बृहस्पति ग्रह कि जानकारी व उपाय, श्री श्याम चौरासी ,श्याम जी की आरती

 

बृहस्पति ग्रह 


बृहस्पति देवताओ के गुरु है,देवगुरु का दर्जा प्राप्त है। वे महर्षि अंगिरा और उनकी पत्नी स्वरूपा के पुत्र हैं

और नवग्रहों में सबसे शुभ ग्रह माना जाता है। यह ज्ञान, भाग्य, धन, उच्च शिक्षा, और आध्यात्मिकता के

प्रमुख कारक हैं। बृहस्पति ग्रह उच्च शिक्षा, दर्शन, और सही निर्णय लेने की क्षमता के प्रतीक हैं। इन्हें धन,

संपत्ति, और सौभाग्य का दाता माना जाता है। बृहस्पति ग्रह महिलाओं की कुंडली में यह विवाह के

मुख्य कारक हैं। इसके साथ ही, यह संतान सुख को भी नियंत्रित करते हैं। बृहस्पति ग्रह शरीर में

पाचन तंत्र, लीवर, और फैट को नियंत्रित करते हैं। 

 जिस जातक की कुंडली में बृहस्पति ग्रह मजबूत होता है, जातक को व्यापार और नौकरी में निरंतर

सफलता मिलती है, और धन-संपत्ति का संचय आसानी से होता है। व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता

बेहतरीन होती है और उसे उच्च शिक्षा तथा बौद्धिक कार्यों में विशेष सफलता प्राप्त होती है। वह ज्ञानी,

दयालु, और समाज में सम्मानित होता है। उसे भाग्य का पूरा साथ मिलता है।  अच्छे जीवनसाथी का सुख,

वैवाहिक जीवन में मधुरता और आज्ञाकारी संतान की प्राप्ति होती है। समाज में श्रेष्ठ पद, प्रतिष्ठा और

नेतृत्व क्षमता बढ़ती है। ईश्वर के प्रति आस्था, धार्मिक कार्यों में रुचि और परोपकार की भावना विकसित

होती है। शारीरिक ऊर्जा और मानसिक शांति बनी रहती है। (लीवर और मधुमेह से बचाव होता है)

। कमजोर बृहस्पति ग्रह होने पर शिक्षा में बाधा, आर्थिक अस्थिरता, और विवाह में देरी जैसी समस्याएं

आती हैं । अगर बृहस्पति कमजोर धन की बचत नहीं होती, फिजूलखर्ची बढ़ती है, और बार-बार कर्ज लेना

पड़ता है। व्यापार और नौकरी में तरक्की रुक जाती है। पढ़ाई में मन नहीं लगता, उच्च शिक्षा में रुकावटें

आती हैं, और सही निर्णय लेने की क्षमता कमजोर हो जाती है। विवाह में देरी या अड़चनें आती हैं।

वैवाहिक जीवन में कलह और संतान प्राप्ति में समस्याओं का सामना करना पड़ता है।पाचन तंत्र कमजोर

हो जाता है। इसके अलावा लिवर से जुड़ी बीमारियां, पीलिया, मोटापा और बालों का झड़ना भी इसके

खराब होने के लक्षण हैं। समाज में यश घटता है और बड़ों तथा गुरुजनों का आशीर्वाद नहीं मिल पाता।

बृहस्पति ग्रह के दोष दूर  करने के लिए - गुरुवार के दिन सुबह उठकर स्नान करें और पीले रंग के कपड़े

पहनें,गुरुवार के दिन भगवान विष्णु और बृहस्पति देव की पूजा करें । गुरुवार के दिन

'ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं सः गुरवे नमः' मंत्र का जाप करें,गुरुवार के दिन पीले रंग की चीज़ें खाएं और दान करें,

गुरुवार के दिन केले के पेड़ की पूजा करें और दीपक जलाएं,गुरुवार के दिन विष्णु भगवान को पीला चंदन

या केसर का तिलक लगाकर पूजा करें,गुरुवार के दिन व्रत रखें,गुरुवार के दिन किसी गरीब ब्राह्मण को

पीले वस्त्र, हल्दी, केला, बेसन, चने की दाल का दान करें,बृहस्पति की शुभता पाने के लिए रुद्राष्टाध्यायी

