अप्रैल मास 2026 का पंचांग

 


अप्रैल मास 2026 का पंचांग 

भारतीय व्रतोत्सव अप्रैल -2026

दि. 1- सत्य व्रत,दि. 2- वैशाख स्नान प्रारम्भ, हनुमान जयंती (द. भा),दि. 5- श्री गणेश चतुर्थी व्रत,दि. 7- गुरुतेग बहादुर जयंती,दि. 9- गुरु अर्जुनदेव जयंती,दि. 10-कालाष्टमी,दि. 13-वरूथिनी एकादशी व्रत, बल्लभाचार्य जयंती,दि. 14-बैशाखी, संक्रांति पुण्य,दि. 15-प्रदोष व्रत, मासशिवरात्रि,दि. 17-अमावस्या पुण्य,दि. 19-परशुराम जयंती,दि.20-अक्षया तीज, विनायक 4 व्रत,दि.21-आद्यजगद्गुरु शंकराचार्य ज.,द.22-श्री रामानुजाचार्य जयंती,दि.23-गंगा सप्तमी,दि.24-दुर्गाष्टमी, बग्लामुखी जयंती,

दि.25-सीतानवमी,दि. 27-मोहिनी एकादशी व्रत,दि.29-प्रदोष व्रत,दि.30-श्री नृसिंह जयंती

मूल विचार अप्रैल -2026 

दि. 7 को 2/56 से दि. 9 को 8/48 तक, दि. 16 को 13/58 से दि. 18 को 9/42 तक, दि. 24 को 20/14 से दि. 26 को 20/27 बजे तक गण्ड मूल नक्षत्र हैं।

ग्रह स्थिति अप्रैल - 2026

दि. 2 मंगल मीन में,दि. 11 बुध मीन में,दि. 12 शनि उदय,दि. 14 सूर्य मेष में,दि. 18 मंगल उदय,दि. 19 शुक्र वृष में,दि. 29 बुधास्त पूर्व,दि. 30 बुध मेष में

पंचक विचार अप्रैल - 2026   

पंचक विचार -(धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण से रेवती नक्षत्र तक) पंचको में दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना मकान दुकान आदि की छत डालना चारपाई पलंग आदि बुनना,दाह संस्कार,बांस की चटाई दीवार प्रारंभ करना आदि स्तंभ रोपण तांबा पीतल तृण काष्ट आदि का संचय करना आदि कार्यों का निषेध माना जाता है समुचित उपाय एवं पंचक शांति करवा कर ही उक्त कार्यों का संपादन करना कल्याणकारी होगा ध्यान रहेगा पंचर नक्षत्रों का विचार मात्र उपरोक्त विशेष कृतियों के लिए ही किया जाता है विवाह मंडल आरंभ गृह प्रवेश प्रवेश उपनयन आदि मुद्दों से तो पंचक नक्षत्रका प्रयोग शुभ माना जाता है पंचक विचार- दिनांक 13 को 03-44 से दिनांक 17 को 12-02 बजे तक पंचक है | 

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी - 9312002527,9560518227

भद्रा विचार अप्रैल -2026

भद्रा काल का शुभ अशुभ विचार - भद्रा काल में विवाह मुंडन, गृह प्रवेश, रक्षाबंधन आदि मांगलिक कृत्य का निषेध माना जाता है परंतु भद्रा काल में शत्रु का उच्चाटन करना,स्त्री प्रसंग में,यज्ञ करना,स्नान करना,अस्त्र शस्त्र का प्रयोग,ऑपरेशन कराना, मुकदमा करना,अग्नि लगाना,किसी वस्तु को काटना,भैस,घोड़ा व ऊंट संबंधी कार्य प्रशस्त माने जाते हैं सामान्य परिस्थिति में विवाह आदि शुभ मुहूर्त में भद्रा का त्याग करना चाहिए परंतु आवश्यक परिस्थितिवश अति आवश्यक कार्य भूलोक की भद्रा ,भद्रा मुख छोड़कर कर भद्रा पुच्छ में शुभ कार्य कर सकते है |







दि. 1 को 7/06 से 19/23 तक, दि. 4 को 23/04 से दि. 5 को 12/00 तक, दि. 8 को 19/01 से दि. 9 को 8/09 तक, दि. 12 को 13/03 से दि. 13 को 1/17 तक, दि. 15 को 22/31 से दि. 16 को 9/30 तक, दि. 20 को 17/51 से दि. 21 को 4/15 तक, दि. 23 दि. 27 को 6/08 से 18/16 तक, दि. 30 को 21/12 से दि. 1 मई को 10/00 बजे तक भद्रा है। 

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी - 9312002527,9560518227

चौघड़िया मुहूर्त 

चौघड़िया मुहूर्त, ज्योतिष में शुभ और अशुभ समय जानने की एक प्रणाली है। यह 24 घंटों को 8 भागों में विभाजित करता है, जिन्हें चौघड़िया कहा जाता है। प्रत्येक चौघड़िया एक निश्चित अवधि का होता है, और इन्हें शुभ और अशुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है। 

चौघड़िया मुहूर्त क्या है - 24 घंटों को 16 भागों में बांटा जाता है, जिन्हें चौघड़िया कहा जाता है। प्रत्येक चौघड़िया लगभग 1.30 घंटे का होता है। 

शुभ-अशुभ - कुछ चौघड़िया शुभ माने जाते हैं, जैसे अमृत, शुभ, लाभ, और चर। कुछ अशुभ माने जाते हैं, जैसे रोग, उद्वेग, और काल। चौघड़िया का उपयोग शुभ कार्यों, जैसे विवाह, यात्रा, और व्यापार शुरू करने के लिए शुभ समय जानने के लिए किया जाता है। 

