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भगवान परशुराम

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  भगवान परशुरामजी  (वैशाख शुक्ल तृतीया/ प्रकटोत्सव)                   भगवान परशुराम त्रेता युग (रामायण काल) में एक ब्राह्मण ऋषि के यहां जन्मे थे। जो भगवान विष्णु के छठा अवतार हैं। पौरोणिक वृत्तान्तों के अनुसार उनका जन्म महर्षि भृगु के पुत्र महर्षि जमदग्नि द्वारा सम्पन्न पुत्रेष्टि यज्ञ से प्रसन्न देवराज इन्द्र के वरदान स्वरूप पत्नी रेणुका के गर्भ से वैशाख शुक्ल तृतीया को मध्यप्रदेश के इंदौर जिला में ग्राम मानपुर के जानापाव पर्वत में हुआ।                     वे भगवान विष्णु के आवेशावतार हैं। पितामह भृगु द्वारा सम्पन्न नामकरण संस्कार के अनन्तर राम कहलाए। वे जमदग्नि का पुत्र होने के कारण जामदग्न्य और शिवजी द्वारा प्रदत्त परशु धारण किये रहने के कारण वे परशुराम कहलाये। आरम्भिक शिक्षा महर्षि विश्वामित्र एवं ऋचीक के आश्रम में प्राप्त होने के साथ ही महर्षि ऋचीक से शार्ङ्ग नामक दिव्य वैष्णव धनुष और ब्रह्मर्षि कश्यप से विधिवत अविनाशी वैष्णव मन्त्र प्राप्त हुआ।         ...

कामदा एकादशी

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कामदा एकादशी    एकादशी तिथि को अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना गया है। वर्ष भर में आने वाली सभी एकादशियों का अपना विशेष महत्व होता है, परंतु चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी, जिसे कामदा एकादशी कहा जाता है, विशेष रूप से फलदायी मानी जाती है। यह एकादशी हिंदू नववर्ष की पहली एकादशी होती है, जो आध्यात्मिक उन्नति तथा मनोकामनाओं की पूर्ति का अवसर प्रदान करती है। एकादशी को भगवान विष्णु की श्रद्धा और भक्ति से पूजा करने पर जीवन के पाप नष्ट होते हैं और व्यक्ति को सुख, समृद्धि तथा मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। “कामदा” शब्द का अर्थ ही है कामनाओं को पूरा करने वाली। इसलिए यह व्रत भक्तों की उचित इच्छाओं की पूर्ति करने वाला माना गया है।  कामदा एकादशी को अत्यंत पवित्र और कल्याणकारी बताया गया है। पद्म पुराण के अनुसार इस व्रत के प्रभाव से मनुष्य अपने पूर्व जन्मों और वर्तमान जीवन के पापों से मुक्त हो सकता है। एकादशी का व्रत व्यक्ति को मुक्ति दिलाकर मोक्ष दिलाता है। इस दिन भगवान विष्णु का नाम-स्मरण, भजन और ध्यान करना चाहिए । जो श्रद्धा और नियम के साथ इस एकादशी का व्रत करता है, उसके जीवन मे...

जानकारीकाल हिन्दी मासिक अप्रैल - 2024

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  जानकारी काल      वर्ष-24   अंक-11   अप्रैल - 2024,   पृष्ठ 45   मूल्य 2-50    www.sumansangam.com     ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते।   माँ काली के इस मंत्र को बेहद ही प्रभावशाली माना जाता है अगर हमे श्रद्धा और विश्वास  के साथ माँ काली के इस मंत्र का पाठ करना चाहिए  है | इस मंत्र का जाप प्रतिदिन 108 बार पूरी श्रद्धा  के साथ करना  चाहिए, खासकर नवरात्र के दिनों में यह मंत्र का जाप बड़ा कल्याणकारी माना जाता है।   प्रधान संपादक व  प्रकाशक  सतीश शर्मा      कार्यालय  ए 214 बुध नगर इंद्रपुरी  नई दिल्ली 110012   मोबाइल    9312002527  संपादक मंडल  सौरभ  शर्मा, कपिल शर्मा, गौरव शर्मा, डॉ अजय प्रताप सिंह,  करुणा ऋषि,  डॉ मधु वैध, राजेश शुक्ल   प्रकाशक व मुद्रक  सतीश शर्मा के लिय ग्लैक्सी प्रिंटर- 106 F, कृणा नगर नई दिल्ली 110029 , A- 214 बुध नगर...