और शिवसहस्त्रनाम का पाठ करें। बृहस्पति यंत्र या पुखराज धारण करें। पीपल के पेड़ को जल अर्पित

करें ।किसी वृद्ध ब्राह्मण की देखभाल करें और उन्हें पीले वस्त्र का दान करें, माथे पर केसर या हल्दी का

तिलक लगाएं,अपने पिता की सेवा करें व उनके स्वास्थ्य का ध्यान रखें,साधु-सन्यासियों की सेवा करें,झूठी

गवाही न दें,गरुड़ पुराण का पाठ करें। 

मेष, सिंह और धनु - इन अग्नि तत्व वाली राशियों पर गुरु का प्रभाव नेतृत्व क्षमता, साहस और उच्च

महत्वाकांक्षा को बढ़ाता है। जातक दार्शनिक और आशावादी बनते हैं। विशेषकर धनु राशि के जातकों

को गुरु हमेशा भाग्य का साथ और आध्यात्मिक ज्ञान प्रदान करते हैं।

वृषभ,कन्या और मकर - इन पृथ्वी तत्व वाली राशियों पर बृहस्पति व्यावहारिक दृष्टिकोण और आर्थिक

स्थिरता लाते हैं। जातक बुद्धिमान, विश्लेषणात्मक और निवेश में कुशल होते हैं। मकर राशि में गुरु नीच

के होते हैं, इसलिए यहाँ अत्यधिक संघर्ष के बाद ही सफलता प्राप्त होती है।

मिथुन,तुला और कुंभ - इन वायु तत्व वाली राशियों में गुरु संचार, बौद्धिक क्षमता, और समाज कल्याण

की भावना को प्रेरित करते हैं। जातक ज्ञान के प्रति जिज्ञासु और निष्पक्ष न्याय करने वाले होते हैं।

कर्क,वृश्चिक और मीन - इन जल तत्व वाली राशियों पर गुरु का प्रभाव अत्यधिक शुभ और भावनात्मक

होता है। यह जातक को अत्यधिक दयालु, कल्पनाशील और परोपकारी बनाते हैं। कर्क बृहस्पति की

उच्च राशि है, जहाँ ये सबसे मजबूत स्थिति में होते हैं और जातक को भारी सफलता, धन और मान-

सम्मान दिलाते हैं। मीन राशि में गुरु अपनी ही राशि में होते हैं, जिससे सहज ज्ञान और आध्यात्मिक

उन्नति चरम पर होती है।

रत्न - पुखराज यदि पुखराज उपलब्ध न हो, तो इसके उपरत्न के रूप में सुनहला या टोपाज भी धारण

किया जा सकता है।

अंक - अंक ज्योतिष में बृहस्पति का अंक 3 (तीन) है।

रंग - गुरु ग्रह का प्रमुख रंग पीला है। इसके अलावा केसरिया और गहरे पीले रंग भी बृहस्पति को प्रिय

होते हैं।

शुभ दिन -  बृहस्पतिवार

दिशा - ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा)

धातु - सोना स्वर्ण 

राशियां - बृहस्पति धनु और मीन राशि के स्वामी हैं।

ऊं श्रीं श्याम देवाय नमः।।ॐ नमो भगवते वासुदेवय।।


श्री श्याम चौरासी

गुरु पद पंकज ध्यान धर, सुमिर सच्चीदानंद ! 
श्याम चोरासी भजत हूँ, रच चोपाई छन्द ।। 

!! चोपाई !!  

महर करो जन के सुखरासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !! 
प्रथम शीश चरण में नाऊं !  कृपा दृष्टि रावरी चाहूं !! 
माफ़ सभी अपराध कराऊँ ! आदि कथा सुछन्द रच गाऊं !!  
भक्त सुजन सुनकर हरसासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !! 

कुरु पांडव में विरोध जब छाया !  समर महाभारत रचवाया !!
बली एक बर्बरीक आया ! तीन सुबाण साथ में लाया !!  
यह लखि हरि को आई हांसी ! सांवलशाह खाटू के वासी !! 

मधुर वचन तब कृष्ण सुनाए !  समर भूमि केही कारण आए !! 
तीन बाण धनु कंध सुहाए ! अजब अनोखा रूप बनाए !!  
बाण अपार वीर सब ल्यासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !! 

