताल के कॉरिडोर में बैठकर मरीजों को देखता रहता, बच्चों को मुस्कुराता, और नर्सों की मदद करता।



डॉ. आरव ने उसे अस्पताल में अस्थायी काम दे दिया — दवाइयों और मरीजों की फाइलें पहुँचाने का।

एक दिन उन्होंने पूछा,

“विवेक, तुम्हारे घरवाले?”

विवेक हल्के से मुस्कुराया, “शायद अब कोई नहीं बचा।”

वो जवाब हमेशा आरव के दिल में रह गया।

लेकिन कुछ महीनों बाद, हालात बदलने लगे। विवेक अब सभी मरीजों का चहेता था। बच्चों को कहानियाँ सुनाता, बुज़ुर्गों के लिए चाय बनाता, और डाक्टरों की मदद करता।

धीरे-धीरे वो अस्पताल की एक “रूह” बन गया।

समय गुज़रा।

एक सुबह आरव को पता चला कि विवेक अचानक अस्पताल छोड़कर चला गया। कोई विदाई नहीं, कोई पता नहीं। बस उसके कमरे में छोड़ा एक छोटा-सा नोट —

"कभी ज़रूरत पड़े, तो आसमान की तरफ देख लेना। मैं वहीं हूँ जहाँ उम्मीद होती है।"

आरव को अजीब खालीपन महसूस हुआ।

लेकिन ज़िंदगी आगे बढ़ती गई।

पाँच साल बाद, मेहरा हॉस्पिटल को एक रहस्यमयी खरीदार से नोटिस मिला —

“अस्पताल की पूरी बिल्डिंग खरीदने का प्रस्ताव।”

रक़म इतनी थी कि कोई सोच भी नहीं सकता था।

नाम पढ़ते ही आरव की साँस रुक गई —

“विवेक आर्य फाउंडेशन।”

आरव को यकीन नहीं हुआ। वही विवेक? जो कभी सड़क पर लहूलुहान पड़ा था?

अगले हफ़्ते जब खरीदार अस्पताल आया, तो सबकी नज़रें दरवाज़े पर टिक गईं।

वो लंबा, सलीकेदार सूट पहने, आत्मविश्वास से भरा शख्स था।

आरव की आँखों में पहचान की चमक थी।

“तुम…”

विवेक मुस्कुराया, “हाँ, डॉक्टर साहब… वही जिसे आपने एक रात सड़क से उठाया था।”

आरव स्तब्ध रह गए।

विवेक ने कहा —

“मैंने उस हादसे के बाद दोबारा जीना शुरू किया। आपने मुझे सिर्फ बचाया नहीं, इंसानियत पर भरोसा भी लौटाया। जब मैं ठीक हुआ, तो मैंने फैसला किया कि मैं उस दर्द को ताकत बनाऊँगा।”

वो आगे बोला —

“मैंने विदेश जाकर हेल्थ टेक्नोलॉजी में स्टार्टअप शुरू किया, और आज मैं भारत लौट आया हूँ। यह अस्पताल वही जगह है जहाँ मैंने जीना सीखा। इसे अब मैं बढ़ाना चाहता हूँ — ताकि कोई और सड़क 



पर अकेला न मरे।”

डॉ. आरव की आँखें भर आईं। उन्होंने कहा —

“विवेक, तुमने तो चमत्कार कर दिया।”

विवेक मुस्कुराया, “नहीं डॉक्टर, चमत्कार आपने किया था… उस रात, जब बाकी सब लोग गाड़ी बढ़ा रहे थे, आपने ब्रेक लगाई थी।”

दोनों की आँखें नम थीं।

विवेक ने अस्पताल के सभी कर्मचारियों के लिए बोनस घोषित किया, और गरीब मरीजों के लिए एक “आशा विंग” बनवाई — जहाँ इलाज बिल्कुल मुफ्त होगा।

कई साल बाद, दिल्ली के उसी रास्ते पर फिर वही हल्की बारिश हो रही थी।

एक नई कार वहीं रुकी, और एक आदमी बाहर निकलकर एक घायल कुत्ते को उठाने लगा।

पीछे एक बोर्ड चमक रहा था —

“विवेक आर्य मेमोरियल हॉस्पिटल – जहाँ हर जान की कीमत है।”

"कभी किसी को कम मत समझो — आज जो टूटा हुआ है, कल वही दुनिया बदल सकता है।"( साभार अनजान कवि)


प्रेरक प्रसंग

आदर्श शिक्षक थे प्रो. राजेन्द्र सिंह उपाख्य रज्जू भइया, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के चतुर्थ सरसंघचालक थे और भारत तिब्बत समन्वय संघ के थे आद्य प्रणेता प्रो. राजेन्द्र सिंह जी भी राह चलते विद्यार्थी का चेहरा देख जान लेते कि उसे कुछ समस्या है। और फिर समस्या का समाधान कर के ही चैन लेते।

एक बार विश्वविद्यालय के बारामदे से होकर वे निकल रहे थे। तभी एक छात्र पर उनकी दृष्टि पड़ी। वे लौटकर उस छात्र के पास पहुंचे और पूछा –

प्रो. राजेन्द्र सिंह – क्या बात है? छात्र – (अचानक उन्हें अपने आगे देख सकपकाकर) जी कुछ नहीं। प्रो. राजेन्द्र सिंह जी ने आत्मीयता से कहा – मेरे साथ आओ।

उनके स्वर के सम्मोहन में बंध वह छात्र उनके पीछे पीछे चलता उनके चैम्बर में पुहंचा। रज्जू भैया ने अपनी सीट पर बैठकर छात्र को समाने कुर्सी पर बैठने को कहा, फिर उसे अत्यन्त आत्मीयता से आश्वस्त करते हुए समस्या पूछी।

छात्र – सर मैं अपने गांव से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर यहां प्रयाग विश्वविद्यालय में प्रवेश लेने आया हूँ। मैंने गलती से अपने प्रवेश फॉर्म में गलत विषय भर दिया। मुझे जैसे ही अपनी गलती मालूम पड़ी। मैंने कार्यालय पहुंच सभी से अपनी भूल सुधारने के लिए अनुनय विनय की लेकिन सबने मना कर दिया। सबका कहना है कि अब कुछ नहीं हो सकता। जो विषय भर दिया वही पढ़ो। सर मेरा तो यहां आना ही व्यर्थ हो जाएगा। कहते कहते छात्र बहुत परेशान हो उठा। छात्र की बात सुन प्रो. राजेन्द्र सिंह सिंह जी तुरन्त उठे और छात्र को साथ लेकर कार्यालय में पहुंचे और उसकी गलती को ठीक कराया। ये छात्र थे – राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एन.सी.ई.आर.टी.) के पूर्व निदेशक तथा राष्ट्रीय अध्यापक प्रशिक्षण (एन.सी.टी.ई.) के पूर्व अध्यक्ष एवं जाने माने शिक्षाविद पद्मश्री प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत।

प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत कहते है कि मैं आज तक इस घटना को नहीं भूला। रज्जू भैया अपने विद्यार्थी की समस्या को बिना कहे समझ लेते और उसके समाधान के लिये डूबकर प्रयत्न करते इसलिये एक आदर्श शिक्षक के रूप में उनके विद्यार्थी आज तक उन्हें यादकर पुलकित हो उठते है।

ऐसे थे अपने रज्जू भैया। 


तुम मेरे पास हो, रात हैरान है 

  उदय प्रताप सिंह

हम ने माना कि महका के घर रख दिया 

कितने फूलों का सर काट कर रख दिया 

तुम मेरे पास हो रात हैरान है 

चाँद किस ने इधर का उधर रख दिया 

एक लम्हे को सूरज ठहर सा गया 

हाथ उस ने मेरे हाथ पर रख दिया 

दे के कस्तूरी हिरनों की तक़दीर में 

प्यास का एक लम्बा सफ़र रख दिया 

तुम ने ये क्या किया बत्तियों की जगह 

इन चराग़ों में आँधी का डर रख दिया 

अपना चेहरा न पोंछा गया आप से 

आईना बे-वजह तोड़ कर रख दिया 

आख़िरी फ़ैसला वक़्त के हाथ है 

सच ने तलवार के आगे सर रख दिया 

देने वाले ये हस्सास नाज़ुक सा दिल 

मेरे सीने में क्यूँ ख़ास कर रख दिया 

                                           तुम 'उदय' चीज़ क्या हो कि इस प्यार ने 

                                          देवताओं का दिल तोड़ कर रख दिया


    



स्वच्छंद परिंदा

 बालेश्वर गुप्ता, नोयडा

       कितना बदल गया है मुन्ना,अपने बाप का इतना तिरस्कार?कैसे रहूं इसके साथ?प---र- इस उम्र में जाऊं भी तो कहाँ?किसी वृद्धाश्रम में ही जाना ठीक होगा।हां-ये ही ठीक रहेगा।पर कौनसे वृद्धाश्रम में-कैसे पता लगाऊं?ऐसे ही सोचते सोचते शांतिशरण जी की आंख लग गयी।सोते सोते भी सपने में वही मुन्ना का व्यवहार ,घटना चित्रपट के समान तैर रही थी।

       ये क्या बाबूजी?आपको कितना मना किया है कि आप किचन में नही आयेंगे, पर आप मानते ही नही।जरा निगाह बचती नही कि आप यही दिखायी देते हैं।किचन में आते हैं तो कुछ भी उठा कर खाने लगते हैं।चलिये, ये डिब्बा वही रखिये और अपने कमरे में जाइये।