चौघड़िया के प्रकार - दिन का चौघड़िया,सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को दिन का चौघड़िया कहा जाता है। 

रात का चौघड़िया,सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक के समय को रात का चौघड़िया कहा जाता है। 

चौघड़िया का महत्व - चौघड़िया मुहूर्त का उपयोग किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने के लिए एक अच्छे समय का चयन करने के लिए किया जाता है। यह माना जाता है कि यदि कोई कार्य शुभ चौघड़िया में शुरू किया जाता है, तो उसके सफल होने की संभावना अधिक होती है।   

 राहू काल 

 राहुकाल -राहुकाल दक्षिण भारत की देन है,दक्षिण भारत में राहु काल में कृत्य करना अच्छा नहीं माना जाता, राहु काल में शुभ कृतियों में वर्जित करने की परंपरा अब हमारे उत्तरी भारत में भी अपनाने लगे हैं राहुकाल प्रतिदिन सूर्यादि वारों में भिन्न-भिन्न समय पर केवल डेढ़ डेढ़ घंटे के लिए घटित होता है |

संक्रांति विचार अप्रैल - 2026

इस मास की संक्रान्ति मेष वैशाख कृष्ण द्वादशी मंगलवार दि. 14 अप्रैल पूर्वाह्न 9/30 बजे 15 मु. उठी भूखी पश्चिम गमन, वायव्य दृष्टि किये वरुण मण्डल में प्रवेश करेगी। गतवार-नक्षत्र 4, वार-नक्षत्र नाम महोदरी-चौर सुखी। मंगलवारी संक्रान्ति होने से गुड़ आदि रस पदार्थ, नमक, घी, तेल, सरसों, तांबा आदि में तेजी बनेगी।

आकाश लक्षण अप्रैल - 2026

मास में शनि उदय, मंगल उदय, बुधास्त पूर्व होने से ग्रहचाल से नाड़ी परिवर्तन होने से गर्मी का प्रकोप बनेगा। मौसमी बीमारियों से प्रजा दुखी होगी। ग्रहचाल नाड़ी परिवर्तन से बादल चाल बनेगी, कहीं हल्की, कहीं तेज बौछार की सम्भावना बनी है।

  मांगलिक दोष विचार परिहार

वर अथवा कन्या दोनों में से किसी की भी कुंडली में 1,4,7,8 व 12 भाव में मंगल होने से ये मांगलिक माने जाते हैं,मंगली से मंगली के विवाह में दोष न होते हुए भी जन्म पत्रिका के अनुसार गुणों को मिलाना ही चाहिए यदि मंगल के साथ शनि अथवा राहु केतु भी हो तो प्रबल मंगली डबल मंगली योग होता है | इसी प्रकार गुरु अथवा चंद्रमा केंद्र हो तो दोष का परिहार भी हो जाता है |इसके अतिरिक्त मेष वृश्चिक मकर का मंगल होने से भी दोष नष्ट हो जाता है | इसी प्रकार यदि वर या कन्या किसी भी कुंडली में 1,4,7,9,12 स्थानों में शनि हो केंद्र त्रिकोण भावो में शुभ ग्रह, 3,6,11 भावो में पाप ग्रह हों तो भी मंगलीक दोष का आंशिक परिहार होता है, सप्तम ग्रह में यदि सप्तमेश हो तो भी दोष निवृत्त होता है |

स्वयं सिद्ध मुहूर्त

 स्वयं सिद्ध मुहूर्त चैत्र शुक्ल प्रतिपदा वैशाख शुक्ल तृतीया अक्षय तृतीया आश्विन शुक्ल दशमी विजयदशमी दीपावली के प्रदोष काल का आधा भाग भारत में से इसके अतिरिक्त लोकाचार और देश आचार्य के अनुसार निम्नलिखित कृतियों को भी स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है बडावली नामी देव प्रबोधिनी एकादशी बसंत पंचमी फुलेरा दूज इन में से किसी भी कार्य को करने के लिए पंचांग शुद्धि देखने की आवश्यकता नहीं है परंतु विवाह आदि में तो पंचांग में दिए गए मुहूर्त व कार्य करना श्रेष्ठ रहता है।

सर्वार्थ सिद्धि योग अप्रैल -2026 

दैनिक जीवन में आने वाले महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शीघ्र ही किसी  शुभ मुहूर्त का अभाव हो,किंतु शुभ मुहर्त के लिए अधिक दिनों तक रुका ना जा सकता हो तो इन सुयोग्य वाले मुहर्तु  को सफलता से ग्रहण किया जा सकता है | इन से प्राप्त होने वाले अभीष्ट फल के विषय में संशय नहीं करना चाहिए यह योग हैं सर्वार्थ सिद्धि,अमृत सिद्धि योग एवं रवियोग | योग्यता नाम तथा गुण अनुसार सर्वांगीण सिद्ध कारक  है| 

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी - 9312002527,9560518227

दिनांक

प्रारंभ

दिनांक

समाप्त

01

16-17

02

06-14

04

06-13

04

21-35

06

06-10

07

02-56

11

13-39

12

06-02

16

13-58

18

05-56

20

05-54

21

05-53

23

05-51

24

05-50

29

05-46

30

00-16

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी - 9312002527,9560518227

सुर्य उदय- सुर्य अस्त अप्रैल -2026   

दिनांक 

01 

05 

10 

15

20 

25 

30

उदय 

06-12 

06-08

06-02

05-57

05-52

05-47

05-42

अस्त 

18-38 

18-40

18-43 

18-46 

18-49 

18-52 

18-54




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