शुक्र ग्रह आकाश मंडल में बुध ग्रह के बाद शुक्र ग्रह का स्थान है | शुक्र ग्रह,सूर्य व चंद्र के बाद सबसे प्रकाशवान ग्रह हैं बृहस्पति के साथ-साथ शुक्र को भी मंत्रिपरिषद में मंत्री पद मिला है | शुक्र ग्रह को सौंदर्य, प्रेम, आकर्षण, भौतिक सुख-सुविधाओं और वैवाहिक जीवन का कारक माना गया है। विभिन्न राशियों में स्थित होने पर शुक्र जातक के स्वभाव, रिश्तों और जीवनशैली को अलग-अलग तरीके से प्रभावित करते हैं। कुंडली के अलग-अलग भावों (भागों) में स्थित होने पर यह जातक को शानदार वाहन, ऐशो-आराम, कलात्मक रुचि और सुखी दांपत्य जीवन प्रदान करता है, हालांकि कमजोर होने पर विपरीत परिणाम भी देता है। प्रत्येक राशि पर शुक्र का विस्तृत प्रभाव नीचे दिया गया है- मेष राशि - इस राशि में शुक्र होने पर जातक साहसी, कलाप्रेमी और घूमने-फिरने के शौकीन होते हैं। प्रेम संबंधों में वे थोड़े आक्रामक हो सकते हैं और अपनी पसंद के जीवनसाथी को पाने के लिए प्रयासरत रहते हैं। वृषभ राशि - यह शुक्र की अपनी राशि है। यहाँ शुक्र जातक को बेहद आकर्षक, धनवान, उदार और वफादार बनाता है। ऐसे लोग भौतिक सुखो...
शनि ग्रह शनिग्रह :- नौ ग्रहों में शनि बृहस्पति के बाद सबसे बड़ा ग्रह है। शनिग्रह एक राशि में ढाई वर्ष भ्रमण करता है। शनि सभी द्वादश (बारह) राशि घूमने के लिए तीस साल का समय लेता है। तीन राशियों की कालावधि को साढे सात वर्ष लगते हैं इसीलिए इस काल को साढेसाती कहते हैं। शनिदेव हैं पश्चिम दिशा के स्वामी, इस दिशा में दोष होने पर लाइफ में बनी रहती हैं परेशानियां,ध्यान रखें ये बाते वास्तु में दस दिशाओं को महत्व बताया गया है। इन सभी दिशाओं का एक-एक प्रतिनिधि ग्रह होता है, जिसका प्रभाव उस दिशा से होता है। उसी के अनुसार पश्चिम दिशा पर शनिदेव का आधिपत्य माना गया है। दरअसल ज्योतिष के अनुसार शनि को श्यामवर्ण माना गया है। काला रंग आलस्य का प्रतीक होता है। शनि को भी धीमे चलने वाला अशुभ शनि को शुभ बनाने के लिए लोहे व काली चीजों के दान का ज्योतिष के अनुसार विशेष महत्व है।जिसके दान से उस ग्रह...
सतीश शर्मा जी द्वारा लिखित व संकलित कुछ कहे कुछ अनकहे प्रसंग समय का सम्मान और निष्ठा की कसौटी यह प्रसंग राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के द्वितीय सरसंघचालक श्री गुरुजी (माधवराव सदाशिवराव गोलवलकर) के प्रवास काल का है। इस घटना में श्री गुरुजी ने विषम से विषम परिस्थिति में भी समयपालन (Punctuality) और स्वयंसेवकों के समय के प्रति अपने गहरे आदर का एक ऐतिहासिक उदाहरण प्रस्तुत किया था। कहानी: घना अंधेरा छा चुका था और मूसलाधार बारिश रुकने का नाम नहीं ले रही थी। कच्चे ग्रामीण रास्ते पानी और कीचड़ से लबालब भर चुके थे। गाड़ियों के पहिए मिट्टी में धंस रहे थे। श्री गुरुजी अपने प्रवास के क्रम में एक सुदूर गाँव में आयोजित स्वयंसेवक एकत्रीकरण की ओर जा रहे थे। कार्यक्रम का समय शाम ठीक 6:00 बजे तय था। लेकिन कार्यक्रम स्थल से लगभग 4 किलोमीटर पहले ही, गाँव के बाहरी कच्चे रास्ते पर उनकी गाड़ी का पहिया एक गहरे गड्ढे में फँस गया। चालक ने एक्सीलेटर दबाया, स्वयंसेवकों ने धक्का दिया, पर गाड़ी टस से मस न हुई। आखिरकार, गाड़ी के इंजन से धुआँ निकलने लगा और वह बंद हो गई। घड़ी में 5:15 बज चुके थे। सा...
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