     टोकता तो पहले भी था,पर आज उसकी आवाज में जो तल्खी थी,वह पहले कभी नही देखी थी।मुन्ना के इस व्यवहार ने ही शांतिशरण जी का दिल तोड़ दिया।वे उस मुन्ना की उपेक्षा नही सह सकते थे,जिसकी परवरिश के लिये शांतिशरण जी ने अपने जीवन को झौंक दिया था।

          शांतिशरण जी एक विद्यालय में क्लर्क की नौकरी करते थे।दो पुत्री और एक पुत्र संतान रूप में पाये थे।सीमित आय में उन्होंने परिवार को चलाया था।चूंकि विद्यालय में क्लर्क थे,इस कारण बच्चो की फीस माफ हो जाती थी,पर उच्च शिक्षा का खर्च तो खुद ही वहन करना था।किसी प्रकार तीनो बच्चो को ग्रेजुएट कराया।अब शांतिशरण जी के सामने दोनो बेटियों की शादियां और मुन्ना की प्रोफेशनल शिक्षा के खर्च की समस्या थी।दोनो बेटियों की उम्र में एक-सवा वर्ष का ही अंतर था।दोनो की शादी भी इसी अंतर में करनी थी।बेटियो के लिये जो बचाकर रखा था,वह आज की महंगाई के समय मे एक बेटी की शादी के लिये भी पर्याप्त नही था।बड़ी बेटी कुसुम को देखने लड़के वाले आये थे,उन्हें कुसुम पसंद 


भी आ गयी,उन्होंने हालांकि दहेज की मांग तो नही की,पर शादी शान शौकत से किसी होटल में हो,आव भगत में कोई कसर नही रहनी चाहिये, यह उनकी इच्छा थी।बाराती भी लगभग 250 आने थे।शुरू में तो शांतिशरण जी को खुशी हुई कि दहेज मुक्त शादी हो रही है,पर जब होटल में 250 -300व्यक्तियो की शादी के बारे में खर्च की पूछताछ की तो शांतिशरण जी के पावँ नीचे से जमीन ही सरक गयी।उस खर्च को वहन करने की उनकी औकात नही थी।कुसुम को भी लड़का पसंद था,वह बहुत खुश थी।शांतिशरण जी सोचते वे कितने अभागे हैं जो बेटी को भी खुशी नही दे सकते।उन्होंने किसी भी प्रकार इस शादी कराने का मन बना लिया।उन्होंने अपने पैतृक घर को गिरवी रख कर्ज ले कर कुसुम की शादी कर दी।

     एक माह बाद ही छोटी बेटी सुमन ने अपनी माँ को अपने प्रेम के विषय मे बताया।सुमन ने ये भी बताया कि अनुज कल ही घर पापा से मिलने आयेगा।कुसुम की शादी करने के बाद इतनी जल्दी दूसरी बेटी की शादी के बारे में शांतिशरण जी सोच भी नही सकते थे।दूसरी शादी पर होने वाले खर्च तथा बेटी के प्रेम विवाह की जिद ने उन्हें तनावग्रस्त कर दिया।अगले दिन ही अनुज अपनी माँ व पिता के साथ उनके घर आया।अनुज के साथ ही उसके माता पिता भी सुलझे विचारो के थे।मध्यम वर्ग से सम्बंधित अनुज के माता पिता ने दहेज रहित सादी शादी करने की इच्छा जताई।अनुज एक ही नजर में सबको भा गया था,ऊपर से दहेज रहित सादी शादी के प्रस्ताव पर सोचने की बात ही नही रह गयी थी।कुल 11 बाराती लेकर अनुज के पिता लेकर आये और सुमन भी अपने घर चली गयी।दो दो बेटियो की जिम्मेदारी से मुक्त होने पर शांतिशरण जी अपने को काफी हल्का महसूस कर रहे थे।

        अब मात्र मुन्ना की शिक्षा की जिम्मेदारी शांतिशरण जी के ऊपर थी।मुन्ना का चयन अहमदाबाद में बिजिनेस मैनेजमेंट के लिये हो गया।फीस काफी अधिक थी,मुन्ना ने कहा भी पापा जरूरी थोड़े ही है,ये पढ़ाई करनी,कहाँ से आयेंगे इतने पैसे,पापा सामान्य शिक्षा से भी भविष्य बनाया जा सकता है,आप विश्वास रखे मैं आपको निराश नही करूँगा।पर शांतिशरण जी अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने को तैयार नही थे।वे बोले,अरे मुन्ना क्यो चिंता करता है,तेरा बाप जिंदा है अभी,कैसे हार मान लूँ।तुझे अहमदाबाद में ही पढ़ना है।शांतिशरण जी ने अपना घर जो कुसुम की शादी में गिरवी रखा था,उसे बेच दिया और खुद एक कम किराये के मकान में रहने चले गये।मुन्ना का दाखिला हो गया।आगे भी दो वर्षो के खर्च पूरा करने की तपस्या थी।धीरे धीरे अपनी भविष्य निधि से कर्ज लिया, साथ ही अन्य पार्ट टाइम जॉब भी अतिरिक्त रूप से रात्रि में करना प्रारंभ कर दिया।शांतिशरण जी मुन्ना की शिक्षा को एक चुनौती के रूप  में ले रहे थे।रात दिन के परिश्रम और बढ़ती उम्र शरीर पर अपना प्रभाव दिखाने लगे थे।लेकिन इस सबकी परवाह न करते हुए शांतिशरण जी मुन्ना के भविष्य निर्माण में अपने को झौंक रहे थे।उनकी तपस्या रंग लाने लगी थी,मुन्ना का एक अच्छी कंपनी में काफी अच्छे वेतन पर कैंपस प्लेसमेंट हो गया था।कोर्स पूरा होने पर मुन्ना ने अहमदाबाद में ही जॉब जॉइन कर लिया।उसने वही एक फ्लैट किराये पर ले लिया।मुन्ना सबसे पहले अपने माता पिता को अपने पास ले आया।उसने अपने पिता से साफ कह दिया,पापा बस बहुत हो चुका,अब आप केवल आराम करेंगे।अब सब जिम्मेदारी 


मेरी।शांतिशरण जी बेटे द्वारा जताई भावना से अभिभूत हो गये।उन्हें लगा उनका परिश्रम,समर्पण सफल हो गया।

        अहमदाबाद जाने पर शांतिशरण जी ने वही सीनियर सिटीजनस के पास बैठना शुरू कर दिया।मुन्ना अपने पिता के गिरते स्वास्थ्य से चिंतित था,उसने उनका बॉडी चेकअप कराया।तो उनको डाइबिटीज निकली।उनका खाना पीना नियंत्रित हो गया।दवाइयां शुरू हो गयी।इसी बीच मुन्ना की माँ स्वर्ग प्रस्थान कर गयी।अकेले रह गये शांतिशरण जी।मुन्ना की शादी भी हो चुकी थी।अब उसका समय स्वाभाविक रूप से पत्नी में भी विभाजित हो गया था।

      शांतिशरण जी को पहले से ही किचन में जाकर कुछ न कुछ खाने की आदत थी।सो वह आदत अब भी थी।डाइबिटीज के कारण मुन्ना ने पापा से कहा,पापा अब आप यह किचन में जाने की आदत छोड़ दो।इसको शांतिशरण जी मुन्ना के व्यवहार में परिवर्तन का सूचक मान रहे थे।पर जब भी मौका लगता वे किचन में चक्कर लगा आते और कुछ न कुछ खा लेते।जब मुन्ना उन्हें वहां देखता तो उन्हें टोकता।इससे शांतिशरण जी की चिढ़ बढ़ती जा रही थी।उस दिन कही से आये मिठाई के डिब्बे को ही शांतिशरण जी खोल लिया और एक मिठाई के पीस को मुँह में डालने ही वाले थे कि मुन्ना आ गया और उसने जोर से बोलकर उन्हें रोक दिया।यही आकर शांतिशरण जी का धैर्य जवाब दे गया।उन्हें लगा मुन्ना बदल गया है।वे वृद्धाश्रम जाने की योजना बनाने लगे।

        अचानक लगी प्यास से आंखे खुली तो देखा कि पानी तो पास में रखा ही नही,वे पानी लेने उठे तो देखा मुन्ना के कमरे की लाइट जल रही है,पति पत्नी परस्पर बात कर रहे हैं।शांतिशरण जी के मन मे आया जरूर उससे पीछा छुड़ाने की योजना ही बना रहे होंगे।इन्हें ये नही पता कि इतना अपमान और तिरस्कार के बाद मैं खुद यहां नही रहने वाला।  पापा शब्द सुन उनके पावँ ठिठक गये,वे जानने की कोशिश करने लगे कि मेरे बारे में क्या बाते हो रही हैं?

