अगस्त मास 2025 का पंचांग
अगस्त मास 2025 का पंचांग
भारतीय व्रतोत्सव अगस्त-2025
भारतीय व्रतोत्सव - दि. 1- दुर्गाष्टमी, मेला नयना देवी व चिंतपूर्णी (हि.प्र.),दि. 5- पवित्रा एकादशी व्रत,
दि. 6- प्रदोष व्रत,दि. 8- सत्य व्रत,दि. 9-रक्षा बंधन, अमरनाथ यात्रा, ऋषि तर्पण, गायत्री जयंती,
हयग्रीव जयंती,दि, 12- कज्जली तीज, गणेश चतुर्थी व्रत, बहुला चौथ,दि. 14- हल छठ, चंद्र छठ,
दि. 16- श्री कृष्ण जन्माष्टमी, कालाष्टमी,दि. 17- संक्रांति पुण्य, गोगा नवमी, नन्द महोत,दि. 19- अजा एकादशी व्रत,
दि.20- वत्स द्वादशी,प्रदोष व्रत,दि.21-मास,शिवरात्रि,दि.23-शनैश्वरी-कुशोत्पाटिनी-
पिठौरी अमावस्या, दि. 25- वाराह जयंती,दि. 26-हरितालिका तीज, दि. 27- श्री गणेश जन्मोत्सव, कलंक चतुर्थी,
चंद्रदर्शन निषेध, सिद्धि विनायक व्रत, दि. 29- सूर्य 6, बलदेव 6, मेला बृज मण्डल,दि. 30- ज्येष्ठा गौरी आवाहन,
दि. 30- संतान सप्तमी, मुक्ताभरण 7, दि. 31- दुर्गाष्टमी, राधाष्टमी, भागवत सप्ताह प्रारम्भ, महालक्ष्मी व्रत प्रारम्भ
मूल विचार अगस्त -2025
मूल विचार - दि. 4 को 2-11 से दि.06 को 12-59 तक, दि. 13 को 10-32 से दि. 15 को 07-35 तक,
दि. 22 को 00--08 से दि. 24 को 00-54 31 को 17-27 से मासांत तक गण्ड मूल नक्षत्र हैं।
ग्रह स्थिति अगस्त -2025
ग्रह स्थिति - दि. 8 बुधोदय पूर्व,दि. 11 मार्गी बुध,दि. 16 सिंह में सूर्य,दि. 20 कर्क में शुक्र,दि. 30 बुध सिंह में
पंचक विचार अगस्त -2025
पंचक विचार -(धनिष्ठा नक्षत्र के तृतीय चरण से रेवती नक्षत्र तक) पंचको में दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना
मकान दुकान आदि की छत डालना चारपाई पलंग आदि बुनना,दाह संस्कार,बांस की चटाई दीवार प्रारंभ
करना आदि स्तंभ रोपण तांबा पीतल तृण काष्ट आदि का संचय करना आदि कार्यों का निषेध माना जाता है
समुचित उपाय एवं पंचक शांति करवा कर ही उक्त कार्यों का संपादन करना कल्याणकारी होगा ध्यान रहेगा
पंचर नक्षत्रों का विचार मात्र उपरोक्त विशेष कृतियों के लिए ही किया जाता है विवाह मंडल आरंभ गृह प्रवेश
प्रवेश उपनयन आदि मुद्दों से तो पंचक नक्षत्रका प्रयोग शुभ माना जाता है, दि.10 को 02-11 से दि. 14 को 09-05 बजे तक पंचक हैं।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी - 9312002527,9560518227
भद्रा विचार अगस्त -2025
भद्रा काल का शुभ अशुभ विचार - भद्रा काल में विवाह मुंडन, गृह प्रवेश, रक्षाबंधन आदि मांगलिक कृत्य का
निषेध माना जाता है परंतु भद्रा काल में शत्रु का उच्चाटन करना,स्त्री प्रसंग में,यज्ञ करना,स्नान करना,अस्त्र शस्त्र
का प्रयोग,ऑपरेशन कराना, मुकदमा करना,अग्नि लगाना,किसी वस्तु को काटना,भैस,घोड़ा व ऊंट संबंधी कार्य
प्रशस्त माने जाते हैं सामान्य परिस्थिति में विवाह आदि शुभ मुहूर्त में भद्रा का त्याग करना चाहिए परंतु आवश्यक
परिस्थितिवश अतिआवश्यक कार्य भूलोक की भद्रा ,भद्रा मुख छोड़कर कर भद्रा पुच्छ में शुभ कार्य कर सकते है |
दि. 1 को 4/58 से 18/11 तक, दि. 5 का 0/26 से 13/12 तक,
दि. 8 को 14/12 से दि. 9 को 1/48 तक, दि. 11 को 21/37 से दि. 12 को 8/45 तक,
दि. 15 को 2/07 से 12/58 तक, दि. 18 को 6/22 से 17/22 उक,
दि. 21 को 12/45 से दि. 22 को 0/24 तक, दि. 27 का 2/49 से 15/44 तक,
