काली के मंत्र का महत्व व लाभ

काली के मंत्र का महत्व व लाभ

सतीश शर्मा  

देवी काली पृथ्वी की दिव्य रक्षक हैं, जिन्हें कालिका माता  के नाम से जाना जाता है। लेकिन देवी की विनाशकारी शक्ति के कारण उन्हें काली माता के नाम से भी जाना जाता है। काली शब्द संस्कृत के  काल शब्द से आया है, काल का अर्थ समय है । इसलिए देवी काली समय, परिवर्तन, शक्ति, सृजन, संरक्षण और विनाश का प्रतिनिधित्व करती हैं। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है कि काली शब्द का अर्थ “काला” है यह काला की स्त्री संज्ञा है। देवी काली को पार्वती का उग्र रूप माना जाता है। माता पार्वती भगवान शिव की पत्नी है | जो भक्त  उनकी श्रद्धाभाव से पूजा करता है, उनके अच्छे कर्म के लिए अच्छे फल प्रदान करती हैं। हमको  मां काली की भक्ति के साथ पूजा करनी चाहिए | जो काली की पूजा उनके मंत्र का जप कर करते है माता उन पर अपना आशीर्वाद बनए रखती है  और उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण करतीं है ।
दुर्गा सप्तशती  के अनुसार, काली मां महान देवी की 10 महाविद्याओं या अभिव्यक्तियों में से पहली हैं। काली मां की पूजा पूरे देश में की जाती है। नेपाल, श्रीलंका के साथ-साथ हमारे देश के कई हिस्सों में जैसे बंगाल, असम, कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, केरल और तमिलनाडु के कई भागों में यह पूजा की जाती है।
देवी काली ने सदियों से धर्म की रक्षा की और पाप करने वाले को नष्ट करने के लिए कई रूप धारण किए हैं। मां कालिका सबसे अधिक जागृत हैं और उन्होंने चार रूपों में पृथ्वी पर विचरण किया है – दक्षिणा काली, श्मशान काली, मां काली और महाकाली। इन सभी रूपों ने विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति की है, राक्षसों के वध से लेकर पृथ्वी और उसके मूल निवासियों के रक्षा करती हैं।

माँ काली का बीज मंत्र – ॐ क्रीं कालिकायै नमः

नमः का अर्थ है देवी को नमस्कार करना और उनके प्रति समर्पण करना। ॐ क्रीं कालिकायै नमः” का मतलब है, “मैं देवी काली को नमन करता हूं”. काली माता, परिवर्तन और प्रचंड करुणा का प्रतीक हैं |
ॐ क्रीं कालिकायै नमः मंत्र  उन लोगों के लिए बहुत लाभ कारी  हैं जो बहुत ज्यादा दिमागी कार्य करते हैं।  काली महाकाली मंत्र  व्यक्ति को मन की गहरी स्थिति में जाने और मन को ख़राब विचारों और भावनाओं से मुक्त करने की और ले जाता है। मन का भय दूर होता है,व्यक्ति के जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है,हर मनोकामना पूरी होती है
काली माता के कुछ और मंत्र:

दक्षिण काली मंत्र – ‘ॐ क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं दक्षिणे कालिके क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा॥’ 

काली माता का 22 अक्षरीय मंत्र – क्रीं क्रीं क्रीं हूँ हूँ ह्रीं ह्रीं स्वाहा 


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