     मुन्ना अपनी पत्नी से कह रहा था,देखो माधवी-पापा की आज ही रिपोर्ट आयी है, उनकी शुगर काफी बढ़ गयी है,मुझे चिंता हो गयी है,पापा को थोड़ी थोड़ी देर में कुछ न कुछ खाने की आदत है,मिठाई तो उन्हें बेहद पसंद है।मैंने आज पापा को मिठाई खाने से रोक तो दिया,पर मुझे अच्छा नही लगा।मैं कल सुगरफ्री मिठाई लाकर रख दूंगा।तुम ऐसा करना कि इसी प्रकार के शुगर रहित अन्य कुछ और चीजे लाकर रख दो, जिससे पापा सबकुछ खा सके।और हाँ पापा की इच्छा रामेश्वरम जाने की थी,अबकी बार शनिवार को हम पापा को रामेश्वरम और कन्याकुमारी लेकर  जा रहे है,तुम सब व्यवस्था कर लो,मैंने छुट्टियों के लिये अप्लाई कर दिया है।

       मैं कितना निकृष्ट हूँ जो अपने मुन्ना को ही पहचानने में भूल कर रहा था।उनकी आंखों से आंसू तो अब भी बह रहे थे।पर ये आंसू खुशी के थे,अपने बेटे के लिये गर्व के थे।आंसुओ को पौछते हुए शांतिशरण जी अपने बिस्तर पर जा लेटे।आज उनके मन पर कोई बोझ नही था।स्वछंद परिंदे की तरह वे आकाश में ऊंची उड़ान भर रहे थे,आखिर उनके द्वारा दिये संस्कारो जीत जो हुई थी।



सादगी डॉ. अनंत अय्यर

सादे कपड़ों में सजे उस बुज़ुर्ग को विमान में खाना नहीं दिया गया और उतरने के बाद उसने कुछ ऐसा किया जिससे पूरा क्रू काँप उठा।

AI888 नंबर वाला बिज़नेस क्लास का विमान सिंगापुर से मुंबई के लिए उड़ान भरने वाला था।

चेक-इन काउंटर पर एक बुज़ुर्ग दिखाई दिया। उसने एक फीकी कमीज़, फीकी खाकी पैंट और प्लास्टिक के सैंडल पहने हुए थे। उसके हाथ में बस एक पुराना कपड़े का थैला था - पुराना सुपरमार्केट वाला थैला - जिसमें कुछ निजी सामान था।

चेक-इन काउंटर के कर्मचारियों ने उसकी तरफ देखा, फिर टिकट की तरफ देखा। बिज़नेस क्लास का टिकट। वे एक पल के लिए स्तब्ध रह गए, लेकिन फिर भी विनम्रता से उसे वीआईपी लाउंज तक ले गए।

सीट 1A - सबसे महंगी सीट - उस बुज़ुर्ग की सीट थी।

जैसे ही वह बैठा, एक फ्लाइट अटेंडेंट उलझन में दिख रही थी, उसके पास आई:

"माफ़ कीजिए... क्या मैं टिकट दोबारा देख सकती हूँ?"

बुज़ुर्ग ने धीरे से मुस्कुराते हुए अपनी जेब से टिकट निकाला:

"यह लो।"

फ्लाइट अटेंडेंट ने उस पर नज़र डाली, यह वाकई बिज़नेस क्लास का टिकट था, लेकिन उसकी आँखें अभी भी शक से भरी थीं।

सीट 1C पर अरमानी सूट और रोलेक्स घड़ी पहने एक युवा व्यवसायी बैठा था, उसने उसे ऊपर से 


नीचे तक देखा, फिर मुँह फेरकर फ़ोन दबा दिया। केबिन में, "क्लास के अंतर" की बेचैनी साफ़ दिखाई दे रही थी।

जब विमान स्थिर हुआ, तो फ्लाइट अटेंडेंट ने खाना परोसा: वाग्यू बीफ़, फ्रेंच वाइन, इटैलियन ब्रेड, और मिठाई के लिए पन्ना कोट्टा।

बुज़ुर्ग ने धीरे से पुकारा:

"माफ़ कीजिए, क्या मैं खाना खा सकता हूँ?"

फ्लाइट अटेंडेंट थोड़ा मुस्कुराई, लेकिन ठंडे स्वर में बोली:

"हाँ... आज बिज़नेस क्लास का खाना सीमित है, नियमित वीआईपी मेहमानों को प्राथमिकता दी जाती है। मुझे उम्मीद है कि आप समझ गए होंगे।"

उसने सिर हिलाया, और कुछ नहीं कहा।

कुछ यात्री हँसे और फुसफुसाए:

"मुझे लगा था कि बिज़नेस क्लास एक लग्ज़री खाना है? मेरे पास टिकट खरीदने के लिए पैसे हैं, लेकिन स्टाइल खरीदने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।"

दो घंटे की उड़ान के दौरान, वह बस चुपचाप खिड़की से बाहर देखता रहा, उसकी आँखें गहरी थीं।

जब विमान मुंबई में उतरा, तो यात्री एक-एक करके चले गए। सिर्फ़ उस बूढ़े व्यक्ति को रुकने के लिए कहा गया।

अचानक केबिन का दरवाज़ा खुला। काले सूट पहने कुछ लोग अंदर आए।काले सूट पहने उन लोगों के आने के साथ ही केबिन में सन्नाटा छा गया। सबकी नज़रें उसी बुज़ुर्ग पर टिक गईं — वही, जो कुछ घंटे पहले सबकी नज़रों में “ग़लत जगह बैठा हुआ आदमी” लग रहा था।

सबसे आगे चल रहे व्यक्ति ने झुककर विनम्रता से कहा —

“सर, आपका स्वागत है। देर के लिए क्षमा करें, सुरक्षा कारणों से हम आपको सामान्य यात्री की तरह उड़ान भरने दे रहे थे। आपका कार काफ़िला नीचे तैयार है। प्रधानमंत्री कार्यालय से सीधे कॉल आया है।”

यह सुनते ही केबिन में मौजूद सभी लोग — फ्लाइट अटेंडेंट, पायलट, और बिज़नेस क्लास के यात्री — स्तब्ध रह गए।

फ्लाइट अटेंडेंट, जिसने कुछ घंटे पहले उसे खाना देने से मना किया था, अब काँपते हुए आगे आई —

“सॉरी सर, मुझे नहीं पता था… मैं समझ नहीं पाई कि आप—”

बुज़ुर्ग ने हल्की मुस्कान दी, वही शांत, विनम्र मुस्कान जो उड़ान की शुरुआत में थी।

उन्होंने कहा —

“बेटी, मैंने भी तो कभी नहीं बताया कि मैं कौन हूँ। किसी को पहचानने के लिए उसके कपड़े नहीं, उसका व्यवहार काफी होता है।”




वो उठे, धीरे-धीरे अपनी पुरानी थैली उठाई, और बाहर की ओर बढ़े।

एयरपोर्ट के गेट पर, ब्लैक बीएमडब्ल्यू और कई सुरक्षाकर्मी इंतज़ार में थे। कैमरे क्लिक करने लगे।

उसी वक्त, उस युवा व्यवसायी ने जो सीट 1C पर बैठा था, अपने होंठ भींच लिए — उसे एहसास हो गया कि जिसे उसने “गरीब बूढ़ा” समझा था, वो दरअसल भारत के सबसे बड़े रक्षा अनुसंधान केंद्र का सेवानिवृत्त प्रमुख वैज्ञानिक था, जिसने देश की सुरक्षा के लिए अपने जीवन के 40 साल समर्पित किए थे।

वो वही व्यक्ति था, डॉ. अनंत अय्यर, जिनकी तकनीक से आज भी भारतीय वायुसेना के विमान उड़ते हैं।

वो विमान से उतरे, और जाते-जाते बस इतना बोले —

“जहाज़ चाहे आसमान में हो या ज़मीन पर, ऊँचाई कपड़ों से नहीं, कर्मों से नापी जाती है।”

पूरा क्रू उस पल झुक गया — शर्म, सम्मान और एक अदृश्य सीख से भरा हुआ।

कभी किसी को उसके कपड़ों, बोली या सादगी से मत आँको। जो सबसे सादा दिखता है, वही कभी-कभी सबसे ऊँचा होता है।

जोहो कारपोरेशन के चेयरमैन, श्रीधर वेम्बू

उनका अगला लक्ष्य, प्राइवेट जेट खरीदना होना चाहिए था। लेकिन जोहो कारपोरेशन(Zoho Corporation ) के चेयरमैन, श्रीधर वेम्बू पर लक्ष्मी के साथ साथ सरस्वती भी मेहरबान थीं। इसलिए उनके इरादे औरों से बिलकुल अलग थे। 

प्राइवेट जेट खरीदना तो दूर, उन्होंने अपनी कम्पनी बोर्ड के निदेशकों से कहा कि  वे अब कैलिफ़ोर्निया(अमेरिका) से जोहो कारपोरेशन का मुख्यालय कहीं और ले जाना चाहते हैं। 

श्रीधर के इस विचार से कम्पनी के अधिकारी हतप्रभ थे.. क्यूंकि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री के लिए कैलिफ़ोर्निया के बे-एरिया से मुफीद जगह दुनिया में और कोई है ही नहीं। गूगल, एप्पल , फेसबुक, ट्विटर या सिस्को, सब के सब इसी इलाके में रचे बसे, फले फूले।पर श्रीधर तो और भी बड़ा अप्रत्याशित फैसला लेने जा रहे थे। वे कैलिफ़ोर्निया से शिफ्ट होकर सीएटल या हूस्टन नहीं जा रहे थे।वे अमेरिका से लगभग 13000 किलोमीटर दूर चेन्नई वापस आना चाहते थे। उन्होंने बोर्ड मीटिंग में कहा कि अगर डैल, सिस्को, एप्पल या माइक्रोसॉफ्ट अपने दफ्तर और रिसर्च सेंटर भारत में स्थापित कर सकते हैं तो 

जोहो कारपोरेशन को स्वदेश लौटने  पर परहेज़ क्यों है ?