दि. 30 को 22/46 से दि. 31 को 11/54 बजे तक भद्रा है।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी - 9312002527,9560518227
सर्वार्थ सिद्धि योग अगस्त -2025
दैनिक जीवन में आने वाले महत्वपूर्ण कार्यों के लिए शीघ्र ही किसी शुभ मुहूर्त का अभाव हो,किंतु शुभ मुहर्त
के लिए अधिक दिनों तक रुका ना जा सकता हो तो इन सुयोग्य वाले मुहर्तु को सफलता से ग्रहण किया जा
सकता है | इन से प्राप्त होने वाले अभीष्ट फल के विषय में संशय नहीं करना चाहिए यह योग हैं सर्वार्थ सिद्धि,
अमृत सिद्धि योग एवं रवियोग | योग्यता नाम तथा गुण अनुसार सर्वांगीण सिद्ध कारक है|
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी - 9312002527,9560518227
सुर्य उदय- सुर्य अस्त अगस्त -2025
राहू काल
राहुकाल -राहुकाल दक्षिण भारत की देन है,दक्षिण भारत में राहु काल में कृत्य करना अच्छा नहीं माना जाता,
राहु काल में शुभ कृतियों में वर्जित करने की परंपरा अब हमारे उत्तरी भारत में भी अपनाने लगे हैं
राहुकाल प्रतिदिन सूर्यादि वारों में भिन्न-भिन्न समय पर केवल डेढ़ डेढ़ घंटे के लिए घटित होता है |
संक्रांति विचार
इस मास की संक्रान्ति सिंह भाद्रपद कृष्ण अष्टमी शनिवार दि. 16/17 अगस्त को रात्रि के
तीसरे पहर में 25/51 बजे 30 मु. सूती धापी उत्तर गमन ईशान दृष्टि किये अग्नि मण्डल में प्रवेश करेगी।
गतवार 4, गतनक्षत्र 5, वार नाम राक्षसी, चाण्डाल सुखी, नक्षत्र नाम मिश्रा, पशु सुखी। शनिवार में संक्रान्ति
होने से सभी प्रकार के तिलहन पदार्थ, अनाज, ईख, शर्करा, मिष्ठान, रस पदार्थ, गुड़, खाण्ड, सोना आदि में
तेजी रहने की सम्भावना है।
आकाश लक्षण
इस मास ग्रहचाल व नाड़ी परिवर्तन, बुधोदय, बुध मार्गी, बुधास्त से बहुत-से स्थानों पर वर्षा होगी।
कहीं अधिक वर्षा से हानि होगी। बहुत-से स्थानों पर पानी की कमी भी रहेगी। पहाड़ी क्षेत्रों में बादल फटने
से स्थिति गम्भीर बनेगी। गुरु के आगे सूर्य रहने से गुरु-शुक्र की युति से अच्छी वर्षा होगी। कर्क राशि में
बुध-शुक्र की युति से भी रिमझिम वर्षा होना सम्भव है।
मांगलिक दोष विचार परिहार
वर अथवा कन्या दोनों में से किसी की भी कुंडली में 1,4,7,8 व 12 भाव में मंगल होने से ये मांगलिक माने
जाते हैं,मंगली से मंगली के विवाह में दोष न होते हुए भी जन्म पत्रिका के अनुसार गुणों को मिलाना ही
चाहिए यदि मंगल के साथ शनि अथवा राहु केतु भी हो तो प्रबल मंगली डबल मंगली योग होता है |
इसी प्रकार गुरु अथवा चंद्रमा केंद्र हो तो दोष का परिहार भी हो जाता है |इसके अतिरिक्त मेष वृश्चिक
मकर का मंगल होने से भी दोष नष्ट हो जाता है | इसी प्रकार यदि वर या कन्या किसी भी कुंडली में
1,4,7,9,12 स्थानों में शनि हो केंद्र त्रिकोण भावो में शुभ ग्रह, 3,6,11 भावो में पाप ग्रह हों तो भी
मंगलीक दोष का आंशिक परिहार होता है, सप्तम ग्रह में यदि सप्तमेश हो तो भी दोष निवृत्त होता है |
स्वयं सिद्ध मुहूर्त
स्वयं सिद्ध मुहूर्त चैत्र शुक्ल प्रतिपदा वैशाख शुक्ल तृतीया अक्षय तृतीया आश्विन शुक्ल दशमी विजयदशमी
दीपावली के प्रदोष काल का आधा भाग भारत में से इसके अतिरिक्त लोकाचार और देश
आचार्य के अनुसार निम्नलिखित कृतियों को भी स्वयं सिद्ध मुहूर्त माना जाता है बडावली नामी
देव प्रबोधिनी एकादशी बसंत पंचमी फुलेरा दूज इन में से किसी भी कार्य को करने के लिए पंचांग शुद्धि