बर्बरीक इतने दल माहीं ! तीन बाण की गिनती नाहीं !! 
योद्धा एक से एक निराले ! वीर बहादुर अति मतवाले !!  
समर सभी मिल कठिन मचासी !सांवलशाह खाटू के वासी !! 

बर्बरीक मम कहना मानो !समर भूमि तुम खेल न जानो !! 
भीषम द्रोण कृप आदि जुझारा !जिनसे पारथ का मन हारा !!  
तू क्या पे पेस इन्हीं से पासी !सांवलशाह खाटू के वासी !! 

बर्बरीक हरि से यों कहता ! समर देखना मैं हूँ चाहता !! 
कौन बली रणशुर निहारूँ ! वीर बहादुर कौन जुझारु !!  
तीन लोक त्रिबाण से मारूं ! हंसता रहूं कभी न हारूं ! 
सत्य कहूं हरि झूठ न जानो ! दोनों दल इक तरफ हों मानो !! 
एक बाण दल दोऊ खपासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!  

बर्बरीक से हरि फरमावे ! तेरी बात समझ नहीं आवे !! 
प्राण बचाओ तुम घर जाओ ! क्यों नादानपना दिखलाओ !! 
तेरी जान मुफ्त में जासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !! 

गर विशवास न तुम्हें मुरारी ! तो कर लीजे जांच हमारी !! 
यह सुन कृष्ण बहुत हर्षाए ! बर्बरीक से वचन सुनाए !! 
मैं अब लेहूं परीछा खासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!  

पात विटप के सभी निहारो !बेध एक शर से डारो !! 
कह इतना एक पात मुरारी ! दबा लिया पद तले करारी !! 
अजब रची माया अविनाशी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!  

बर्बरीक धनु-बाण चढाया ! जानी जाय न हरि की माया !! 
विटप निहार बली मुस्काया ! अजित अमर अहिलावति जाया !! 
बली सुमिर शिव बाण चालीसा ! सांवलशाह खाटू के वासी !!  

बाण बली ने अजब चलाया ! पत्ते बेध विटप के आया !! 
गिरा कृष्ण के चरणों माहीं ! बिंधा पात हरि चरण हटाहीं !! 
इससे कौन फतेह किमि पासी !सांवलशाह खाटू के वासी !!  

कृष्ण बली कहै बताओ ! किस दल की तुम जीत कराओ !! 
बली हार का दल बतलाया ! यह सुन कृष्ण सनाका खाया !! 
विजय किस विध पारथ पासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!  

छल करना तब कृष्ण विचारा !बली से बोले नन्द कुमारा !! 
ना जाने क्या ज्ञान तुम्हारा ! कहना मानो बली हमारा !! 
हो इक तरफ नाम पा जासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!   

कहै बर्बरीक कृष्ण हमारा ! टूट न सकता प्रण ये करारा !! 
मांगे दान उसे मैं देता ! हारा देख सहारा देता !! 
सत्य कहूं ना झूठ जरा सी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!  

बेशक वीर बहादुर तुम हो !जंचते दानी हमें न तुम हो !! 
कहै बर्बरीक हरि बतलाओ ! तुमको चाहिए क्या बतलाओ ! 
जो मांगे सो हमसे पासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!  

बली अगर तुम सच्चे दानी ! तो मैं तुमसे कहूँ बखानी !! 
समर भूमि बली देने खातिर ! शीश चाहिए एक बहादुर !!  
शीश दान दे नाम कमासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!  

हम तुम अर्जुन तीनों भाई ! शीश दान दे को बलदाई !! 
जिसको आप योग्य बतलावें ! वही शीश बलिदान चढ़ावें !! 
आवागमन मिटे चोरासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!  

अर्जुन नाम समर में पावे ! तुम बिन सारथी कौन कहावे !! 
शीश दान दीन्हौं भगवाना ! भारत देखन मन ललचाना !! 
शीश शिखर गिरि पर धरवासी !सांवलशाह खाटू के वासी !!  

शीश दान बर्बरीक दिया है ! हरि ने गिरि पर धरा दिया है !! 
समर अठारह रोज हुआ है ! कुरु दल सारा नाश हुआ है !! 
विजय पताका पाण्डु फहरासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!  