श्रीधर के तर्क और प्रश्नो के आगे बोर्ड में मौन छा गया। फैसला हो चुका था। आई आई टी मद्रास के इंजीनियर श्रीधर वापस मद्रास जाने का संकल्प ले चुके थे।उन्होंने  कम्पनी के नए मुख्यालय को तमिल नाडु के एक गाँव(जिला टेंकसी) में स्थापित करने के लिए 4 एकड़ जमीन पहले से खरीद ली थी।और एलान के मुताबिक, अक्टूबर 2019 , यानि ठीक एक साल पहले श्रीधर ने टेंकसी जिले के मथलामपराई गाँव में जोहो कारपोरेशन का ग्लोबल हेडक्वार्टर शुरू कर दिया। यही नहीं, 2.5 बिलियन 


डॉलर के जोहो कारपोरेशन ने पिछले ही वर्ष सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कारोबार में 3,410 करोड़ रूपए का रिकॉर्ड राजस्व प्राप्त करके टेक जगत में बहुतों को चौंका भी दिया।  

स्वदेश क्यों लौटना चाहते थे श्रीधर ? 

श्रीधर, अमेरिका की किसी एजेंसी या बैंक या स्टॉक एक्सचेंज के दबाव के कारण स्वदेश नहीं लौटे। उनपर प्रतिस्पर्धा का दबाव भी नहीं था। वे कोई नया व्यवसाय भी नहीं शुरू कर रहे थे। वे किसी नकारात्मक कारण से नहीं, एक सकारात्मक विचार लेकर वतन लौटे। उन्होंने कई वर्ष पहले संकल्प लिया था कि अगर जोहो ने बिज़नेस में कामयाबी पायी तो वे प्रॉफिट का बड़ा हिस्सा स्वदेश में निवेश करेंगे। कम्पनी के मुनाफे को वे गाँव के बच्चों को आधुनिक शिक्षा देने पर भी खर्च करेंगे। इसी इरादे से उन्होंने सबसे पहले मथलामपराई गाँव में बच्चों के लिए निशुल्क आधुनिक स्कूल खोले।कंप्यूटर टेक्नोलॉजी के जानकार श्रीधर गाँव में ही जोहो विश्वविद्यालय भी बना रहे हैं जहाँ भविष्य के सॉफ्टवेयर इंजीनियर तैयार होंगे। फोर्ब्स मैगज़ीन में दिए एक इंटरव्यू में श्रीधर बताते हैं कि  टेक्नोलॉजी को अगर ग्रामीण इलाकों से जोड़ा जाए तो गाँव से पलायन रोका जासकता है । " गाँव में प्रतिभा है, काम करने की इच्छा है...अगर आधुनिक शिक्षा से हम बच्चों को जोड़े तो एक बड़ा टैलेंट पूल हमे गाँव में ही मिल जायेगा। इसीलिए मैं भी बच्चों की क्लास में जाता हूँ , उन्हें पढ़ाता भी हूँ।  मेरी कोशिश गाँव को सैटेलाइट से जोड़ने की है। हम न सिर्फ दूरियां मिटा रहे हैं, न सिर्फ पिछड़ापन दूर कर  रहे हैं , बल्कि शहर से बेहतर डिलीवरी गाँव से देने जा रहे है....प्रोडक्ट चाहे सॉफ्टवेयर ही क्यों न हो , " श्रीधर बताते हैं।

तस्वीरें ज़ाहिर करती हैं कि श्रीधर बेहद सहज और सादगी पसंद इंसान हैं।  वे लुंगी और बुशर्ट  में ही अक्सर आपको दिखेंगे। गाँव और तहसील में आने जाने के लिए वे साईकिल पर ही चल निकलते हैं।उनकी बातचीत से, हाव भाव से,  ये आभास नहीं होता कि  श्रीधर एक खरबपति सॉफ्टवेयर उद्योगपति हैं जिन्होंने 9  हज़ार से ज्यादा लोगों को रोजगार दिया है जिसमे अधिकाँश इंजीनियर है। उनकी कम्पनी के ऑपरेशन अमेरिका से लेकर जापान और सिंगापुर तक फैले हैं जहाँ 9,300 टेक कर्मियों को रोजगार मिला है। श्रीधर का कहना है कि आने वाले वर्षों में वे करीब 8 हज़ार टेक रोजगार भारत के  गाँवों में उपलब्ध कराएंगे और ग्लोबल सर्विस को देश के नॉन-अर्बन इलाकों में शिफ़्ट करेंगे। शिक्षा के साथ गाँवों में वे आधुनिक अस्पताल, सीवर सिस्टम, पेयजल, सिंचाई, बाजार और स्किल सेंटर स्थापित कर रहे हैं।    









अंतिम विदाई 

शिखा खुराना 'कुमुदिनी’

उम्र का ये पड़ाव अपनों का कई बार देखा है।

करीब जाकर महसूस किया, नब्ज़ को परखा है।


भरोसा दिलाया पकड़कर हाथ, दर्द की भाषा भी पढ़ी,

थकावट चेहरे पर थी, मुक्ति की आशा थी गढ़ी,


चले जाने की आरज़ू थी, हमने आंसू छुपाए थे,

दर्द देखे थे उनकी आंखों में, दुःख में मुस्कुराए थे।


दुआ की थी छोड़कर अब चले जाएं, 

राहत मिले हर दर्द से, और ना कष्ट वो पाएं,


चंद घड़ियों का साथ उनके वक्त आखिरी में पाया था।

निस्तब्ध ठंडी पड़ी बाहों को सुकून से सहलाया था।


घड़ी बिछड़ने की थी आई, विलाप कर ना पाई थी।

स्नेह से दो बूंद अश्रुओं से दी अंतिम जब विदाई‌ थी।






नवम्बर मास 2025 का पंचांग 

भारतीय व्रतोत्सव नवम्बर -2025

 दि. 1- भीष्म पंचक प्रारंभ, देव प्रबोधिनी 11 व्रत (स्मा.),दि. 2- देव प्रबोधिनी एकादशी व्रत (वै.), तुलसी विवाह प्रारम्भ,दि. 3- सोम प्रदोष व्रत,दि. 4- वैकुण्ठचतुर्दशी,दि. 5- कार्तिक पूर्णिमा, सत्य व्रत, श्रीपुष्करराज मेला (गढ़गंगा) श्री गुरुनानक जयंती, भीष्म पंचक समाप्त, चातुर्मास व्रत नियम पूर्ण, कार्तिक स्नान पूर्ण, तुलसी विवाह पूर्ण,दि. 8- गणेश चतुर्थी व्रत,दि. 12- काल भैरवाष्टमी,दि. 15- उत्पन्ना एकादशी व्रत,दि. 16- संक्रांति पुण्य,दि. 17- सोम प्रदोष व्रत, संत ज्ञानेश्वर पुण्य तिथि,,दि. 18- मास शिवरात्रि,देविका स्नान (कर),दि 20- अमावस्था पुण्य,दि. 24- विनायक चतुर्थी व्रत, दि.25- गुरुतेग बहादुर बलिदान दिवस, नाग पंचमी (द. भा.),दि. 26- चम्पा छठ, स्कन्द छठ, दि. 28- श्री दुर्गाष्टमी

मूल विचार नवम्बर -2025

मूल विचार - दि. 3 को 15/05 से दि. 5 को 9/40 तक, दि. 11 को 18/17 से दि. 13 को 19/38 तक, दि. 21 को 13/55 से दि. 23 को 19/27 बजे तक गण्ड मूल नक्षत्र है।

ग्रह स्थिति नवम्बर -2025 

ग्रह स्थिति - दि. 2 तुला में शुक्र,दि. 6 मंगल अस्त,दि. 9 वक्री बुध,दि. 11 वक्री गुरु,दि. 13 बुधास्त पश्चिम,दि. 16 वृश्चिक में सूर्य,दि. 23 तुला में बुध,दि. 25 बुधोदय पूर्व,दि. 26 वृश्चिक में शुक्र,दि. 28 शनि मार्गी,दि. 29 बुध मार्गी

पंचक विचार नवम्बर -2025  

पंचक विचार -(धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण से रेवती नक्षत्र तक) पंचको में दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना मकान दुकान आदि की छत डालना चारपाई पलंग आदि बुनना,दाह संस्कार,बांस की चटाई दीवार प्रारंभ करना आदि स्तंभ रोपण तांबा पीतल तृण काष्ट आदि का संचय करना आदि कार्यों का निषेध माना जाता है समुचित उपाय एवं पंचक शांति करवा कर ही उक्त कार्यों का संपादन करना कल्याणकारी होगा ध्यान रहेगा  पंचर नक्षत्रों का विचार मात्र उपरोक्त विशेष कृतियों के लिए ही किया जाता है विवाह मंडल आरंभ गृह प्रवेश प्रवेश उपनयन आदि मुद्दों से तो पंचक नक्षत्रका प्रयोग शुभ माना जाता है,मसारंभ से दि.04 को 12-34 तक, दि.27 को 14-07 से दि. 01 को 23-18 बजे तक पंचक हैं।

भद्रा विचार नवम्बर -2025 

भद्रा काल का शुभ अशुभ विचार - भद्रा काल में विवाह मुंडन, गृह प्रवेश, रक्षाबंधन आदि मांगलिक कृत्य का निषेध माना जाता है परंतु भद्रा काल में शत्रु का उच्चाटन करना,स्त्री प्रसंग में,यज्ञ करना,स्नान करना,अस्त्र शस्त्र का प्रयोग,ऑपरेशन कराना, मुकदमा करना,अग्नि लगाना,किसी वस्तु को काटना,भैस,घोड़ा व ऊंट संबंधी कार्य प्रशस्त माने जाते हैं सामान्य परिस्थिति में विवाह आदि शुभ मुहूर्त में भद्रा का त्याग करना चाहिए परंतु आवश्यक परिस्थितिवश अतिआवश्यक कार्य भूलोक की भद्रा ,भद्रा मुख छोड़कर कर भद्रा पुच्छ में शुभ कार्य कर सकते है

