अमावस्या का महत्व व उपाय
अमावस्या का महत्व व उपाय
अमावस्या का दिन आत्मचिंतन, ध्यान और मन-शरीर को शुद्ध करने के लिए अनुकूल माना जाता है। अंधकार के बाद आने वाला प्रकाश यानी नई शुरुआत का प्रतीक है, जहाँ पुरानी ऊर्जा को त्यागकर नई ऊर्जा का स्वागत किया जाता है। सोमवती अमावस्या, मौनी अमावस्या, और हरियाली अमावस्या का विशेष महत्व है,अमावस्या के दिन पवित्र नदी में स्नान, पितृ तर्पण, और ब्राह्मण भोजन कराना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा, घर की सफाई, जरूरतमंदों को दान (विशेषकर तिल, गुड़, वस्त्र), और संध्या समय दक्षिण दिशा में चौमुख दीपक जलाना पितरों को प्रसन्न करता है। इस दिन मानसिक शांति के लिए ध्यान करना चाहिए।अमावस्या एक अत्यंत महत्वपूर्ण और पवित्र तिथि है, जो पितृ तर्पण, दान-पुण्य, और आत्मनिरीक्षण के लिए समर्पित है। यह दिन पितरों (पूर्वजों) का आशीर्वाद पाने, पितृ दोष से मुक्ति, और मानसिक शांति के लिए विशेष पूजा-पाठ हेतु जाना जाता है। सूर्योदय से पहले पवित्र नदी या घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। तिल, गुड़, वस्त्र, अनाज, और नमक का दान विशेष फलदायी है।पितृ पूजा/तर्पण: पितरों के निमित्त तर्पण (तिल और जल से) करें, इससे पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं और सरसों के तेल का दीपक जलाएं, क्योंकि इसमें पितरों का वास माना जाता है। शाम के समय घर के मुख्य द्वार पर या पीपल के नीचे चौमुख दीपक जलाएं। ब्राह्मणों को भोजन कराएं या गरीब लोगों को अन्न दान करें। गाय, कौवे और कुत्ते को रोटी खिलाएं। घर से अनावश्यक और पुरानी वस्तुएं हटाकर स्वच्छता बनाए रखें। तामसिक भोजन (मांस, मछली, शराब) से बचें। नया कार्य या भूमि पूजन न करें। बाल कटवाना या शेविंग करने से बचें। वाद-विवाद से बचें।अमावस्या तिथि के स्वामी स्वयं पितर हैं, इसलिए इस दिन तर्पण, पिंडदान और पूर्वजों के नाम का दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और सुख-समृद्धि आती है। इस दिन निर्धन ब्रहमण को वस्त्र और अन्न का दान करना अत्यंत फलदायी माना गया है,अगर वो कुवाँर हो तो ओर भी आचा है । शिव जी की पूजा करें, अमावस्या के दिन शिव मंदिरों में भी विशेष पूजा की जाती है। दक्षिण दिशा में पितरों के नाम का दीपक जलाएं।दक्षिण दिशा में मुंह कर तर्पण, पीपल में जल-तिल अर्पण, शाम को दक्षिण दिशा में चौमुख दिया जलाना तथा चींटियों को शक्कर-आटा खिलाना है। वार अनुसार उपाय नीचे दिए गए हैं।
वार के अनुसार अमावस्या को करने योग्य कार्य - सोमवार (सोमवती अमावस्या) को पीपल के पेड़ के चारों ओर 108 बार सूत लपेटकर परिक्रमा करें। शिवजी का दूध-जल से अभिषेक करें। मंगलवार: हनुमान चालीसा का पाठ करें और हनुमान जी को सिंदूर चढ़ाएं। बुधवार को गौ माता को हरी घास या पालक खिलाएं। गुरुवार को विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें या पीपल के पेड़ पर हल्दी मिलाकर जल चढ़ाएं। शुक्रवार को लक्ष्मी जी की पूजा करें और किसी कन्या को भोजन कराएं या सफेद मिठाई का दान करें। शनिवार (शनिश्चरी अमावस्या) को पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाएं, हनुमान जी को तेल चढ़ाएं, और काले तिल या उड़द की दाल का दान करें। रविवार को सूर्य देव को जल (अर्घ्य) दें और तांबे की वस्तु या गुड़ का दान करें।इसी प्रकार से मास के अनुसार भी अमावस्या का महत्व है । वशाख मास इस दिन जल तर्पण, पितरों के लिए पीपल के नीचे दीपक जलाना, और छाते का दान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं।ज्येष्ठ अमावस्या, इस समय के दौरान जल का दान और ज़रूरतमंदों को भोजन कराने का बहुत बड़ा महत्त्व है।अषाढ़ अमावस्या, इस मास में पितृदोष शांति के लिए रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करना फलदायी होता है।श्रावण अमावस्या, शिव पूजा और पार्वती जी की पूजा का विधान है, साथ ही पीपल के पेड़ की परिक्रमा करना कल्याणकारी है।भाद्रपद अमावस्या, इस दिन पितृ तर्पण के साथ-साथ भगवान विष्णु की पूजा की जाती है।आश्विन अमावस्या, यह पितृ पक्ष की अमावस्या है, जिसमें पूर्वजों के लिए विशेष श्राद्ध और दान (भोजन, वस्त्र) किया जाता है।कार्तिक अमावस्या, यह दीपावली की अमावस्या होती है, जिसमें महालक्ष्मी पूजा के साथ ही पितरों को दीपक अर्पित किए जाते हैं।मार्गशीर्ष अमावस्या, दान-पुण्य और पवित्र नदी में स्नान करने का विशेष महत्त्व है।पौष अमावस्या, इस महीने में पितरों के नाम पर कंबल और अन्न का दान करना सर्वोत्तम है। माघ अमावस्या, यह मौनी अमावस्या के रूप में जानी जाती है, जिसमें मौन धारण कर गंगा स्नान करना और पितरों का तर्पण करना अत्यंत पुण्यदायी है। फाल्गुन अमावस्या, इस दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए दूध और पंचामृत से अभिषेक करें।चैत्र अमावस्या, इस दिन नई शुरुआत करने से बचने और पितरों के नाम पर दीपदान करने का विधान है।

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