भीम नकुल सहदेव और पारथ ! करते निज तारीफ अकारथ !! 
यों सोच मन में यदुराया ! इनके दिल अभिमान है छाया !! 
हरि भगतों का दुःख मिटासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!  

पारथ भीम आदि बलधारी !से यों बोले गिरवरधारी !! 
किसने विजय समर में पाई ! पूछो वीर बर्बरीक से भाई !! 
सत्य बात सिर सभी बतासी !सांवलशाह खाटू के वासी !!  

हरि सबको संग ले गिरवर पर ! सिर बैठा था मगन शिखर पर !! 
जा पहुँचे झटपट नन्दलाला ! पुनि पूछा सिर से सब हाला !! 
शीश दान है खुद अविनाशी !सांवलशाह खाटू के वासी !!  

हरि यों कहै सही फरमाओ !समर जीत है कौन बताओ !! 
बली कहै मैं सत्य बताऊं ! नहीं पितु चचा बलि न ताऊ !! 
भगवद ने पाई शाबाशी !सांवलशाह खाटू के वासी !!  

चक्र सुदर्शन है बलदाई ! काट रहा था दल जिमि काई !! 
रूप द्रौपदी काली का धर ! हो विकराल ले कर में खप्पर !! 
भर-भर रुधिर पिए थी प्यासी !!सांवलशाह खाटू के वासी !!  

मैंने जो कछु समर निहारा ! सत्य सुनाया हाल है सारा !! 
सत्य वचन सुनकर यदुराई ! वर दीन्हा सिर को हर्षाई !! 
श्याम रूप मम धार पुजासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!  

कलि में तुमको श्याम कन्हाई ! पूजेंगे सब लोग लुगाई !! 
खीर चूरमा भोग लगावे ! माखन मिश्री खूब चढ़ावे !! 
मन वच कर्म से जो कोई ध्यासी !इचिछत फल सो ही पा जासी !!  
अन्त समय सद्गगति पा जासी !सांवलशाह खाटू के वासी !! 

सागर सा धनवान बनाना !! पत्नी गोद में सुवन खिलाना !! 
सेवक आया शरण तिहारी ! श्रीपति यदुपति कुंज बिहारी !!  
सब सुख दायक आनन्द रासी ! सांवलशाह खाटू के वासी !!  !! 

चोपाई ||  

श्याम चोरासी है रची, भक्त जनन के हेतु ! सेवक निशि बासर पढ़े, सकल सुमंगल हेतु !!  
लख चोरासी छूटीए , श्याम चोरासी गाय ! अछत अपार फल पायकर , आवागमन मिटाए !!  

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श्याम जी की आरती 

ॐ जय श्री श्याम हरे,बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत,अनुपम रूप धरे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे...॥

रतन जड़ित सिंहासन,सिर पर चंवर ढुरे ।
तन केसरिया बागो,कुण्डल श्रवण पड़े ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे...॥

गल पुष्पों की माला,सिर पार मुकुट धरे ।
खेवत धूप अग्नि पर,दीपक ज्योति जले ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे...॥

मोदक खीर चूरमा,सुवरण थाल भरे ।
सेवक भोग लगावत,सेवा नित्य करे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे...॥

झांझ कटोरा और घडियावल,शंख मृदंग घुरे ।
भक्त आरती गावे,जय-जयकार करे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे...॥

जो ध्यावे फल पावे,सब दुःख से उबरे ।
सेवक जन निज मुख से,श्री श्याम-श्याम उचरे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे...॥

श्री श्याम बिहारी जी की आरती,जो कोई नर गावे ।
कहत भक्त-जन,मनवांछित फल पावे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे...॥

जय श्री श्याम हरे,बाबा जी श्री श्याम हरे ।
निज भक्तों के तुमने,पूरण काज करे ॥
ॐ जय श्री श्याम हरे...

ॐ जय श्री श्याम हरे,बाबा जय श्री श्याम हरे।
खाटू धाम विराजत,अनुपम रूप धरे॥
ॐ जय श्री श्याम हरे...॥


ब्रह्मा मुरारी त्रिपुरांतकारी भानु: शशि भूमि सुतो बुधश्च। 
गुरुश्च शुक्र शनि राहु केतव सर्वे ग्रहा शांति करा भवंतु।


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शर्मा जी, जन्म कुंडली विशेषज्ञ व सलाहकार,9312002527, 9560518227

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