दि. 1 को 20/21 से दि. 2 को 7/31 तक, दि. 4 को 22/36 से दि. 5 को 8/44 तक, दि. 7 को 21/18 से दि. 8 को 7/32 तर्क, दि. 11 को 0/08 से 11/39 तक, दि. 14 को 12/07 से दि. 15 को 0/50 तक, दि. 18 को 7/12 से 20/27 तक, दि.24 को 8/26 से 21/22 तक, दि. 28 को 0/30 से 12/22 बजे तक भद्रा है।

सर्वार्थ सिद्धि योग नवम्बर -2025  

दैनिक जीवन में आने वाले महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शीघ्र ही किसी  शुभ मुहूर्त का अभाव हो,किंतु शुभ मुहर्त के लिए अधिक दिनों तक रुका ना जा सकता हो तो इन सुयोग्य वाले मुहर्तु  को सफलता से ग्रहण किया जा सकता है | इन से प्राप्त होने वाले अभीष्ट फल के विषय में संशय नहीं करना चाहिए यह योग हैं सर्वार्थ सिद्धि,अमृत सिद्धि योग एवं रवियोग | योग्यता नाम तथा गुण अनुसार सर्वांगीण सिद्ध कारक  है| 

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी - 9312002527,9560518227

दिनांक

प्रारंभ

दिनांक

समाप्त

02

17-03

03

06-38

04

12-34

05

06-40

10

18-48

11

06-44

11

18-17

12

06-45

20

10-58

21

13-55

23

06-59

23

19-27

30

06-59

01

07-00


चौघड़िया मुहूर्त 

चौघड़िया मुहूर्त, ज्योतिष में शुभ और अशुभ समय जानने की एक प्रणाली है। यह 24 घंटों को 8 भागों में विभाजित करता है, जिन्हें चौघड़िया कहा जाता है। प्रत्येक चौघड़िया एक निश्चित अवधि का होता है, और इन्हें शुभ और अशुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है। 

चौघड़िया मुहूर्त क्या है - 24 घंटों को 16 भागों में बांटा जाता है, जिन्हें चौघड़िया कहा जाता है। प्रत्येक चौघड़िया लगभग 1.30 घंटे का होता है। 

शुभ-अशुभ - कुछ चौघड़िया शुभ माने जाते हैं, जैसे अमृत, शुभ, लाभ, और चर। कुछ अशुभ माने जाते हैं, जैसे रोग, उद्वेग, और काल। चौघड़िया का उपयोग शुभ कार्यों, जैसे विवाह, यात्रा, और व्यापार शुरू करने के लिए शुभ समय जानने के लिए किया जाता है। 

चौघड़िया के प्रकार - दिन का चौघड़िया,सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को दिन का चौघड़िया कहा जाता है। 

रात का चौघड़िया,सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक के समय को रात का चौघड़िया कहा जाता है। 

चौघड़िया का महत्व - चौघड़िया मुहूर्त का उपयोग किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने के लिए एक अच्छे समय का चयन करने के लिए किया जाता है। यह माना जाता है कि यदि कोई कार्य शुभ चौघड़िया में शुरू किया जाता है, तो उसके सफल होने की संभावना अधिक होती है।   

सुर्य उदय- सुर्य अस्त नवम्बर -2025  


दिनांक 

01 

05 

10 

15

20 

25 

30

उदय 

06-34 

06-37 

06-41 

06-45 

06-49 

06-53 

06-57 

अस्त 

17-33 

17-30 

17-27 

17-25 

17-23 

17-22 

17-22 


 राहू काल 

 राहुकाल -राहुकाल दक्षिण भारत की देन है,दक्षिण भारत में राहु काल में कृत्य करना अच्छा नहीं माना जाता, राहु काल में शुभ कृतियों में वर्जित करने की परंपरा अब हमारे उत्तरी भारत में भी अपनाने लगे हैं राहुकाल प्रतिदिन सूर्यादि वारों में भिन्न-भिन्न समय पर केवल डेढ़ डेढ़ घंटे के लिए घटित होता है |



संक्रांति विचार

इस मास की संक्रान्ति वृश्चिक मार्गशीर्ष कृष्ण द्वादशी रविवार दि. 16 नवम्बर को अपराह्न 13/36 पर 30 मु. उठी धापी दक्षिण गमन नैऋत्य दृष्टि किये वायुमण्डल में प्रवेश करेगी। गतवार 3, गत नक्षत्र 4, वार नाम घोरा, शुद्र सुखी, नक्षत्र नाम ध्वांक्षी वैश्य सुखी। सभी धान्य, रस पदार्थ, घी, तेल, तिल, मसूर, कपड़ा, ऊन, चना, तांबा, पीतल, लोहा, जस्ता आदि में तेजी बनेगी।

आकाश लक्षण

मास में मंगल अस्त, बुध वक्री मार्गी उदयास्त और गुरु वक्री शनि मार्गी के प्रभाव में मौसम में भारी परिवर्तन होगा। बादल चाल मेघाच्छन से कहीं हल्की, कहीं भारी वर्षा होगी। पर्वतीय क्षेत्रों के उतंग स्थानों पर बर्फ गिरेगी। मैदानी स्थानों पर ठण्ड का प्रभाव बढ़ेगा। कश्मीर, भूटान, शिलांग, हि.प्र. आदि पर्वतीय क्षेत्रों में हल्की वर्षा सम्भव है।

  मांगलिक दोष विचार परिहार

वर अथवा कन्या दोनों में से किसी की भी कुंडली में 1,4,7,8 व 12 भाव में मंगल होने से ये मांगलिक माने जाते हैं,मंगली से मंगली के विवाह में दोष न होते हुए भी जन्म पत्रिका के अनुसार गुणों को मिलाना ही चाहिए यदि मंगल के साथ शनि अथवा राहु केतु भी हो तो प्रबल मंगली डबल मंगली योग होता है | इसी प्रकार गुरु अथवा चंद्रमा केंद्र हो तो दोष का परिहार भी हो जाता है |इसके अतिरिक्त मेष वृश्चिक मकर का मंगल होने से भी दोष नष्ट हो जाता है | इसी प्रकार यदि वर या कन्या किसी भी कुंडली में 1,4,7,9,12 स्थानों में शनि हो केंद्र त्रिकोण भावो में शुभ ग्रह, 3,6,11 भावो में पाप ग्रह हों तो भी मंगलीक दोष का आंशिक परिहार होता है, सप्तम ग्रह में यदि सप्तमेश हो तो भी दोष निवृत्त होता है |

स्वयं सिद्ध मुहूर्त

 स्वयं सिद्ध मुहूर्त चैत्र शुक्ल प्रतिपदा वैशाख शुक्ल तृतीया अक्षय तृतीया आश्विन शुक्ल दशमी विजयदशमी दीपावली के प्रदोष काल का आधा भाग भारत में से इसके अतिरिक्त लोकाचार और देश आचार्य के अनुसार निम्नलिखित कृतियों को भी स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है बडावली नामी देव प्रबोधिनी एकादशी बसंत पंचमी फुलेरा दूज इन में से किसी भी कार्य को करने के लिए पंचांग शुद्धि देखने की आवश्यकता नहीं है परंतु विवाह आदि में तो पंचांग में दिए गए मुहूर्त व कार्य करना श्रेष्ठ रहता है।

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी - 9312002527,9560518227



देव प्रबोधिनी एकादशी

इस एकादशी में रातभर जागकर हरि नाम-संकीर्तन करने से भगवान विष्णु अत्यन्त प्रसन्न होते हैं। विवाहादिसमस्त मांगलिक कार्योके शुभारम्भ में संकल्प भगवान विष्णु को साक्षी मानकर किया जाता है। अतएव चातुर्मासमें प्रभावी प्रतिबंध देवोत्थान एकादशी के दिन समाप्त हो जाने से विवाहादिशुभ कार्य प्रारम्भ हो जाते हैं।

देव प्रबोधिनी एकादशी कथा - एक राजा के राज्य में सभी लोग एकादशी का व्रत रखते थे। वहां की प्रजा नौकर-चाकरों से लेकर पशुओं तक को एकादशी के दिन अन्न नहीं दिया जाता था। एक दिन किसी दूसरे राज्य का एक व्यक्ति राजा के पास आकर बोला- महाराज! कृपा करके मुझे नौकरी पर रख लें। तब राजा ने उसके सामने एक शर्त रखी कि ठीक है, रख लेते हैं। लेकिन रोज तो तुम्हें खाने को सब कुछ मिलेगा, पर एकादशी को अन्न नहीं मिलेगा। उस व्यक्ति ने उस समय 'हां' कर ली, पर एकादशी के दिन जब उसे फलाहार का सामान दिया गया तो वह राजा के सामने जाकर गिड़गिड़ाने लगा- महाराज! इससे मेरा पेट नहीं भरेगा। मैं भूखा ही मर जाऊंगा। मुझे खाने के लिए अन्न दे दो।