देखने की आवश्यकता नहीं है परंतु विवाह आदि में तो पंचांग में दिए गए मुहूर्त व कार्य करना श्रेष्ठ रहता है।
अभिजीत मुहूर्त
अभिजीत मुहूर्त, ज्योतिष में एक शुभ समय माना जाता है, जो दिन के मध्य में आता है। यह लगभग 48 मिनट
का समय होता है, जो दोपहर के 24 मिनट पहले और 24 मिनट बाद तक रहता है। इसे विजय मुहूर्त भी
कहा जाता है, और माना जाता है कि इस समय में किए गए कार्य सफल होते हैं।
अभिजीत मुहूर्त का महत्व - अभिजीत मुहूर्त को सभी प्रकार के शुभ कार्यों,
जैसे कि गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह, व्यापार शुरू करना, आदि के लिए शुभ माना जाता है।
यह मुहूर्त कई दोषों को दूर करने की शक्ति रखता है।
अभिजीत मुहूर्त सकारात्मक ऊर्जा और उत्साह से भरपूर होता है। यह भी माना जाता है कि
इस मुहूर्त में किए गए कार्यों से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने त्रिपुरासुर नामक राक्षस का वध अभिजीत मुहूर्त में ही किया था।
यह भी माना जाता है कि भगवान राम का जन्म भी इसी मुहूर्त में हुआ था।
अभिजीत मुहूर्त सूर्योदय और सूर्यास्त के बीच का समय होता है।यह समय हर दिन बदलता रहता है,
क्योंकि यह सूर्योदय और सूर्यास्त के समय पर निर्भर करता है।
उदाहरण के लिए, यदि सूर्योदय सुबह 7 बजे और सूर्यास्त शाम 7 बजे है,
तो अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:36 से 1:24 तक होगा । अभिजीत मुहूर्त में क्या करें और क्या न
करें - इस मुहूर्त में, आप कोई भी शुभ कार्य शुरू कर सकते हैं, जैसे कि पूजा, यज्ञ, या कोई नया व्यवसाय।
ज्योतिषियों के अनुसार, बुधवार के दिन अभिजीत मुहूर्त में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए,
और दक्षिण दिशा की यात्रा से भी बचना चाहिए। विजय मुहूर्त, अबूझ मुहूर्त (कुछ मामलों में)
चौघड़िया मुहूर्त, ज्योतिष में शुभ और अशुभ समय जानने की एक प्रणाली है।
यह 24 घंटों को 8 भागों में विभाजित करता है, जिन्हें चौघड़िया कहा जाता है।
प्रत्येक चौघड़िया एक निश्चित अवधि का होता है, और इन्हें शुभ और अशुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है.
चौघड़िया मुहूर्त क्या है?
विभाजन:
24 घंटों को 8 भागों में बांटा जाता है, जिन्हें चौघड़िया कहा जाता है।
अवधि:
प्रत्येक चौघड़िया लगभग 1.30 घंटे का होता है।
शुभ-अशुभ:
कुछ चौघड़िया शुभ माने जाते हैं, जैसे अमृत, शुभ, लाभ, और चर। कुछ अशुभ माने जाते हैं, जैसे रोग, उद्वेग, और काल।
उपयोग -चौघड़िया का उपयोग शुभ कार्यों - जैसे विवाह, यात्रा, और व्यापार शुरू करने के लिए शुभ समय
जानने के लिए किया जाता है।
चौघड़िया के प्रकार:
दिन का चौघड़िया:
सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को दिन का चौघड़िया कहा जाता है।
रात का चौघड़िया - सूर्यास्त से अगले दिन के सूर्योदय तक के समय को रात का चौघड़िया कहा जाता है।
चौघड़िया का महत् -चौघड़िया मुहूर्त का उपयोग किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने के लिए एक
अच्छे समय का चयन करने के लिए किया जाता है। यह माना जाता है कि यदि कोई कार्य शुभ चौघड़िया में शुरू
किया जाता है, तो उसके सफल होने की संभावना अधिक होती है।
अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे शर्मा जी - 9312002527,9560518227
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