राजा ने उसे शर्त की बात याद दिलाई, फिर भी वह अपनी बात पर अड़ा रहा और अन्न छोड़ने को राजी नहीं हुआ, तब राजा ने उसे आटा-दाल-चावल आदि दिए। वह नित्य की तरह नदी पर पहुंचा और स्नान कर भोजन पकाने लगा। जब भोजन बन गया तो वह भगवान को बुलाने लगा- आओ भगवान! भोजन तैयार है। उसके बुलाने पर पीताम्बर धारण किए भगवान चतुर्भुज रूप में आ पहुंचे और प्रेम से उसके साथ भोजन करने लगे। भोजनादि करके भगवान अंतर्धान हो गए तथा वह अपने काम पर चला गया। पंद्रह दिन बाद अगली एकादशी को वह राजा से कहने लगा कि महाराज, मुझे दुगुना सामान 


दीजिए। उस दिन तो मैं भूखा ही रह गया। राजा ने कारण पूछा तो उसने बताया कि हमारे साथ भगवान भी खाते हैं। इसीलिए हम दोनों के लिए ये सामान पूरा नहीं होता। यह सुनकर राजा को बड़ा आश्चर्य हुआ। वह बोला- मैं नहीं मान सकता कि भगवान तुम्हारे साथ खाते हैं। मैं तो इतना व्रत रखता हूं, पूजा करता हूं, पर भगवान ने मुझे कभी दर्शन नहीं दिए।

राजा की बात सुनकर वह बोला- महाराज! यदि विश्वास न हो तो साथ चलकर देख लें। राजा एक पेड़ के पीछे छिपकर बैठ गया। उस व्यक्ति ने हर रोज की तरह भोजन बनाया और भगवान को शाम तक पुकारता रहा, फिर भी भगवान न आए। अंत में उसने कहा- हे भगवान! यदि आप नहीं आए तो मैं नदी में कूदकर प्राण त्याग दूंगा। फिर भी भगवान नहीं आए, तब वह प्राण त्यागने के उद्देश्य से नदी की तरफ बढ़ा। प्राण त्याग ने का उसका दृढ़ इरादा जान शीघ्र ही भगवान ने प्रकट होकर उसे रोक लिया और साथ बैठकर भोजन करने लगे। खा-पीकर वे उसे अपने विमान में बिठाकर अपने धाम ले गए। यह देख राजा ने सोचा कि व्रत-उपवास से तब तक कोई फायदा नहीं होता, जब तक मन शुद्ध न हो। इससे राजा को ज्ञान मिला। वह भी मन से व्रत-उपवास करने लगा और अंत में स्वर्ग को प्राप्त हुआ।

   

उत्पन्ना एकादशी

उत्पन्ना एकादशी का व्रत मार्गशीर्ष मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इस दिन भगवान श्रीकृष्ण की पूजा का विधान है। एकादशी का व्रत रखने वाले दशमी के दिन शाम को भोजन नहीं करते हैं। एकादशी के दिन ब्रह्मावेला में भगवान कृष्ण की पुष्प, जल, धूप, अक्षत से पूजा की जाती है। इस व्रत में केवल फलों का ही भोग लगाया जाता है। यह ब्रह्मा, विष्णु, महेश त्रिदेवों का संयुक्त अंश माना जाता है। यह अंश दत्तात्रेय के रूप में प्रकट था। यह मोक्ष देने वाला व्रत माना जाता है।

उत्पन्ना एकादशी की कहानी

सत्ययुग में एक बार मुर नामक दैत्य ने देवताओं पर विजय प्राप्त कर इन्द्र को अपदस्थ कर दिया। देवता भगवान शंकर की शरण में पहुंचे। भगवान शंकर ने देवताओं को विष्णुजी के पास भेज दिया। विष्णुजी ने दानवों को तो परास्त कर दिया परन्तु मुर भाग गया। विष्णु ने मुर को भागता देखकर लड़ना छोड़ दिया और बद्रिकाश्रम की गुफा में आराम करने लगे। मुर ने वहां पहुंचकर विष्णुजी को मारना चाहा। तत्काल विष्णुजी के शरीर से एक कन्या को आशीर्वाद दिया कि तुम संसार में माया जाल में उलझे तथा मोह के कारण मुझसे विमुख प्राणियों को मुझ तक लाने में सक्षम होओगे। तुम्हारी आराधना करने वाले प्राणी आजीवन सुखी रहेंगे। ऐसी है जिसका माहात्य अपूर्व है।

वर वधू की तलाश है तो निम्नलिखित फार्म भरे 

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नवम्बर मास के महत्व पूर्ण दिवस 

1 नवंबर- ऑल सेंट्स डे,हर साल 1 नवंबर को सभी संतों के सम्मान में ऑल सेंट्स डे मनाया जाता है। यह ईसाइयों के लिए ईसाई इतिहास के सभी ज्ञात और अज्ञात संतों और शहीदों को याद करने का एक अवसर माना जाता है। ऑल सेंट्स डे को ऑल हैलोज़ डे या हैलोमास भी कहा जाता है।

1 नवंबर- राज्योत्सव दिवस (कर्नाटक स्थापना दिवस),राज्योत्सव दिवस, जिसे कर्नाटक राज्योत्सव या कन्नड़ राज्योत्सव या कन्नड़ दिवस या कर्नाटक दिवस के नाम से भी जाना जाता है, हर साल 1 नवंबर को मनाया जाता है। 1 नवंबर 1956 को, दक्षिण भारत के सभी कन्नड़ भाषा-भाषी क्षेत्रों को मिलाकर कर्नाटक राज्य का निर्माण किया गया था।

1 नवंबर- हरियाणा दिवस,हरियाणा दिवस जो 1966 में भारतीय राज्य हरियाणा के गठन का प्रतीक है। यह दिन विशेष महत्व रखता है क्योंकि यह हरियाणा के लोगों की सांस्कृतिक विरासत, प्रगति और उपलब्धियों का स्मरण कराता है। 

2 नवंबर- ऑल सोल्स डे,2 नवंबर को दिवंगत आत्माओं के सम्मान में ऑल सोल्स डे मनाया जाता है। रोमन कैथोलिक धर्म में, 2 नवंबर उन सभी दिवंगत आत्माओं को श्रद्धांजलि अर्पित करता है जिनके बारे में माना जाता है कि वे पापमोचन में हैं क्योंकि उनकी मृत्यु उनकी आत्माओं पर छोटे पापों का दोष लेकर हुई थी।

2 नवंबर- पारुमाला पेरुननल-केरल का यह शानदार त्योहार भारत के सदाबहार राज्य के सबसे प्रसिद्ध उत्सवों में से एक है। परुमाला पेरुन्नाल केरल एक ऐसा त्योहार है जो केरल को एक ठहराव पर ला देता है। परुमाला पेरुन्नाल केरल एक सुगम्य स्थान पर मनाया जाता है, जिससे पर्यटकों के लिए इस अवसर पर आना और आनंद लेना आसान हो जाता है।

3 नवंबर- विश्व जेलीफ़िश दिवस -चूंकि यह वह मौसम है जब जेलीफ़िश उत्तरी गोलार्ध के तटों की ओर प्रवास करना शुरू करती हैं, इसलिए विश्व जेलीफ़िश दिवस को दक्षिणी गोलार्ध में वसंत ऋतु में मनाया जाना तय किया गया है।

3 नवंबर- विश्व सैंडविच दिवस-सैंडविच का आविष्कार करने के दावे के बाद, जॉन मोंटेगू, चौथे अर्ल ऑफ़ सैंडविच को सैंडविच का नाम दिया गया। यह दिन शाम के खाने में पाए जाने वाले विविध स्वादों का सम्मान करता है।

04 नवम्बर वासुदेव फडके जयन्ती (1845 ई०)

05 नवम्बर सम्राट हेमचन्द विक्रमादित्य का बलिदान दिवस (5 नवम्बर 1556) -  दिल्ली के अन्तिम हिन्दू राजा

5 नवंबर- विश्व सुनामी जागरूकता दिवस-विश्व सुनामी जागरूकता दिवस 5 नवंबर को मनाया जाता है ताकि सुनामी के खतरों को उजागर किया जा सके और प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम करने में पूर्व चेतावनी प्रणालियों के महत्व पर ज़ोर दिया जा सके। कई संगठन लोगों को स्थिति के प्रति जागरूक करने के लिए सुनामी के बारे में पारंपरिक ज्ञान प्रदान करते हैं।

6 नवंबर- युद्ध और सशस्त्र संघर्ष में पर्यावरण के शोषण को रोकने के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस

संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 5 नवंबर, 2001 को घोषणा की कि 6 नवंबर को 'युद्ध और सशस्त्र संघर्ष में पर्यावरण के शोषण की रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस' के रूप में मनाया जाएगा।

6 नवंबर- राष्ट्रीय नाचोस दिवस-देश भर के खेल आयोजनों में अक्सर खाए जाने वाले भोजन के सम्मान में 6 नवंबर को राष्ट्रीय नाचोस दिवस मनाया जाता है। अपने सबसे बुनियादी रूप में, नाचोस बस टॉर्टिला चिप्स होते हैं जिन पर पिघला हुआ चीज़ नाचो, क्वेसो या कोई अन्य प्रकार का नाचोस और साल्सा डाला जाता है। 

7 नवंबर- शिशु संरक्षण दिवस-हर साल 7 नवंबर को शिशु संरक्षण दिवस शिशुओं की सुरक्षा, संवर्धन और विकास के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि अगर शिशुओं की सुरक्षा की जाए, तो वे इस दुनिया का भविष्य बनेंगे, क्योंकि वे कल के नागरिक हैं। दुनिया के भविष्य की रक्षा करना बेहद ज़रूरी है।

7 नवंबर- राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस-कैंसर के बारे में जागरूकता बढ़ाने और इसे वैश्विक स्वास्थ्य प्राथमिकता बनाने के लिए 7 नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस मनाया जाता है। पूर्व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने इस स्थिति के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए 2014 में राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस की शुरुआत की थी।

7 नवंबर- चंद्रशेखर वेंकट रमन जयंती-सी.वी. रमन, जिन्हें चंद्रशेखर वेंकट रमन के नाम से भी जाना जाता है, का जन्म 7 नवंबर, 1888 को तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में हुआ था। सी.वी. रमन को 1930 में रमन प्रभाव की खोज के लिए भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला। रमन प्रभाव में किसी पदार्थ से होकर गुजरने वाला प्रकाश प्रकीर्णित होता है और पदार्थ के अणुओं में ऊर्जा अवस्था परिवर्तन के कारण प्रकीर्णित प्रकाश की तरंगदैर्घ्य में परिवर्तन होता है।विपिन चंद्र पाल जयन्ती (1858 ई०) मा० माधवराव मुले जयन्ती (1912)

08 नवम्बर मा० एकनाथ रानाडे जयन्ती (1914)

08 नवंबर - लालकृष्ण आडवाणी का जन्मदिन-लाल कृष्ण आडवाणी का जन्म 8 नवंबर 1927 को कराची, पाकिस्तान में हुआ था। लाल कृष्ण आडवाणी, एक भारतीय राजनीतिज्ञ और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संस्थापक सदस्य, भारत के उप प्रधान मंत्री (2002-04) के रूप में कार्यरत थे।

08 नवंबर- विश्व रेडियोग्राफी दिवस- दुनिया भर के रेडियोग्राफर इस दिन और इसके आस-पास के दिनों का उपयोग रेडियोग्राफी को एक कैरियर के रूप में बढ़ावा देने, आधुनिक स्वास्थ्य सेवा में एक महत्वपूर्ण योगदान के रूप में, तथा डायग्नोस्टिक इमेजिंग और विकिरण चिकित्सा के बारे में सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाने के अवसर के रूप में कर सकते हैं। 

09 नवंबर- राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस - भारत में, 9 नवंबर को राष्ट्रीय विधिक सेवा दिवस के रूप में मनाया जाता है ताकि उन क्षेत्रों में लोगों में जागरूकता बढ़ाई जा सके जहाँ कानूनी साक्षरता का अभाव है। विधिक सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1995 में लागू किया गया था और तब से लोग कानूनी साक्षरता की कमी के प्रति जागरूक हो रहे हैं।

9 नवंबर- उत्तराखंड स्थापना दिवस- उत्तराखंड की स्थापना 9 नवंबर, 2000 को हुई थी। उत्तराखंड को "देवभूमि" या "देवताओं की भूमि" के रूप में जाना जाता है। उत्तराखंड स्थापना दिवस 19 नवंबर को मनाया जाता है। शुरुआत में उत्तरांचल के नाम से जाना जाने वाला यह राज्य 2007 में औपचारिक रूप से उत्तराखंड नाम में बदल गया।

9 नवंबर- करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन - 9 नवंबर, 2019 को भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने करतारपुर कॉरिडोर के निर्माण की घोषणा की। इस दिन का धार्मिक महत्व तब से है जब 1552 में प्रथम सिख गुरु, गुरु नानक देव जी ने करतारपुर साहिब गुरुद्वारा की स्थापना की थी।

9 नवंबर- विश्व स्वतंत्रता दिवस - 9 नवंबर को मनाया जाने वाला विश्व स्वतंत्रता दिवस, 1989 में बर्लिन की दीवार गिरने की याद में मनाया जाता है, जो उत्पीड़न पर स्वतंत्रता की विजय का प्रतीक है। यह दिन स्वतंत्रता और लोकतंत्र की भावना का जश्न मनाता है और उन लोगों को सम्मानित करता है जिन्होंने सत्तावादी शासन से मुक्त जीवन जीने के अधिकार के लिए संघर्ष किया।  

10 नवंबर- शांति और विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस - शांति और विकास के लिए विश्व विज्ञान दिवस एक अंतरराष्ट्रीय दिवस है जो समाज में विज्ञान के महत्व को दर्शाता है और हर साल 10 नवंबर को मनाया जाता है। यह उभरते वैज्ञानिक मुद्दों पर चर्चा में आम जनता की भागीदारी के महत्व पर भी ज़ोर देता है।

10 नवंबर- विश्व सार्वजनिक परिवहन दिवस - 10 नवंबर को मनाया जाने वाला विश्व सार्वजनिक परिवहन दिवस एक वैश्विक पहल है जिसका उद्देश्य टिकाऊ शहरों के निर्माण और जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए सार्वजनिक परिवहन के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाना है। 

10 नवंबर- विश्व टीकाकरण दिवस - विश्व टीकाकरण दिवस, जो प्रतिवर्ष 10 नवंबर को मनाया जाता है, वैश्विक स्वास्थ्य की सुरक्षा में टीकों के महत्व की एक महत्वपूर्ण याद दिलाता है। यह दिवस जानलेवा बीमारियों की रोकथाम और व्यक्तियों व समुदायों को खसरा, पोलियो और इन्फ्लूएंजा जैसी बीमारियों से बचाने में टीकाकरण की भूमिका पर प्रकाश डालता है। 

10 नवम्बर शिवाजी द्वारा अफजल खान का वध (1859)

11 नवंबर - युद्धविराम दिवस (स्मरण दिवस/दिग्गज दिवस) - फ्रांस में, 11 नवंबर को युद्धविराम दिवस के रूप में मनाया जाता है, जिसे प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के उपलक्ष्य में भी जाना जाता है। इस दिन को प्रथम विश्व युद्ध की समाप्ति के उपलक्ष्य में भी मनाया जाता है। कुछ देश इस दिन को स्मरण दिवस के रूप में भी मनाते हैं। 11 नवंबर, 1918 को उत्तरी फ्रांस के कॉम्पिएग्ने में मित्र देशों की सेनाओं और जर्मनी के बीच एक युद्धविराम समझौते पर भी हस्ताक्षर किए गए थे।

11 नवंबर- राष्ट्रीय शिक्षा दिवस - यह दिवस 11 नवंबर को भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना अबुल कलाम आज़ाद की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। 1947 से 1958 तक, वे स्वतंत्र भारत के पहले शिक्षा मंत्री भी रहे। 

12 नवंबर- विश्व निमोनिया दिवस - निमोनिया और इसकी रोकथाम के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए 12 नवंबर को विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है। यह दुनिया का सबसे बड़ा संक्रामक रोग माना जाता है, जिससे पाँच साल से कम उम्र के बच्चे सबसे ज़्यादा प्रभावित होते हैं।

12 नवम्बर - महामना मदन मोहन मालवीय पुण्य तिथि (1946)

13 नवंबर- विश्व दयालुता दिवस - हर साल 13 नवंबर को विश्व दयालुता दिवस मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य सभी को सबसे महत्वपूर्ण और अनोखे मानवीय सिद्धांतों में से एक पर चिंतन करने और उसका पालन करने का अवसर प्रदान करना है। यह दिन दयालुता के छोटे-छोटे कार्यों को भी बढ़ावा देता है, जो लोगों को एक साथ लाते हैं।

14 नवंबर- बाल दिवस - हर साल 14 नवंबर को भारत बाल दिवस मनाता है। इसे बाल दिवस के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोगों को बच्चों के अधिकारों, देखभाल और शिक्षा के बारे में जागरूक किया जाता है। यह दिन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जयंती के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।  

14 नवंबर- विश्व मधुमेह दिवस - 14 नवंबर को विश्व मधुमेह दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिवस का मुख्य उद्देश्य मधुमेह रोग के प्रभाव, इसकी रोकथाम और मधुमेह शिक्षा के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना है।

15 नवंबर-  गुरु नानक देव की जयंती - हर साल गुरु नानक जयंती सिख धर्म के संस्थापक, गुरु नानक देव के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में मनाई जाती है। इस वर्ष गुरु नानक की 553वीं जयंती है, जिसे प्रकाश उत्सव या गुरु पर्व के रूप में भी जाना जाता है और यह सिख समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण त्योहार है।

15 नवंबर- झारखंड स्थापना दिवस - झारखंड का गठन 15 नवंबर 2000 को हुआ था। बिहार पुनर्गठन अधिनियम ने बिहार को भारत के 28वें राज्य के रूप में स्थापित किया।

15 नवंबर- बिरसा मुंडा जयंती - धार्मिक और आदिवासी स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा का जन्म 15 नवंबर, 1875 को झारखंड के खूंटी ज़िले के उलिहातु में हुआ था। यह क्षेत्र ब्रिटिश भारत के बिहार का एक हिस्सा था। बिरसा मुंडा भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में एक महत्वपूर्ण व्यक्ति थे। 

16 नवंबर- अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस - संस्कृतियों और लोगों के बीच आपसी समझ को बढ़ावा देकर सहिष्णुता के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र महासभा ने प्रस्ताव 51/95 द्वारा, संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों को 16 नवंबर, 1966 को अंतर्राष्ट्रीय सहिष्णुता दिवस मनाने के लिए आमंत्रित किया था।

16 नवंबर- राष्ट्रीय प्रेस दिवस - हर साल 16 नवंबर को भारतीय प्रेस परिषद (पीसीआई) को मान्यता और सम्मान देने के लिए राष्ट्रीय प्रेस दिवस मनाया जाता है। यह दिन देश में स्वतंत्र और जवाबदेह प्रेस के अस्तित्व का जश्न मनाता है।

17 नवंबर- अंतर्राष्ट्रीय छात्र दिवस - नाजी सैनिकों ने 17 नवंबर 1939 को अंतर्राष्ट्रीय छात्र दिवस की स्थापना की। इस दिन 9 छात्र नेता थे और इस घटना के दौरान छात्रों की बहादुरी असाधारण थी।

17 नवंबर- राष्ट्रीय मिर्गी दिवस - राष्ट्रीय मिर्गी जागरूकता दिवस 17 नवंबर को मनाया जाता है। इस अवसर पर, मुख्य उद्देश्य मिर्गी रोग, उसके लक्षणों और उसकी रोकथाम के बारे में लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। मिर्गी को एक दीर्घकालिक मस्तिष्क विकार माना जाता है जो बार-बार होने वाले दौरे या "दौरे" से चिह्नित होता है। यह सभी उम्र के लोगों को प्रभावित करता देखा गया है, और प्रत्येक व्यक्ति की अपनी चिंताएँ और समस्याएँ होती हैं जिनसे उसे निपटना होता है।

17 नवम्बर - लाला लाजपत राय पुण्य तिथि (1928)

18 नवम्बर - माधव राव पेशवा का निधन (1772)

19 नवम्बर - भाउरावदेवरस का जन्म दिवस (1917)

19 नवंबर- विश्व शौचालय दिवस - हर साल 19 नवंबर को विश्व शौचालय दिवस मनाया जाता है। यह दिन मुख्य रूप से लोगों को वैश्विक स्वच्छता संकट से निपटने और सतत विकास लक्ष्य (एसडीजी) 6 को प्राप्त करने के लिए प्रेरित करने के लिए है, जो 2030 तक सभी के लिए स्वच्छता का वादा करता है। यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया की लगभग 60% आबादी, यानी लगभग 4.5 अरब लोगों के घरों में शौचालय नहीं हैं या वे शौचालय के कचरे का उचित निपटान करना नहीं जानते हैं।

19 नवंबर- अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस - अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस का मुख्य विषय पुरुषों और लड़कों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है। हर साल 19 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय पुरुष दिवस मनाया जाता है और यह दिन दुनिया भर में पुरुषों के सामने आने वाली प्रमुख समस्याओं पर प्रकाश डालता है।

20 नवंबर- सार्वभौमिक बाल दिवस - हर साल 20 नवंबर को विश्व बाल दिवस मनाया जाता है। इस दिन का मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देना, दुनिया भर के बच्चों में जागरूकता बढ़ाना और बच्चों के कल्याण में सुधार लाना है। 20 नवंबर, 1954 को विश्व बाल दिवस की स्थापना की गई थी।

20 नवंबर - अफ्रीका औद्योगीकरण दिवस - हर साल 20 नवंबर को, अफ्रीकी औद्योगीकरण दिवस अफ्रीकी औद्योगीकरण की समस्याओं और चुनौतियों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए मनाया जाता है। यह भी देखा गया है कि विभिन्न अफ्रीकी देशों की सरकारें और अन्य संगठन अफ्रीका के औद्योगीकरण की प्रक्रिया को प्रोत्साहित करने के विभिन्न तरीकों पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

21 नवंबर- विश्व टेलीविजन दिवस - हर साल 21 नवंबर को विश्व टेलीविजन दिवस मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस दिन टेलीविजन की दैनिक भूमिका पर प्रकाश डाला जाता है क्योंकि यह लोगों को प्रभावित करने वाले विभिन्न मुद्दों को प्रस्तुत करता है। यह दिन वैश्विक परिदृश्य पर भू-टेलीविज़ुअल संचार के प्रभाव और पहुँच की स्वीकृति के रूप में मनाया जाता है।

21 नवंबर- विश्व हेलो दिवस - विश्व हेलो दिवस प्रतिवर्ष 21 नवम्बर को मनाया जाने वाला एक अवकाश है, जिसका उद्देश्य यह व्यक्त करना है कि संघर्षों का समाधान बल प्रयोग के बजाय संचार के माध्यम से किया जाना चाहिए।

21 नवंबर- राष्ट्रीय दर्शन दिवस - समाज, संस्कृति और मानवीय चिंतन पर दर्शन के गहन प्रभाव की वैश्विक मान्यता है। यूनेस्को द्वारा स्थापित यह दिवस समकालीन चुनौतियों से निपटने में आलोचनात्मक चिंतन, संवाद और चिंतन के महत्व पर प्रकाश डालता है।

23 नवंबर- फिबोनाची दिवस -मध्य युग के सबसे प्रभावशाली गणितज्ञों में से एक, लियोनार्डो बोनाची के सम्मान में प्रतिवर्ष 23 नवंबर को फिबोनाची दिवस मनाया जाता है। 

23 नवंबर- राष्ट्रीय एस्प्रेसो दिवस -इस शक्तिशाली पेय को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका में 23 नवंबर को प्रतिवर्ष राष्ट्रीय एस्प्रेसो दिवस मनाया जाता है।

 23 नवंबर- राष्ट्रीय काजू दिवस - राष्ट्रीय काजू दिवस हमें इस स्वादिष्ट बीज का आनंद लेने के लिए प्रोत्साहित करता है, चाहे वह किसी भी रूप में हो। साथ ही, यह दिन काजू की खेती करने वाले मजदूरों की कड़ी मेहनत की सराहना करने के लिए भी मनाया जाता है।

23 नवम्बर - महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र वसु का देहान्त (1937) 1834 में इंग्लैंड में विज्ञान स्नातक बने

24 नवंबर- लचित दिवस - लाचित दिवस अहोम सेनापति लाचित बोरफुकन के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है। यह दिन सरायघाट के युद्ध में असमिया सेना की विजय का सम्मान करता है।

24 नवंबर- गुरु तेग बहादुर जी का शहीदी दिवस - गुरु तेग बहादुर, भाई मतिदास, भाई सति दास और भाई दयाल दास का धर्म हेतु चाँदनी चौक दिल्ली में बलिदान (1675)

25 नवंबर- महिलाओं के खिलाफ हिंसा उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस - हर साल 25 नवंबर को महिलाओं के विरुद्ध हिंसा उन्मूलन के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। इस दिवस की स्थापना 1993 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी। महिलाओं के विरुद्ध हिंसा को लिंग-आधारित हिंसा के किसी भी ऐसे कृत्य के रूप में परिभाषित किया जाता है जो महिलाओं को शारीरिक, यौन या मनोवैज्ञानिक क्षति या पीड़ा पहुँचाता है, जिसमें धमकियाँ भी शामिल हैं।

26 नवंबर- राष्ट्रीय दुग्ध दिवस -यह दिवस भारत की श्वेत क्रांति के जनक डॉ. वर्गीज कुरियन की जयंती के उपलक्ष्य में 26 नवंबर को मनाया जाता है।

26 नवंबर- भारत का संविधान दिवस -हर साल 26 नवंबर को भारत संविधान दिवस मनाता है, जिसे विधि दिवस या संविधान दिवस भी कहा जाता है। 26 नवंबर, 1949 को भारत की संविधान सभा ने भारतीय संविधान को अपनाया था। यह 26 जनवरी, 1950 को लागू हुआ।  

28 नवंबर- लाल ग्रह दिवस -लाल ग्रह दिवस प्रतिवर्ष 28 नवंबर को मनाया जाता है। लाल ग्रह दिवस 28 नवंबर, 1964 को मेरिनर 4 अंतरिक्ष यान के प्रक्षेपण की याद में मनाया जाता है।

28 नवम्बरमहात्मा ज्योतिबाफुले का देहावसान (1890) महाराष्ट्र के महान समाज सुधारक।

29 नवंबर - फिलिस्तीनी लोगों के साथ एकजुटता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस -हर साल 29 नवंबर को फ़िलिस्तीनी लोगों के साथ अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता दिवस मनाया जाता है। 1977 में प्रस्ताव 32/40B पारित होने के साथ, महासभा ने इस दिन को फ़िलिस्तीनी लोगों के साथ अंतर्राष्ट्रीय एकजुटता दिवस के रूप में नामित किया। 29 नवंबर, 1947 को, महासभा ने फ़िलिस्तीन के विभाजन पर प्रस्ताव 181 (II) को अपनाया।

29 नवंबर- अंतर्राष्ट्रीय जगुआर दिवस -हर साल 29 नवंबर को अंतर्राष्ट्रीय जगुआर दिवस के रूप में मनाया जाता है। उत्तरी अमेरिका की इस सबसे बड़ी जंगली बिल्ली को सतत विकास के प्रतीक, जैव विविधता के संरक्षण के लिए एक छत्र प्रजाति और मध्य एवं दक्षिण अमेरिका की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के एक हिस्से के रूप में सम्मानित किया जाता है।

30 नवंबर- सेंट एंड्रयू दिवस -हर साल 30 नवंबर को, स्कॉटलैंड सेंट एंड्रयू दिवस मनाता है, खासकर उन देशों में जहाँ सेंट एंड्रयू संरक्षक संत हैं, जैसे बारबाडोस, बुल्गारिया, कोलंबिया, साइप्रस, ग्रीस, रोमानिया, रूस, स्कॉटलैंड और यूक्रेन। आज एंड्रयू द एपोस्टल का पर्व है। बर्न्स नाइट और होगमैनय के बाद, यह स्कॉटिश कैलेंडर की सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है, जो हर साल स्कॉटलैंड के शीतकालीन उत्सव की शुरुआत का संकेत देती है।






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